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तिलक वर्मा की आंधी में उड़ा पंजाब किंग्स, मुंबई इंडियंस ने दर्ज की 6 विकेट से शानदार जीत

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में मुंबई इंडियंस (MI) ने पंजाब किंग्स (PBKS) को 6 विकेट से हरा दिया है। इस मैच में टॉस जीतकर मुंबई के नए कप्तान जसप्रीत बुमराह ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। पंजाब किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 200/8 का स्कोर खड़ा किया, जिसमें प्रभसिमरन सिंह ने 57 और अजमतुल्लाह ओमरजई ने 38 रनों का योगदान दिया। मुंबई की ओर से शार्दुल ठाकुर सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 4 विकेट चटकाए।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी रही और रयान रिकेल्टन ने 48 रन बनाए। हालांकि, मध्यक्रम में रोहित शर्मा (25) के आउट होने के बाद मैच फंसता नजर आया, लेकिन तिलक वर्मा ने अपनी तूफानी पारी से पासा पलट दिया। तिलक ने मात्र 33 गेंदों पर नाबाद 75 रन बनाए। अंत में विल जैक्स (25 नाबाद) के साथ मिलकर उन्होंने मुंबई को जीत दिलाई।

यह श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली पंजाब किंग्स की टूर्नामेंट में लगातार पांचवीं हार है। वहीं, मुंबई इंडियंस प्लेऑफ की रेस से पहले ही बाहर हो चुकी है, लेकिन बुमराह की कप्तानी में इस जीत ने टीम का मनोबल बढ़ाया है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…14-05-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में आज की सबसे बड़ी हलचल चुनाव आयोग द्वारा 15 जून से शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर रही, जिसके तहत वोटर लिस्ट का घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा, पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पर चंडीगढ़ में FIR और लुधियाना में एक मजदूर के महज 5 घंटे में करोड़पति बनने की खबर चर्चा का केंद्र बनी रही। दिनभर की अन्य प्रमुख घटनाओं में फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी, अमृतसर कॉलेज में छात्रों के बीच झड़प और चंडीगढ़ के एक क्लब में लगी भीषण आग शामिल है।

वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण (SIR): चुनाव आयोग 15 जून से पंजाब और चंडीगढ़ में SIR शुरू करेगा। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे, नए नाम जोड़ेंगे और फर्जी या दोहराए गए नामों को हटाएंगे।

योगराज सिंह पर FIR दर्ज: एक्टर योगराज सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ में महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह विवाद एक वेब सीरीज ‘लुक्खे’ के डायलॉग से शुरू हुआ, जिसके बाद पंजाब महिला आयोग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का संबोधन: बटाला में आयोजित एक धार्मिक समागम में CM मान ने कहा कि उनकी सरकार जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग मुफ्त इलाज जैसी सुविधाओं के लिए कर रही है। उन्होंने बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद जैसे कड़े कानून का भी जिक्र किया।

जालंधर में धार्मिक कार्यक्रम पर विवाद: प्रसिद्ध गायक कन्हैया मित्तल के कार्यक्रम की तैयारियों को पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देकर रुकवा दिया था। हालांकि, बाद में अनुमति मिलने पर कार्यक्रम संपन्न हुआ, लेकिन इस दौरान ‘आप’ विधायक रमन अरोड़ा ने सुरक्षा वापस लौटाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अमृतसर कॉलेज में छात्रों के बीच झड़प: खालसा कॉलेज में भोजपुरी बोलने को लेकर दो गुटों में मारपीट हुई, जिसमें 6 से ज्यादा छात्र घायल हो गए। बिहार के छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें हॉस्टल में बंद कर दिया गया और डराया-धमकाया गया।

चंडीगढ़ क्लब में भीषण आग: सेक्टर-26 स्थित डिफेले क्लब की पहली मंजिल पर अचानक आग लग गई। फायर ब्रिगेड और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्टाफ और ग्राहकों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

मलेशिया में फंसा युवक लौटा घर: जालंधर का आकाश, जो वीजा समस्याओं के कारण मलेशिया एयरपोर्ट और डिटेंशन सेंटर में फंस गया था, सांसद संत सीचेवाल की मदद से 16 दिन बाद सुरक्षित घर लौट आया है।

लुधियाना में फर्जी कॉल सेंटरों पर रेड: पुलिस ने फिरोजपुर रोड और सिल्वर आर्क मॉल के पास चल रहे दो कॉल सेंटरों पर छापा मारकर 100 से अधिक युवक-युवतियों को हिरासत में लिया। ये लोग विदेशियों को डरा-धमकाकर उनके खातों से पैसे ऐंठते थे।

अमेरिका में पंजाबी गिरोह के सरगना को सजा: कैलिफोर्निया में ‘पंजाबी डेविल्स’ गिरोह के सरगना जशनप्रीत सिंह को अवैध हथियारों की तस्करी के मामले में 5 साल 4 महीने की जेल हुई है।

