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जगरूप सिंह सेह ने संभाला जिला परिषद लुधियाना के चेयरमैन का पद, विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
लुधियाना / सत्ता संदेश
जिला परिषद लुधियाना को नया चेयरमैन मिल गया है। गुरुवार को पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत, श्रम, पर्यटन, सांस्कृतिक मामले और ऊर्जा मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद तथा राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां की मौजूदगी में जगरूप सिंह सेह ने जिला परिषद लुधियाना के चेयरमैन पद का कार्यभार संभाला।
इस अवसर पर विधायक जगतार सिंह दयालपुरा, विधायक जीवन सिंह संगोवाल, विधायक हाकम सिंह ठेकेदार, पूर्व विधायक गुरप्रीत सिंह जीपी, पूर्व विधायक जगजीवन सिंह खिरनिया, पंजाब जेनको बोर्ड के चेयरमैन नवजोत सिंह जर्ग, मार्केट कमेटी दोराहा के चेयरमैन दर्शन सिंह कोहली, मार्केट कमेटी खन्ना के चेयरमैन जगतार सिंह गिल, मार्केट कमेटी साहनेवाल के चेयरमैन हेमराज राजी, जिला परिषद एवं ब्लॉक समिति के सदस्य, पार्टी कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी मेहनती कार्यकर्ताओं और वॉलंटियर्स को आगे बढ़ाकर उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारियां सौंप रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की सच्ची भावना को मजबूत करने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्री सौंद ने कहा कि जिला परिषद लुधियाना पंजाब की सबसे बड़ी जिला परिषदों में से एक है और उन्हें विश्वास है कि जगरूप सिंह सेह इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जिला परिषद के पास ग्रामीण विकास के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के संसाधन उपलब्ध हैं, जिनका सही उपयोग गांवों की तस्वीर बदल सकता है।
उन्होंने बताया कि पंचायती राज विभाग के कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ब्लॉक समितियों और 10 प्रतिशत हिस्सा जिला परिषदों के माध्यम से खर्च किया जाता है। ऐसे में जिला परिषद की भूमिका ग्रामीण विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने जगरूप सिंह सेह को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार विकास कार्यों को गति देने के लिए हर स्तर पर पूरा सहयोग देगी। उन्होंने जगरूप सिंह सेह को पार्टी का मेहनती, जुझारू और समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी में पद योग्यता और मेहनत के आधार पर दिए जाते हैं, न कि किसी सिफारिश या आर्थिक प्रभाव के आधार पर।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से लोगों के हित में अनेक जनकल्याणकारी फैसले लिए हैं और आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ काम जारी रहेगा।
समराला के विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने आम परिवारों से आने वाले युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जगरूप सिंह सेह जिला परिषद लुधियाना में पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी प्रशासन सुनिश्चित करेंगे।
अपने संबोधन में नवनियुक्त चेयरमैन जगरूप सिंह सेह ने कहा कि वह जिले के प्रत्येक गांव और प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना, युवाओं के लिए अवसर सृजित करना और लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे। साथ ही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने तथा पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
कपूरथला की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर बरसे राणा गुरजीत सिंह, जुआ-सट्टा और गैंगस्टरवाद पर उठाए सवाल
कपूरथला / सत्ता संदेश
कपूरथला में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शहर की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कपूरथला में जुआ, सट्टा, गैंगस्टरवाद, नशा और अन्य अवैध कारोबार चरम पर पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रशासन इन पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।
चुनावों के दौरान कानून की उड़ाई गईं धज्जियां
राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि विधानसभा और नगर निगम चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। लोगों को डराने-धमकाने का माहौल बनाया गया और आपराधिक मामलों में शामिल लोग राजनीतिक नेताओं के साथ खुलेआम घूमते रहे। उनके अनुसार ऐसे तत्वों ने चुनावी माहौल को खराब करने में अहम भूमिका निभाई।
अवैध बैटिंग और सट्टे के कारोबार पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि शहर में जुए-सट्टे के अलावा अवैध बैटिंग का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को कई बार इन गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिस उनसे ही सबूत मांगती रही। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का काम प्रशासन को अवगत करवाना होता है, जबकि जांच करना और सबूत जुटाना पुलिस की जिम्मेदारी है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी साधा निशाना
राणा गुरजीत सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस आजकल बाजारों में जाकर व्यापारियों से मुलाकात कर रही है, जबकि ऐसे काम थानों में बैठकर भी किए जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक इशारों पर किया जा रहा है और इसे केवल एक सार्वजनिक दिखावा (पब्लिक स्टंट) बताया।
हालात नहीं सुधरे तो कांग्रेस करेगी संघर्ष
विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कांग्रेस पार्टी जनता को साथ लेकर आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।
जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए
राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन का पहला दायित्व आम लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है। उन्होंने मांग की कि जुआ, सट्टा, नशा और गैंगस्टरवाद जैसी गतिविधियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बहाल हो सके।
कॉकरोच जनता पार्टी के ‘एक्स’ अकाउंट को ब्लॉक करने के खिलाफ याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई
नयी दिल्ली / सत्ता संदेश
Delhi High Court में एक अनोखे मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिसमें “कॉकरोच जनता पार्टी” के ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दायर की गई है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Purushaindra Kumar Kaurav की पीठ के समक्ष होनी है। याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी के आधिकारिक अकाउंट को बिना पर्याप्त कारण के ब्लॉक किया गया, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि ‘एक्स’ प्लेटफॉर्म द्वारा अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के फैसले की समीक्षा की जाए और इसे पुनः बहाल करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम है, और इसे बिना स्पष्ट कारण के बंद नहीं किया जा सकता।
