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भारत दुनिया निवेशकों के लिए अवसर की भूमि: पीयूष गोयल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, बल्कि आने वाले वर्षों में भी यह विकास की गति बनाए रखेगा।

वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद भारत ने हर संकट को अवसर में बदला है। व्यापार, विनिर्माण, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में देश लगातार मजबूत हो रहा है।

भारत पर बढ़ रहा वैश्विक भरोसा

गोयल ने बताया कि हाल ही में कनाडा और अमेरिका के निवेशकों व उद्योगपतियों के साथ हुई बैठकों में भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि भारत को आज एक भरोसेमंद साझेदार, मजबूत लोकतंत्र और विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा जा रहा है।

उनके अनुसार, वैश्विक निवेशकों के लिए अब सवाल यह नहीं है कि भारत में निवेश करना है या नहीं, बल्कि यह है कि वे भारत की विकास यात्रा में कितनी जल्दी शामिल होते हैं।

भारत में निवेश से कंपनियों को मिला बड़ा फायदा

मंत्री ने हुंडई और जेसीबी जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में लंबे समय तक निवेश करने वाली कंपनियों को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि आज जेसीबी भारत में बने उत्पादों का निर्यात 130 से अधिक देशों में कर रही है।

मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेगा कारोबार

पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ 9 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इससे भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता 1 जून 2026 से लागू हो चुका है और अगले छह महीनों में दो से तीन अन्य महत्वपूर्ण व्यापार समझौते भी लागू होने की संभावना है।

100 नए औद्योगिक पार्क होंगे विकसित

सरकार देशभर में लगभग 3.5 अरब डॉलर की लागत से 100 आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करेगी। इन पार्कों में तैयार फैक्ट्रियां, श्रमिक आवास, जल एवं बिजली सुविधाएं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरणीय मंजूरियों जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश

गोयल ने बताया कि भारत बंदरगाहों, सड़कों, राजमार्गों, हवाई अड्डों और ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं पर लगभग 130 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। पिछले एक दशक में देश की बंदरगाह और हवाई अड्डा क्षमता दोगुनी हो चुकी है।

सेमीकंडक्टर और AI पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उभरती तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि टाटा और एएसएमएल मिलकर भारत में पहला सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माण संयंत्र स्थापित कर रहे हैं।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने निवेशकों से भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का आह्वान करते हुए कहा कि देश में निवेश, नवाचार और विनिर्माण के लिए अपार अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक विकास गाथा बनकर उभरेगा और वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक बाजार बना रहेगा।

IIFT में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस 2026 का शुभारंभ, वैश्विक व्यापार चुनौतियों पर मंथन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस (GBRC) 2026 का उद्घाटन किया। “वैश्विक उथल-पुथल के बीच व्यापार प्रबंधन” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, नीति निर्माता, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए।

अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत व्यापार, विनिर्माण, नवाचार और नई तकनीकों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और वैश्विक व्यापार साझेदारियों में भारत की प्रगति इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका को दर्शाती है।

उन्होंने IIFT जैसे संस्थानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान शोध आधारित सुझावों के माध्यम से नीति निर्माण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

IIFT के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक बदलाव और तकनीकी विकास दुनिया की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।

AI, व्यापार और शिक्षा पर विशेष चर्चा

सम्मेलन में बिजनेस स्कूलों के अंतरराष्ट्रीयकरण, प्रबंधन शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, भू-राजनीतिक चुनौतियों और उच्च शिक्षा में नवाचार जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा वित्त, मार्केटिंग, रणनीति, वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

BRICS देशों की भूमिका पर विशेष सत्र

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “बहुध्रुवीय दुनिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिक्स” विषय पर विशेष चर्चा है। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में BRICS देशों की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

शोधार्थियों को मिलेगा बड़ा मंच

कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरेट शोधार्थियों के लिए विशेष संगोष्ठी भी आयोजित की गई है, जहां उन्हें वरिष्ठ शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

देश के प्रमुख संस्थानों की भागीदारी

इस सम्मेलन में IIM, IIT बॉम्बे, ISB, MDI गुरुग्राम, BIMTECH, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, IIMC, IILM यूनिवर्सिटी और जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपति, निदेशक और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।

5 जून को होगा समापन

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 5 जून 2026 को होगा। समापन समारोह में सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति और सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट शोध पत्र को सम्मानित किया जाएगा।

