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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का किसान हित में निर्णायक कदम, 4,886 करोड़ रु. से अधिक की MSP सुरक्षा

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक में 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी खरीदी को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी

महाराष्ट्र के चना उत्पादकों के लिए बड़ा फैसला, श्री  शिवराज सिंह चौहान ने खरीद सीमा बढ़ाकर 8.19 लाख मीट्रिक टन की

लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार प्रतिबद्ध, किसानों को औने-पौने दाम से मिलेगी राहत- श्री शिवराज सिंह

किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और बाजार में मजबूरी में बिक्री की स्थिति से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में रबी 2026 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन कर दी गई है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपए से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।

किसान हित में केंद्र सरकार का एक और बड़ा निर्णय

कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 69.66 करोड़ रु. से अधिक होगा। इस निर्णय से कर्नाटक के सूरजमुखी उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।

केंद्र सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहतकारी साबित होगा, जिन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका के कारण मजबूरी में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

महाराष्ट्र के चना किसानों को बड़ी राहत

इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के दौरान राज्य में पीएसएस के तहत चने की अधिकतम खरीद मात्रा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन करने को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 4,816.80 करोड़ रु. से अधिक होगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चना खरीद की समय-सीमा में 30 दिनों का विस्तार करते हुए इसे 29 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निर्धारित अवधि में अपनी उपज की बिक्री पूरी नहीं कर पाए थे। अब अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सकेगा और उन्हें बाजार के दबाव में कम कीमत पर बिक्री नहीं करनी पड़ेगी।

किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और कृषि उपज की खरीद प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसानोन्मुख बने। कर्नाटक में सूरजमुखी और महाराष्ट्र में चने की खरीद संबंधी ये निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील और सक्रिय है। इन फैसलों से न केवल संबंधित राज्यों के किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण भी मजबूत होगा। लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।

खाद्य सुरक्षा से खाद्यान्नों के मामले में नेतृत्व की ओर: खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पीएलआई योजना का परिवर्तनकारी प्रभाव
  • श्री अविनाश जोशी

खाद्यान्नों से जुड़ी भारत की कहानी में एक निर्णायक मोड़

भारत आज अपने आर्थिक सफर के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अब जबकि हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की दिशा में अग्रसर है, विकास को सिर्फ उत्पादन की मात्रा से ही नहीं, बल्कि हमारे द्वारा सृजित मूल्य के आधार पर भी मापना होगा।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की तुलना में बहुत कम क्षेत्र ही ऐसे हैं, जहां इस प्रकार का बदलाव बिल्कुल साफ नजर आता है।

भारत खाद्यान्नों, फलों, सब्जियों, दूध और समुद्री उत्पादों के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक है। दशकों तक, हमारे कृषि संबंधी सामर्थ्य ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। फिर भी, इस उपज का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से बेहद ही सीमित मूल्यवर्धन के साथ सीधे खेत से बाजार तक पहुंचता रहा।

आज भारत के कृषि उत्पादन का महज 12-13 प्रतिशत हिस्सा ही प्रसंस्करण से गुजरता है। उत्पादन और प्रसंस्करण के बीच का यही अंतर भारतीय अर्थव्यवस्था में उपलब्ध सबसे बड़े अवसरों में से एक है।

इसलिए, खाद्यान्नों से जुड़ी भारत की यात्रा का अगला चरण बिल्कुल स्पष्ट है: कृषि की प्रचुर संपदा को उच्च मूल्य वाले एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य उत्पादों में परिवर्तित करना।

पीएलआई योजना के पीछे की परिकल्पना

इस अवसर को पहचानते हुए, भारत सरकार ने मार्च 2021 में कुल 10,900 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन पर आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) की शुरुआत की।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) द्वारा इस योजना को 2021-22 से 2026-27 तक की छह साल की अवधि के लिए लागू किया जा रहा है।

इस योजना के पीछे का मूल विचार सरल लेकिन ठोस है: खाद्य प्रसंस्करण क्षमता, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग के विस्तार में निवेश करने वाली कंपनियों को पुरस्कृत करना। कुल मिलाकर, यह योजना इन-स्टोर ब्रांडिंग, अंतरराष्ट्रीय खुदरा श्रृंखलाओं में शेल्फ स्पेस और वैश्विक विपणन अभियानों में निवेश करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके भारत में खाद्य उत्पादन से जुड़ी वैश्विक स्तर की कई चैंपियन कंपनियां तैयार करती है।

रणनीतिक डिजाइन: एक आधुनिक खाद्य इकोसिस्टम का निर्माण

पीएलआईएसएफपीआई योजना की संरचना को सावधानीपूर्वक को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित रखा गया है।

1. उच्च क्षमता वाले खाद्य क्षेत्रों को प्रोत्साहन देना

पहला घटक पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) और खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद जैसी प्रमुख खाद्य श्रेणियों में उत्पादन बढ़ाने पर केन्द्रित है।

ये श्रेणियां वैसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत घरेलू खपत और निर्यात क्षमता, दोनों में तेजी से विस्तार कर सकता है।

2. नवाचार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भागीदारी को प्रोत्साहन देना

दूसरा घटक एमएसएमई द्वारा विकसित नवोन्मेषी और जैविक खाद्य उत्पादों को समर्थन प्रदान करता है। लघु एवं मध्यम उद्यम भारत के खाद्य क्षेत्र की रीढ़ हैं और समावेशी विकास हेतु  आधुनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ उनका जुड़ाव बेहद जरूरी है।

