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पीड़िता के परिवार से मिलने से रोकने का आरोप, मीरवाइज उमर फारूक ने कहा- घर में नजरबंद किया गया

कश्मीर / सत्ता संदेश

कश्मीर के धार्मिक नेता Mirwaiz Umar Farooq ने आरोप लगाया है कि उन्हें बडगाम जिले में कथित दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता के परिवार से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया।

मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को दावा किया कि वे पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त करना और उन्हें सांत्वना देना चाहते थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके।

यह मामला उस समय सामने आया है जब कश्मीर में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर पहले से ही तनाव और गुस्से का माहौल है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर न्याय की मांग तेज हो रही है और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध भी जताया जा रहा है।

मीरवाइज ने आरोप लगाया कि प्रशासन लोगों को संवेदना व्यक्त करने और पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने से रोक रहा है, जो कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पाबंदियां जनता के बीच असंतोष को और बढ़ा सकती हैं।

प्रशासन की ओर से हालांकि इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अक्सर संवेदनशील मामलों में नेताओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

इस घटना के बाद घाटी में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूरे क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था को भी सतर्क रखा गया है।

खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन के बाद कश्मीर के कई हिस्सों में लगा प्रतिबंध

श्रीनगर, दो मार्च (भाषा) कश्मीर में सोमवार को अधिकारियों ने उन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के दौरान शनिवार को तेहरान में एक हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है।

अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर अवरोधक लगाकर बंद कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जुटने से रोकने के लिए पूरे शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया आबादी है। खामेनेई के मौत के खिलाफ लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखे गए। प्रदर्शनकारियों को छाती पीटकर मातम मनाते और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाते देखा गया। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण चौराहों पर कटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं। घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं।

ये पाबंदियां मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा एक दिवसीय बंद के आह्वान की पृष्ठभूमि में आई हैं।

मीरवाइज ने कहा, “हम लोगों से इसे एकता, गरिमा और पूर्ण शांति के साथ मनाने का आग्रह करते हैं।”

एमएमयू के बंद के आह्वान को विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है।

मुफ्ती ने कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक के बंद के आह्वान को हम अपना पूर्ण समर्थन देते हैं। यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय पूरी मुस्लिम उम्माह और सच्चाई के साथ खड़े सभी लोगों को आहत करता है।”

अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर निजी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को भी दो दिन के लिए बंद कर दिया है।