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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए।

खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया।

केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया।

पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
नई दिल्ली, 26 मई 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।

केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े

नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि

कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।

नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में है नारी शक्ति
  • शोभा करंदलाजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सितंबर 2023 में संसद में समर्थन करते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता जब देश की नारियां भी इसके साथ ही उन्नति करें। उनका यह विश्वास एमएसएमई क्षेत्र (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) में सरकार के काम में हर रोज दिखाई देता है।

एमएसएमई  क्षेत्र को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। लेकिन अगर गहराई से देखें तो इसके दिल में महिला उद्यमियों का मूक बल बसता है। आखिरकार आज इस मूक बल को वह राष्ट्रीय मान्यता, संस्थागत समर्थन और नीतिगत गति मिल रही है जिसका वह हमेशा से हकदार है।

आँकड़े बयां करते हैं कहानी

भारत के एमएसएमई  इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हुए हैं। वास्तव में, ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ पंजीकरण के अनुसार, देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई में महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और ये रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। पूरी तरह से ऑनलाइन, कागज रहित और स्व-घोषणा पर आधारित इस व्यवस्था ने उस नौकरशाही बाधा को समाप्त कर दिया, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी। जनवरी 2023 में शुरू किए गए ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ ने अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत उन महिलाओं तक पहुँच बनाकर इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया, जिनके पास ‘पैन’ नंबर या ‘जीएसटीएन’  नहीं था। इसने उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभों के दायरे में लाने का काम किया।

सरकार ने महिलाओं को विकास वाहक के रूप में अपने आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है।

आर्थिक शक्ति के रूप में नारी शक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति है। उन्होंने ही कहा था कि  जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार सशक्त होते हैं और जब परिवार सशक्त होते हैं, तो राष्ट्र निरंतर मज़बूत होता जाता है।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ राजनीतिक क्षेत्र में इस दर्शन की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक व्यापक और बहुआयामी नीतिगत ढांचे के रूप में सामने आई है, जो ऋण, कौशल, बाज़ार तक पहुंच, पहचान और गरिमा जैसे पहलुओं को समाहित करती है।

महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नीतिगत संरचना

एमएसएमई मंत्रालय ने अपने हर बड़े कार्यक्रम और योजना में महिलाओं के सशक्तिकरण को व्यवस्थित रूप से शामिल किया है।

ये सभी मिलकर, आपूर्ति पक्ष पर आठ मुख्य श्रेणियों के माध्यम से उद्यमियों को सहायता प्रदान करते हैं: तकनीक तक पहुँच, ऋण और वित्त तक पहुँच, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, अवसरंचना सहायता, औपचारिकीकरण और समावेशन, बाज़ार तक पहुँच, और उद्योग-स्तरीय कौशल विकास।

पिछले पाँच वर्षों में, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 3.2 लाख से ज़्यादा महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों को सहायता दी गई है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से 39% महिलाएँ हैं जो इस योजना की रूपरेखा और महिलाओं की कुछ कर दिखाने की ललक, दोनों को दर्शाता है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट महिला ऋणदाताओं को 90 प्रतिशत तक का बढ़ा हुआ गारंटी कवर प्रदान करता है। इससे बैंक बिना कुछ गिरवी रखे महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हैं।

इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक खरीद नीति  में संशोधन कर यह अनिवार्य किया गया कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से ही खरीदें। इससे महिला उद्यमियों के लिए एक सुनिश्चित और अनुमानित बाज़ार तैयार होता है, जिससे सरकारी खर्च को महिलाओं के व्यवसाय की वृद्धि में बदला जा रहा है। यह देखकर खुशी होती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा की गई कुल खरीद का 3.5 प्रतिशत हिस्सा महिला एमएसएमई  से ही खरीदा गया था।

‘जेडइडी’ (जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट) प्रमाणन योजना के तहत, महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई को प्रमाणन शुल्क पर सौ प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। ये विस्तृत विवरण काफी महत्वपूर्ण हैं और ये मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में गहराई से विचार किया है कि महिलाओं को कहाँ कहाँ बाधाओं का सामना करना पड़ता है और ठीक उन्हीं बाधाओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ सहायता दी गई।

‘महिला कॉयर योजना’, के तहत कॉयर क्षेत्र में काम करने वाली महिला कारीगरों को विशेष कौशल विकास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ‘एमएसएमई- व्यापार सशक्तिकरण और विपणन’ के तहत महिलाओं को मार्केटिंग के लिए मदद करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 लाख लाभार्थियों में से 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘यशस्विनी अभियान’ में, एमएसएमई  योजनाओं और पंजीकरण से मिलने वाले लाभों के बारे में महिलाओं को जानकारी देने के लिए पूरे देश में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए आयोजित ‘एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन’ 3.0 के तहत 18,888 से अधिक आइडिया प्राप्त हुए, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि महिलाओं में रचनात्मक और उद्यमशीलता की ऊर्जा का भंडार मौजूद है, जो बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहा है।

