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चामुंडा देवी मंदिर के बाहर गंदे पानी से श्रद्धालु परेशान, बीमारियों का खतरा बढ़ाडेयरी संचालक सड़क पर छोड़ रहे हैं गंदा पानी, स्कूली छात्र भी हो रहे प्रभावित

लुधियान / सत्ता संदेश

लुधियाना के ताजपुर रोड स्थित चामुंडा देवी मंदिर के बाहर गंदे पानी की समस्या से श्रद्धालु और राहगीर काफी परेशान हैं। मंदिर के सामने सड़क पर डेयरियों से निकलने वाला गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे इलाके में बदबू फैल रही है और लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, मंदिर में रोजाना सुबह-शाम माथा टेकने आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि पिछले काफी समय से डेयरी संचालक गंदा पानी सीधे सड़क पर छोड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ मंदिर आने वाले श्रद्धालु बल्कि आसपास से गुजरने वाले राहगीर और स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदे पानी और बदबू के कारण इलाके में बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार इस समस्या को लेकर इलाके के पार्षद से भी शिकायत की गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला, समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
श्रद्धालुओं ने मीडिया के माध्यम से नगर निगम प्रशासन से अपील की है कि इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि मंदिर जैसी धार्मिक जगह के बाहर इस तरह की गंदगी न केवल असुविधा पैदा कर रही है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनती जा रही है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा तुरंत कार्रवाई कर सड़क पर जमा गंदे पानी की निकासी का पक्का प्रबंध किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम जनता को राहत मिल सके। लुधियाना से गुरमीत सिंह की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) के निधन पर दुःख व्यक्त किया है

उत्तराखंड /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया।


प्रधानमंत्री ने कहा कि मेजर जनरल खण्डूड़ी ने सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत तक विभिन्न क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया है जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। श्री मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के विकास के प्रति उनके दृढ़ समर्पण का उल्लेख किया और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को सच्चे अर्थों में प्रेरणादायक बताया। उन्होंने देशभर में संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए उनके अथक प्रयासों की भी सराहना की।


प्रधानमंत्री ने दुःख की इस घड़ी में दिवंगत नेता के परिवार और समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।


प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है:


“उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है। देशभर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति!”

रेलवे ने जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड पर 238 करोड़ रुपए की लागत से महत्वपूर्ण ढलान स्थिरीकरण, सुरंगों के पुनर्निर्माण और पुलों के संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी

जम्मू /सत्ता संदेश

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने की परियोजना: अश्विनी वैष्णव

रेलवे ने उत्तरी रेलवे के जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड पर 238 करोड़ रुपये की लागत से महत्वपूर्ण ढलान स्थिरीकरण, सुरंग पुनर्निर्माण और पुलों के संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी है। इन कार्यों में जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर पुनर्निर्माण, सुरंगों से रिसाव की समस्या का समाधान और अन्य संबंधित सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ये कार्य देश के सबसे चुनौतीपूर्ण भूभागों में सुरक्षित और विश्वसनीय संपर्क सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि कटिंग, पुलों और सुरंगों के विस्तृत मूल्यांकन के बाद संरक्षण और पुनर्वास कार्यों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस खंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता मजबूत होगी।

कठिन भूभाग, प्रतिकूल भूवैज्ञानिक स्थितियों और प्रतिकूल मौसम के कारण इस खंड को कई इंजीनियरिंग और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि रेलवे ने समय-समय पर क्रियान्वयन और मजबूत बुनियादी ढांचा विकास के माध्यम से इन चुनौतियों पर लगातार काबू पाया है। मौजूदा बुनियादी ढांचे के लिए नए संरक्षण और पुनर्वास कार्यों की मंजूरी के साथ, यह मार्ग पहले से अधिक बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा और हर साल लाखों यात्रियों को अधिक सुरक्षा और विश्वास के साथ सेवा प्रदान करने के लिए तैयार है।

