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सोनम वांगचुक की हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीती 28 जून से आमरण अनशन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक द्वारा की जा रही भूख हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खण्डपीठ सुनवाई कर रही थी।

याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए। दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को वांगचुक को जबरन खाना खिलाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

बता दें कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनके भूख हड़ताल को 18 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। पार्टी संस्थापक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए।

वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, मांसपेशियों में दर्द है और उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं।

उधर, सीजेपी ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। सीजेपी ने देश भर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।

प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी को हाईकोर्ट में दी चुनौती
जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की कथित निरंतर निगरानी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि विरोध स्थल पर अंधाधुंध फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी टावर का संचालन असंवैधानिक घोषित किया जाए, साथ ही ऐसी निगरानी को निलंबित करने और सार्वजनिक प्रदर्शनों में निगरानी को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया जाए।

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ पर राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की आने वाली फिल्म ‘धुरंधर 2’ कानूनी विवादों में घिर गई है। एक सैन्यकर्मी ने दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर फिल्म के कुछ दृश्यों पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ता (सैन्यकर्मी) का आरोप है कि फिल्म ‘धुरंधर 2’ में कई ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं जो सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाए जाने वाले गोपनीय ‘ऑपरेशनल’ तरीकों को उजागर करते हैं। याचिका में कहा गया है कि भले ही फिल्म निर्माताओं ने इसे ‘फिक्शन’ (काल्पनिक) बताया हो, लेकिन इस तरह के दृश्यों का सार्वजनिक होना देश की सुरक्षा के हित में नहीं है।

कोर्ट का रुख और निर्देश: इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि याचिका में उठाए गए मुद्दे ‘विचारणीय’ हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होतीं और उनका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए सेंसरशिप और दिशा-निर्देशों की आवश्यकता होती है।

हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को फिल्म के विवादित दृश्यों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सक्षम अधिकारी इस याचिका को एक प्रतिवेदन (representation) के रूप में स्वीकार करें और पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करें। इसी के साथ अदालत ने इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है।

चेक बाउंस मामला: कोर्ट की फटकार के बाद अभिनेता राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया सरेंडर

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक आत्मसमर्पण करने का कड़ा आदेश दिया था, जिसके बाद 5 फरवरी को उन्होंने जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर किया।9 करोड़ रुपये का बकाया और कोर्ट की नाराजगी हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजपाल यादव ने बार-बार अदालती नियमों का उल्लंघन किया है और समझौते के वादों को पूरा नहीं किया। हालांकि एक्टर ने आखिरी बार राहत की गुहार लगाते हुए कहा था कि वे 25 लाख रुपये लेकर आए हैं और बाकी रकम भी चुका देंगे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि पहले सरेंडर जरूरी है, राहत पर विचार बाद में किया जाएगा। कोर्ट के अनुसार, अभी भी 9 करोड़ रुपये की राशि बकाया है।क्या है पूरा मामला? यह विवाद साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के कारण वे पैसे नहीं लौटा सके और उनके द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए। साल 2018 में इस मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था और 6 महीने की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद वे बार-बार अपील के जरिए राहत पाते रहे।कानून का सम्मान जरूरी: जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने राजपाल यादव के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेशों का पालन न करना कानून के प्रति अनादर दर्शाता है। कोर्ट ने उनके वकील की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें देरी का कारण पैसों का इंतजाम करना बताया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जो लोग कानून का सम्मान नहीं करते, उन्हें कानून से किसी अनुकूलता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।