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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…19-05-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन काफी हलचल भरा रहा। जहाँ एक तरफ एक उभरती हुई पंजाबी गायिका की हत्या ने सबको झकझोर कर रख दिया, वहीं दूसरी तरफ आसमान से बरसती आग और बढ़ती महंगाई ने आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है। प्रशासन ने बढ़ती गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।

  1. पंजाबी सिंगर इंदर कौर की बेरहमी से हत्या: कनाडा से आए शख्स ने दिया अंजाम लुधियाना की 29 वर्षीय पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर की हत्या कर दी गई और उनका शव नीलो नहर से बरामद हुआ। इंदर के भाई ने बताया कि आरोपी मोगा का रहने वाला है और 5 साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए उनकी दोस्ती हुई थी। जब इंदर को पता चला कि आरोपी शादीशुदा है और उसके बच्चे हैं, तो उसने शादी से इनकार कर दिया। आरोपी इसी वजह से कनाडा से नेपाल के रास्ते पंजाब आया और गनपॉइंट पर इंदर को किडनैप कर उसकी हत्या कर दी।
  2. 25 मई तक भीषण लू का अलर्ट: रातें भी होने लगीं गर्म मौसम विभाग (IMD) ने पंजाब और चंडीगढ़ में 25 मई तक ‘सीवियर हीटवेव’ (भीषण लू) का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को बठिंडा सबसे गर्म जिला रहा। विभाग के अनुसार, रात का तापमान सामान्य से 5 डिग्री अधिक दर्ज किया गया है, जिससे अब रातें भी गर्म होने लगी हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे धूप में निकलने से बचें और ओआरएस, लस्सी और नींबू पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें।
  3. महंगाई का झटका: 5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम : पंजाब और चंडीगढ़ में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। इस बार पेट्रोल और डीजल के रेट 85 पैसे से 1 रुपये तक बढ़ाए गए हैं, जबकि सीएनजी के रेट में 1.73 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।, पिछले 5 दिनों में कुल बढ़ोतरी 4 रुपये तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार होने के कारण तेल कंपनियों ने यह बोझ जनता पर डाला है।
  4. मुख्यमंत्री भगवंत मान का ‘अंडरग्राउंड केबल’ प्रोजेक्ट: सतोज़ से शुरुआत CM भगवंत मान ने अपने पैतृक गांव सतोज़ से बिजली की तारों को जमीन के नीचे दबाने के पायलट प्रोजेक्ट की नींव रखी। इस पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होंगे और बिना खुदाई के ‘ट्रेंचलेस ड्रिलिंग’ तकनीक से पाइप बिछाए जाएंगे। सीएम ने कहा कि इससे लटकती तारों के कारण होने वाले हादसों और खेतों में लगने वाली आग की घटनाओं पर रोक लगेगी।
  5. न्यू चंडीगढ़ में एडवोकेट गगनदीप जम्मू पर फायरिंग: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और पूर्व सेक्रेटरी गगनदीप जम्मू की कार पर कुराली बाईपास पर अज्ञात हमलावरों ने 3 गोलियां चलाईं। एडवोकेट जम्मू ने बताया कि एक बाइक सवार ने उनके पिछले टायर और खिड़की पर फायर किया, जिसके बाद उन्होंने कार को उल्टी दिशा में चलाकर अपनी जान बचाई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
  6. गुरदासपुर में दर्दनाक सड़क हादसा: 4 युवकों की मौत नेशनल हाईवे पर एक ऑल्टो कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार 4 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और शवों को बाहर निकालने के लिए कार की बॉडी को कटर से काटना पड़ा। चश्मदीदों के अनुसार हादसा सुबह 4 बजे के करीब हुआ और धमाका इतना तेज था कि लोग सहम गए।,
  7. जालंधर का अशोक मस्कीन बना सुपरस्टार: रील ने बदली जिंदगी फैक्ट्री में खराद का काम करने वाले अशोक मस्कीन आज एक सोशल मीडिया रील की वजह से सुपरस्टार बन गए हैं। उनके ‘कोक स्टूडियो’ गाने को अब तक 1.80 करोड़ लोग देख चुके हैं। 50 साल की उम्र में मिली इस शोहरत के बाद अब उन्हें बॉलीवुड से भी प्लेबैक सिंगिंग के ऑफर मिल रहे हैं।
  8. ऑस्ट्रेलिया में लुधियाना की छात्रा कोमलप्रीत कौर की मौत : लुधियाना के रायकोट की 19 वर्षीय छात्रा कोमलप्रीत कौर की पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में एक कार हादसे में मौत हो गई। वह नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी और नाइट ड्यूटी खत्म कर घर लौटते समय एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। कोमलप्रीत के पिता भारतीय सेना से रिटायर्ड सूबेदार हैं।
  9. लुधियाना में 3 बच्चों की मां ने की खुदकुशी: ससुराल पक्ष पर आरोप लुधियाना के जीवनपुर में 32 वर्षीय पूजा कौर ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका के भाई ने आरोप लगाया कि पूजा का पति ग्रीस में है और उसके पीछे से उसके जेठ और जेठानी उसे लगातार प्रताड़ित और मारपीट कर रहे थे। मरने से पहले पूजा ने अपने भाई को फोन कर मारपीट के बारे में बताया था।
  10. आप विधायक के पति का नामांकन रद्द: महिला वार्ड से भरा था पर्चा लुधियाना के जगराओं में AAP विधायक सरबजीत कौर माणूके के पति सुखविंदर बिल्ला का पार्षद चुनाव के लिए नामांकन रद्द हो गया है। उन्होंने जगराओं नगर कौंसिल के वार्ड नंबर 1 से पर्चा भरा था, जो महिलाओं के लिए आरक्षित (Reserved) था। रिटर्निंग अफसर ने नियमों का हवाला देते हुए उनका पर्चा खारिज कर दिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
पंजाब के गांवों में अब नहीं दिखेंगे बिजली के खंभे: CM भगवंत मान ने सतोज़ से शुरू किया ऐतिहासिक ‘अंडरग्राउंड केबल’ प्रोजेक्ट