मजदूर ने जीती 1 करोड़ की लॉटरी: लुधियाना की एक फैक्ट्री में काम करने वाले रणधीर सिंह ने महज 7 रुपए का टिकट खरीदा और 5 घंटे बाद वह 1 करोड़ रुपए का मालिक बन गया। उसने बताया कि वह इन पैसों से अपना कर्ज चुकाएगा और बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर संबोधित किया

उत्तर प्रदेश / सत्ता संदेश

मोदी सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है

पिछले 20 वर्षों में अपने साहस, समर्पण और परिश्रम से देश का विश्वास अर्जित कर ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ हासिल करने वाले NDRF के सभी जवानों को बधाई

CAPF के जवानों ने 7 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे

भारत आज आपदा प्रबंधन में ‘ग्लोबल लीडर’ और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ बनकर उभरा है तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को धरातल पर उतारा है

पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है

मोदी सरकार आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को ‘मिनिमम कैजुअल्टी’ से ‘ज़ीरो कैजुअल्टी’ तक पहुँचा रही है

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है

1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाने और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने वाले NDRF के जवानों को देखते ही मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव बढ़ जाता है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक और NDRF के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया जाना सिर्फ NDRF की सराहनीय सेवाओं को स्वीकार किया जाना ही नहीं, बल्कि यह SDRF, पंचायत से लेकर राज्य तक पूरी मशीनरी, NCC, NSS और हजारों की संख्या में सेवा में लगे आपदा मित्रों की सेवाओं का राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमोदन किया जाना है। उन्होंने कहा कि NDRF के जवान देश में कहीं भी ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के घोष के साथ जाते हैं। NDRF के जवान देश-दुनिया में जहाँ कहीं भी गए, वहाँ प्यार और भरोसा अर्जित किया है। देश में कहीं भी आपदा आई हो या आने वाली हो, जब NDRF के जवान वहाँ पहुँचते हैं, तो जनता राहत की साँस लेती है कि अब उनका बचाव हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NDRF ने अपनी स्थापना के 20 साल में देश में कहीं भी बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य प्रकार की आपदा आई हो, अपने सफल कार्यों के आधार पर पूरे देश की 140 करोड़ जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या कोई भीषण हादसा, NDRF की एक झलक ही देशवासियों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव भर देती है। इस बल ने अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NDRF को प्रेसिडेंट्स कलर मिलना, NDRF के समस्त बल के सेवा, साहस, शौर्य और समर्पण के संचित गुणों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और NDRF ने अपने कार्यकाल में आपदा बचाव के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नक्शे पर स्थापित करने का काम किया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है, लेकिन देश के गृह मंत्री के नाते मेरे लिए यह विशेष गौरव का विषय है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज 116 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली छह परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से NDRF देश की जनता को किसी भी प्रकार की आपदा से सुरक्षित रखने के लिए और भी मजबूती से काम कर पाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से अब तक हमने न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए काम किया है, बल्कि अब हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि अब हम जीरो कैजुअल्टी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जिस आपदा का पूर्वानुमान और मौसम विज्ञान विभाग से पूर्व जानकारी मिल जाती है, वहाँ जन, धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि NDMA ने आपदा प्रबंधन से जुड़े नीति विषयक मामलों में ढेर सारे निर्णय लिए, बहुत सारे दिशानिर्देश जारी किए, और जन जागरूकता पैदा करने की दिशा में सफल प्रयास किए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपदा बचाव देश का संस्कार बनता जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF ने न केवल नागरिकों, बल्कि उनके साथ रहने वाले मूक पशुओं को भी बचाकर उत्कृष्ट सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि आपदा में जनहानि शून्य हो और संपत्तियों का नुकसान न्यूनतम हो।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय हीट वेव जैसी गंभीर चुनौतियों का भी बहुत ही प्रभावी तरीके से सामना करने की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय और NDRF ने क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर बहुत बल दिया है। NDRF ने अपने 8,500 से अधिक जवानों, 10,000 से ज्यादा सिविल डिफेंस कर्मियों और 2 लाख 20 हजार से अधिक वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का भागीरथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में 10,500 से अधिक नाविकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि कम्युनिटी बेस्ड आपदा रिस्पॉन्स को मजबूत करने के लिए आपदा मित्रों की टोली हर खतरे का मुकाबला करने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है। आपदा के कहर से जानमाल का नुकसान न्यूनतम करने के विषय को प्रधानमंत्री मोदी जी ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में एक थ्योरी के रूप में स्थापित किया है। बीते 12 साल में आपदा से बचाव सिर्फ एक सिस्टम नहीं बल्कि इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर भारत सरकार तक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक हर जगह एक साथ एक उद्देश्य के लिए काम करने का एक नया तरीका भारत सरकार ने अपनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में कई भीषण प्राकृतिक आपदाएं आई। ओडिशा के सुपर साइक्लोन, गुजरात के भूकंप और हिंद महासागर की सुनामी ने देश के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं के कारण देश में एक मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया गया। आपदा प्रबंधन अधिनियम भी आया। NDMA और NDRF का भी गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब 16 बटालियनों के साथ NDRF एक सशक्त बल बन चुका है। NDRF ने अपनी कार्यपद्धति से SDRF की ट्रेनिंग और SDRF के साथ साझा अभियानों से अपनी शक्ति बढ़ाया है। प्रोएक्टिव डिप्लॉयमेंट और प्रीपोजिशनिंग जैसे उपाय हमें नुकसान से बचाने में कारगर साबित हो चुके हैं। श्री शाह ने कहा कि 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ NDRF के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी। बाद में ऐसी कई आपदाएं आई, जैसे – धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली के फ्लड्स, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह। वहीं, अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश, सबरीमाला यात्रा, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजनों में NDRF ने बहुत अच्छे तरीके से समाज के साथ मिलकर काम किया।

गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है। इसके माध्यम से रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन, और गाइडलाइंस के निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है। श्री शाह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत आज निर्विवाद रूप से एक ग्लोबल लीडर और फर्स्ट रिस्पॉंडर के रूप में उभरा है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारते हुए इसे धरातल पर लागू किया गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी की प्रेरणा से ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया है। CDRI के आज 48 देश सदस्य बन चुके हैं और भारत के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने देशभर के सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि 2021 से अब तक CAPFs के सभी जवानों ने देशभर में 7 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह समस्त CAPFs के मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।

भारत के बच्चों को भोजन के अलावा भी और चीजों की आवश्यकता है
  • डॉ. सरथ गोपालन

कुछ समय पहले मेरे क्लिनिक में पांच साल की एक बच्ची लाई गई। वह अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में विकास के कई चरणों में पीछे लग रही थी। उसकी बोलने की गति धीमी थी और वह अपने हमउम्र बच्चों जितनी सक्रिय या जुड़ी हुई नहीं दिख रही थी। उसके विकास के आकलन में वह तीन साल की बच्ची के स्तर पर पाई गई। उसकी मां बहुत चिंतित थीं। बच्ची बीमार नहीं थी। कोई ऐसी बीमारी या निदान नहीं था जो इसकी वजह समझा सके। लेकिन जब हमने कोविड-19 के पिछले दो वर्षों के बारे में बात की, तो तस्वीर साफ होने लगी। लंबे लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद रहे, वह ज्यादातर समय घर पर रही, खेल की जगह स्क्रीन ने ले ली और भोजन पहले की तुलना में अधिक साधारण और सीमित हो गया। उन शांत वर्षों में उसके मस्तिष्क को वह सब नहीं मिल पाया जिसकी उसे बढ़ने के लिए जरूरत थी। वह कोई अपवाद नहीं थी। अलग-अलग क्लिनिकों में बाल रोग विशेषज्ञ और विकास विशेषज्ञ एक ही तरह की स्थिति देख रहे थे-ऐसे बच्चे जो शारीरिक रूप से स्वस्थ थे, लेकिन विकास में पीछे रह गए थे। यह वायरस की वजह से नहीं था, बल्कि उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मस्तिष्क का 90% विकास पांच वर्ष की आयु से पहले ही हो जाता है, जिससे प्रारंभिक वर्ष बच्चे के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक भविष्य को आकार देने का सबसे बड़ा अवसर बन जाते हैं। इस दौरान बनने वाले तंत्रिका संबंध सीखने, भाषा, स्मृति और जीवन भर के लिए लचीलेपन को मजबूत करते हैं।

इस अवधि में सही पोषण प्राप्त करना सबसे शक्तिशाली निवेशों में से एक है जो हम कर सकते हैं। आयरन, जिंक और सेलेनियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जिन्हें अक्सर तंत्रिका पोषक तत्व कहा जाता है, स्वस्थ मस्तिष्क विकास और कार्य के लिए आवश्यक हैं। फिर भी आंकड़े एक चिंताजनक कहानी बयां करते हैं। अकेले आयरन की कमी भारत में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 50% बच्चों को प्रभावित करती है ( एनएफएचएस-5)। पांच वर्ष से कम आयु के 67.1% बच्चों में एनीमिया दर्ज किया गया, जो पिछले सर्वेक्षण से अधिक है। 12-59 महीने की आयु के बच्चों के राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि विश्लेषण सहित हाल के साक्ष्यों से पता चला है कि 60% से अधिक बच्चों में एनीमिया के साथ या उसके बिना सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी थी। यह अकेले हीमोग्लोबिन की संख्या से कहीं अधिक व्यापक पोषण संबंधी अंतर की ओर इशारा करता है।

डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए), एक ओमेगा-3 फैटी एसिड, मस्तिष्क की संरचना, स्मृति निर्माण और दृश्य विकास में सहायक होता है। कोलीन, एक अन्य आवश्यक पोषक तत्व, अब मस्तिष्क के विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। जब माताएं गर्भावस्था के दौरान कोलीन का सेवन करती हैं, तो यह स्वस्थ जीन गतिविधि और कोशिका संरचना, तथा मस्तिष्क के प्रमुख क्षेत्रों – जिनमें स्मृति और चिंतन के लिए जिम्मेदार क्षेत्र शामिल हैं – के विकास में सहायक होता है। ये पोषक तत्व बच्चे के आहार में वैकल्पिक नहीं हैं, बल्कि उनकी क्षमता के लिए मूलभूत हैं।

