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पंजाब में एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का आगाज, 2030 हॉकी विश्व कप की तैयारी

पंजाब में एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का उद्घाटन CM भगवंत मान ने किया। जालंधर में लीग मैच और मोहाली में सेमीफाइनल व फाइनल होंगे। पंजाब 2030 हॉकी विश्व कप की मेजबानी की तैयारी में भी जुटा है।

जालंधर / सत्ता संदेश

दिनांक : 28 अक्टूबर 2026

पंजाब ने पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी कर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपनी ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंजाब वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने की दिशा में भी तैयारियां कर रहा है।

इस चैंपियनशिप में भारत सहित छह देशों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। इनमें बांग्लादेश, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी टीमों का स्वागत करते हुए कहा कि पंजाब की हॉकी से गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। राज्य ने देश को कई ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। सरकार का लक्ष्य खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और नई पीढ़ी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

पंजाब ने देश को दिए 77 हॉकी ओलंपियन

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर 2024 के पेरिस ओलंपिक तक पंजाब ने देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं। इनमें से 48 खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं। उन्होंने बलबीर सिंह सीनियर, ऊधम सिंह, पृथिपाल सिंह, अजीत पाल सिंह, सुरजीत सिंह और परगट सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलंपिक-2021 और पेरिस ओलंपिक-2024 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने में पंजाब के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मौजूदा भारतीय टीम में भी पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की हॉकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

हॉकी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में छह नए एस्ट्रो-टर्फ हॉकी मैदान स्थापित किए गए हैं, जबकि दो अन्य मैदानों का निर्माण जारी है। इसके अलावा राज्य में 18 छह-ए-साइड एस्ट्रो-टर्फ मैदान भी तैयार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे सीजन के लिए छह लाख से अधिक खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। वहीं, मुख्यमंत्री खेल मैदान योजना के तहत राज्य में 3,000 से अधिक खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर उपलब्ध कराना है।

जालंधर में लीग मुकाबले, मोहाली में सेमीफाइनल और फाइनल

मुख्यमंत्री ने बताया कि एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के सभी लीग मुकाबले जालंधर में खेले जाएंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पंजाब में खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य पंजाब की हॉकी विरासत को मजबूत करना और युवाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी की तैयारियों का भी उल्लेख किया।

Ludhiana : खादयांवाला सरकारी स्कूल को अपग्रेड करने पर MLA ने CM मान का जताया आभार

लुधियाना के सलेम टाबरी स्थित खादयांवाला सरकारी हाई स्कूल को सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रूप में अपग्रेड किया गया। MLA मदन लाल बग्गा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का आभार जताया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के सलेम टाबरी स्थित खादयांवाला सरकारी हाई स्कूल को सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रूप में अपग्रेड किया गया है। इस फैसले पर क्षेत्र के विधायक मदन लाल बग्गा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का विशेष रूप से धन्यवाद किया।

विधानसभा सत्र के दौरान विधायक मदन लाल बग्गा ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को अपग्रेड करने के साथ-साथ शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

विधायक बग्गा ने कहा कि सलेम टाबरी के खादयांवाला सरकारी हाई स्कूल को सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा मिलने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने इस फैसले पर स्थानीय निवासियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि इससे इलाके में शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों का अपग्रेडेशन विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Bhagwant Mann News: धूरी में CM मान ने युवाओं को किया प्रेरित, बोले- मेहनत और पढ़ाई पर दें ध्यान

धूरी के देश भगत कॉलेज में युवा मेले को संबोधित करते हुए CM भगवंत मान ने 70 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां देने का दावा किया और युवाओं को मेहनत व शिक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी।

धुरी / पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब को शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी और युवाओं के लिए रोजगार एवं करियर के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने युवाओं को बिना रिश्वत और सिफारिश के योग्यता के आधार पर 70,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान धूरी विधानसभा क्षेत्र के गांव बरड़वाल स्थित देश भगत कॉलेज में आयोजित क्षेत्रीय युवा मेले में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं को शिक्षा, कड़ी मेहनत और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसे जनप्रतिनिधियों की जरूरत है, जो लोगों की समस्याओं और उनके दुख-दर्द को समझें।