पंजाब डेस्क: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पैतृक गांव सतोज़ में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) करने के लिए एक क्रांतिकारी पायलट प्रोजेक्ट की नींव रखी है। इस पहल के साथ पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बनने की राह पर है जहाँ के गांव ‘खंबा मुक्त’ होंगे। मुख्यमंत्री ने इस दिन को पंजाब के इतिहास में “सुनहरे अक्षरों” वाला बताया है।

प्रोजेक्ट की खास बातें और तकनीक:

लागत: इस पायलट प्रोजेक्ट पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

बिना खुदाई के काम: सड़कों को नुकसान पहुँचाए बिना पाइप बिछाने के लिए खाई रहित ड्रिलिंग मशीनों (Trenchless drilling machines) का इस्तेमाल किया जाएगा।

बड़ा नेटवर्क: प्रोजेक्ट के तहत 7 किमी हाई-टेंशन लाइन, 9.5 किमी लो-टेंशन लाइन और 41 किमी सर्विस केबलों को जमीन के 3 फीट नीचे दबाया जाएगा, जिससे गांव के 384 अनावश्यक बिजली के खंभे खत्म हो जाएंगे।

जनता को मिलने वाले बड़े फायदे: मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक लाभ भी हैं:

हादसों से बचाव: लटकती तारों के कारण होने वाले जानलेवा हादसों में कमी आएगी।

फसलों की सुरक्षा: खेतों के ऊपर से गुजरने वाली तारों से अक्सर फसलों में आग लग जाती थी, जिस पर अब लगाम लगेगी।

निर्बाध बिजली: बारिश या तेज हवाओं के दौरान बिजली गुल होने की समस्या खत्म होगी और वोल्टेज में होने वाला नुकसान (Transmission loss) भी कम होगा।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि ‘सतोज़ मॉडल’ पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा और यह राज्य को ‘रोशन पंजाब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कुदरत का कहर: गर्मी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड किए ध्वस्त, 48.2 डिग्री पारा छूने के साथ टूटा रिकॉर्ड; 2 दिन का रेड अलर्ट जारी

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश में गर्मी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मंगलवार, 19 मई 2026 को बुंदेलखंड का बांदा जिला प्रदेश का सबसे गर्म इलाका रहा, जहाँ अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भीषण लू (Severe Heatwave) के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।इन शहरों में भी रहा भीषण गर्मी का प्रकोप: सिर्फ बांदा ही नहीं, बल्कि यूपी के कई अन्य जिले भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं:

-झांसी और आगरा: 46.5°C

-प्रयागराज: 45.8°C (सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक)

-जालौन: 45.2°C-कानपुर: 44.8°C

-लखनऊ: 40.9°C

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने जारी किए निर्देश: बढ़ते तापमान और लू के खतरे को देखते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रखा है। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को निर्देश दिए हैं कि गर्मी से पीड़ित मरीजों को तत्काल और समुचित इलाज मुहैया कराया जाए। अस्पतालों में दवाओं और पेयजल की निगरानी बढ़ाने के आदेश भी दिए गए हैं।

सावधानी और बचाव के उपाय: प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को निम्नलिखित सलाह दी है:

-दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें।

-पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS) का सेवन करें।

-सिर को ढककर रखें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।

-खाली पेट धूप में निकलने से बचें और मसालेदार भोजन न करें।

मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं हैं और आने वाले सप्ताह में गर्म हवाओं का असर जारी रहेगा।

उत्तर पूर्वी राज्यों के कारीगर और बुनकर समूह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

कारीगर और बुनकर राष्ट्र की जीवंत विरासत के ज्वलंत उदाहरण: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों और बुनकरों के एक समूह ने आज (19 मई, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

कारीगरों और बुनकरों ने 26 जनवरी, 2026 को आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन के दौरान निमंत्रण किट तैयार करने और भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र की विविध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उदाहरण के लिए, नागालैंड के कारीगरों ने केले के रेशे और बांस का उपयोग करके टोकरियां बनाईं, असम के बुनकरों ने शॉल बनाए। मणिपुर के कारीगरों ने काली मिट्टी के बर्तन बनाए और सिक्किम के कारीगरों ने प्राकृतिक रेशों का उपयोग करके उत्पाद तैयार किए।

इस संवाद के दौरान, कारीगरों और बुनकरों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन के लिए काम करने के अपने अनुभव साझा किए और अपनी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।

असम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कारीगरों और बुनकरों से परस्‍पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में प्राकृतिक सुंदरता का भंडार है। उन्होंने कारीगरों और बुनकरों को सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उनका कलात्मक ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कारीगरों और बुनकरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्र की जीवंत विरासत का ज्वलंत उदाहरण हैं और उनसे आग्रह किया कि वे इन अमूल्य परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएं।