भारत के इस्पात उत्पादन में मई 2026 में भी वृद्धि जारी रही

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत का इस्पात क्षेत्र मई 2026 में भी मजबूत प्रदर्शन करता रहा। उत्पादन, खपत और निवेश के प्रमुख संकेतकों में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उद्योग की सकारात्मक विकास गति बरकरार रही।

मई 2026 में देश का कच्चा इस्पात उत्पादन 14.21 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.9 प्रतिशत अधिक है। वहीं तैयार इस्पात का उत्पादन 13.94 मिलियन टन तक पहुंच गया, जिसमें 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में तैयार इस्पात की खपत 14.33 मिलियन टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत अधिक है।

अप्रैल-मई 2026 के दौरान कच्चे इस्पात का कुल उत्पादन 28.04 मिलियन टन रहा, जबकि तैयार इस्पात का उत्पादन 27.36 मिलियन टन तक पहुंच गया। इस दौरान इस्पात की खपत में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण निर्माण, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती मांग रही।

आयात और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी

मई 2026 में इस्पात आयात 0.69 मिलियन टन और निर्यात 0.51 मिलियन टन रहा। पिछले वर्ष की तुलना में आयात में 62.5 प्रतिशत और निर्यात में 29.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने 1.37 मिलियन टन इस्पात आयात किया, जबकि निर्यात 0.98 मिलियन टन रहा। इस अवधि में भारत शुद्ध आयातक देश बना रहा।

क्षमता विस्तार को मिल रही रफ्तार

देश की कुल कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 220 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है। यह 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।

इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Steel Authority of India Limited (सेल) ने भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता 6.8 मिलियन टन से बढ़ाकर 10.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने को मंजूरी दी है।

वहीं JSW Steel ने ओडिशा के पारादीप में 13.2 मिलियन टन क्षमता वाले एकीकृत इस्पात संयंत्र के निर्माण की शुरुआत की है।

ग्रीन स्टील को बढ़ावा

इस्पात मंत्रालय की ग्रीन स्टील पहल के तहत 31 मई 2026 तक 15 राज्यों के 94 इस्पात उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें टीएमटी बार, कॉइल, प्लेट, वायर रॉड और पाइप जैसे उत्पाद शामिल हैं। अधिकांश उत्पादों को सर्वोच्च 5-स्टार रेटिंग मिली है।

कीमतों में हल्की नरमी

मई 2026 में घरेलू इस्पात कीमतों में कुछ नरमी देखी गई। टीएमटी और रीबार की कीमतों में लगभग 1.3 प्रतिशत की मासिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि एचआर कॉइल और जीपी शीट की कीमतों में भी मामूली कमी आई।

कच्चे माल की लागत बढ़ी

इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी जारी रही। NMDC Limited ने लौह अयस्क की कीमतों में 200 रुपये प्रति टन की वृद्धि की। वहीं अंतरराष्ट्रीय कोकिंग कोयले की कीमत बढ़कर 239 डॉलर प्रति टन पहुंच गई, जिससे इस्पात उत्पादकों पर लागत का दबाव बढ़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, क्षमता विस्तार और ग्रीन स्टील जैसी पहलों के कारण आने वाले महीनों में भी भारतीय इस्पात उद्योग की विकास गति बनी रह सकती है।

रक्षा मंत्री ने फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमा दोगुनी की, परिचालन दक्षता को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में चिकित्सा एवं निर्माण परियोजनाओं सहित रक्षा सेवाओं के लिए वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन को जारी किया। वित्तीय शक्तियों में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, और कुछ मामलों में तो यह वृद्धि दोगुने से भी अधिक है। इससे फील्ड कमांडरों की परिचालन क्षमता और मजबूत होगी। इससे अनुबंधों को शीघ्रता से संपन्न करने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटित वित्तीय शक्तियों को दोगुना कर दिया गया है ताकि विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके। वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन से चालू वर्ष के बजटीय आवंटन के अनुसार राजस्व मार्ग से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद में मदद मिलेगी।

सेना/वायुसेना/नौसेना कमांडरों को सौंपी गई विशेष वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, साथ ही तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदान की गई कुल सीमा में 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वित्तीय शक्तियों में वृद्धि के अतिरिक्त, सामान्य खरीद की तुलना में उच्चतर अधिकार क्षेत्र के साथ अग्रणी सेवा द्वारा संयुक्त सेवा खरीद को बढ़ावा देने के लिए नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को विकेंद्रीकृत करने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरणों की स्थापना की गई है।