भारत और नॉर्वे के बीच नए द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई

दिल्ली /सत्ता संदेश


भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने नॉर्वे में स्वच्छ ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा, सतत विकास, भूविज्ञान और शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्रों में पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक ओर भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ हुए हैं वहीं, भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए 18 मई 2026 को ओस्लो में नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी के नेतृत्व में डीएसआईआर/सीएसआईआर की ओर से नॉर्वे के सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के क्षेत्रों में भारत-नॉर्वे संबंधों का विस्तार करना है तथा इसके साथ ही दोनों देशों में संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग सहभागिता, शैक्षणिक सहयोग तथा सतत विकास संबंधी पहलों को बढ़ावा देना है।

डीएसआईआर/सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच समझौता ज्ञापन का उद्देश्य अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और क्षमता विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते में जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य सहित वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं, सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान से जुड़ी यात्राओं, विशिष्ट कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यवस्था और समय-समय पर उनकी समीक्षा के लिए तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है।

सीएसआईआर ने नॉर्वे के प्रमुख स्वतंत्र अनुसंधान संगठन स्टिफ्टेल्सन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ) के साथ 2014 से जारी समझौता ज्ञापन के ढांचे के अंतर्गत सहयोग के लिए समझौते (2026-2029) पर भी हस्ताक्षर किए। यह समझौता जैव-आधारित प्रक्रियाओं और सामग्रियों, नवाचार केंद्रों, समुद्री ऊर्जा (जिसमें अपतटीय पवन और हाइब्रिड प्रणालियां शामिल हैं), कार्बन कैप्चर, भंडारण और उपयोग तथा अपशिष्ट को काम में लाने योग्य सामग्रियों में परिवर्तित करने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से अपशिष्ट बनने से रोकने और दीर्घकालिक व्यवस्था में परिवर्तन पर केंद्रित है।

सीएसआईआर के संस्थानों और एसआईएनटीईएफ के संस्थानों के बीच समुद्री ऊर्जा और अपतटीय पवन ऊर्जा के संबंध में एक विशिष्ट परियोजना के लिए सहयोग पर भी समझौता किया गया। इस समझौते में सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (सीएसआईआर-एसईआरसी), सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाएं (सीएसआईआर-एनएएल), सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईओ) और सीएसआईआर-चतुर्थ प्रतिमान संस्थान (सीएसआईआर-4पीआई) के साथ एसआईएनटीईएफ महासागर, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्यूनिटी शामिल हैं। इस सहयोग का उद्देश्य अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता को मजबूत करना तथा राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन और उसके अवशोषण में संतुलन बनाने से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में योगदान देना है। इस संयुक्त कार्यक्रम में तैरती हुई अपतटीय पवन प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा की समतुल्य लागत (एलसीओई) में कमी लाने, स्थिरता, पर्यावरण, सामाजिक और शासन संबंधी विषयों, मानकीकरण, पायलट प्रदर्शन, कौशल विकास तथा औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए सीएसआईआर की ओर से लगभग 341 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

डॉ. एन. कलाइसेल्वीमहानिदेशकसीएसआईआर और सचिवडीएसआईआर के साथ:

अ) प्रो. टोर ग्रांडेरेक्टरएनटीएनयूब) डॉ. एलेक्जेंड्रा बेच गोजर्वसीईओ स्टिफ्टेलसन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ)स) सुश्री ऐनी केजेर्स्टी फाह्लविककार्यकारी निदेशकनॉर्वे की अनुसंधान परिषदऔर द) डॉ. एंड्रियास ए फाफहुबरसीईओ एमराल्ड

सीएसआईआर, वैज्ञानिक और नवाचार संबंधी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनटीएनयू) के बीच “हरित परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी सहयोग” शीर्षक से संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह घोषणापत्र स्थिरता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, महासागर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और असैनिक तथा अवसंरचना संबंधी अभियांत्रिकी से जुड़ी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है। इस सहयोग में छात्रों और शिक्षकों की यात्राएं, संयुक्त अनुसंधान गतिविधियां, अकादमिक आदान-प्रदान, संगोष्ठियां और सहयोग संबंधी अकादमिक कार्यक्रम शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात यह हुई है कि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) ने एमराल्ड जियोमॉडलिंग के साथ भारत में बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भूविज्ञान पर आधारित समाधान प्राप्त करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग स्थापित करने के लिए पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण योजना, डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग, तकनीकी परामर्श सहायता और वैज्ञानिक कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल होगा।