इसके अलावा, मंत्रालय के पास एक समर्पित महिला उद्यमिता प्रकोष्ठ है, जो विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करके, महिलाओं के लिए प्राप्त परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन करके, तथा इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ जुड़कर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।

इन सभी पहलों ने जेंडर टारगेटिंग (लैंगिक लक्ष्यीकरण) और अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया है। ये कदम योजनाओं के भीतर केवल एक सब्सिडी प्रावधान के रूप में ‘महिलाओं के समावेश’ से आगे बढ़कर, महिला-अनुकूल उद्यमिता सहायता के लिए एक अधिक सुविचारित और व्यापक ढांचे की ओर बढ़ने के सफर को दर्शाते हैं।

कौशल, आत्मविश्वास, समुदाय

क्रेडिट और बाज़ारों से परे, सरकार ने यह माना है कि उद्यमिता कौशल और आत्मविश्वास का भी विषय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, जहाँ महिलाएँ पारंपरिक रूप से अपने समाज की आर्थिक रीढ़ रही हैं, लक्षित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रशिक्षित प्रतिभागियों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक हो।

स्वयं सहायता समूहों को एमएसएमई सहायता तंत्रों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे महिला उद्यमियों के ऐसे समुदाय बने हैं जो एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। वे न केवल अपना व्यवसाय खड़ा करते हैं, बल्कि आपस में जुड़कर एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार करते हैं।

यह एक ऐसी सरकार है जो निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। प्रत्येक बजट, प्रत्येक योजना और प्रत्येक पोर्टल का सरलीकरण उस विशाल इमारत की एक ईंट के समान है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री मोदी ने एक सरल, किंतु क्रांतिकारी विचार के साथ रखी थी—कि भारत की महिलाएं एक ऐसी शक्ति हैं जिन्हें अब स्वतंत्र और सशक्त होने का अवसर मिलना चाहिए।

हर उद्यम में नारी शक्तिकी भावना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने दुनिया को बताया कि भारत की महिलाएँ यहाँ की संसद का हिस्सा हैं। इस सरकार की एमएसएमई नीतियां दुनिया को यह बता रही हैं कि भारत की महिलाएँ देश के बाजारों, कारखानों, उसकी निर्यात श्रृंखलाओं, उसके नवाचार केंद्रों और उसके बोर्डरूम्स की भी हकदार हैं।

ये उसी एक सत्य की अभिव्यक्तियाँ हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के अपने विज़न का आधार बनाया है। एक विकसित भारत वह भारत है, जहाँ 3 करोड़ से भी ज़्यादा महिला उद्यमी (और यह संख्या लगातार बढ़ रही है) विकास की असली ताकत हैं।

अभी हम उस लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुँचे हैं, लेकिन इस सरकार की देखरेख में और प्रधानमंत्री के पक्के इरादों के साथ, हम यकीनन उस राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

(लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मैसूरु स्थित “केन्द्रीय खाद्य तकनीकी एवं अनुसंधान संस्थान” (सीएफटीआरआई) में बायोनेस्ट का उद्घाटन किया, खाद्य स्टार्टअप पर विशेष ध्यान दिया गया।

सीएफटीआरआई ने नए समझौता ज्ञापनों, पीपीपी-आधारित उत्पाद लॉन्च और उद्योग साझेदारी के साथ अपने इनक्यूबेशन दायरे का विस्तार किया है।

भारत का इनक्यूबेशन तंत्र प्रयोगशाला अनुसंधान को वाणिज्यिक अनुप्रयोगों से जोड़ने के लिए एक प्रमुख मंच होगा।

डॉ. सिंह ने खाद्य नवाचार क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान-उद्योग संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) में बीआईआरएसी-बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया और स्टार्टअप-संचालित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों की एक प्रदर्शनी की समीक्षा की। इससे संस्थान के इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को प्रयोगशाला अनुसंधान को वाणिज्यिक अनुप्रयोगों से जोड़ने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित किया गया।

समर्पित इनक्यूबेशन सुइट्स और साझा बुनियादी ढांचे के साथ एक अत्याधुनिक सुविधा के रूप में डिजाइन किया गया, बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर से खाद्य स्टार्टअप को बढ़ावा मिलने, उन्नत अनुसंधान का समर्थन करने, खाद्य जैव प्रसंस्करण और जैव प्रौद्योगिकी में सत्यापन और नियामक सुविधा को बढ़ाने और वैज्ञानिक विचारों को बाजार के लिए तैयार समाधानों में परिवर्तित करने में सक्षम होने की उम्मीद है।

