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‘वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर’ का उद्घाटन, अब पीड़ित गवाह सुरक्षित माहौल में देंगे बयान

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल ने लुधियाना के ज्यूडिशियल कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्थापित वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर (Vulnerable Witness Deposition Centre) का उद्घाटन किया। यह केंद्र विशेष रूप से संवेदनशील और पीड़ित गवाहों की सुरक्षित एवं निर्भय वातावरण में गवाही दर्ज कराने के उद्देश्य से बनाया गया है।

उद्घाटन समारोह के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरप्रीत कौर रंधावा, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट डेज़ी बांगर, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव हिमांशु अरोड़ा, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पवलीन सिंह, पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन सग्गर, सचिव हिमांशु वालिया तथा अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

बिना आरोपी के सामने आए दर्ज होगी गवाही

अधिकारियों ने बताया कि इस विशेष केंद्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित गवाहों को अदालत में आरोपी का सामना न करना पड़े। इसके लिए गवाहों के आने-जाने का अलग मार्ग बनाया गया है, जो सामान्य कोर्ट परिसर से अलग है।

केंद्र में एक विशेष कक्ष बनाया गया है, जहां गवाह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में अपना बयान दर्ज करा सकेंगे। इससे गवाहों का मानसिक दबाव कम होगा और वे बिना किसी भय के न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

बच्चों और महिला पीड़ितों के लिए विशेष व्यवस्था

न्यायालय प्रशासन ने बताया कि यदि गवाह कोई बच्चा या महिला पीड़ित है, तो उसके लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सेंटर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के बच्चों के अनुकूल कक्ष तक अलग मार्ग बनाया गया है, जहां बच्चों के लिए पढ़ाई और खेलकूद की सामग्री उपलब्ध है, ताकि वे सहज महसूस कर सकें।

आधुनिक तकनीक से होगी सुनवाई

केंद्र में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनकी मदद से अदालत गवाह का बयान रिकॉर्ड कर सकेगी, जबकि आरोपी को उसके सामने उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और संवेदनशील बनेगी।

पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के अंत में जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल और जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरप्रीत कौर रंधावा ने न्यायालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने सेंट्रल जेल, महिला जेल और बोरस्टल जेल की चेकिंग की
  • डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने सेंट्रल जेल, महिला जेल और बोरस्टल जेल की अचानक चेकिंग की
  • कैदियों की समस्याएं सुनकर उन्हें तुरंत हल करने के निर्देश भी दिए गए

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने सेंट्रल जेल, महिला जेल और बोरस्टल जेल, लुधियाना की अचानक चेकिंग की।

चेकिंग के दौरान, माननीय डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने सेंट्रल जेल, महिला जेल और बोरस्टल जेल के सुपरिटेंडेंट की मौजूदगी में अलग-अलग कैदियों और बंदियों से बात की और उनकी समस्याएं ध्यान से सुनीं। इसके बाद, मौके पर ही जेल अधिकारियों को कैदियों की जायज़ समस्याओं को तुरंत हल करने और ज़रूरी कार्रवाई करने के लिए गाइडलाइन जारी की गईं।

जज ने कैदियों को मुफ़्त कानूनी मदद पाने के उनके अधिकार के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जो कैदी अपने केस की पैरवी के लिए खुद वकील नहीं कर सकते, वे डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना के ज़रिए मुफ़्त कानूनी मदद ले सकते हैं। इसके साथ ही कैदियों को यह भी बताया गया कि फ्री लीगल एड पाने के लिए वे जेल में बने लीगल एड क्लिनिक से संपर्क कर सकते हैं और लीगल एड के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं।

चेकिंग के दौरान जेलों में मिली कुछ कमियों के बारे में माननीय डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जजों ने सुपरिंटेंडेंट को ज़रूरी गाइडलाइंस जारी कीं और निर्देश दिया कि इन कमियों को दूर करने के बाद की गई कार्रवाई की रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना को दी जाए।

इस मौके पर मैडम पवलीन सिंह, माननीय चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, लुधियाना भी मौजूद थीं।

जल्दी इंसाफ पाने के लिए परमानेंट लोक अदालत का फायदा उठाएं : हरप्रीत कौर रंधावा

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने परमानेंट लोक अदालतों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाने पर ज़ोर दिया।

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रंधावा ने कहा कि पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर के निर्देशों के अनुसार, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़, 1987 के सेक्शन 22-B के तहत डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ अमेंडमेंट एक्ट, 2002 के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं, जबकि परमानेंट लोक अदालतों (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में 01 चेयरपर्सन और 02 मेंबर होते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्री-लिटिगेटिव केस (वे केस जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं) का फैसला किया जाता है। इस स्थायी लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं जैसे परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीफोन सेवाएं, बिजली सेवाओं से संबंधित मामले, पानी से संबंधित मामले, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा या सफाई से संबंधित मामले, अस्पताल या डिस्पेंसरी में सेवाओं से संबंधित मामले, बीमा सेवाएं, बैंकिंग सेवाएं, आवास सेवाएं, वित्त सेवाएं, शिक्षा का प्रावधान एवं संबंधित मामले, नए कनेक्शन, आपूर्ति, एलपीजी रीफिलिंग एवं संबंधित मामले, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं बीपीएल कार्ड जारी करना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा योजना, शगुन योजना एवं बेरोजगारी भत्ता सेवाओं से संबंधित मामले, जनवितरण सेवाएं, जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित सेवाएं आदि का निपटारा किया जाता है।

उपर्युक्त सेवाओं से संबंधित ऐसे विवाद, शिकायत, विवाद जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं, उन्हें सादे कागज पर लिखित रूप में स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं) के अध्यक्ष के समक्ष दायर करना होगा तथा 5 लाख रुपये तक के विवाद/मामले इस लोक अदालत में 01 करोड़ तक के केस फाइल किए जा सकते हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना की चेयरपर्सन मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने आम लोगों से अपील की कि वे ऊपर बताई गई कैटेगरी में आने वाले अपने केस परमानेंट लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में फाइल करें। लोक अदालत में जल्दी और सस्ता इंसाफ मिलता है और इसके फैसले को सिविल कोर्ट का आदेश माना जाता है। परमानेंट लोक अदालत में केस फाइल करने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती। ज़्यादा जानकारी के लिए 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।