वित्तीय शक्तियों को अंतिम बार 2021 में अधिसूचित किया गया था। सैन्य बलों की संख्या में विस्तार और बजट आवंटन में वृद्धि के मुकाबले परिचालन एवं रखरखाव पर बढ़ते व्यय को पूरा करने के लिए संशोधन आवश्यक हो गया था। वित्तीय शक्तियों में यह संशोधित प्रत्यायोजन, अक्टूबर 2025 में अधिसूचित संशोधित रक्षा खरीद नियमावली के साथ मिलकर, त्वरित निर्णय लेने के साथ रक्षा खरीद को गति प्रदान करेगा। इससे रक्षा बलों की आवश्यकताओं के अनुसार संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) श्रीमती सुकृति लिखी, सचिव (रक्षा वित्त) श्री विश्वजीत सहाय, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नागेश कपूर, कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स श्री अनुग्रह नारायण दास और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ईरान युद्द और होर्मुज स्ट्रेट बढ़ते खतरे के बाद खाड़ी देश तेल निर्यात के लिए कर रहे है नए रस्ते तैयार

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

ईरान-होर्मुज संकट के बीच खाड़ी देशों ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों पर तेज किया काम, अरबों डॉलर के निवेश की तैयारी

ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच खाड़ी देशों ने ऊर्जा निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इराक, ओमान और कुवैत तेल एवं गैस आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नई पाइपलाइन परियोजनाओं, रेल कॉरिडोर और विशाल ऊर्जा भंडारण केंद्रों में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य किसी कारणवश बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए खाड़ी देश अपनी निर्यात व्यवस्था को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

होर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन करोड़ों बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। दशकों से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल निर्यात इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशिया, यूरोप और अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंचता रहा है।

हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसके चलते क्षेत्र के देशों ने वैकल्पिक बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

यूएई की नई वेस्ट-टू-ईस्ट पाइपलाइन योजना

संयुक्त अरब अमीरात ने अबू धाबी से फुजैरा तक नई वेस्ट-टू-ईस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन परियोजना को गति दी है। फुजैरा बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, जिससे तेल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यूएई की तेल निर्यात क्षमता वर्ष 2027 तक लगभग दोगुनी हो सकती है। इसके अतिरिक्त यूएई ऐसी नई पाइपलाइन पर भी विचार कर रहा है, जिसके माध्यम से केवल कच्चा तेल ही नहीं बल्कि पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन जैसे परिष्कृत उत्पादों का भी परिवहन किया जा सके।

कुवैत-सऊदी-यूएई ऊर्जा कॉरिडोर पर चर्चा

कुवैत, सऊदी अरब और यूएई के बीच एक संभावित पाइपलाइन कॉरिडोर पर भी बातचीत जारी है। इस परियोजना का उद्देश्य कुवैत के तेल को पाइपलाइन के माध्यम से सऊदी अरब या यूएई के बंदरगाहों तक पहुंचाना है, जहां से उसे वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जा सके।

हालांकि परियोजना का अंतिम मार्ग अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन इसे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इराक तैयार कर रहा नए निर्यात मार्ग

इराक भी होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक निर्यात नेटवर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत बसरा से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह तक एक नई पाइपलाइन प्रस्तावित है, जिसकी क्षमता लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है।

इसके अलावा इराक बसरा से ओमान के दुक्म बंदरगाह तक एक अन्य पाइपलाइन विकल्प पर भी विचार कर रहा है। यह मार्ग इराकी तेल को सीधे समुद्री निर्यात केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करेगा। साथ ही, इराक और तुर्किये के बीच मौजूद किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को भी पुनर्जीवित और आधुनिक बनाने का कार्य जारी है।

ओमान बन सकता है क्षेत्रीय ऊर्जा हब

ओमान अपने रणनीतिक बंदरगाहों को तेल और गैस भंडारण तथा निर्यात के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। कुवैत और ओमान के बीच होर्मुज के बाहर नई स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करने को लेकर भी चर्चा चल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं सफल होती हैं तो संकट की स्थिति में खाड़ी देशों को निर्यात जारी रखने के लिए मजबूत वैकल्पिक आधार मिल सकेगा।

गैस परिवहन के नए विकल्पों की तलाश

प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में अभी किसी नई परियोजना की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लंबे समय से प्रस्तावित गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर गंभीर चर्चा चल रही है। यह रेल नेटवर्क पेट्रोलियम उत्पादों और ऊर्जा सामग्री के परिवहन में सहायक हो सकता है।