70 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां देने का दावा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने युवाओं से कहा कि वे अपनी पढ़ाई और मेहनत पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने 70,000 से अधिक सरकारी नौकरियां बिना रिश्वत और सिफारिश के योग्यता के आधार पर दी हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर युवा मेले से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि युवाओं का उत्साह और उनकी कलात्मक प्रतिभा देखकर उन्हें अपने शुरुआती दिनों की याद आ गई। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। जीतने वालों को विनम्र रहना चाहिए, जबकि हारने वालों को निराश होने के बजाय और मेहनत करनी चाहिए।

39 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

देश भगत कॉलेज में आयोजित युवा मेले में 39 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान चार चरणों में 60 विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

भगवंत मान ने कहा कि इन गतिविधियों के जरिए पंजाब की युवा पीढ़ी की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और प्रतिभा सामने आती है। उन्होंने युवा मेले आयोजित करने में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला और उसके युवा कल्याण विभाग के योगदान की भी सराहना की।

शिक्षा के साथ कला और संस्कृति भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। संगीत, नृत्य, थिएटर, साहित्य और लोक कलाओं जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, भावनात्मक समझ, आपसी सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करती हैं।

उन्होंने कहा कि एक प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए युवाओं का सर्वांगीण विकास जरूरी है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी सांस्कृतिक और कलात्मक प्रतिभा को भी आगे बढ़ाना चाहिए।

‘रंगला पंजाब’ के निर्माण पर जोर

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब को ‘रंगला पंजाब’ बनाने का सपना तभी साकार हो सकता है, जब युवाओं को ज्ञान, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और जीवन में स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, लगातार मेहनत करने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाले मंच युवाओं को भविष्य में सक्षम नेतृत्वकर्ता और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करते हैं।

मुख्यमंत्री के संबोधन में शिक्षा, रोजगार, युवा प्रतिभा और सांस्कृतिक गतिविधियों को पंजाब के विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया।

Khanna AAP News: दिलप्रीत बैनीपाल ने समर्थकों समेत थामा AAP का दामन, तरनप्रीत सिंह सोंड ने किया स्वागत

खन्ना में दिलप्रीत बैनीपाल अपने समर्थकों और युवाओं के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। कैबिनेट मंत्री तरनप्रीत सिंह सोंड ने नए सदस्यों का स्वागत किया।

खन्ना / सत्ता संदेश

पंजाब के खन्ना में आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय संगठनात्मक मजबूती मिली, जब दिलप्रीत बैनीपाल अपने समर्थकों और बड़ी संख्या में युवाओं के साथ पार्टी में शामिल हुए। यह कार्यक्रम कैबिनेट मंत्री एवं खन्ना के विधायक तरनप्रीत सिंह सोंड के नेतृत्व में हुआ। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दिलप्रीत बैनीपाल और उनके साथी आम आदमी पार्टी की नीतियों तथा पंजाब सरकार की जनहितैषी पहलों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए। नए सदस्यों ने संगठन को मजबूत करने और जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।

दिलप्रीत बैनीपाल के साथ कई समर्थकों ने ली सदस्यता

दिलप्रीत बैनीपाल के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल होने वालों में अदीव बैंस, जसकरण धालीवाल, तरनजोत समरा, हरमन मोहाली, दिलप्रीत मोहाली, सिमरन संधेर, नवजोत माजरा, जगमीत धीमान, प्रदीप गिल, मलकीत सिंह बैनीपाल, हरप्रीत सिंह बैनीपाल, भाटिया (लुधियाना) और गुरप्रीत सिंह बैनीपाल सहित कई अन्य समर्थक शामिल रहे।

पार्टी नेताओं के अनुसार, नए सदस्यों के जुड़ने से खन्ना क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

