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सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: चांदी एक झटके में 32,000 रुपये महंगी, सोना 1.73 लाख के पार

बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के संकट के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोमवार को भूकंप जैसी स्थिति देखी गई। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की ओर रुख करने से सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

चांदी ने छुआ 3 लाख का आंकड़ा: अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमत में एक ही दिन में 32,000 रुपये (11.94%) की भारी बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही चांदी का भाव 3,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले शुक्रवार को 2,68,000 रुपये था।

सोने की कीमतों में भी लगी आग: चांदी की राह पर चलते हुए 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के भाव में भी 8,100 रुपये (4.92%) की तेजी आई। दिल्ली में सोना अब 1,72,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर सोना 2.21 प्रतिशत बढ़कर 5,394.28 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान द्वारा पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए जवाबी हमलों के कारण निवेशक जोखिम भरे बाजार से हटकर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों (Safe-haven assets) में पैसा लगा रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी बेरोजगारी और विनिर्माण के आंकड़े जारी होने के बाद कीमतों में और अधिक अस्थिरता देखी जा सकती है।

ईरान-इजरायल तनाव: यूएई में फंसा पंजाबी गायक एमी विर्क का परिवार; सीएम भगवंत मान ने सुरक्षित वापसी का दिया भरोसा

पंजाब डेस्क : पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पंजाबी मनोरंजन जगत पर भी देखने को मिल रहा है। मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता एमी विर्क (Ammy Virk) का परिवार इस समय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंसा हुआ है। एमी विर्क खुद भारत में हैं और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच विदेश में मौजूद अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।

परिवार की सुरक्षा के लिए सरकार सक्रिय: एमी विर्क ने बताया कि उनकी पत्नी, बेटी और बहनें यूएई में हैं। इस मामले की जानकारी मिलते ही आम आदमी पार्टी पंजाब के महासचिव बलतेज पन्नू ने गायक से फोन पर संपर्क किया और स्थिति का जायजा लिया। पन्नू ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और परिवार की सुरक्षित वतन वापसी के लिए केंद्र सरकार के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है।

पंजाबियों की वापसी के लिए विशेष कमेटी का गठन: खाड़ी देशों में फंसे पंजाबियों की मदद के लिए पंजाब सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने जानकारी दी कि एडीजीपी एनआरआई विंग आर.के. जायसवाल की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।

यह कमेटी प्रभावित लोगों का डेटा जुटा रही है और उनकी सुरक्षित निकासी के लिए आपातकालीन योजना पर काम कर रही है।मंत्री ने यह भी बताया कि ओमान (मस्कट) से भारत के लिए उड़ानें नियमित रूप से चल रही हैं और वीजा संबंधी प्रक्रियाओं को भी तेज कर दिया गया है। फिलहाल सरकार को मध्य एशिया से लगातार मदद के लिए फोन आ रहे हैं।

लुधियाना में ट्रेन की चपेट में आने से दो प्रवासी मजदूरों की मौत; एक मृतक था 7 बेटियों का पिता

पंजाब डेस्क : पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में रेलवे ट्रैक पार करना दो प्रवासी मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हुआ। शहर में दो अलग-अलग रेल हादसों में दो लोगों की जान चली गई। ये दोनों ही अपने परिवारों के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे, जिनकी मौत के बाद परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पहला हादसा: धूरी लाइन क्षेत्र पहली घटना धूरी लाइन इलाके में हुई, जहाँ बिहार के भागलपुर जिले के रहने वाले भैरो प्रसाद की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह दशमेश नगर में रहते थे और ट्रैक्टर के पुर्जे बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। परिजनों के अनुसार, वह घर से कुछ जरूरी सामान खरीदने निकले थे, लेकिन ट्रैक पार करते समय हादसे का शिकार हो गए। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।

दूसरा हादसा: ढंडारी क्षेत्र दूसरी घटना ढंडारी इलाके में हुई, जहाँ 45 वर्षीय मुलई नामक व्यक्ति की ट्रैक पार करते समय ट्रेन से टकराकर मौत हो गई। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज (गोरखपुर) के रहने वाले मुलई एक फैक्ट्री मजदूर थे। उन पर 7 बेटियों और एक बेटे वाले बड़े परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी।

पुलिस कार्रवाई: घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी (GRP) ने मौके पर पहुँचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

जालंधर में दर्दनाक हादसा: निर्माणाधीन पुल के गड्ढे में गिरकर बाइक सवार की मौत; तड़पते युवक की मदद के बजाय सामान ले उड़े लोग

पंजाब डेस्क : पंजाब के जालंधर से जंडूसिंघा की ओर जाने वाले रोड पर एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहाँ निर्माणाधीन पुल के लिए खोदे गए 20 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से एक अज्ञात बाइक सवार की मौत हो गई। यह हादसा रात करीब 11:30 बजे हुआ, लेकिन युवक का शव अगली सुबह बरामद किया गया।