ये समझौते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं और इनसे दोनों देशों के बीच सहयोग से अनुसंधान, नवाचार-आधारित सतत विकास और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

लुधियाना के थाना मेहरबान क्षेत्र के गांव जीवनपुर में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है।

लुधियान / सत्ता संदेश

मृतका की पहचान पूजा कौर के रूप में हुई है, जिसकी शादी करीब 12 साल पहले गांव में हुई थी और उसके तीन बच्चे भी हैं। बताया जा रहा है कि उसका पति विदेश, यूरोप में रहता है। मृतका के भाई गुरमुख सिंह ने आरोप लगाया है कि पूजा का जेठ बबलू शराब पीने का आदी है और जमीन के बंटवारे को लेकर अक्सर विवाद करता था। इस मुद्दे को लेकर कई बार परिवार में झगड़े हुए और पांच-छह बार गांव की पंचायत भी बैठ चुकी थी। यहां तक कि पुलिस में भी शिकायतें दी गई थीं, लेकिन आरोपी के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। गुरमुख के अनुसार, उसके जीजा ने अपने हिस्से में से एक एकड़ जमीन ज्यादा देकर भी विवाद खत्म करने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद बबलू और उसकी पत्नी का रवैया नहीं बदला। दोनों अक्सर पूजा के साथ मारपीट करते थे और उसे प्रताड़ित करते रहते थे।
घटना मंगलवार सुबह की है, जब पूजा घर के बाथरूम में कपड़े धो रही थी। आरोप है कि उसी दौरान बबलू और उसकी पत्नी ने उसे पकड़कर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। गुरमुख का दावा है कि दोनों ने मिलकर उसकी बहन की हत्या कर उसे फंदे से लटका दिया, ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिया जा सके। सुबह करीब आठ बजे जब गुरमुख की मां ने पूजा को फोन किया और उसने कॉल रिसीव नहीं किया, तो उन्होंने पास में रहने वाली रिश्तेदार को घर भेजा। वहां पहुंचने पर पता चला कि पूजा फंदे से लटकी हुई है। घटना के बाद से दोनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। इस मामले में थाना मेहरबान के एसएचओ जगदीप सिंह गिल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले की गहराई से जांच की जा रही है। लुधियाना से गुरमीत सिंह की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री ने धरती माता द्वारा समस्‍त मानवता को एक ही परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकारने की विशेषता को दर्शाने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया। इसका अर्थ है कि धरती माता समस्त मानवता को एक परिवार मानती है। श्री मोदी ने कहा कि धरती मां के लिए यह संपूर्ण विश्व एक घर के समान है, जहां प्रत्येक संस्कृति का अपना महत्व और सम्मान है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

“धरती माता पूरी मानवता को एक परिवार मानती हैं। उनके लिए यह पूरा संसार एक घर की तरह है, जहां हर संस्कृति का अपना महत्त्व और सम्मान है।

जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम्।

सहस्रं धारा द्रविणस्य मे दुहां ध्रुवेव धेनुरनपस्फुरन्ती ॥”

धरती माता विभिन्न भाषाएं बोलने वाले और विभिन्न धर्मों और परंपराओं का पालन करने वाले लोगों को एक ही परिवार के सदस्य के रूप में अपनाती है। ईश्वर करे कि यह धरती मां हमारे लिए समृद्धि की हजारों धाराएं प्रवाहित करती रहे, ठीक उसी प्रकार जैसे एक शांत और स्‍नेहमयी गौ माता दूध प्रदान करती है।