हालांकि, मामले में ‘एक्स’ या संबंधित प्राधिकरण की ओर से ब्लॉकिंग के कारणों पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अदालत अब इस बात पर विचार करेगी कि क्या अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया नियमों और कानूनों के अनुरूप थी या नहीं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह राजनीतिक दलों के डिजिटल अधिकारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कंटेंट पॉलिसी से जुड़े व्यापक सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अकाउंट ब्लॉकिंग और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर कई कानूनी विवाद सामने आए हैं।
फिलहाल सभी की नजर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और क्या अकाउंट की बहाली पर कोई अंतरिम राहत दी जा सकती है।
सांसदों के वेतन-भत्तों पर संयुक्त समिति के अध्यक्ष बने बीरेंद्र प्रसाद बैश्य
नयी दिल्ली / सत्ता संदेश
Assam से राज्यसभा सांसद Birendra Prasad Baishya को वर्ष 2026-27 के लिए सांसदों के वेतन और भत्तों से संबंधित संसद की संयुक्त समिति का अध्यक्ष चुना गया है। यह समिति सांसदों के वेतन ढांचे और भत्तों से जुड़े नियमों की समीक्षा और सिफारिशें तैयार करने का कार्य करती है।
यह नियुक्ति संसद सदस्यों के वेतन एवं भत्ता अधिनियम, 1954 के तहत गठित संयुक्त समिति के तहत की गई है। इस समिति में लोकसभा के 10 और राज्यसभा के 5 सदस्य शामिल होते हैं, जो मिलकर सांसदों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों पर विचार करते हैं।
समिति का मुख्य उद्देश्य सांसदों के पारिश्रमिक ढांचे को समयानुकूल बनाना और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप उसमें आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करना होता है। इसके साथ ही यह समिति यह भी देखती है कि सार्वजनिक प्रतिनिधियों के वेतन-भत्ते पारदर्शी और संतुलित हों।
बीरेंद्र प्रसाद बैश्य असम गण परिषद (Asom Gana Parishad) के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें इस महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह समिति भले ही तकनीकी प्रकृति की हो, लेकिन इसके निर्णय सांसदों की वित्तीय सुविधाओं और संसदीय व्यवस्था के संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। इसलिए इसके अध्यक्ष की भूमिका काफी जिम्मेदारी भरी मानी जाती है।
इस नियुक्ति के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि समिति आने वाले समय में सांसदों के वेतन और भत्तों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर नई सिफारिशें प्रस्तुत कर सकती है।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा
बेंगलुरु / सत्ता संदेश
Karnataka की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बेंगलुरु स्थित लोक भवन में राज्यपाल के विशेष सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सिद्धरमैया ने औपचारिक रूप से अपना त्यागपत्र राज्यपाल कार्यालय को भेज दिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे के विस्तृत कारणों को लेकर अभी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य की सत्ता और संगठनात्मक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की खबर सामने आते ही कांग्रेस नेताओं, समर्थकों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें और चर्चाएं जारी हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर निर्णय ले सकता है।
सिद्धरमैया कर्नाटक की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास को लेकर उनकी सरकार की कई नीतियां चर्चा में रही हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने राज्य में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की कोशिश की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी। कांग्रेस के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में बताए जा रहे हैं। साथ ही पार्टी नेतृत्व राज्य में राजनीतिक संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए फैसला ले सकता है।
विपक्षी दलों ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे कांग्रेस के अंदरूनी राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी संवैधानिक और संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत आगे का निर्णय करेगी।
राज्यपाल कार्यालय की ओर से इस्तीफे को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जब तक नया मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं होता, तब तक कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा जारी है।
कर्नाटक की राजनीति में यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक रणनीतियों और सत्ता संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।
ईडी छापेमारी को लेकर केरल में सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सरकार और माकपा पर सवाल
तिरुवनंतपुरम / सत्ता संदेश
Kerala की राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार में मंत्री K. Muraleedharan ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan से जुड़े परिसरों पर की गई ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी Communist Party of India (Marxist) के भीतर हो रही आलोचनाओं से बचाना हो सकता है।
मुरलीधरन ने कहा कि कांग्रेस को इस कार्रवाई के समय और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर संदेह है। उनका आरोप है कि जिस समय पार्टी के भीतर विजयन की कार्यशैली और कुछ राजनीतिक फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे थे, उसी दौरान ईडी की छापेमारी ने राजनीतिक विमर्श का ध्यान दूसरी ओर मोड़ दिया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न तो ईडी का समर्थन करती है और न ही एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी का। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध करती रही है और उसका रुख इस मामले में भी वही है।
मुरलीधरन के बयान के बाद केरल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई कई बार राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित दिखाई देती है, जबकि भाजपा और केंद्र सरकार ऐसे आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में माकपा और कांग्रेस के बीच पहले से ही तीखा राजनीतिक मुकाबला है। ऐसे में ईडी की कार्रवाई और उस पर दिए जा रहे बयान राज्य की राजनीति को और गर्मा सकते हैं। खासतौर पर जब राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो रही हो।
इस मामले में अब तक ईडी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं माकपा नेताओं ने भी कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में देशभर में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। कई विपक्षी दल एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।
फिलहाल केरल में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