बच्चे के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण पोषण संबंधी हस्तक्षेप जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। मस्तिष्क का विकास भ्रूण अवस्था में ही शुरू हो जाता है, और मां की पोषण स्थिति सीधे तौर पर उस तंत्रिका आधार को आकार देती है जिससे बच्चा जन्म लेता है। डीएचए गर्भ में तंत्रिका संपर्क को सहारा देता है; गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड का सेवन कम जन्म वजन और विकास में देरी के जोखिम को कम करता है। फिर भी, भारत में केवल 44% गर्भवती महिलाओं ने अनुशंसित 180 या उससे अधिक दिनों तक आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट का सेवन किया (एनएफएचएस-5), जो एक बहुत बड़ा और लक्षित करने योग्य अवसर प्रस्तुत करता है।

यही कारण है कि किशोरियों में निवेश करना अगली पीढ़ी में निवेश करना है। एक स्वस्थ लड़की स्वस्थ मां बनती है, और एक स्वस्थ मां अपने बच्चे को सर्वोत्तम संभव शुरुआत देती है। भारत में 59% किशोरियों में एनीमिया की समस्या है, इसलिए स्कूलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और लक्षित पूरक आहार के माध्यम से इस समूह को प्राथमिकता देना संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा में प्रभावी उपायों में से एक है।

हालांकि पोषण महत्वपूर्ण है, मस्तिष्क के विकास के लिए दो समानांतर इनपुट आवश्यक हैं: पर्याप्त पोषण और भावनात्मक-सामाजिक उत्तेजना। महामारी ने इसे सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। यूनिसेफ का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर सात में से एक बच्चे ने कोविड-19 के दौरान विकास या सीखने में महत्वपूर्ण हानि का अनुभव किया, जो मुख्य रूप से बीमारी के कारण नहीं, बल्कि साथियों के साथ मेलजोल, बातचीत और खेल की कमी के कारण हुआ। स्क्रीन ने मानवीय संपर्क का स्थान ले लिया, और भाषा, शारीरिक और सामाजिक विकास प्रभावित हुआ।

संवेदनशील देखभाल, मौखिक संवाद, स्पर्श संबंधी जुड़ाव और एक उत्तेजक वातावरण तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और स्वस्थ मस्तिष्क संरचना के लिए आवश्यक हैं। प्रारंभिक बचपन के कार्यक्रम जो पोषण संबंधी सहायता और विकासात्मक उत्तेजना दोनों को एकीकृत करते हैं, ऐसे परिणाम देते हैं जो इनमें से कोई भी अकेले प्राप्त नहीं कर सकता। भारत की कार्यक्रम संरचना इस पर अमल करने के लिए अच्छी स्थिति में है। पोषण अभियान और पीएम पोषण जैसे कार्यक्रम पहले से ही देश भर में लाखों माताओं और छोटे बच्चों तक पहुंच रहे हैं। पोषण पखवाड़ा जैसी पहल पोषण के इर्द-गिर्द निरंतर, सामुदायिक स्तर पर लामबंदी की शक्ति को दर्शाती है। वितरण संरचना, जिसमें आंगनवाड़ी नेटवर्क, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी और सामुदायिक स्तर पर पहुँच शामिल है, स्थापित है। अब अवसर यह है कि इस ढांचे से मिलने वाले लाभों को और अधिक बढ़ाया जाए।

उचित प्रशिक्षण और सहयोग से, वे शारीरिक विकास पर नज़र रखने से लेकर माता-पिता को प्रारंभिक प्रोत्साहन, संवेदनशील देखभाल और बाल विकास प्रथाओं पर मार्गदर्शन देने तक अपनी भूमिका का विस्तार कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क को एकीकृत करना, जो पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल को एक सुसंगत इकाई में जोड़ता है, इस विकास के लिए एक स्पष्ट और वैज्ञानिक रोडमैप प्रदान करता है। यह लक्ष्य को केवल बच्चों को भोजन कराने से आगे बढ़ाकर उन्हें वास्तव में फलने-फूलने में मदद करने की ओर ले जाता है।

शुरुआती बचपन में पोषण किसी भी देश के लिए सबसे अधिक लाभ देने वाला निवेश है। जब बच्चों को उनके विकसित होते मस्तिष्क के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व, सही देखभाल का वातावरण और सही मानसिक व सामाजिक प्रोत्साहन मिलता है तो उसका लाभ पूरी जिंदगी मिलता है। ऐसे बच्चे बेहतर विद्यार्थी बनते हैं, आगे चलकर अधिक सक्षम और उत्पादक नागरिक बनते हैं, और समाज भी अधिक मजबूत और सक्षम बनता है। भारत के पास विकसित भारत का सपना है। उसके पास व्यवस्थाएं हैं। उसके पास विज्ञान है। अब जरूरत इस बात की है कि शुरुआती बचपन के पोषण को केवल कल्याणकारी योजना का हिस्सा न माना जाए, बल्कि उसे उस बुनियाद के रूप में देखा जाए, जिस पर बाकी सब कुछ टिका है।