मंदिर के स्वर्ण भंडारों के मुद्रीकरण को लेकर किए गए झूठे दावों पर स्पष्टीकरण

कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार मंदिरों के स्वर्ण भंडार के बदले में मंदिरों को स्वर्ण बांड जारी करने की योजना बना रही है या मंदिरों के स्वर्ण भंडार के मुद्रीकरण के लिए एक प्रस्ताव को स्‍वीकृति दे दी गई है।

यह स्पष्ट किया जाता है देश भर में मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के पास मौजूद सोने के मुद्रीकरण की योजना शुरू करने की सरकार की योजनाओं से संबंधित अटकलें और अफवाहें पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं।

यह भी स्पष्ट किया जाता है कि मंदिर के टावरों, दरवाजों या अन्य मंदिर संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को “भारत का रणनीतिक स्वर्ण भंडार” माना जाने का दावा भी पूरी तरह से झूठा, भ्रामक और निराधार है।

नागरिकों से अनुरोध है कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं। अपुष्ट जानकारी फैलाने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है और जनता गुमराह हो सकती है।

सरकार सभी नागरिकों से आग्रह करती है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। नीतिगत निर्णयों या सरकारी योजनाओं से संबंधित कोई भी जानकारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और सत्यापित सार्वजनिक संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से साझा की जाएगी।

भारतीय रेलवे ने चेन्नई उपनगरीय रेल नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए 993 करोड़ रुपये की अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना को स्वी कृति दी


अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना से यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी, भीड़ कम होगी और सीमेंट, ऑटोमोबाइल एवं खाद्यान्नों के परिवहन को बढ़ावा मिलेगा: अश्विनी वैष्णव

चेन्नई /सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे ने दक्षिणी रेलवे की 993 करोड़ रुपये की लागत वाली अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना (68 किमी) को स्‍वीकृति दे दी है, जिससे देश भर में सुरक्षित, तेज और अधिक कुशल रेल परिवहन की दिशा में प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है। यह खंड चेन्नई समुद्र तट, तांबरम, चेंगलपट्टू और अरक्कोनम को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण चेन्नई उपनगरीय सर्कुलर रेल नेटवर्क का हिस्सा है।

केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना व्यस्त चेन्नई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने और समयबद्धता एवं परिचालन दक्षता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कॉरिडोर पर यात्री और माल ढुलाई दोनों को मजबूती मिलेगी, जिससे सीमेंट, ऑटोमोबाइल, अनाज, लोहा और इस्पात सहित प्रमुख वस्तुओं के परिवहन को लाभ होगा।

वर्तमान में, मौजूदा दोहरी लाइन का पूरा उपयोग हो रहा है और आने वाले वर्षों में यातायात में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसके लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता होगी। दोहरीकरण कार्य से ट्रेनों के ठहराव का समय कम होगा, समय की पाबंदी में सुधार होगा और उपनगरीय सेवाओं की आवृत्ति बढ़ेगी।

यह मार्ग महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, श्रीपेरुम्बुदुर, ओरगाडम और इरुनगट्टुकोट्टई सहित कई प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों के साथ-साथ महत्वपूर्ण ऑटोमोबाइल, सीमेंट और विनिर्माण उद्योगों को जोड़ता है। कांचीपुरम के पास प्रस्तावित परंदुर हवाई अड्डा परियोजना भी इस मार्ग के निकट स्थित है, जिससे इस मार्ग का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना की स्‍वीकृति भारतीय रेलवे द्वारा रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण, नेटवर्क क्षमता बढ़ाने और प्रमुख मार्गों पर परिचालन दक्षता में सुधार के निरंतर प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना से उपनगरीय और माल ढुलाई संपर्क मजबूत होने, क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने और तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय परिवहन सेवाएं उपलब्ध होने की आशा है।

भारतीय रेलवे ने अति व्यस्त हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर क्षमता बढ़ाने के लिए 962 करोड़ रुपये की लागत वाली 54 किलोमीटर लंबी किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को स्वीकृति दी


किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से यात्रियों के आवागमन, संपर्क और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी: अश्विनी वैष्णव