मार्च 2026 तक, बायोनेस्ट सुविधा ने 26 स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान किया है, जिनमें भौतिक और हाइब्रिड इनक्यूबेट्स के साथ-साथ स्नातक उद्यम भी शामिल हैं – जिनमें से कई पहले ही उत्पाद का व्यावसायीकरण कर चुके हैं। इनक्यूबेटेड कंपनियों ने सामूहिक रूप से 12 पेटेंट दाखिल किए हैं और अनुसंधान प्रकाशनों में योगदान दिया है, जो बाजार परिणामों के अनुरूप नवाचार पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।

ये स्टार्टअप न्यूट्रास्यूटिकल्स, प्रिसिजन फर्मेंटेशन, प्रोबायोटिक्स और पोस्टबायोटिक्स, सीआरआईएसपीआर-आधारित प्रौद्योगिकियों और वानस्पतिक उत्पादों जैसे उभरते क्षेत्रों में काम करते हैं, जो खाद्य और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के भीतर उच्च-मूल्य वाले, विज्ञान-संचालित क्षेत्रों की ओर बदलाव का संकेत देते हैं।

डॉ. सिंह ने उद्यमियों और हितधारकों के साथ अपनी बातचीत के दौरान, इस बात पर जोर दिया कि उद्यम शुरू करना आसान हो गया है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए निरंतर मूल्यवर्धन, बाजार तक पहुंच और मजबूत उद्योग संबंध आवश्यक हैं। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया और रेडी-टू-ईट और सुविधाजनक खाद्य पदार्थों सहित उपभोक्ता मांग के अनुरूप नवाचार को अपनाने पर बल दिया।

केन्द्रीय मंत्री ने उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और अनुसंधान, विकास और नवाचार को गति देने के उद्देश्य से नए वित्तपोषण तंत्र और संस्थागत सहायता ढाँचों का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक संस्थानों को डिजिटल प्लेटफार्मों और लक्षित संचार रणनीतियों के माध्यम से अपनी पहुँच बढ़ानी चाहिए ताकि प्रौद्योगिकियों के बारे में जागरूकता और उन्हें अपनाने में सुधार हो सके। इसके साथ ही जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और विशेष पोषण जैसे क्षेत्रों में समन्वय को प्रोत्साहित किया जा सके।

इस कार्यक्रम में चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए और सीएफटीआरआई में विकसित दो उत्पादों का शुभारंभ किया गया, जो उद्योग जगत के साथ निरंतर जुड़ाव और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण का संकेत देता है। अधिकारियों ने कहा कि नवाचारों को व्यापक स्तर पर फैलाने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए इस तरह के सहयोग महत्वपूर्ण हैं।

संस्थान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, इसके शोध कार्यों और तकनीकी योगदानों को दर्शाने वाले प्रकाशनों का एक सेट जारी किया गया, जिसमें एक कॉफी टेबल बुक, शोध एवं विकास उपलब्धियों का संकलन, एक फोटो यात्रा और पारंपरिक व्यंजनों का संग्रह शामिल है। इस उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए एक स्मारक डाक कवर और एक चित्र पोस्टकार्ड का भी अनावरण किया गया।

यह प्रदर्शनी संस्थान की प्रयोगशाला से बाजार तक की प्रक्रिया का एक जीवंत प्रदर्शन थी, जिसमें सीएफटीआरआई और इसके लाइसेंसधारियों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों और स्टार्टअप नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। 450 से अधिक प्रौद्योगिकियों को विकसित और हजारों लाइसेंसधारियों को हस्तांतरित करने के साथ, संस्थान खाद्य अनुसंधान, उद्योग सहयोग और उद्यम विकास के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरा है।

अधिकारियों ने कहा कि बायोनेस्ट इकोसिस्टम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से रुचि आकर्षित कर रहा है, जिसमें स्टार्टअप वैश्विक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, वाणिज्यिक उपलब्धियां और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हासिल कर रहे हैं, और विशेष खाद्य अनुप्रयोगों के लिए रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

ये सभी घटनाक्रम सामूहिक रूप से अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण से हटकर बाजार-आधारित खाद्य नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बदलाव का संकेत देते हैं, जिसमें सीएसआईआर-सीएफटीआरआई भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विकास के अगले चरण को गति देने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, इनक्यूबेशन सहायता और उद्योग सहयोग को संयोजित करने वाले एक एकीकृत मंच के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।