प्रशासन और मजदूरों की बड़ी लापरवाही: घटनास्थल पर पुल के पिल्लर के लिए गड्ढा खोदा गया था, लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल मिट्टी के ढेर लगाकर खानापूर्ति की गई थी। वहां न तो कोई साइन बोर्ड था और न ही लाइट का प्रबंध। हादसे के समय पास ही सो रहे मजदूरों ने आवाज तो सुनी, लेकिन उन्होंने यह सोचकर अनदेखी कर दी कि गिरने वाला व्यक्ति खुद बाहर निकल जाएगा। सुबह जब स्थानीय दुकानदार ने देखा, तो युवक की मौत हो चुकी थी और सरिया लगने के कारण उसकी आंख निकली हुई थी।

इंसानियत शर्मसार:

लूटपाट की आशंका: मौके पर पहुँची पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने लूटपाट की आशंका जताई है। मृतक के पास से उसके हेडफोन और बाइक की चाबियां तो मिलीं, लेकिन उसका मोबाइल फोन और पर्स गायब है। लोगों का कहना है कि तड़पते हुए युवक की मदद करने के बजाय किसी ने उसका कीमती सामान चोरी कर लिया।

पुलिस जांच शुरू: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि यह केवल एक हादसा है या इसके पीछे निर्माण कंपनी की कोई बड़ी लापरवाही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है।

जालंधर के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी: APJ और पुलिस DAV स्कूल को मिली ईमेल, पुलिस जांच में जुटी

पंजाब डेस्क : पंजाब के जालंधर में आज उस समय हड़कंप मच गया जब दो प्रतिष्ठित स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। जानकारी के अनुसार, रामा मंडी क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एपीजे (APJ) और पुलिस डीएवी (Police DAV) स्कूल को यह धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए हैं।

स्कूल प्रशासन में दहशत: इस घटना के बाद स्कूल प्रशासन और बच्चों के अभिभावकों में दहशत फैल गई। स्कूल प्रबंधकों ने तुरंत इस मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस प्रशासन अब ईमेल के स्रोत का पता लगाने और स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच में जुट गया है।

शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 2,743 अंक टूटा

मुंबई, दो मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच सोमवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,743.46 अंक यानी 3.37 प्रतिशत टूटकर 78,543.73 अंक पर आ गया।

वहीं, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 533.55 अंक यानी 2.11 प्रतिशत गिरकर 24,645.10 अंक पर आ गया।

सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), लार्सन एंड टुब्रो, इटर्नल, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सेंसेक्स में शामिल इकलौता ऐसा शेयर रहा जिसमें बढ़त दर्ज की गई।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 5.38 प्रतिशत गिरकर 76.79 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जंग छिड़ने के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल है।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के समन्वित हवाई हमले में मौत हो गई है। रविवार को इसकी पुष्टि होने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल और क्षेत्र के अन्य अरब देशों पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया है।

एशिया के अन्य बाजारों में जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग नुकसान में रहे, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक बढ़त में कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा, “पश्चिम एशिया में युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता निकट अवधि में बाजार पर दबाव बनाए रखेगी। बाजार के नजरिये से सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से जुड़ा जोखिम है।”

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 7,536.36 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 12,292.81 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

शुक्रवार को सेंसेक्स 961.42 अंक गिरकर 81,287.19 अंक और निफ्टी 317.90 अंक टूटकर 25,178.65 अंक पर आ गया था।

पूर्व सांसद एवं शिक्षाविद जनार्दन वाघमारे का निधन

लातूर, दो मार्च (भाषा) प्रख्यात शिक्षाविद और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. जनार्दन वाघमारे का सोमवार सुबह महाराष्ट्र के लातूर शहर में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिन से अस्वस्थ थे। परिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

वह 91 वर्ष के थे।

सूत्रों के अनुसार, वाघमारे का स्वास्थ खराब होने के बाद उन्हें 24 जनवरी को यहां एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने सोमवार सुबह करीब आठ बजे अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक शरद पवार के करीबी सहयोगी थे और शिक्षा, साहित्य तथा सार्वजनिक सेवा में दिए गए योगदान के लिए उन्हें व्यापक रूप से सराहा जाता रहा।

वाघमारे स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड़ के संस्थापक और कुलपति थे।

चाकुर तहसील के जनवाल गांव में 11 नवंबर, 1934 को जन्मे वाघमारे ने 2008 से 2014 के बीच महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया।

उन्होंने 2001 से 2006 के बीच लातूर नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

चिराग ने बिहार की शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की

पटना, दो मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में लागू एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने के लिए खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।

