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Russia Avalanche: 11 पर्वतारोहियों की मौत, 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन में मौसम बना बाधा

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

रूस के उत्तरी काकेशस क्षेत्र में एक दर्दनाक हिमस्खलन ने बड़ी तबाही मचा दी है। काबारडिनो-बाल्कारिया क्षेत्र के बेजेंगी गॉर्ज में आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से 11 पर्वतारोहियों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में छह अन्य पर्वतारोही घायल हुए हैं।

स्थानीय इमरजेंसी सर्विस के अनुसार, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाका राहत एवं बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बन रहा है। लगातार हिमस्खलन के खतरे के बीच बचाव दल लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

33 पर्वतारोहियों के दल को बनाया निशाना

हादसा रविवार शाम करीब 5 बजे स्थानीय समय के अनुसार बेजेंगी गॉर्ज में हुआ। बताया जा रहा है कि करीब 5,025 मीटर ऊंचे माउंट मिजिरगी से अचानक भारी मात्रा में बर्फ नीचे की ओर खिसकी और 33 पर्वतारोहियों के समूह को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय बचाव दल को मौके पर भेजा गया। इसके अलावा एमआई-8 हेलीकॉप्टर की भी मदद ली गई। शुरुआती अभियान में तीन पर्वतारोहियों को सुरक्षित बाहर निकालकर नालचिक पहुंचाया गया।

इमरजेंसी सर्विस के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 9 बजे तक 10 पर्वतारोही खुद पहाड़ से नीचे उतरने में सफल रहे थे। हालांकि छह लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।

50 से ज्यादा बचावकर्मी अभियान में जुटे

लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए 50 से ज्यादा इमरजेंसी वर्कर्स को अभियान में लगाया गया है। लेकिन क्षेत्र में खराब मौसम, कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और दोबारा हिमस्खलन की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा है ताकि राहतकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

इस साल पर्वतारोहियों की मौत की दूसरी बड़ी घटना

रूस में हुआ यह हादसा इस साल पर्वतारोहण से जुड़ी बड़ी त्रासदियों में एक है। इससे पहले 30 जुलाई को पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर भी हिमस्खलन ने कई पर्वतारोहियों की जान ले ली थी।

ब्रॉड पीक पर कैंप 2 और कैंप 3 के बीच हुए हादसे में कुल 10 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी। मृतकों में विश्व प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्सदाई) भी शामिल थे।

इस अभियान में पांच नेपाली पर्वतारोही शामिल थे और दल का नेतृत्व निर्मल पुर्जा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक पर्वतारोही भी दल का हिस्सा थे।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर दुनिया के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बदलते मौसम और हिमस्खलन के गंभीर खतरे को उजागर किया है।