बैठक के बाद, कारीगरों और बुनकरों ने अमृत उद्यान सहित राष्ट्रपति भवन का निर्देशित दौरा किया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली में राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और उनके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और उनके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत का मानवाधिकार ढांचा अद्वितीय है, इसमें एनएचआरसी और एसएचआरसी दोनों ही अपने विषय-विशिष्ट क्षेत्राधिकार के अतिरिक्त कुछ मामलों पर समवर्ती क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के मानवाधिकार प्रदर्शन का मूल्यांकन सभी आयोगों के कार्यों के माध्यम से सामूहिक रूप से किया जाता है। इसलिए मामलों के दोहराव से बचने, सूचना साझाकरण में सुधार करने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस बैठक में एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, श्रीमती विजया भारती सयानी, महासचिव श्री भरत लाल, महानिदेशक श्रीमती अनुपमा नीलेकर चंद्र और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने एसएचआरसी से अपने कामकाज को डिजिटल बनाने और एनएचआरसी के साथ एक एकीकृत एचआरसीनेट पोर्टल से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने आयोगों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाने की चेतावनी भी दी और कहा कि हालांकि न्यायालयों ने मौलिक और मानवाधिकारों के दायरे को बढ़ाया है, लेकिन मानवाधिकार संस्थानों को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत दी गई परिभाषाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकार क्षेत्र में स्पष्टता बनाए रखने से अनावश्यक विवाद कम होंगे और आयोग अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने भविष्य में राज्य मानवाधिकार आयोगों के बीच संवाद और घनिष्ठ सहयोग की आशा भी व्यक्त की।

न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने एनएचआरसी और एसएचआरसी के बीच संवाद को समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने आदेशों के प्रभावी कार्यान्वयन और पीड़ित व्यक्तियों, विशेष रूप से हिरासत में हुई मौतों जैसे संवेदनशील मामलों में, समय पर कार्रवाई के लिए दोनों पक्षों के बीच बेहतर संचार और समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने एसएचआरसी से प्रभावित समुदायों के साथ अधिक संपर्क बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी और एसएचआरसी के विशेष पर्यवेक्षकों और प्रतिवेदकों के बीच समन्वय से संस्थागत प्रभावशीलता मजबूत हो सकती है। उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा जन सहायता के लिए एसएचआरसी के संपर्क विवरण प्रदर्शित करने की पहल की भी सराहना की।

इससे पहले एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि मानवाधिकार एक जटिल विषय है जिसके लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उसके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ-साथ एसएचआरसी के बीच सामूहिक कार्रवाई, घनिष्ठ समन्वय और सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण की आवश्यकता है। आयोग की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में 4.28 लाख शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो पुलिस द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन (18 प्रतिशत), माफियाओं द्वारा संगठित शोषण (17.4 प्रतिशत), सेवा संबंधी मामले- पेंशन/वेतन का भुगतान न होना (6 प्रतिशत), महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन (5.8 प्रतिशत), जेलों और कारागारों की स्थिति (3.5 प्रतिशत), श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन (2.2 प्रतिशत), स्वास्थ्य संबंधी उल्लंघन (2 प्रतिशत), शैक्षणिक संस्थानों में मानवाधिकारों का उल्लंघन (2 प्रतिशत), बाल अधिकारों का उल्लंघन (1.7 प्रतिशत) आदि से संबंधित हैं।

सक्रिय निगरानी और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप पर जोर देते हुए, उन्होंने हिरासत में हुई मौतों, आश्रय गृहों में दुर्व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में दयनीय स्थिति, हाथ से मैला ढोने से हुई मौतों, साथ ही भिखारियों, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास और प्रमाणीकरण तंत्र में कमियों के मामलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस तरह की सहभागिता और संवाद नीतिगत उद्देश्यों और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच के अंतर को कम करने, मजबूत संस्थागत समन्वय स्थापित करने में सहायक होंगे, साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन की रोकथाम भी सुनिश्चित करेंगे।

मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के शीघ्र और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने में डिजिटल शासन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एनएचआरसी ने शिकायत प्रबंधन प्रणाली के रूप में एचआरसीनेट पोर्टल विकसित किया है। सभी मानवाधिकार संस्थानों द्वारा इसे अपनाने से मामलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है और समन्वय में सुधार हो सकता है। अब तक, 23 राज्य मानवाधिकार आयोगों ने इस प्रणाली को अपनाया है। हालांकि, आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड और नागालैंड के एसएचआरसी अभी तक इससे नहीं जुड़े हैं, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान के एसएचआरसी जुड़ने के बावजूद अभी तक पोर्टल के माध्यम से शिकायतों के समाधान की शुरुआत नहीं कर पाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, मानवाधिकारों के उल्लंघन की निगरानी वैश्विक तंत्रों के माध्यम से की जाती है, जबकि देश के भीतर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग 27 राज्य मानवाधिकार आयोग  और विभिन्न क्षेत्रीय आयोग मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य करते हैं। इसलिए देश भर में किए जा रहे कार्यों की समग्र जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन के दौरान आयोजित दो सत्रों में एसएचआरसी के साथ उनकी चुनौतियों को समझने के लिए संवाद शामिल था, जिसके बाद एनएचआरसी ने विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों ने देश में मानवाधिकार तंत्र को मजबूत करने के लिए अपने अनुभवों को साझा किया।

हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, गोवा और कर्नाटक के राज्य मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और प्रतिनिधि, साथ ही विशेष प्रतिवेदक और पर्यवेक्षक, जिन्हें आयोग को मानवाधिकार स्थिति पर रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए मानवाधिकार विषयगत क्षेत्र सौंपे गए हैं, इस चर्चा में शामिल हुए।

सम्मेलन के दौरान एसएचआरसी को मजबूत करने और संस्थागत समन्वय के लिए दिए गए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों की संख्या, बुनियादी ढांचे, पहुंच, जमीनी स्तर पर भागीदारी और संस्थागत क्षमता में सुधार के माध्यम से मानवाधिकार नियंत्रण केंद्रों एसएचआरसी को मजबूत बनाना ताकि हिरासत में हिंसा, पुलिस की ज्यादतियों और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों से संबंधित बढ़ती शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
  • मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों की प्रवर्तनीयता और कानूनी स्पष्टता को बढ़ाना तथा आयोगों के जनादेश, शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के संबंध में जनता में जागरूकता बढ़ाना।
  • समन्वय, निगरानी और कार्यवाही के दोहराव से बचने के लिए एसएचआरसी को एचआरसीनेट पोर्टल से जोड़ना ताकि एनएचआरसी के साथ एकीकृत डिजिटल डेटा साझा किया जा सके।
  • एसएचआरसी और एनएचआरसी के विशेष पर्यवेक्षक और प्रतिवेदक बेहतर जवाबदेही और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल हेतु पारस्परिक समन्वय में सुधार करेंगे।
  • समन्वित क्षेत्रीय दौरों, निरीक्षणों और संस्थागत अनुवर्ती कार्रवाई को बढ़ाना, जिसमें जेलों, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, नशामुक्ति केंद्रों, आश्रय गृहों, अस्पतालों, वृद्धाश्रमों और अन्य संवेदनशील संस्थानों का दौरा शामिल है।
  • एनएचआरसी और एसएचआरसी की कमजोर व्यक्तियों, संस्थानों से संपर्क करने में असमर्थ महिलाओं बच्चों, बेघर बुजुर्ग एवं मानसिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए पहुंच बढ़ाना।
  • धोखाधड़ी करने वाले संगठनों और मध्यस्थों द्वारा मानवाधिकार से जुड़े मंचों का दुरुपयोग रोकने के लिए एनएचआरसी द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों का अनुपालन करना।
  • एसएचआरसी को शैक्षणिक संस्थानों, मानवाधिकार प्रकोष्ठों और सामुदायिक पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से मानवाधिकार जागरूकता, शिक्षा और संवेदीकरण के लिए एनएचआरसी की पहलों की शुरुआत।

विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों ने विषयगत और क्षेत्र-विशिष्ट मानवाधिकार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित प्रतिक्रियाएं और सुझाव प्रदान किए।

  • मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद दंडात्मक कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय, पुलिस, सुधार गृह कर्मचारियों और सीएपीएफ के नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से निवारक हस्तक्षेपों पर ध्यानकेंद्रित किया जाना चाहिए।
  • जेलों में भीड़ कम करने, रहने की बेहतर स्थिति, बेहतर संचार सुविधाएं, जेल में वेतन का मानकीकरण और निगरानी गृहों और आश्रय गृहों के विस्तार सहित जेल सुधारों को लागू करके उनका पालन किया जाना चाहिए।
  • जिला अधिकारियों और पुलिस के बीच मजबूत समन्वय, कानूनी प्रवर्तन और जागरूकता के माध्यम से बचाए गए बाल श्रमिकों, बंधुआ मजदूरों और अन्य कमजोर बच्चों के उचित पुनर्वास को सुनिश्चित करना।
  • बाल कल्याण समितियों को मजबूत करना, बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना और जिलों और राज्यों में बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइनों को बहाल करना।
  • पुनर्वास, कलंक निवारण, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच और समुदाय आधारित निगरानी के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, कुष्ठ रोग और दिव्यांगों के अधिकारों पर अधिक जोर देना।
  • अंतर्लिंगी शिशुओं, लैंगिक गैर-अनुरूप बच्चों और अन्य कमजोर समूहों की सुरक्षा और मान्यता सुनिश्चित करना, जिसमें उन्हें प्रभावित करने वाली संस्थागत और चिकित्सा पद्धतियों की निगरानी करना शामिल है।
  • सार्वजनिक सेवा वितरण दुकानों और असुरक्षित आबादी की सेवा करने वाली संस्थाओं सहित कल्याणकारी वितरण प्रणालियों में गरिमा और पहुंच में सुधार करना।
  • प्रदूषण, जल संदूषण और जलवायु संबंधी मानवाधिकार चिंताओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिक और वास्तविक समय में पर्यावरण निगरानी प्रणालियों, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और पर्यावरणीय न्याय मानचित्रण का उपयोग करना।
  • सफाईकर्मियों, कचरा उठाने वाले श्रमिकों, ट्रक चालकों, खदान श्रमिकों और अन्य कमजोर श्रमिक समूहों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, बीमा और कल्याणकारी सुरक्षा उपायों में सुधार करना।
  • सुरक्षित प्रौद्योगिकियों, सुरक्षात्मक उपायों और नैदानिक ​​अवसंरचना के माध्यम से सिलिकोसिस जैसी बीमारियों के लिए जागरूकता अभियान और निवारक तंत्र को मजबूत करना।
  • नियमित निरीक्षण, शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र के माध्यम से विद्यालयों, आदिवासी छात्रावासों, अस्पतालों, कारागारों और अन्य संस्थानों में स्थितियों में सुधार करना।
  • दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और समावेशी शैक्षिक सहायता प्रणालियों में सुधार करना।
  • राज्यों में सफल कल्याण और पुनर्वास मॉडलों को अपनाना, जिसमें जेलों में आंगनवाड़ी से जुड़ी बाल देखभाल सुविधाएं और समुदाय आधारित सहायता प्रणाली शामिल हैं।
  • अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और आपदा प्रभावित कर्मियों के लिए मुआवजे, पुनर्वास और कल्याणकारी सहायता सुनिश्चित करना और
  • स्वास्थ्य अधिकार ढांचे के अंतर्गत भर्ती मानकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं का समाधान करना।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने उद्योग- सरकार सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया तथा वैश्विक अनिश्चितताओं को सुधार और सुदृढ़  विकास के अवसरों में बदलने पर दिया जोर