(लेखक, नई दिल्ली के मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार और न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई) के अध्यक्ष हैं।)

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

दिल्ली / सत्ता संदेश

सरकार के संज्ञान में आया है कि “जेजी बिल्डिंग ग्रुप” नामक एक संस्था द्वारा कुछ धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की जा रही हैं, जिसमें आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) से संबंध होने का झूठा दावा करके फर्जी भर्ती अभियान चलाए जा रहे हैं।

2. उक्त संस्था कथित तौर पर:

(i). एमओएचयूए के नाम का उपयोग करके फर्जी रिक्ति नोटिस जारी कर रही है;

(ii). मंत्रालय से प्राधिकरण/सहयोग का दावा करके उम्मीदवारों को गुमराह कर रही है;

(iii). रोजगार प्रदान करने के बहाने आवेदकों से कथित तौर पर मौद्रिक लाभ की मांग कर रही है;

(iv). ऐसे झूठे दावों को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म/वेबसाइट का संचालन कर रही है।

3. इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि:

(क). आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ऐसी कोई भर्ती सूचना जारी नहीं की है;

(ख) मंत्रालय ने किसी भी निजी एजेंसी/संस्था को अपनी ओर से भर्ती करने के लिए अधिकृत नहीं किया है;

(ग). इसके विपरीत दावा करने वाले किसी भी संचार को कपटपूर्ण और भ्रामक माना जाना चाहिए।

4. आम जनता, विशेषकर नौकरी चाहने वालों को सलाह दी जाती है:

(i). ऐसे फर्जी भर्ती प्रस्तावों का जवाब न दें

(ii). ऐसी संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें;

(iii). ऐसे प्रस्तावों के संबंध में कोई भुगतान न करें;

(iv). ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों को करें।

5. यह विज्ञप्ति जनहित में जागरूकता पैदा करने और भोले-भाले नागरिकों के शोषण को रोकने के लिए जारी की जा रही है।

डी ओ पी टी और सी बी सी “क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देना: प्रशिक्षण से प्रदर्शन-आधारित शासन तक” विषय पर राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन का आयोजन 15 मई 2026 को करेगा।

दिल्ली / सत्ता संदेश

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी ओ पी टी) और क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) 15 मई 2026 को “क्षमता निर्माण का संस्थागतकरण: प्रशिक्षण से प्रदर्शन-आधारित शासन तक” विषय पर राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह करेंगे।

यह शिखर सम्मेलन केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भूमिका-आधारित, योग्यता-संचालित और प्रदर्शन-आधारित क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए आवश्यक रूपरेखाओं और कार्यान्वयन रोडमैप पर आम सहमति बनाने में सहायक होगा।

शिखर सम्मेलन से पहले 26 फरवरी को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक राष्ट्रीय कार्यशाला का वर्चुअल माध्यम से आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सामान्य प्रशासन विभागों/कार्मिक विभागों या समकक्ष विभागों के प्रमुखों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों और प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आंतरिक परामर्श कार्यशालाएं आयोजित करने और क्षमता निर्माण को संस्थागत बनाने और प्रदर्शन-आधारित शासन को सक्षम बनाने पर संरचित सुझाव साझा करने का अनुरोध किया गया था।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आयोजित इन परामर्श बैठकों का उद्देश्य विभागों, प्रशिक्षण संस्थानों, मानव संसाधन/ईएचआरएमएस दलों और अन्य हितधारकों को शामिल करना था ताकि विचार-विमर्श व्यावहारिक प्रशासनिक वास्तविकताओं पर आधारित हो। परामर्श बैठकों का मुख्य उद्देश्य वर्त्तमान अच्छी प्रथाओं, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों और प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक सुधारों की पहचान करना था। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त सुझावों के आधार पर शिखर सम्मेलन के दौरान विचार-विमर्श के लिए एक समेकित नोट तैयार किया गया है।

यह शिखर सम्मेलन विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों पर आधारित है, जो भारत सरकार द्वारा 2020 में शुरू किया गया राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम है। मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य नियम-आधारित दृष्टिकोण से भूमिका-आधारित, योग्यता-आधारित प्रणाली की ओर अग्रसर होकर सिविल सेवा क्षमता निर्माण को रूपांतरित करना है।

शिखर सम्मेलन में चार प्रमुख विषयगत प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पहला विषय, भूमिका-केंद्रित और प्रदर्शन-आधारित क्षमता निर्माण के लिए एकीकृत ढांचा, प्रदर्शन-आधारित शासन को सक्षम बनाने के लिए प्रणालियों में अंतर-संचालनीयता पर केंद्रित होगा। दूसरा विषय, प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ बनाना, केंद्रीय और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों को मांग-अनुरूप क्षमता निर्माण साझेदार के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक सुधारों की जांच करेगा।