इसके अलावा कतर से सऊदी अरब, जॉर्डन और तुर्किये तक गैस पाइपलाइन विकसित करने के विचार पर भी चर्चा जारी है। यदि यह परियोजना साकार होती है तो खाड़ी क्षेत्र की गैस सीधे यूरोपीय बाजारों तक पहुंच सकेगी।

ऊर्जा सुरक्षा बना प्रमुख लक्ष्य

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों का मुख्य उद्देश्य ऐसा बहु-आयामी नेटवर्क तैयार करना है, जो किसी भी भू-राजनीतिक संकट के दौरान तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित न होने दे। इसके लिए पाइपलाइन, रेल नेटवर्क, भंडारण सुविधाएं और वैकल्पिक बंदरगाहों का विकास तेजी से किया जा रहा है।

आने वाले वर्षों में खाड़ी क्षेत्र में और भी नई पाइपलाइन तथा परिवहन परियोजनाओं की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी अधिक स्थिरता मिल सकती है।

PM मोदी गुजरात और दमन के दौरे पर रहेंगे, 22 हजार करोड़ से अधिक विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

PM मोदी गुजरात औऱ दमन का दौरे पर रहेंगे। जहां वह 22 हजार करोड़ से अधिक विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। आपको बता दें कि पहले पीएम गुजरात के सूरत जिले के हजीरा पहुंचेंगे, जहां वे औद्योगिक और अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। इसके बाद सूरत में करीब 18,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा जनसभा को संबोधित करेंगे।

सूरत में प्रधानमंत्री वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के महत्वपूर्ण हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच परिवहन, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के प्रमुख हिस्सों को चार लेन बनाने की परियोजना की भी शुरुआत होगी, जिससे जनजातीय क्षेत्रों और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच आसान होगी।

प्रधानमंत्री सूरत में 200 बेड वाले आधुनिक ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन भी करेंगे। यह अस्पताल 24 घंटे आपातकालीन और ट्रॉमा सेवाएं उपलब्ध कराएगा। साथ ही बिजली वितरण, ट्रांसमिशन नेटवर्क और औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया जाएगा।

शाम को प्रधानमंत्री दमन पहुंचेंगे, जहां वे नामो हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और नामो अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके बाद लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया जाएगा।

दमन में शुरू होने वाली प्रमुख परियोजनाओं में आइकॉनिक ब्रिज, दमन कन्वेंशन सेंटर और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) परिसर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री लक्षद्वीप के लिए करीब 885 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी शिलान्यास करेंगे। इनमें कलपेनी और कदमत द्वीपों पर आधुनिक बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री संपर्क मजबूत होगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय मछुआरों को लाभ पहुंचेगा।

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से गुजरात, दमन और लक्षद्वीप में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

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श्री आनंदपुर साहिब मुख्य मार्ग सड़क हादसा, श्रद्धालुओं से भरी पिकअप पलटी

नंगल / सत्ता संदेश

श्री आनंदपुर साहिब मुख्य मार्ग पर आज सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। गांव दड़ौली के पास श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।


जानकारी के अनुसार गांव हयातपुर के श्रद्धालु पीरनिगाहा में माथा टेकने के बाद पिकअप वाहन में सवार होकर अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान नंगल–श्री आनंदपुर साहिब मार्ग पर गांव दड़ौली के निकट वाहन चालक का संतुलन बिगड़ गया और पिकअप सड़क पर पलट गई। हादसे की सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स की टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को तुरंत वाहन से बाहर निकालकर उपचार के लिए नंगल के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।


प्राथमिक जानकारी के अनुसार अधिकांश श्रद्धालुओं को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की भी सूचना है। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू होने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।


फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है। समय पर मिली मदद ने कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

गंदे पानी ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें: दूध फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग

खन्ना / सत्ता संदेश

खन्ना के मलेरकोटला रोड स्थित एक दूध उत्पाद फैक्ट्री के खिलाफ गांव माजरी और रसूलड़ा के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री का गंदा पानी रात के समय छोड़ा जाता है, जिससे इलाके में भारी प्रदूषण और बदबू फैल रही है। लोगों का कहना है कि इस कारण उनका जीना मुश्किल हो गया है।