श्री गोयल ने कहा कि भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों को तेज सुधारों, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और अधिक निर्यात के अवसरों में बदलना चाहिए

श्री पीयूष गोयल ने सेवा क्षेत्र में भरोसा जताया तथा एआई, साइबर सुरक्षा और डेटा सेंटर इकोसिस्टम में अवसरों पर बल दिया

भारतीय प्रतिभा पर भरोसे के कारण तेजी से बढ़ रहे हैं भारतीय जीसीसी: श्री पीयूष गोयल

बड़े पैमाने पर स्थापित हो रहे डेटा सेंटर्स अपना खुद का इकोसिस्टम बनाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा: श्री गोयल

श्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से सुधार के लिए लीक से हटकर नए विचारों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एसोचैम (एएसएसओसीएचएएम) इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट 2026 को संबोधित करते हुए उद्योग और  सरकार के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया, ताकि व्यापार सुगमता को आगे बढ़ाया जा सके, भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता क्षमता को मजबूत किया जा सके और और विकसित भारत 2047 कि दिशा मे देश की यात्रा को गति दी जा सके।

मंत्री महोदय ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भारत के लिए एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि व्यावसायिक प्रक्रियाओं मजबूत किया जा सके, तेजी से सुधार किए जा सकें अधिक सुदृढ़ता लाई जा सके और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को विकास और सुधार के अवसरों में बदल देगा।

वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों और पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए श्री गोयल ने कहा कि व्यवसायों को बिना घबराए अवसरों और जोखिमों दोनों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और अधिक स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक तौर-तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें अपव्यय को कम करना, उत्पादकता में सुधार करना और ऊर्जा दक्षता के उपायों को लागू करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि कोविड काल के अनुभवों ने डिजिटल सहभागिता और दूरस्थ कार्य प्रणाली (वर्क फ्रोम होम मॉडल) की प्रभावशीलता को साबित किया है। भारत में तेजी से बढ़ रहे वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश में लगभग 1,800 जीसीसी संचालित हो रहे हैं, जो लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और करीब एक करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रही है, जिसके पास वैश्विक परिचालन को संभालने में सक्षम युवा और प्रतिभाशाली मानव संसाधन मौजूद है।

मंत्री महोदय ने भारत के सेवा क्षेत्र में विश्वास व्यक्त किया और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां नए अवसर पैदा करेंगी।

श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों, व्यापार सुधारों और वैश्विक घटनाक्रमों को अवसरों के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विश्वसनीय वैश्विक साझेदारियों, कम लागत पर डेटा की उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और मजबूत विद्युत अवसंरचना के माध्यम से डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए अनुकूल इको-सिस्टम का निर्माण कर रही है।

उन्होंने बताया कि भारत या भारतीय डेटा केंद्रों से दुनिया के बाकी हिस्सों को प्रदान की जाने वाली क्लाउड सेवाओं को 2047 तक 100 प्रतिशत कर-मुक्त दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि डेटा केंद्रों में निवेश से रियल एस्टेट, आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में मांग पैदा होगी, जिससे आर्थिक विकास का एक सकारात्मक चक्र शुरू होगा।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, जिनमें जापानी विनिर्माण प्रणालियां भी शामिल हैं, से सीख लेकर अधिक दक्षता अपनाएं और अपव्यय को कम करें। उन्होंने कहा कि टैरिफ, यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात पिछले वर्ष 863 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

श्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत मजबूती की स्थिति से जुड़ रहा है और देश वस्तुओं का एक प्रतिस्पर्धी निर्माता और सेवाओं का प्रदाता है। 38 देशों को शामिल करने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये समझौते व्यापक जुड़ाव के द्वार खोलते हैं और इस बात पर जोर दिया कि भारतीय व्यवसायों को केवल आयात में वृद्धि होने देने के बजाय निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने के लिए इनका लाभ उठाना चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि सरकार एक सहायक के रूप में कार्य करना जारी रखेगी और उन्होंने भव्य पहल तथा 100 नए औद्योगिक पार्कों के स्थान निर्धारण के संबंध में हितधारकों के साथ परामर्श का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 पार्क पहले से ही विकास के विभिन्न चरणों में हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चाओं के दौरान प्राप्त सुझावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक पार्कों में एक एकल निकाय स्थापित करने की संभावना की जांच कर रही है, जो सभी केंद्रीय और राज्य मंजूरियों के लिए ‘वन-स्टॉप शॉप’ के रूप में कार्य कर सके।

