ब्रेकिंग न्यूज़
सिंगापुर ओपन में भारतीय जोड़ी का धमाका, सात्विक-चिराग ने दुनिया की नंबर-1 जोड़ी को हराकर फाइनल में बनाई जगह

सिंगापुर / सत्ता संदेश

भारतीय बैडमिंटन के स्टार युगल खिलाड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Singapore Open सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। भारतीय जोड़ी ने सेमीफाइनल में विश्व नंबर एक और शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरियाई जोड़ी Kim Won-ho और Seo Seung-jae को सीधे गेम में हराकर बड़ा उलटफेर किया।

52 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में भारत की चौथी वरीय जोड़ी ने मौजूदा विश्व चैंपियन को 21-19, 21-18 से शिकस्त दी। इस जीत के साथ सात्विक और चिराग ने न केवल फाइनल का टिकट हासिल किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वे दुनिया की किसी भी शीर्ष जोड़ी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

पहले गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। स्कोर लगातार बराबरी पर चलता रहा, लेकिन महत्वपूर्ण क्षणों में भारतीय जोड़ी ने संयम बनाए रखा और 21-19 से गेम अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में भी कोरियाई खिलाड़ी वापसी की कोशिश करते रहे, लेकिन सात्विक और चिराग ने आक्रामक खेल तथा बेहतरीन समन्वय के दम पर बढ़त बनाए रखी और 21-18 से मुकाबला जीत लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय जोड़ी की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका शानदार तालमेल, तेज रिफ्लेक्स और दबाव की स्थिति में शांत रहना है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों खिलाड़ियों ने विश्व बैडमिंटन में भारत की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सामने विश्व नंबर एक और मौजूदा विश्व चैंपियन जोड़ी थी। ऐसे प्रतिद्वंद्वी को सीधे गेम में हराना किसी भी जोड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों के लिए यह प्रदर्शन उत्साहजनक है, खासकर ऐसे समय में जब देश के खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं। सात्विक और चिराग पहले भी कई बड़े खिताब जीत चुके हैं और अब उनके पास सिंगापुर ओपन का प्रतिष्ठित खिताब जीतने का अवसर है।

खेल विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारतीय जोड़ी फाइनल में भी इसी लय और आत्मविश्वास के साथ खेलती है, तो उसके पास ट्रॉफी जीतने की मजबूत संभावना होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म उन्हें विश्व बैडमिंटन की सबसे खतरनाक पुरुष युगल जोड़ियों में शामिल करती है।

अब सभी की नजर फाइनल मुकाबले पर टिकी है, जहां सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भारत को एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब दिलाने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगे।

एशियाई खेल ट्रायल्स में हार के बाद भावुक हुईं विनेश फोगाट, बोलीं- ‘मैं फेल नहीं हुई हूं’

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Vinesh Phogat ने एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स से बाहर होने के बाद भी हार नहीं मानी है। महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में हारने के बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह असफल नहीं हुई हैं और पहले से अधिक मजबूती के साथ वापसी करेंगी।

ट्रायल्स के दौरान विनेश का मुकाबला युवा पहलवान Meenakshi Goyat से हुआ, जिसमें उन्हें 4-6 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी रहा और अंत तक परिणाम को लेकर रोमांच बना रहा। हार के बाद जब विनेश से उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई तो उनके पहले शब्द थे, “मैं फेल नहीं हुई हूं।”

यह बयान न केवल उनकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है बल्कि उन चुनौतियों की भी झलक देता है जिनका सामना उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में किया है। भारतीय कुश्ती जगत की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल विनेश फोगाट ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन हर बार वापसी कर अपनी क्षमता साबित की है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति मिलने के बाद विनेश की वापसी पर पूरे देश की नजर थी। ट्रायल्स में उनका प्रदर्शन संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन सेमीफाइनल में मिली हार के कारण उनका एशियाई खेलों के लिए चयन का सपना फिलहाल अधूरा रह गया।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शीर्ष खिलाड़ी के लिए हार करियर का अंत नहीं होती, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर होती है। विनेश का बयान इसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने संकेत दिया कि वह भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी जारी रखेंगी और अपने खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान देंगी।

विनेश फोगाट भारतीय महिला कुश्ती की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक रही हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते हैं। उनकी उपलब्धियों ने देश में महिला कुश्ती को नई पहचान दिलाई है।

कुश्ती प्रेमियों और खेल विश्लेषकों का मानना है कि अनुभव, तकनीकी कौशल और संघर्षशीलता के कारण विनेश अभी भी भारतीय कुश्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी हार के बावजूद उनके प्रति प्रशंसकों का समर्थन कायम है।

सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने वाली मीनाक्षी गोयत के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। युवा पहलवान ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को हराया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हालांकि ट्रायल्स का यह अध्याय विनेश के लिए निराशाजनक रहा, लेकिन उनके शब्द—“मैं फेल नहीं हुई हूं”—यह संकेत देते हैं कि वह इस हार को अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देख रही हैं। खेल जगत में ऐसे ही जज्बे को एक सच्चे चैंपियन की पहचान माना जाता है।

राष्ट्रीय खेल 2027 की तैयारियों की समीक्षा, मेघालय में बनेगा 150 करोड़ रुपये का हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर

शिलांग / सत्ता संदेश

केंद्रीय खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने अगले वर्ष आयोजित होने वाले 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया और मेघालय में 150 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक हाई-एल्टीट्यूड (ऊंचाई पर स्थित) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।

शिलांग में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में Conrad Sangma, केंद्रीय खेल एवं युवा कार्य राज्य मंत्री Raksha Khadse, P. T. Usha, मेघालय के खेल मंत्री तथा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के खेल विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों के आवास, परिवहन, सुरक्षा और प्रतियोगिता स्थलों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेल केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करने और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मांडविया ने कहा कि मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहां के खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग और अन्य खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऐसे में हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना क्षेत्र के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेने से खिलाड़ियों की सहनशक्ति, फेफड़ों की क्षमता और प्रदर्शन में सुधार होता है। यही कारण है कि दुनिया के कई प्रमुख खेल राष्ट्र अपने एथलीटों को ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं। मेघालय में प्रस्तावित केंद्र भारतीय खिलाड़ियों को विदेश जाने के बजाय देश में ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में खेल पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि इस आयोजन से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और खेलों के प्रति युवाओं की रुचि और मजबूत होगी।

Indian Olympic Association की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा कि राष्ट्रीय खेल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने आयोजन की तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तेजी से आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित कर रहा है।

केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ और अन्य खेल विकास योजनाओं के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। खेल मंत्रालय का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के जरिए भारत वैश्विक खेल प्रतिस्पर्धाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों के साथ-साथ हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की घोषणा को भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

सिंगापुर ओपन: पीवी सिंधू क्वार्टर फाइनल में बाहर, सात्विक-चिराग की जोड़ी सेमीफाइनल में पहुंची

सिंगापुर / सत्ता संदेश

P. V. Sindhu का अभियान Singapore Open सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल में हार के साथ समाप्त हो गया। भारतीय स्टार खिलाड़ी को विश्व नंबर एक An Se-young के खिलाफ सीधे गेम में हार का सामना करना पड़ा। वहीं पुरुष युगल में भारत की स्टार जोड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने शानदार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।

कोरिया की एन से यंग ने सिंधू को 21-17, 21-14 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। मुकाबले में सिंधू ने कई मौकों पर अच्छी वापसी की कोशिश की, लेकिन वह पूरे मैच में निरंतर दबाव बनाए रखने में सफल नहीं रहीं।

पहले गेम में सिंधू ने आक्रामक शुरुआत की और कुछ समय तक मुकाबला बराबरी पर रहा, लेकिन निर्णायक क्षणों में एन से यंग ने अपनी तेज गति और सटीक शॉट्स के दम पर बढ़त बना ली। दूसरे गेम में भी कोरियाई खिलाड़ी ने नियंत्रण बनाए रखा और सिंधू को वापसी का मौका नहीं दिया।

बैडमिंटन विशेषज्ञों का कहना है कि एन से यंग के खिलाफ सिंधू का रिकॉर्ड लगातार चुनौतीपूर्ण रहा है। विश्व नंबर एक खिलाड़ी की फिटनेस, गति और रक्षात्मक खेल ने उन्हें महिला बैडमिंटन में बेहद मजबूत प्रतिद्वंद्वी बना दिया है।

हालांकि भारतीय प्रशंसकों के लिए राहत की खबर पुरुष युगल से आई, जहां सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने कड़े मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली। दोनों खिलाड़ियों ने दबाव की स्थिति में संयम बनाए रखा और निर्णायक अंक हासिल किए।

भारतीय बैडमिंटन में सात्विक-चिराग की जोड़ी को दुनिया की सबसे मजबूत युगल जोड़ियों में गिना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत को सफलता दिलाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीफाइनल में पहुंचने से इस जोड़ी का आत्मविश्वास और मजबूत होगा, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्तर लगातार कठिन होता जा रहा है।

अब भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की नजर सेमीफाइनल मुकाबले पर टिकी है, जहां सात्विक और चिराग खिताब की दौड़ में अपनी चुनौती मजबूत करने उतरेंगे।

आईपीएल में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक, खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के लिए नया निर्देश जारी