युवाओं की भागीदारी से संगठन को मजबूती मिलेगी: मंत्री सोंड

कैबिनेट मंत्री तरनप्रीत सिंह सोंड ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार जनकल्याण, युवाओं के भविष्य और राज्य के विकास के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि दिलप्रीत बैनीपाल और उनके साथियों का आम आदमी पार्टी में शामिल होना पार्टी की नीतियों और सरकार के कार्यों में उनके भरोसे को दर्शाता है। मंत्री के मुताबिक, युवाओं की ऊर्जा, विचार और भागीदारी सामाजिक बदलाव तथा जनसेवा के प्रयासों को मजबूत कर सकती है।

सोंड ने नए सदस्यों को पार्टी में सम्मान और उचित भूमिका देने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता मिलकर पंजाब की प्रगति और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे।

इस राजनीतिक घटनाक्रम को खन्ना में आम आदमी पार्टी के संगठन को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

Punjab Stubble Burning: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90% कमी, जानिए भगवंत मान सरकार की रणनीति

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और मध्य प्रदेश के आंकड़े।

नई दिल्ली / चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा तेज हो जाती है और पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब का नाम प्रमुखता से सामने आता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े राज्य में पराली प्रबंधन के प्रयासों और घटनाओं में आई कमी की ओर संकेत करते हैं।

पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में राज्य में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 474 घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, 2026 का आंकड़ा अभी तक की अवधि का है, इसलिए इसकी तुलना पूरे वर्ष के आंकड़ों से सीधे नहीं की जानी चाहिए।

मध्य प्रदेश में पंजाब से अधिक मामले

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के CREAMS कार्यक्रम की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश 118 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर रहा। पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि मेंकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश को 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है. इसके लिए भारत सरकार लगभग ₹415 करोड़ का अनुदान देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में इसे अहम कदम बताते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि इससे हिमाचल के युवाओं को अपने ही राज्य में मेडिकल की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे. साथ ही, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा तेजी से लिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए जेपी नड्डा ने बताया कि हिमाचल सरकार से 23 जून 2026 को प्रस्ताव मिला था. इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री से भी इस विषय पर चर्चा हुई और अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है.

कहां पर कितनी सीटों को मिली है मंजूरी?

जेपी नड्डा ने कहा, “केंद्र सरकार ने हिमाचल के प्रस्ताव पर तेजी से काम करते हुए सभी 320 सीटों को मंजूरी दी है. अब हम राज्य सरकार से भी उम्मीद करते हैं कि वह इसी तेजी से जरूरी कदम उठाए, ताकि प्रदेश के युवाओं और आम लोगों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके.” इन 320 नई सीटों में शिमला के लिए 91, टांडा और हमीरपुर के लिए 57-57, मंडी के लिए 55, नाहन के लिए 32 और चंबा के लिए 28 सीटें शामिल हैं. इनसे सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, कैंसर सहित कई अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने ₹15,000 करोड़ की लागत से अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई यूजी और पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है. हिमाचल प्रदेश में 320 नई पीजी सीटों की स्वीकृति भी इसी योजना का हिस्सा है.

‘समय से शुरू करने पूरे किए जाएं जरूरी काम’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल सरकार से आग्रह किया कि वह इन सभी 320 सीटों को समय पर शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके. उन्होंने राज्य में केंद्र सरकार की मदद से चल रही अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत बताई.

जेपी नड्डा ने कहा कि चंडीगढ़बद्दी और भानुपल्लीबिलासपुर जैसी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में राज्य सरकार की हिस्सेदारी और जमीन से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाना चाहिए. इसी तरह, केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, “हिमाचल के लोगों के हित से जुड़े विकास कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए. केंद्र सरकार प्रदेश के विकास के लिए हर संभव सहयोग दे रही है. हमारी अपेक्षा है कि राज्य सरकार भी इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दे और इन्हें समय पर पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए.”

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता स्पष्ट है—हिमाचल का विकास और हिमाचल के हर परिवार का कल्याण.”