पोषक अनाज (मिलेट) से संबंधित नवाचार: परंपरा को आधुनिक बाजारों से जोड़ना

वर्ष 2023 में, अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज (मिलेट्स) वर्ष के उपलक्ष्य में, मंत्रालय ने पीएलआई योजना के तहत एक विशेष पहल की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) और खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) उत्पादों में मिलेट्स के उपयोग को प्रोत्साहित करना था।

मिलेट्स जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी, अत्यधिक पौष्टिक और भारत की कृषि परंपराओं में गहराई से जुड़े हुए हैं।

आधुनिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में मिलेट्स का समावेश करके, यह योजना पोषण संबंधी सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी कृषि को एक साथ बढ़ावा देती है।

बदलाव से जुड़े आंकड़े

पीएलआई योजना के तहत बहुत ही कम समय में हासिल की गई प्रगति उद्योग जगत की ओर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और इस नीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

अब तक:

• इस योजना के तहत 165 कंपनियों को मंजूरी दी गई है।

• इनमें से 68 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं, साथ ही बड़ी कंपनियों के 40 संविदा निर्माता भी शामिल हैं।

• कुल मिलाकर 9,207 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है।

• प्रति वर्ष लगभग 35 लाख मीट्रिक टन की नई प्रसंस्करण और संरक्षण संबंधी क्षमता सृजित की गई है।

• इस योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3.29 लाख रोजगार सृजित हुए हैं।

ध्यान रखने लायक बात यह है कि इस योजना का मूल लक्ष्य 25 लाख रोजगार सृजित करना था। इस क्षेत्र ने पहले ही इस लक्ष्य का 131 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया है।

पीएलआई समर्थित कंपनियों द्वारा प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों की बिक्री में भी 2019-20 से 13.23 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

(निर्यात में वृद्धि दर 2019-20 से 7.41 प्रतिशत की है)

विभिन्न पीएलआई योजनाओं के बीच एक चमकता सितारा

उत्पादन पर आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के 14 क्षेत्रों को कवर करती है। इनमें से, खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित पीएलआई सबसे प्रभावशाली योजनाओं में से एक बनकर उभरी है।

कुल पीएलआई सब्सिडी वितरण में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का हिस्सा मात्र 8 से 9 प्रतिशत ही होने के बावजूद, इसने तमाम पीएलआई योजनाओं के तहत सृजित किए गए कुल रोजगारों में से लगभग 42 प्रतिशत रोजगार सृजित किए हैं।

अब तक, इस योजना के तहत कुल 2715 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है। यह कुल परिव्यय का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है।

यह साबित करता है कि खाद्य प्रसंस्करण भारत के मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम में सबसे अधिक रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों में से एक है।

उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली के अनुरूप बदलाव

भारत के जनसांख्यिकीय परिवर्तन का असर खाद्य उद्योग पर भी पड़ रहा है।

युवा और शहरीकरण की ओर अग्रसर आबादी की बढ़ती मांगें इस प्रकार हैं:

• खाद्य संबंधी सुविधाजनक उपाय

• स्वच्छ पैकेजिंग

• सुरक्षित और पौष्टिक खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) उत्पाद

बेंगलुरु, मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों में काम करने वाले पेशेवर अक्सर पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) या खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) वैसे गुणवत्तापूर्ण भोजन की तलाश में रहते हैं जो उनकी तेज रफ्तार जीवनशैली के अनुरूप हो।

खाद्य सुरक्षा से खाद्य नेतृत्व की ओर

भारत की प्रचुर कृषि संपदा इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हमारे सामने इस प्रचुर संपदा को सतत आर्थिक मूल्य में बदलने की चुनौती है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना इस बदलाव को गति देने में सहायक साबित हो रही है और खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर खाद्यानों के मामले में नेतृत्व का सपना शीघ्र ही साकार होने वाला है।

(लेखक आईएएस अधिकारी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव हैं)

डेयरी विभाग ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए

लुधियाना, 01 अप्रैल 2026 – डेयरी विकास विभाग द्वारा संचालित 2 सप्ताह के डेयरी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के पूरा होने के बाद, बीजा स्थित डेयरी प्रशिक्षण एवं विस्तार केंद्र में प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी-सह-प्रभारी डेयरी प्रशिक्षण केंद्र, बीजा दलबीर कुमार ने बताया कि पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी विकास विभाग, पंजाब कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां और डेयरी विकास विभाग के निदेशक वारयाम सिंह गिल के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्य संभव हो पाया है।

विभाग द्वारा प्रशिक्षार्थियों के लिए आयोजित किया जा रहा दो सप्ताह का डेयरी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 28 मार्च, 2026 को संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद, बीजा स्थित डेयरी प्रशिक्षण एवं विस्तार केंद्र में प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर उन्होंने भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं को विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि सामान्य जाति के प्रशिक्षुओं को 25 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के प्रशिक्षुओं को 33 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के बेरोजगार लड़के-लड़कियों से भी डेयरी विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी और डेयरी प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी बीजा दलबीर कुमार ने कहा कि दूध उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए विभाग शहरों में मोबाइल वैन के माध्यम से शिविरों का आयोजन भी कर रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, आप मोबाइल नंबर 81461-00543 या 01628-299322 पर भी संपर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर क्लर्क हरविंदर सिंह और स्टेनोग्राफर हरविंदर सिंह भी उपस्थित थे।