श्री गोयल ने सरकारी प्रणालियों में सुधार के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का आग्रह किया और कहा कि कोविड-19 के बाद शुरू की गई राष्ट्रीय एकल-खिड़की प्रणाली को उद्योग जगत से पर्याप्त भागीदारी और प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने व्यवसायों से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ मिलकर विशिष्ट समस्याओं की पहचान करें और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से व्यापार करने में सुगमता में सुधार करें।

मंत्री महोदय ने कहा कि भारत को ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता सामान और कृषि आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों सहित अधिक मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसानों और मछुआरों को बेहतर कीमतें और बेहतर मूल्य प्राप्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को कच्चे माल के रूप में नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों के रूप में वैश्विक बाजारों तक पहुंचना चाहिए।

श्री गोयल ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन और घरेलू खपत के महत्व पर भी प्रकाश डाला और नागरिकों से भारतीय पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। भारत की ऊर्जा दक्षता पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने उजाला एलईडी बल्ब कार्यक्रम की सफलता को याद किया, जिससे ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय कमी आई और सालाना लगभग एक लाख करोड़ रुपये की बचत हुई।

उन्होंने कहा कि भारत अब 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रख रहा है और निर्यातकों से आग्रह किया कि वे आगामी एफटीए का सक्रिय रूप से लाभ उठाएं, नए बाजारों को तलाश करें, नमूनाकरण और परीक्षण ऑर्डर शुरू करें तथा समझौतों के औपचारिक रूप से लागू होने से पहले ही वैश्विक जुड़ाव बढ़ाएं।

मंत्री महोदय ने दोहराया कि सरकार अलग-अलग विभागों में काम करने के बजाय एकीकृत तरीके से काम करती है और उद्योग जगत से सरकार को लीक से हट कर सुझाव देने के लिए आंमत्रित किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय खुद दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए आंतरिक सुधार कर रहा है।

श्री गोयल ने बताया कि मंत्रालय, जिसके 46 संगठनों के तहत 216 शहरों में 482 कार्यालय हैं, राज्य की राजधानियों और प्रमुख शहरों में एकल- संपर्क केंद्रों में परिचालन को समेकित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे व्यवसायों को एकीकृत और डिजिटल रूप से जुड़े सिस्टम के माध्यम से डीजीएफटी, कॉफी बोर्ड, मसाला बोर्ड, जीईएम और अन्य निकायों से संबंधित सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने में सुविधा होगी।

गुणवत्ता, उत्पादकता, स्थानीयकरण और नवाचार पर केंद्रित संस्कृति का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने सुझाव दिया कि उद्योग और सरकार संयुक्त रूप से स्वदेशीकरण, आयात प्रतिस्थापन, निर्यात, ऊर्जा दक्षता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में प्रगति की  निगरानी के लिए स्कोरकार्ड विकसित करें।

श्री गोयल ने सभी हितधारकों से ‘विकसित भारत’ की ओर ‘अमृत काल’ की इस यात्रा को अधिक परिणाम-उन्मुख, कुशल और सहयोगात्मक बनाने के लिए मिल कर काम करने का आग्रह किया।

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पीके/केसी/आईएम/केएस
(रिलीज़ आईडी: 2262799) आगंतुक पटल : 46

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भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने किया उद्घाटन

ओडिशा / सत्ता संदेश

ओडिशा में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में पूर्वी भारत की खेती को नई दिशा देने के लिए साझा रोडमैप पर गहन मंथन

श्री शिवराज सिंह चौहान बोले- पूर्वी भारत बन सकता है देश के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग, दलहन-तिलहन और टिकाऊ खेती पर दिया जोर

खेत बचाओ, माटी बचाओ, किसान बचाओ के संदेश के साथ केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह का संतुलित उर्वरक उपयोग पर बल

फार्मर आईडी, वैज्ञानिक अनुसंधान और खरीद व्यवस्था को श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया बदलाव की कुंजी

नकली खाद व कीटनाशक और घटिया बीज किसानों के खिलाफ बड़ा अपराध, ऐसे तत्वों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जाएगा- श्री शिवराज सिंह

मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने बताई क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन, मिलेट्स, ऑर्गेनिक खेती और किसान-हितैषी पहल

द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी के साथ पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने पूर्वी भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने का सशक्त आह्वान किया। ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से जुड़े इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दलहन-तिलहन उत्पादन, छोटी जोत वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक खेती, किसान रजिस्ट्री, बागवानी, कृषि ऋण, विपणन, नकली कृषि आदानों पर नियंत्रण और किसान आय वृद्धि जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा का खाका रखा गया।

पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की कृषि, किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय कृषि रणनीति को नई दिशा देने के लिए गंभीर विचार-विमर्श का मंच है। श्री चौहान ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरती पर एकत्र हुई यह “टीम एग्रीकल्चर” पूर्वी भारत की खेती की हालत को बेहतर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ बैठी है। उन्होंने पूर्वी भारत की उर्वरा भूमि, जल उपलब्धता, विविध जलवायु और किसानों की मेहनत को इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि थोड़े से सही प्रयासों से यही क्षेत्र भारत के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने किसानों को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता बताते हुए कहा कि किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और शक्तिशाली भारत की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा की रीढ़ कृषि है। उन्होंने कृषि के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे- 140 करोड़ देशवासियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना और किसानों की बेहतर आजीविका व आय वृद्धि सुनिश्चित करना।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना, नुकसान होने पर भरपाई करना और कृषि का विविधीकरण करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केवल धान और गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य उच्च मूल्य फसलों की ओर भी आगे बढ़ना होगा, क्योंकि पूर्वी भारत में इन सभी क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्वी राज्यों में छोटी जोत एक बड़ी वास्तविकता है, इसलिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ मॉडल बनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनाज के साथ फल, सब्जियां, मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने आईसीएआर, कृषि मंत्रियों और अधिकारियों से आग्रह किया कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग के मॉडल किसानों तक प्रेरक और व्यवहारिक रूप में पहुंचें।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने टिकाऊ कृषि की दिशा में मृदा स्वास्थ्य की रक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि बिना मृदा परीक्षण के अंधाधुंध खाद का प्रयोग खर्च भी बढ़ाता है और धरती की सेहत भी बिगाड़ता है, इसलिए किसानों को आवश्यकतानुसार ही उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने प्राकृतिक खेती को भी प्रधानमंत्री के फोकस का क्षेत्र बताते हुए किसानों से अपनी जमीन के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया।