पंजाब में किसी भी दिन पराली जलाने की घटनाओं की संख्या दहाई तक नहीं पहुंची, जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन ऐसे रहे, जब घटनाओं का आंकड़ा दहाई में दर्ज किया गया।

वर्ष 2025 के आंकड़े भी इस अंतर को स्पष्ट करते हैं। छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 33,028 घटनाओं में से मध्य प्रदेश में 17,067, उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 मामले दर्ज हुए। इन आंकड़ों के आधार पर पराली जलाने की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित मानने के बजाय दूसरे कृषि प्रधान राज्यों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को सब्सिडी देने पर जोर दिया है। सरकार की रणनीति का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और अगली फसल की बुवाई भी समय पर हो सके।

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, वर्ष 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें 14,384 सुपर सीडर, 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक शामिल हैं।

इन मशीनों की मदद से खेतों में पराली को मिट्टी में मिलाने, अवशेषों को इकट्ठा करने और पराली का वैकल्पिक उपयोग करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी सुविधा मिल सकती है।

किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी

पराली प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों तथा पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक भी आधुनिक मशीनों की सुविधा पहुंचाना है। महंगी कृषि मशीनें खरीदना हर किसान के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में सामूहिक मशीन केंद्रों के माध्यम से किसान जरूरत के अनुसार मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन की 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, तकनीकी सहायता देने और फसल अवशेषों के वैकल्पिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में भी क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनरी के लिए करीब 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी।

पराली से कमाई के रास्ते तलाश रहे किसान

पराली को केवल कृषि अपशिष्ट मानने के बजाय उससे आमदनी के अवसर तलाशने पर भी काम हो रहा है। पंजाब में कुछ किसान पराली को इकट्ठा करके बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के लिए बेच रहे हैं।

संगरूर के एक किसान द्वारा लगभग 12 हजार क्विंटल पराली बेचकर करीब 16 लाख रुपये की आय अर्जित करने का उदाहरण सामने आया है। हालांकि, इस तरह की कमाई पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन लागत और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। फिर भी, यह मॉडल किसानों के लिए फसल अवशेषों के आर्थिक इस्तेमाल की संभावनाएं दिखाता है।

पराली जलाने पर रोक के लिए किसानों का सहयोग जरूरी

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच सीमित समय, मजदूरी का खर्च, मशीनों की उपलब्धता और पराली हटाने की लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान केवल जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। किसानों को किफायती मशीनें, तकनीकी सहायता और पराली के उपयोग के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी सरकार की नीतियों, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता और किसानों के सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है। हालांकि, इस बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए हर सीजन में प्रभावी निगरानी, किसानों तक सुविधाओं की पहुंच और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी होगा।

दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर होने वाली बहस के बीच पंजाब के आंकड़े यह भी बताते हैं कि पराली प्रबंधन की चुनौती बहुआयामी है और इसका समाधान राज्यों के साझा प्रयासों, किसानों के सहयोग तथा व्यावहारिक कृषि नीतियों से ही संभव है।

Punjab Stubble Burning: पराली जलाने के मामलों में 2022 के मुकाबले करीब 90% गिरावट, मशीनों पर सब्सिडी से बढ़ा विकल्प

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए 2026 के आंकड़े, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और पराली प्रबंधन की योजनाएं।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। इस बहस में पंजाब का नाम प्रमुखता से आता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी की ओर इशारा करते हैं। पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2025 में इनकी संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

हालांकि, चालू सीजन में पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 22 अक्टूबर तक 510 घटनाएं दर्ज की गई थीं। ऐसे में पराली प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे उपायों के साथ मौजूदा सीजन की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।

मध्य प्रदेश में पंजाब से ज्यादा घटनाएं

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS कार्यक्रम के 6 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश में 118, पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं सामने आईं।

ये आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में धान की खेती का विस्तार, फसल कटाई का समय और अवशेषों के प्रबंधन की उपलब्ध सुविधाएं इस चुनौती को प्रभावित करती हैं। हालांकि, अलग-अलग तारीखों और निगरानी प्रणालियों के आंकड़ों की तुलना करते समय उनके स्रोत और गणना के तरीके को ध्यान में रखना आवश्यक है।

कृषि मशीनों पर सब्सिडी से किसानों को मदद

पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कृषि मशीनों पर सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को पात्रता के अनुसार 80 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है।