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) में खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों द्वारा स्मार्ट चश्मों (स्मार्ट ग्लासेस) के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कदम को तकनीकी सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और मैच की निष्पक्षता बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब खेलों में वियरेबल टेक्नोलॉजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और कई डिवाइस वास्तविक समय में वीडियो रिकॉर्डिंग, डेटा ट्रांसमिशन और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। बोर्ड का मानना है कि इस तरह के उपकरण मैच के दौरान अनधिकृत संचार या संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पैदा कर सकते हैं।

नए निर्देश के तहत किसी भी खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ या मैच अधिकारी को मैदान के भीतर या ड्रेसिंग रूम क्षेत्र में स्मार्ट चश्मों का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी के पास ऐसे उपकरण पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल हटाने और संबंधित कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

बीसीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम खेल की पारदर्शिता और “कॉन्टैक्टलेस डेटा एक्सेस” जैसे संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। बोर्ड पहले से ही मैच के दौरान संचार उपकरणों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उपयोग पर सख्त नियम लागू करता रहा है, और यह नया प्रतिबंध उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक का उपयोग प्रशिक्षण और प्रदर्शन विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हो गया है, लेकिन मैदान के अंदर ऐसे उपकरणों पर नियंत्रण जरूरी है ताकि किसी भी तरह की अनुचित जानकारी लीक या रणनीतिक बढ़त न मिल सके।

फ्रेंचाइजी टीमों को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है और सभी को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। खिलाड़ियों के लिए प्री-मैच ब्रीफिंग में इस नियम को दोहराए जाने की संभावना है।

आईपीएल में पहले भी तकनीकी उपकरणों के उपयोग को लेकर समय-समय पर नियम कड़े किए जाते रहे हैं। इस नए प्रतिबंध को उसी दिशा में एक और सख्त कदम माना जा रहा है, जिससे लीग की निष्पक्षता और सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जा सके।

नौकरी नियमितीकरण की मांग को लेकर कैट पहुंचे ओलंपिक पदक विजेता रवि दहिया और पैरालंपियन शरद कुमार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश


टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता पहलवान Ravi Kumar Dahiya और पैरालंपिक ऊंची कूद के पदक विजेता Sharad Kumar ने दिल्ली सरकार में अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट (कैट) का दरवाजा खटखटाया है।

दोनों खिलाड़ियों ने अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि वर्षों से सहायक शिक्षा निदेशक (खेल) के रूप में नियमित प्रशासनिक कार्य करने के बावजूद उन्हें केवल अस्थायी विस्तार दिए जा रहे हैं, जबकि उनकी सेवाओं को स्थायी करने की प्रक्रिया लंबित है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के आधार पर “ग्रुप ए” पदों की पेशकश मिलने के बाद सुरक्षित सरकारी नौकरियां छोड़कर दिल्ली सरकार से जुड़ने का निर्णय लिया था, इस उम्मीद के साथ कि उनकी नियुक्तियां जल्द ही नियमित कर दी जाएंगी।

अब दोनों खिलाड़ियों ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि लंबे समय से अनिश्चित स्थिति में काम करने से उनके करियर और भविष्य दोनों पर असर पड़ रहा है।

मामला अब कैट के समक्ष विचाराधीन है, और आने वाले दिनों में इस पर सुनवाई होने की संभावना है।

ISSF विश्व कप म्यूनिख में भारतीय चुनौती की कमान संभालेंगे सम्राट राणा और अर्जुन बबूता

म्यूनिख / सत्ता संदेश


राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं के प्रतिष्ठित आईएसएसएफ विश्व कप (ISSF World Cup Munich) के म्यूनिख चरण की शुरुआत सोमवार से हो गई। पहले दिन पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें भारतीय निशानेबाजी दल की अगुआई सम्राट राणा और अर्जुन बबूता करेंगे।

भारतीय टीम को इस प्रतियोगिता से काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि इसमें ओलंपिक और विश्व चैंपियन सहित दुनिया भर के शीर्ष निशानेबाज हिस्सा ले रहे हैं। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कुल 80 देशों के 696 खिलाड़ी अपनी सटीकता और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

Samrat Rana पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत की प्रमुख चुनौती माने जा रहे हैं, जबकि Arjun Babuta 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में भारतीय उम्मीदों का केंद्र होंगे।

जर्मनी के म्यूनिख (Munich) में हो रही यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी कैलेंडर की प्रमुख स्पर्धाओं में से एक मानी जाती है, जहां प्रदर्शन खिलाड़ियों की विश्व रैंकिंग और आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी के लिए बेहद अहम होता है।

आईएसएसएफ (International Shooting Sport Federation) द्वारा आयोजित यह विश्व कप खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव देता है और भारतीय टीम के लिए यह एक महत्वपूर्ण टेस्ट माना जा रहा है।