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महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

बोधगया मंदिर एक्ट 1949 को रद्द करने की अपील, विटिकशिला महा बुद्ध विहार ट्रस्ट ने उठाई मांग

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

विटिकशिला महा बुद्ध विहार ट्रस्ट ने भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजकर बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 को निरस्त करने और महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की है।

ट्रस्ट द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि बोधगया विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। इसी स्थान पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यहीं से बौद्ध धर्म का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल का प्रबंधन बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1949 में लागू किया गया बोधगया मंदिर एक्ट महाबोधि महाविहार के प्रबंधन के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान समय में इस कानून के कुछ प्रावधान बौद्ध समुदाय की धार्मिक परंपराओं, भावनाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं।

ट्रस्ट का कहना है कि महाबोधि महाविहार केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इसके संचालन, संरक्षण और धार्मिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपी जानी चाहिए, ताकि इसकी परंपराओं और धार्मिक विरासत का संरक्षण उनकी मान्यताओं के अनुसार किया जा सके।

बौद्ध संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 की समीक्षा करते हुए आवश्यक संशोधन या इसे निरस्त करने पर विचार किया जाए और महाबोधि महाविहार का प्रशासन एवं प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।

फिलहाल इस ज्ञापन पर केंद्र सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 में किसी प्रकार का संशोधन या बदलाव किया जाता है।

यह मुद्दा धार्मिक आस्था, विरासत संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण आने वाले समय में व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिक्किम का तीन दिवसीय दौरा शुरू किया, भारत-चीन सीमा का करेंगी दौरा

गंगटोक / सत्ता संदेश

राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मंगलवार को सिक्किम के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे की शुरुआत की। इस दौरान वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-चीन सीमा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति मुर्मू दोपहर लगभग 12 बजे सिक्किम की राजधानी Gangtok के लिबिंग हेलीपैड पर पहुंचीं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। राज्यपाल Om Prakash Mathur और मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने स्वयं उपस्थित रहकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।

आगमन के बाद राष्ट्रपति सीधे लोक भवन के लिए रवाना हुईं, जहां उनके प्रवास की व्यवस्था की गई है। अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति राज्य में कई आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी और विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी कर सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा विशेष रूप से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह भारत-चीन सीमा से लगे क्षेत्रों का भी निरीक्षण करेंगी। सिक्किम का यह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और यहां सेना तथा सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण मौजूदगी रहती है।

राष्ट्रपति के इस दौरे को राज्य में विकास कार्यों, जनकल्याण योजनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति के आकलन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्रशासन ने उनके दौरे को लेकर व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की हैं।

दौरे के दौरान राष्ट्रपति स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के लोगों से भी मुलाकात कर सकती हैं। इसके अलावा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

सिक्किम सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने इस दौरे को महत्वपूर्ण बताया है, जिससे राज्य के विकास और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्च स्तर पर संवाद को बल मिलने की उम्मीद है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली / सत्ता संदेश

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करें; भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया

वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने आज (20 मई, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों ने हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब देश विकास के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है, तो अधिकारियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होगी। उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। उन्हें नियमों का पालन करना होगा, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को भूलना नहीं होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए। साथ ही, उन्हें परिणाम भी देने होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि, जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है। जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं। इसलिए, अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे जनता के हित में इन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे भारत की जनता, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को, अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा प्रहार: ‘राष्ट्रपति और सिख समुदाय का अपमान बर्दाश्त नहीं’

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री ने सदन में हुए हंगामे और विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों को देश के संवैधानिक मूल्यों और विभिन्न समुदायों का अपमान करार दिया।

संविधान और राष्ट्रपति का अपमान: प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा में राष्ट्रपति के संबोधन पर चर्चा न होने देना सीधे तौर पर संविधान का अनादर है। उन्होंने इसे देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि विपक्ष के पास ‘संविधान’ शब्द बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।

सदन में अमर्यादित व्यवहार और ‘असम’ का मुद्दा: सदन की कार्यवाही के दौरान चेयर पर कागज फेंके जाने की घटना पर दुख जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह उन सदस्यों का अपमान है जो असम और दलित पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने पूर्व में भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने के विरोध को भी असम और कलाप्रेमियों के प्रति कांग्रेस की नफरत का प्रतीक बताया।

राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू विवाद : प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। पीएम ने कहा कि एक ऐसे व्यक्ति को गद्दार कहना जिसका परिवार देश के लिए शहीद हुआ हो, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह पूरे सिख समुदाय और गुरुओं का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के मन में सिखों के प्रति गहरी नफरत भरी है।

क्या था मामला? ज्ञात हो कि संसद के मकर द्वार के बाहर राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसमें राहुल गांधी ने बिट्टू को ‘गद्दार’ और जवाब में बिट्टू ने राहुल गांधी को ‘देश का दुश्मन’ कहा था। इस घटना के बाद भाजपा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।