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून से “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से संतुलित खाद उपयोग, मिट्टी की सेहत, आधुनिक तकनीक, योजनाओं की जानकारी और किसान जागरूकता पर विशेष बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के डायवर्जन पर रोक लगानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सब्सिडी वाला खाद केवल किसान और खेती के काम में ही उपयोग हो। उन्होंने नकली खाद, घटिया बीज और नकली कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ बड़ा अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कड़े कानून की आवश्यकता है और राज्यों को इस दिशा में सख्ती से कार्रवाई करनी होगी, ताकि किसानों की लागत न बढ़े और उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान मिल सके।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि पूर्वी क्षेत्र देश को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि दाल और तिलहन की खेती को बढ़ावा तभी मिलेगा जब किसान को यह भरोसा होगा कि उसकी उपज की खरीद सुनिश्चित है, इसलिए पीएम-आशा, खरीद प्रणाली, नैफेड, एनसीसीएफ और राज्य एजेंसियों की भूमिका को और प्रभावी बनाना होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने वैज्ञानिक शोध और तकनीक को खेत तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक संस्थानों का ज्ञान सीधे किसानों तक पहुंचे, यह समय की मांग है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे अपनी परिस्थितियों के अनुरूप विशेष अभियान चलाएं, ताकि रिसर्च, अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और योजनाओं की जानकारी समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचे।

उन्होंने फार्मर आईडी को किसान तक सुविधाएं सरल, पारदर्शी और तेज तरीके से पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उनके अनुसार फार्मर आईडी से किसान की जमीन, परिवार और अन्य विवरण एक जगह उपलब्ध होने से ऋण, उर्वरक वितरण और योजना लाभ में अनावश्यक देरी तथा परेशानी कम होगी, इसलिए इसे तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

श्री चौहान ने बागवानी, आम जैसी उच्च मूल्य फसलों, निर्यात क्षमता, स्वच्छ पौध सामग्री, नर्सरी व्यवस्था और बाजारोन्मुख कृषि पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत के कई राज्यों में फल, सब्जियां और विशिष्ट फसलें न केवल देश के भीतर बल्कि निर्यात के स्तर पर भी किसानों को अधिक मूल्य दिलाने की क्षमता रखती हैं।

ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन पूर्वी राज्यों के लिए कृषि भविष्य का साझा रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन पूर्वोदय की परिकल्पना को बल देगा और पूर्वी भारत की कृषि उत्पादकता, जलवायु-अनुकूल खेती और समावेशी कृषि विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री श्री मांझी ने कहा कि ओडिशा मूल रूप से कृषि प्रधान राज्य है और कृषि यहां की आजीविका, खाद्य सुरक्षा तथा सामाजिक-आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि को अधिक समावेशी, जलवायु अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इसी दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि दाल उत्पादन, खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता, क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन और खेती के विस्तार पर राज्य विशेष रूप से काम कर रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि धान उत्पादन और खरीद बढ़ने के साथ भंडारण, निकासी और विपणन की चुनौतियां भी सामने आई हैं, इसलिए अधिक उत्पादन के साथ बेहतर प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था पर समानांतर रूप से कार्य करना आवश्यक है।

श्री मांझी ने राज्य की किसान-हितैषी पहलों का उल्लेख करते हुए धान खरीद, इनपुट सहायता, पीएम-किसान के साथ सीएम-किसान सहायता, फसल बीमा, कृषि यंत्रीकरण, एफपीओ सशक्तीकरण, कोल्ड स्टोरेज विस्तार और कृषि उद्योग प्रोत्साहन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती से जोड़ने के लिए नीति समर्थन, बुनियादी ढांचा, संगठित विपणन और उद्यमिता आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने मिलेट्स को सुपर फूड बताते हुए कहा कि यह कम पानी और कम खाद में उगने वाली महत्वपूर्ण फसल है, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के लिए इसकी बड़ी उपयोगिता है। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती, पारंपरिक खाद्यान्न प्रजातियों के संरक्षण, जैव विविधता के पुनर्जीवन और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इन क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने एफपीओ, कोल्ड स्टोरेज, कृषि उद्यमिता, कॉफी उत्पादन और स्थानीय कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन को ओडिशा की प्राथमिकताओं में बताया। उनके अनुसार पूर्वी भारत के राज्यों के बीच श्रेष्ठ प्रथाओं, नवाचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान इस सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि बनेगा और यहां से निकले निष्कर्ष कृषि आत्मनिर्भरता तथा किसान समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी एवं श्री रामनाथ ठाकुर, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव, बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधि-मंत्री श्री अशोक कीर्तनिया, केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, केवीके, एफपीओ, स्टार्टअप्स, नाबार्ड और बैंकों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर का शव समराला के पास सरहिंद नहर से मिला