ग्रामीणों के अनुसार फैक्ट्री का दूषित पानी पहले एकत्र किया जाता है और बाद में रात के अंधेरे में बाहर छोड़ दिया जाता है। इससे आसपास के क्षेत्र में गंदगी और तेज बदबू फैल रही है। लोगों का कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष से वे इस समस्या का सामना कर रहे है। गांव के पंच ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के कारण इलाके में बीमारियां बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार में भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का मामला सामने आ चुका है। ग्रामीणों ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग हर समय बदबू के बीच रहने को मजबूर हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार फैक्ट्री प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने मांग की कि ऐसी फैक्ट्रियों को रिहायशी इलाकों से दूर स्थापित किया जाए। वहीं फैक्ट्री के प्लांट हेड ने कहा कि लोगों की शिकायत उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट में तकनीकी दिक्कत आने के कारण समस्या बढ़ी है। फैक्ट्री प्रबंधन को इसकी जानकारी दे दी गई है और एक-दो दिनों में समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कल से लकड़ी वाला बॉयलर बंद किया जा रहा है।


नगर कौंसिल के ईओ चरणजीत सिंह ने कहा कि मामला उनके ध्यान में आ गया है। टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी और यदि कोई कमी पाई तो गई को संबंधित विभागों के साथ मिलकर उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मामले को प्रदूषण नियंत्रण विभाग के संज्ञान में भी लाया जाएगा।

अब देखना यह होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या ग्रामीणों को लंबे समय से आ रही परेशानी से राहत मिल पाएगी?

कपूरथला की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर बरसे राणा गुरजीत सिंह, जुआ-सट्टा और गैंगस्टरवाद पर उठाए सवाल

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शहर की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कपूरथला में जुआ, सट्टा, गैंगस्टरवाद, नशा और अन्य अवैध कारोबार चरम पर पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रशासन इन पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।

चुनावों के दौरान कानून की उड़ाई गईं धज्जियां

राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि विधानसभा और नगर निगम चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। लोगों को डराने-धमकाने का माहौल बनाया गया और आपराधिक मामलों में शामिल लोग राजनीतिक नेताओं के साथ खुलेआम घूमते रहे। उनके अनुसार ऐसे तत्वों ने चुनावी माहौल को खराब करने में अहम भूमिका निभाई।

अवैध बैटिंग और सट्टे के कारोबार पर उठाए सवाल

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि शहर में जुए-सट्टे के अलावा अवैध बैटिंग का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को कई बार इन गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिस उनसे ही सबूत मांगती रही। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का काम प्रशासन को अवगत करवाना होता है, जबकि जांच करना और सबूत जुटाना पुलिस की जिम्मेदारी है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी साधा निशाना

राणा गुरजीत सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस आजकल बाजारों में जाकर व्यापारियों से मुलाकात कर रही है, जबकि ऐसे काम थानों में बैठकर भी किए जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक इशारों पर किया जा रहा है और इसे केवल एक सार्वजनिक दिखावा (पब्लिक स्टंट) बताया।

हालात नहीं सुधरे तो कांग्रेस करेगी संघर्ष

विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कांग्रेस पार्टी जनता को साथ लेकर आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।

जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए

राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन का पहला दायित्व आम लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है। उन्होंने मांग की कि जुआ, सट्टा, नशा और गैंगस्टरवाद जैसी गतिविधियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बहाल हो सके।

मिलावटखोरों पर हेल्थ विभाग का शिकंजा, संदिग्ध देसी घी और पनीर के नमूने जांच के लिए भेजे

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन : तरजिंदर सिंह

अमृतसर में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रामबाग स्थित एक डेयरी पर छापेमारी की। इस दौरान पनीर के सैंपल लिए गए और करीब 7 क्विंटल देसी घी को सील कर जांच के लिए भेजा गया।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पंजाब की कमिश्नर कमलप्रीत कौर बराड़ तथा डिप्टी कमिश्नर अमृतसर दलविंदरजीत सिंह के दिशा-निर्देशों के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभिन्न डेयरियों और दूध से बने उत्पाद बेचने वाली दुकानों की जांच की सहायक कमिश्नर फूड राजिंदरपाल सिंह ने बताया कि पिछले एक महीने से दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत प्राप्त शिकायत के आधार पर रामबाग क्षेत्र में स्थित एक डेयरी पर तड़के छापेमारी की गई।


छापेमारी के दौरान पनीर के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए। इसके अलावा डेयरी में मौजूद ‘प्रभु देसी घी’ ब्रांड के 48 टिन, जिनका कुल वजन लगभग 7 क्विंटल था, को सील कर दिया गया। यह घी हरियाणा के सिरसा में निर्मित बताया गया है। घी के सैंपल भी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। सिविल सर्जन डॉ. चरणजीत सिंह बजाज ने कहा कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी के खिलाफ विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और लैब रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की आशंका हो तो तुरंत विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और लोगों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।