तीसरा विषय, अति-व्यक्तिगत शिक्षण के लिए एआई और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना, व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग तैयार करने, विश्लेषण में सुधार करने और बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी-संचालित क्षमता निर्माण को सक्षम बनाने के लिए एआई-सक्षम उपकरणों के उपयोग पर केंद्रित होगा। चौथा विषय, राज्यों में कैडर प्रशिक्षण की समीक्षा, राज्य कैडर प्रशिक्षण योजनाओं को क्षमता निर्माण योजनाओं के साथ संरेखित करने और राज्य के सभी कैडरों और सेवाओं में व्यवस्थित, करियर-व्यापी क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श करेगा।

इस शिखर सम्मेलन में डी ओ पी टी, सीबीसी, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों, प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों, केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों, कर्मयोगी भारत, एलबीएसएनएए और सिविल सेवा क्षमता निर्माण इकोसिस्टम के अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आएंगे। यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच केंद्रित विचार-विमर्श को सक्षम बनाएगा ताकि सरकार के सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण की भविष्य की दिशा तय की जा सके।

राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश परामर्शों से उभरने वाली प्रमुख सुधार प्राथमिकताओं को मान्य करने और सांकेतिक समय-सीमा के साथ कार्रवाई योग्य मार्गों की पहचान करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। शिखर सम्मेलन के परिणामों से क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने, प्रमुख हितधारकों की भूमिकाओं को स्पष्ट करने, डिजिटल और संस्थागत शिक्षण प्रणालियों के बीच अभिसरण को मजबूत करने और प्रदर्शन-आधारित शासन की ओर संक्रमण का समर्थन करने की उम्मीद है।

शिवराज सिंह चौहान करेंगे 5 लाख पीएमएवाई-जी आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ; महाराष्ट्र के लिए ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश सहायता जारी करेंगे


दिल्ली / सत्ता संदेश

15 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में महाराष्ट्र को ₹122.98 करोड़ की 35 सड़क परियोजनाओं की भी सौगात

सतारा में आयोजित होगा पीएमएवाई-जी लाभार्थी सम्मेलन एवं ‘महा आवास अभियान’ राज्य स्तरीय पुरस्कार समारो

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 15 मई 2026 को महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री श्रीमती सुनेत्रा अजित पवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत पूर्ण हुए 5 लाख आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, 6 पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को आवास की चाबियां भी सौंपेंगे, जिनमें योजना के अंतर्गत 3 करोड़वें आवास से जुड़े लाभार्थी भी शामिल होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र को पीएमएवाई-जी के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश की मातृ स्वीकृति जारी करेंगे। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत ₹122.98 करोड़ की लागत से 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी जारी करेंगे, जिससे राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

कार्यक्रम के दौरान ‘महा आवास अभियान 2023-24’ के अंतर्गत राज्य स्तरीय पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ‘महा आवास अभियान अवॉर्ड्स गौरवगाथा पुस्तिका’ एवं त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाएगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के आवास उपलब्ध कराना है। पीएमएवाई-जी के अंतर्गत अब तक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को 4.15 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया जा चुका है, जिनमें से 3.91 करोड़ आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 11 मई 2026 तक 3.03 करोड़ से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र ने योजना के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य को आवंटित 43.80 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध 41.42 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 17.92 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। सतारा जिले में 55,052 आवासों के लक्ष्य के सापेक्ष 54,759 आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 24,848 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र के लिए पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत बड़ी स्वीकृति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए बड़ी स्वीकृति की घोषणा भी की जाएगी, जिससे राज्य में ग्रामीण सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को और मजबूती मिलेगी।

पीएमजीएसवाई-IV (2026-27, बैच-I) के अंतर्गत 95.99 किलोमीटर लंबाई की 35 सड़क परियोजनाओं को लगभग ₹122.98 करोड़ की लागत से स्वीकृति का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में सड़क संपर्क सुनिश्चित करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार एवं अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना है। यह पहल ग्रामीण महाराष्ट्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने एवं जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत अब तक 34 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों एवं 1000 से अधिक पुलों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिन पर ₹15 हजार करोड़ से अधिक की लागत स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से गांवों की सड़क संपर्क व्यवस्था मजबूत हुई है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

राज्य में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत ‘न्यू एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी’ आधारित सड़क निर्माण कार्यों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आधुनिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल ग्रामीण आधारभूत संरचना विकसित हो रही है।

यह कार्यक्रम ग्रामीण आवास, सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना विकास के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की

दिल्ली/ सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा तथा महासागर-आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की अपनी उपयोगिता और महत्ता है तथा भारत स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी श्री चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक, सीईएल के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वदेशी प्रणालियों के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग पहलों की भी शुरुआत हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन के संचालन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सुविधा स्वदेशी विनिर्माण तथा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रति देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में सीईएल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा निर्मित किया गया था तथा देश का पहला सौर संयंत्र भी वर्ष 1979 में इसी संगठन द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इतनी अग्रणी उपलब्धियों के बावजूद उस समय सीईएल के योगदान को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब यह संस्था पुनः राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रासंगिकता प्राप्त कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी संस्था से लाभ अर्जित करने वाली और राजस्व उत्पन्न करने वाली मिनी रत्न कंपनी के रूप में सीईएल का परिवर्तन संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव दृढ़ नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन तथा संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