लुधियान / सत्ता संदेश

इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर की हत्या कर दी गई थी। परिवारिक सदस्यों ने अगवा कर हत्या करने के आरोप लगाए हैं।

समराला के नजदीक सरहिंद नहर से एक महिला का अज्ञात शव मिला था। समराला पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर समराला के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। आज इस महिला की पहचान लुधियाना निवासी गायिका इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर (29) के रूप में हुई है। परिवारिक सदस्यों ने गायिका इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर के अगवा कर हत्या किए जाने के आरोप लगाए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गायिका इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर का शव आज सुबह करीब 11 बजे नीलों नहर से बरामद किया गया। इंदर को छह दिन पहले बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया गया था और तब से उसका परिवार लगातार उसकी तलाश कर रहा था।

परिवार ने बताया कि मोगा निवासी एक व्यक्ति उस पर उसकी मर्जी के खिलाफ शादी करने का दबाव बना रहा था। जब उसने इनकार कर दिया तो आरोपी ने उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद हत्या करने के बाद वह कनाडा फरार हो गया।

बताया जा रहा है कि वह खास तौर पर हत्या को अंजाम देने के लिए कनाडा से पंजाब आया था। फिलहाल पुलिस ने शव को नहर से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए समराला के सिविल अस्पताल भेज दिया है।

एएसआई परमजीत सिंह, लुधियाना ने बताया कि गायिका इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर के परिवार की ओर से शिकायत दी गई थी कि उनकी लड़की को गन प्वाइंट पर अगवा कर लिया गया है, जिसकी तलाश लुधियाना पुलिस द्वारा की जा रही थी। कल इस गायिका का शव समराला के नजदीक सरहिंद नहर से मिला। पहचान होने के बाद पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और शव को वारिसों के हवाले कर दिया जाएगा।

जालंधर के बस्ती बावा खेल इलाके के राजा गार्डन में एक खाली प्लॉट से गुटका साहिब के पवित्र अंग मिलने से इलाके में गुस्सा फैल गया।

जालंधर / सत्ता संदेश

घटना की जानकारी मिलते ही सिख संगठनों के सदस्य मौके पर पहुंचे और सख्त विरोध जताया। बस्ती बावा खेल पुलिस स्टेशन की पुलिस और एसीपी वेस्ट आतिश भाटिया भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने यह पता लगाने के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है कि यह बेअदबी की हरकत किसने की।

मौके पर पहुंचे बघेल सिंह ने बताया कि वह कीर्तन दरबार में शामिल थे, तभी उन्हें फोन आया कि गुटका साहिब के पवित्र अंग एक खाली प्लॉट में बिखरे पड़े हैं। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और सम्मानपूर्वक पवित्र अंगों को एक बैग में एकत्र किया। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि यह किसी शरारती व्यक्ति की करतूत है और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

सिख तालमेल कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपना रोष जताया। उन्होंने कहा कि गुटका साहिब के पवित्र अंगों को खाली प्लॉट में फेंकना बेहद निंदनीय है। इस संबंध में पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई गई है।

एसीपी वेस्ट आतिश भाटिया ने बताया कि कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में सामने आया कि गुटका साहिब के अंग फाड़कर बाबा बुढ्ढा जी पुल के पास एक प्लॉट में फेंके गए थे। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और वियतनाम के उप-प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग ने हनोई में द्विपक्षीय वार्ता की

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की

दोनों मंत्रियों ने वियतनाम के वायु सेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का आभासी रूप से उद्घाटन किया

भारत और वियतनाम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्री ने न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला स्थापित करने की घोषणा की

दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 19 मई, 2026 को हनोई में वियतनाम के उप- प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।

दोनों पक्षों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा, साइबर सुरक्षा और उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यास और आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता संवर्धन पहलों का समर्थन करने के भारत के संकल्प को भी दोहराया।

जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर बल दिया।

दोनों रक्षा मंत्रियों ने वियतनाम के वायुसेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला भारतीय सहायता से स्थापित की गई है। रक्षा मंत्री ने न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की भी घोषणा की।

भारत के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग और वियतनाम की टेली कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया, जो दोनों देशों के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय को चिह्नित करता है।

द्विपक्षीय बैठक के बाद, रक्षा मंत्री ने वियतनाम के महासचिव और राष्ट्रपति श्री तो लाम को फोन किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं और रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, समुद्री सहयोग, संपर्क, डिजिटल परिवर्तन और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

दोनों नेताओं ने साझा सभ्यतागत संबंधों, आपसी विश्वास और समान रणनीतिक हितों पर आधारित भारत और वियतनाम के बीच मजबूत और अटूट मित्रता की पुष्टि की। उन्होंने भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए वियतनाम के राष्ट्रपति ने बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की और वियतनाम के विकास एवं रणनीतिक प्राथमिकताओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ के रूप में बढ़ते रक्षा सहयोग का स्वागत किया और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

श्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के संस्थापक पिता, पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनके मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत की। उन्होंने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा, “उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्‍वतंत्रता एवं वैश्विक एकजुटता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने भारत-वियतनाम की मजबूत मित्रता की आधारशिला भी रखी, जो साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित है।”