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने, परिचालन क्षमता में सुधार और निर्बाध रेल परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे की प्रतिबद्धता और मजबूत करते हुए 962 करोड़ रुपये की लागत वाली किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना (54 किलोमीटर) को स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क का महत्वपूर्ण भाग है और इससे पूर्वी और उत्तरी भारत में यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों की स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रेल सेवाओं की समयबद्धता तथा परिचालन की सामर्थ्य में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल लाइन से सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुचारू रूप से आवाजाही सुनिश्चित होगी और इसके साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास और व्यापारिक संपर्क में सहायता मिलेगी।

अभी किउल और झाझा के बीच मौजूदा दोहरी लाइन के खंड का अपनी अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा उपयोग हो रहा है जबकि आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर यातायात की मांग और बढ़ने की आशा है जिसके लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता होगी। प्रस्तावित 54 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन परियोजना से इस लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा, भीड़ कम होगी तथा सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी। इस परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच संपर्क और मजबूत होगा। साथ ही, इससे उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच माल ढुलाई भी सुगम होगी।

यह मार्ग कोलकाता/हल्दिया बंदरगाहों और रक्सौल/नेपाल के बीच महत्वपूर्ण रूप से संपर्क प्रदान करता है तथा बाढ़ एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी सहित प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी भारी माल ढुलाई के लिए मालगाड़ियों के परिवहन को संभालता है। इस रेल खंड को भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित किया गया है।

इस रणनीतिक गलियारे पर बढ़ते यातायात की मांग को देखते हुए इस परियोजना से यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों के लिए दीर्घकालिक स्तर पर बुनियादी ढांचागत सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से बेहतर संपर्क और वहन क्षमता में अतिरिक्त वृद्धि से पूर्वी और उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच सामग्रियों की आवाजाही की सामर्थ्य बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और रेल परिवहन की विश्वसनीयता में सुधार होगा।

अफगानिस्तान में भुखमरी का हाहाकार: 47 लाख लोग दाने-दाने को मोहताज, पेट पालने के लिए अपनी ही औलादें बेचने को मजबूर हुए मां-बाप

इंटरनेशनल डेस्क : भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में गरीबी और भुखमरी का संकट अब एक भयानक मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 10 प्रतिशत आबादी, यानी 47 लाख लोग गंभीर भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। हालात इतने भयावह हैं कि मजबूर माता-पिता अपने बच्चों का पेट भरने और उनका इलाज कराने के लिए उन्हें बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

इलाज के लिए बेची 5 साल की बेटी : मजबूरी की ऐसी ही एक दास्तां सईद अहमद की है, जिन्होंने अपनी 5 साल की बीमार बेटी का इलाज कराने के लिए उसे 2 लाख अफगानी में एक रिश्तेदार को बेच दिया। फिलहाल उन्होंने इलाज के लिए कुछ पैसे लिए हैं और 5 साल बाद उन्हें अपनी बेटी को भेजना होगा। इसी तरह घोर प्रांत के अब्दुल राशिद अजीमी अपनी 7 साल की जुड़वां बेटियों को बेचने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके पास उन्हें खिलाने के लिए भोजन नहीं है।

संकट की मुख्य वजहें:

विदेशी मदद में कटौती: संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस साल विदेशी मदद में 2025 के मुकाबले 70% तक की भारी गिरावट आई है।

बेरोजगारी और सूखा: काम की तलाश में लोग घंटों सड़कों पर खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। भीषण सूखे और महंगाई ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।

बासी रोटी का सहारा: कई परिवार केवल बासी रोटी और गर्म पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। जब स्थानीय बेकरियों में बासी रोटी बांटी जाती है, तो उसे लेने के लिए सैकड़ों लोग टूट पड़ते हैं।

अस्पतालों में बढ़ती मौतें :कुपोषण के कारण अस्पतालों में नवजात बच्चों की स्थिति चिंताजनक है। दवाओं की कमी और इलाज का खर्च न उठा पाने के कारण कई बच्चे दम तोड़ रहे हैं और बेबस माता-पिता उन्हें अस्पताल से घर ले जाने को मजबूर हैं।