मंत्री ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण 24 अप्रैल 2025 को जारी किया गया था, एक माह के भीतर सफल बोलीदाता का चयन कर लिया गया और एक वर्ष से भी कम समय में विनिर्माण सुविधा का संचालन प्रारंभ हो गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, जो भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है तथा उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहलों का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योग साझेदारी के माध्यम से व्यावसायीकरण और जन उपयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूर्ण रूप से स्वदेशी बन चुकी है और कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है तथा यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास में परिवर्तित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

“टीडीबी-डीएसटी ने मल्टीपल मायलोमा बीमारी के इलाज हेतु उन्नत सीएआर-टी सेल थेरेपी के लिए भारत-सिंगापुर सहयोग के तहत हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स से समझौता किया”

दिल्ली/ सत्ता संदेश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने भारत के उन्नत जैव प्रौद्योगिकी और सेल थेरेपी प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तेलंगाना के हैदराबाद में स्थित मेसर्स हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ “मल्टीपल मायलोमा के उपचार हेतु नवीन दोहरे लक्ष्यीकरण वाले काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी कोशिकाओं का निर्माण और प्रथम चरण का नैदानिक ​​परीक्षण” नामक परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना सिंगापुर स्थित बायोसेल इनोवेशन्स के साथ साझेदारी में भारत-सिंगापुर सहयोगात्मक ढांचे के तहत कार्यान्वित की जा रही है।

यह परियोजना मल्टीपल मायलोमा के लिए एक उन्नत दोहरे लक्ष्यीकरण वाली सीएआर-टी सेल थेरेपी विकसित करने पर केंद्रित है। मल्टीपल मायलोमा इंसान को दुर्बल करने वाला और वर्तमान में लाइलाज रक्त कैंसर है। बीसीएमए को लक्षित करने वाली मौजूदा सीएआर-टी थेरेपी ने पुनरावर्ती और प्रतिरोधी रोगियों में उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। यह प्रस्तावित नवाचार मल्टीपल मायलोमा कोशिकाओं पर व्यक्त बीसीएमए और सीडी19 मार्करों दोनों को एक साथ लक्षित करके उपचार की प्रभावकारिता और छूट की अवधि को और बेहतर बनाने का प्रयास करता है।

इस परियोजना के तहत, हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स प्रथम चरण के नैदानिक ​​परीक्षण के माध्यम से अगली पीढ़ी की दोहरे लक्ष्यीकरण वाली सीएआर-टी कोशिकाओं का विकास, निर्माण और नैदानिक ​​मूल्यांकन करेगी। यह थेरेपी उन रोगियों के लिए है जिन्होंने कई प्रकार के उपचार आजमा लिए हैं और जिनके पास वर्तमान में सीमित चिकित्सीय विकल्प उपलब्ध हैं।

सीएआर-टी सेल थेरेपी में रोगी के स्वयं के टी लिम्फोसाइट्स को आनुवंशिक रूप से इस प्रकार संशोधित किया जाता है कि वे विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं की पहचान करके उन्हें नष्ट कर सकें। प्रस्तावित दोहरी लक्ष्यीकरण रणनीति पारंपरिक एकल-मार्कर सीएआर-टी थेरेपी की तुलना में एक महत्वपूर्ण प्रगति है और इससे उपचार में मुश्किल मल्टीपल मायलोमा के रोगियों में दीर्घकालिक रोगमुक्ति के परिणामों में सुधार होने की उम्मीद है।

यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के व्यापक ढांचे के अंतर्गत उन्नत जैविक उत्पादों, सटीक चिकित्सा और अत्याधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह उभरते जैव चिकित्सा नवाचार क्षेत्रों में भारत और सिंगापुर के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सहयोग को भी सुदृढ़ करती है।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत सेल और जीन थेरेपी सटीक स्वास्थ्य सेवा का भविष्य हैं और जटिल तथा पहले असाध्य रोगों के उपचार में क्रांतिकारी क्षमता रखती हैं। इस भारत-सिंगापुर सहयोगात्मक परियोजना के माध्यम से, टीडीबी उन्नत इम्यूनोथेरेपी प्लेटफार्मों में स्वदेशी नवाचार का समर्थन कर रहा है जो अगली पीढ़ी की जैव प्रौद्योगिकी और किफायती स्वास्थ्य समाधानों में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत कर सकता है।”

हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रतिनिधि ने टीडीबी के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता कंपनी के अभिनव सीएआर-टी थेरेपी प्लेटफॉर्म के नैदानिक ​बदलाव और व्यावसायीकरण में तेजी लाएगी, साथ ही देश में उन्नत कैंसर उपचार समाधानों तक पहुंच का विस्तार करेगी।