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में किसानों ने 21 हजार से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें सुपर सीडर की संख्या सबसे अधिक रही है। इसके अलावा मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल ड्रिल, बेलिंग मशीन और स्ट्रॉ रेक जैसी मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है।

इन मशीनों की मदद से किसान पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाने, उसके बीच अगली फसल की बुवाई करने या उसे इकट्ठा करके दूसरे उपयोगों के लिए भेजने जैसे विकल्प अपना सकते हैं।

पराली प्रबंधन के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना

पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के मद में 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को तकनीकी सहायता देने और पराली के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।

इससे पहले 2025 के सीजन में आधुनिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए लगभग 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सरकारी प्रयासों का उद्देश्य किसानों को ऐसे व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे धान की कटाई के बाद खेतों को समय पर गेहूं की बुवाई के लिए तैयार किया जा सके।

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय

किसानों के सामने पराली प्रबंधन की चुनौती केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय कम मिलता है। ऐसे में खेत से पराली हटाने, मशीनों का इंतजाम करने और अवशेषों को दूसरी जगह पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह चुनौती अधिक हो सकती है।

इसलिए पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए निगरानी और कानूनी कार्रवाई के साथ सस्ती मशीनों की उपलब्धता, साझा मशीन केंद्रों और किसानों को समय पर तकनीकी सहायता देना भी महत्वपूर्ण है।

बायोगैस और बायो-CNG में भी संभावनाएं

धान की पराली का उपयोग बायोगैस, बायो-CNG, बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है। यदि किसानों को पराली के लिए नियमित खरीदार, उचित कीमत और किफायती परिवहन की सुविधा मिलती है, तो फसल अवशेष उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन सकते हैं।

हालांकि, इससे होने वाली आय पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन खर्च और संबंधित परियोजनाओं की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे विकल्पों को बड़े स्तर पर विकसित करना पराली प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

किसानों की भागीदारी के बिना संभव नहीं समाधान

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों के मुकाबले आई कमी के पीछे सरकारी योजनाओं, कृषि मशीनों की उपलब्धता, निगरानी और किसानों की भागीदारी जैसे कई कारक महत्वपूर्ण हैं। केवल किसी एक योजना को इसका पूरा श्रेय देना उचित नहीं होगा।

आगे की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पराली प्रबंधन के विकल्प हर किसान तक समय पर पहुंचें और उनका उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक बना रहे। इसके साथ ही चालू सीजन के आंकड़ों की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि पिछले वर्षों में दर्ज सुधार को आगे भी बनाए रखा जा रहा है या नहीं।

पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र: SIR, नशा तस्करी और बेअदबी कानून पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

पंजाब विधानसभा के 22 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले विशेष सत्र में SIR के खिलाफ प्रस्ताव, सिल्क रूट खोलने की मांग, नशा तस्करी और बेअदबी कानून पर चर्चा की संभावना।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब विधानसभा का 22 से 27 अक्टूबर तक चलने वाला विशेष सत्र कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में रहेगा। सत्र के दौरान विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार मतदाता सूचियों के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा यह प्रस्ताव सदन में रखेंगे। इसके अलावा पंजाब के व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक सिल्क रूट को दोबारा खोलने, भाई कन्हैया जी की मानव सेवा को सम्मान देने और बेअदबी रोधी कानून में संशोधन जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं।

SIR के खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे प्रताप सिंह बाजवा

विशेष सत्र में विपक्ष की ओर से SIR के तहत तैयार मतदाता सूचियों को रद्द करने और घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के आधार पर तैयार पुरानी मतदाता सूचियों का इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाएगी। प्रस्ताव में पंजाब सरकार से यह मामला केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के समक्ष उठाने की मांग भी शामिल होगी। इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पंजाब में व्यापार बढ़ाने के लिए सिल्क रूट खोलने की मांग

सत्र में विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा ऐतिहासिक सिल्क रूट को दोबारा खोलने का मुद्दा उठाएंगे। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से संबंधित देशों के साथ व्यापारिक संपर्क बहाल करने की पहल करने की मांग की जाएगी।