रविवार को पटना में संवाददाताओं से बातचीत में पासवान ने कहा कि यह आकलन किया जाना चाहिए कि जिस उद्देश्य से कानून लागू किया गया था, क्या वह पूरा हो रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा, “यह समीक्षा जरूरी है कि जिन उद्देश्यों के साथ कानून बनाया गया था, वे पूरे हो रहे हैं या नहीं। यदि नहीं, तो कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।”

पासवान ने स्पष्ट किया कि समीक्षा की बात को शराबबंदी हटाने की वकालत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब हम समीक्षा की बात करते हैं तो अक्सर यह गलतफहमी हो जाती है कि हम शराबबंदी समाप्त करने की बात कर रहे हैं। मेरा मानना है कि किसी भी योजना को समय के साथ बेहतर बनाने के लिए उसकी निरंतर समीक्षा आवश्यक है।”

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पासवान ने कहा कि वह मद्यपान पर नियंत्रण के प्रयासों का पूरा समर्थन करते हैं क्योंकि नशे की लत परिवार और समाज दोनों के लिए घातक है।

उन्होंने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सरकार ने शराबबंदी लागू की थी, तब उनकी पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए भी इस कदम का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा, “शराब के सेवन और निर्माण पर रोक लगाने का विचार सामाजिक दृष्टि से उचित है।”

हालांकि, पासवान ने जहरीली शराब के सेवन से समय-समय पर होने वाली मौतों और राज्य में शराब की कथित ‘होम डिलीवरी’ के आरोपों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “अक्सर जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं। यदि ऐसी घटनाएं अब भी हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं जहरीली शराब का निर्माण हो रहा है।”

पासवान ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कानून के क्रियान्वयन तंत्र की व्यापक समीक्षा आवश्यक है ताकि खामियों को दूर कर इसके उद्देश्य को सुनिश्चित किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लोजपा (रामविलास) के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग की थी। हालांकि, जद(यू) नेताओं ने कानून पर पुनर्विचार की संभावना से इनकार किया है, जबकि भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर अब तक मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई

खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन के बाद कश्मीर के कई हिस्सों में लगा प्रतिबंध

श्रीनगर, दो मार्च (भाषा) कश्मीर में सोमवार को अधिकारियों ने उन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के दौरान शनिवार को तेहरान में एक हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है।

अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर अवरोधक लगाकर बंद कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जुटने से रोकने के लिए पूरे शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया आबादी है। खामेनेई के मौत के खिलाफ लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखे गए। प्रदर्शनकारियों को छाती पीटकर मातम मनाते और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाते देखा गया। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण चौराहों पर कटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं। घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं।

ये पाबंदियां मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा एक दिवसीय बंद के आह्वान की पृष्ठभूमि में आई हैं।

मीरवाइज ने कहा, “हम लोगों से इसे एकता, गरिमा और पूर्ण शांति के साथ मनाने का आग्रह करते हैं।”

एमएमयू के बंद के आह्वान को विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है।

मुफ्ती ने कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक के बंद के आह्वान को हम अपना पूर्ण समर्थन देते हैं। यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय पूरी मुस्लिम उम्माह और सच्चाई के साथ खड़े सभी लोगों को आहत करता है।”

अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर निजी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को भी दो दिन के लिए बंद कर दिया है।

महानदी जल विवाद को लेकर भाजपा सरकार पिछली बीजद सरकार की गलती को सुधार रही है: ओडिशा के महाधिवक्ता

भुवनेश्वर, दो मार्च (भाषा) ओडिशा के महाधिवक्ता (एजी) पीतांबर आचार्य ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार पिछली बीजद सरकार द्वारा की गई उस ‘‘ऐतिहासिक गलती’’ को सुधारने के लिए कदम उठा रही है, जिससे पड़ोसी छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद उत्पन्न हुआ था।

आचार्य ने पुरी में रविवार को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) के सदस्यों के राज्य दौरे से इतर पत्रकारों को यह बयान दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ में बांधों के निर्माण का विरोध न करके एक ऐतिहासिक गलती की थी। हम ओडिशा के लोगों के हित में स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठा रहे हैं।’’

न्यायाधिकरण के सदस्यों ने हीराकुड जलाशय और सतकोसिया घाटी का दौरा किया तथा सोमवार को वे चिल्का झील जाएंगे।

आचार्य ने कहा, ‘‘इन स्थानों को रामसर स्थल घोषित किया गया है और ये क्षेत्र महानदी के प्राकृतिक जल प्रवाह से सीधे जुड़े हुए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘न्यायाधिकरण के सदस्य जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए ओडिशा का दौरा कर रहे हैं। वे सात से 11 मार्च तक छत्तीसगढ़ का भी दौरा करेंगे।’’

ओडिशा ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी इलाकों में बांध के निर्माण से इसके प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे निचले इलाकों के किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

ओडिशा के इन आरोप के बाद 2018 में इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।