विपरीत समानांतर क्वांटम अवस्थाओं से मापन के क्षेत्र में नए लाभ

वैज्ञानिकों ने एक आश्चर्यजनक क्वांटम रूप का पता लगाया है जो दर्शाता है कि कभी-कभी विपरीत अवस्थाओं में तैयार किए गए दो कण दो समान कणों की तुलना में अधिक जानकारी प्रकट कर सकते हैं।

इन निष्कर्षों से अज्ञात क्वांटम उपकरणों के लक्षण वर्णन में सुधार हो सकता है और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्रोटोकॉल को लाभ मिल सकता है।

क्वांटम भौतिकी में, एक ही समय में सब कुछ जानना संभव नहीं है। इस मूलभूत सीमा को बोहर का पूरकता सिद्धांत कहा जाता है, जो यह बताती है कि क्वांटम प्रणाली के कुछ गुणों को एक साथ पूर्ण परिशुद्धता के साथ निर्धारित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए प्रसिद्ध उदाहरणों में डबल-स्लिट प्रयोग में पथ सूचना और व्यतिकरण दृश्यता के बीच का संतुलन, साथ ही स्थिति और संवेग, या विभिन्न अक्षों के अनुदिश स्पिन घटकों जैसे गैर-परिवर्तनशील प्रेक्षणीयताओं का संयुक्त रूप से मापन असंभवता शामिल है।

लेकिन क्या होगा अगर सिस्टम को तैयार करने का हमारा तरीका इस सीमा को बदल सके? फिज. रेव. लेट. में प्रकाशित एक नए अध्ययन में एक आश्चर्यजनक उत्तर सामने आया है: कभी-कभी विपरीत स्वभाव वाले लोग समान स्वभाव वाले लोगों से बेहतर काम करते हैं।

यह शोध इस बात की पड़ताल करता है कि क्वांटम कणों के युग्म दिए जाने पर हम उनकी विभिन्न विशेषताओं—विशेष रूप से, एक क्यूबिट के स्पिन—को संयुक्त रूप से कितनी सटीकता से माप सकते हैं। इन युग्मों को दो अलग-अलग तरीकों से तैयार किया जा सकता है: या तो दोनों स्पिन एक ही दिशा में इंगित करते हैं (समानांतर), या एक दूसरे के सापेक्ष विपरीत दिशा में होता है (विपरीत समानांतर)।

सहज ज्ञान से यह लग सकता है कि एक जैसी प्रतियां अधिक उपयोगी होनी चाहिए। आखिर, एक ही स्थिति की दो प्रतियां होने से अधिक जानकारी मिलती है। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी की कहानी कुछ और ही है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान एस. एन. बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र, बालागढ़ विजॉय कृष्ण महाविद्यालय और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के शोधकर्ताओं के एक समूह ने दिखाया है कि विपरीत समानांतर स्पिन एक उल्लेखनीय लाभ प्रदान करते हैं। ये तीन परस्पर असंगत स्पिन घटकों की एक साथ सटीक भविष्यवाणी करने की अनुमति देते हैं—जो समानांतर स्पिन के साथ मौलिक रूप से असंभव है

यह परिणाम क्वांटम सिद्धांत के मूल को छूता है। शास्त्रीय भौतिकी (20वीं शताब्दी में विकसित भौतिक सिद्धांत) में कई गुणों को मापना केवल व्यावहारिक सीमाओं तक ही सीमित है। इसके विपरीत, क्वांटम प्रणालियां आंतरिक सीमाएं निर्धारित करती हैं—जिन्हें हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत और बोहर के पूरकता सिद्धांत ने बखूबी उजागर किया है। फिर भी यहां, अवस्थाओं को तैयार करने के तरीके को चतुराई से चुनकर, इनमें से कुछ सीमाओं को आश्चर्यजनक तरीके से दूर किया जा सकता है।

यह शोध याकिर अहारोनोव और उनके सहयोगियों द्वारा प्रस्तुत ‘मीन किंग्स प्रॉब्लम’ नामक प्रसिद्ध क्वांटम पहेली से भी जुड़ा है। मूलभूत जानकारियों के अलावा, इसके व्यावहारिक निहितार्थ भी हैं। एंटीपैरेलल कॉन्फ़िगरेशन द्वारा प्रदान की गई बेहतर अनुकूलता अज्ञात क्वांटम उपकरणों के कुशल लक्षण वर्णन का वादा करती है, जो विश्वसनीय क्वांटम प्रौद्योगिकियों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल को भी प्रभावित करता है, जहां सीमित क्वांटम संसाधनों से अधिकतम जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

गहरे स्तर पर, यह अध्ययन क्वांटम भौतिकी में बार-बार आने वाले एक विषय को उजागर करता है: अधिक समरूपता का अर्थ हमेशा अधिक शक्ति नहीं होता। कभी-कभी, विपरीतता लाने से—जैसे एक स्पिन को दूसरे के विपरीत करने से—ऐसी क्षमताएं आ जाती हैं जो समान प्रणालियां प्रदान नहीं कर सकतीं। क्वांटम जगत में, विपरीत चीजें न केवल आकर्षित करती हैं—बल्कि कभी-कभी वे और भी बहुत कुछ प्रकट कर सकती हैं।