ऐतिहासिक सिल्क रूट चीन से मध्य एशिया, ईरान और यूरोप तक फैले व्यापारिक मार्गों का नेटवर्क था। पंजाब का संपर्क भी उत्तर-पश्चिम के उन रास्तों से रहा है, जो अफगानिस्तान के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंचते थे। इन मार्गों के जरिए व्यापारियों और सामान की आवाजाही होती थी। प्रस्ताव का उद्देश्य पंजाब के किसानों और कारोबारियों को नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। हालांकि, इन मार्गों को दोबारा विकसित करने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित देशों के स्तर पर पहल जरूरी होगी।

भाई कन्हैया जी के नाम पर अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड रखने की मांग

विशेष सत्र में भाई कन्हैया जी की मानव सेवा को सम्मान देने से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसमें सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों का नाम भाई कन्हैया जी के नाम पर रखने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही 20 सितंबर को मनाए जाने वाले भाई कन्हैया जी मानव सेवा संकल्प दिवस को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की सिफारिश भी की जाएगी।

नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था और कर्मचारियों के मुद्दों पर चर्चा

सत्र के दौरान तीन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी विभिन्न मुद्दों पर सदन में अपनी बात रखेंगे। विपक्ष सीबीआई जांच, नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की मांगों सहित पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सदन में प्रश्नकाल भी होगा, जिसके दौरान विधायकों को विभिन्न मामलों पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा।

बेअदबी रोधी कानून में संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना

विशेष सत्र में बेअदबी रोधी कानून में संशोधन विधेयक और रंजीतगढ़ विकास प्राधिकरण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। बेअदबी रोधी कानून के कुछ प्रावधानों पर श्री अकाल तख्त साहिब की आपत्तियों के बाद सरकार ने इस विषय पर विचार-विमर्श किया है। वहीं, रंजीतगढ़ विकास प्राधिकरण विधेयक का उद्देश्य कंडी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है।

इन मुद्दों के चलते पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब सदन की कार्यवाही के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR के खिलाफ प्रस्ताव, सिल्क रूट को दोबारा खोलने की मांग और प्रस्तावित विधेयकों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच क्या सहमति बनती है।

पंजाब विधानसभा के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, भगवंत मान का पुतला जलाया

पंजाब विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस का प्रदर्शन, नशा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन सदन के बाहर कांग्रेस विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला जलाकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने मानसा में नशा-विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या, राज्य में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और सरकारी आवासों पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली के नेताओं के कथित कब्जे जैसे मुद्दे उठाते हुए सरकार को घेरा।

कांग्रेस विधायकों ने इन मामलों में सरकार की जवाबदेही तय करने और मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगने की बात कही। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इन मुद्दों को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

झोटा हत्याकांड पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे प्रताप सिंह बाजवा

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस परविंदर सिंह झोटा की हत्या समेत राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुख्यमंत्री से सीधा जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए और मुख्यमंत्री को सदन में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि नशे और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। पार्टी इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।

नशा और कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग

कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने कहा कि विपक्ष राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की मांग करेगा। उन्होंने मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए राज्य में गैंगस्टर गतिविधियों और रंगदारी के लिए मिल रही कथित धमकियों पर चिंता जताई।

कोटली ने नशीले पदार्थों से जुड़ी आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाने की बात कही। उन्होंने संगरूर के गुलजार सिंह के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर भी सदन में चर्चा होनी चाहिए।

परगट सिंह ने भी सरकार से जवाब मांगने की बात कही

जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि वे इन सभी मुद्दों को विधानसभा में उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद विधानसभा पहुंचे परगट सिंह ने नशे, कानून-व्यवस्था और राज्य के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने की बात कही।

विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस के प्रदर्शन से पंजाब की राजनीति में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अब सदन की कार्यवाही के दौरान यह देखना होगा कि सरकार इन सवालों पर क्या जवाब देती है और किन मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ती है।

पंजाब दौरे पर अमित शाह ने AAP सरकार को घेरा, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की मौत पर उठाए सवाल

लुधियाना / मानसा / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पंजाब दौरे के दौरान राज्य में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला। मंगलवार को गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़े मामलों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद शाह ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशीले पदार्थों का कारोबार गंभीर चुनौती बना हुआ है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमित शाह ने गुरदासपुर के विक्रमजीत सिंह, संगरूर के गुलजार सिंह और मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने पंजाब सरकार से सवाल किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में जमीनी हालात चिंताजनक हैं और नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों से मिलने का उनका उद्देश्य उनके दुख में शामिल होना और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाना था।

‘गांव-गांव में बिक रहा नशा’, AAP सरकार से पूछे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार राज्य में नशीले पदार्थों का कारोबार अब भी चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बरामदगी का उल्लेख करते हुए नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।

शाह ने पंजाब सरकार से PIT-NDPS कानून के तहत की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनके दावे के अनुसार, पिछले एक साल में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज किए गए, लेकिन नशे के कारोबार से प्रभावित क्षेत्रों में गिरफ्तारियों को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर मामलों की समीक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘गालियां देने से फायदा नहीं, नशे का कारोबार बंद करें’

अमित शाह ने कहा कि पंजाब दौरे पर आने का उनका उद्देश्य नशे से प्रभावित परिवारों को सांत्वना देना था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी या उनके प्रति नाराजगी जताने से नशे की समस्या का समाधान नहीं होगा।

शाह ने राज्य सरकार से अपील की कि नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार नशे के खिलाफ अभियान में पंजाब के लोगों के साथ खड़ी है।

BJP सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त पंजाब का वादा

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान कर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पंजाब की जनता से वादा दोहराया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा जाएगा।

शाह ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए और इस तरह की घटनाओं में शामिल आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

‘पाताल से भी ढूंढ निकाले जाएंगे आरोपी’, CBI जांच पर शाह का बयान

परविंदर सिंह झोटा के मामले का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के फैसले का स्वागत किया और दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा दिया।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद CBI की टीम मानसा पहुंची और मामले की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू की। शाह ने गुरदासपुर और संगरूर से जुड़े अन्य मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की मांग उठाई।

झोटा परिवार से मुलाकात, इंसाफ की मांग पर कायम परिजन

मानसा में अमित शाह ने एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की। परिवार ने उनसे मामले में इंसाफ दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। परिजनों के अनुसार, शाह ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया और जांच में कार्रवाई को लेकर इंतजार करने के लिए कहा।

झोटा परिवार और समर्थक मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। CBI जांच शुरू होने के बाद अब इस मामले में जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।

अमित शाह का यह दौरा पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को भी सामने लाता है। जहां भाजपा ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, वहीं झोटा मामले को CBI को सौंपने का फैसला पंजाब सरकार की ओर से परिवार की मांग स्वीकार किए जाने के रूप में सामने आया है।

Punjab Employees Strike: पंजाब में 21-22 अक्टूबर को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की हड़ताल

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने 21-22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल का ऐलान किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान से बैठक और मांगों के समाधान की मांग।

जालंधर / सत्ता संदेश

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर विरोध तेज हो गया है। पंजाब मुलाजिम एवं पेंशनर सांझा फ्रंट और अन्य सरकारी कर्मचारी संगठनों ने 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल करने का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से बैठक बुलाकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रधानों ने बातचीत के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अक्टूबर की शुरुआत में सरकारी कर्मचारियों के साथ बैठक करने और उनकी मांगों का समाधान करने का भरोसा दिया था। हालांकि, अक्टूबर के कई दिन बीत जाने के बावजूद बैठक नहीं हुई। इसी के विरोध में संगठनों ने 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल करने का फैसला किया है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। संगठनों ने सरकार से जल्द बैठक बुलाने और कर्मचारियों तथा पेंशनरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 21 और 22 अक्टूबर की हड़ताल के बाद बड़े स्तर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि आंदोलन आगे बढ़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

इस हड़ताल का सरकारी कार्यालयों में कामकाज और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित विभागों में कर्मचारियों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।