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जल्दी इंसाफ पाने के लिए परमानेंट लोक अदालत का फायदा उठाएं : हरप्रीत कौर रंधावा

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने परमानेंट लोक अदालतों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाने पर ज़ोर दिया।

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रंधावा ने कहा कि पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर के निर्देशों के अनुसार, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़, 1987 के सेक्शन 22-B के तहत डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ अमेंडमेंट एक्ट, 2002 के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं, जबकि परमानेंट लोक अदालतों (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में 01 चेयरपर्सन और 02 मेंबर होते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्री-लिटिगेटिव केस (वे केस जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं) का फैसला किया जाता है। इस स्थायी लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं जैसे परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीफोन सेवाएं, बिजली सेवाओं से संबंधित मामले, पानी से संबंधित मामले, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा या सफाई से संबंधित मामले, अस्पताल या डिस्पेंसरी में सेवाओं से संबंधित मामले, बीमा सेवाएं, बैंकिंग सेवाएं, आवास सेवाएं, वित्त सेवाएं, शिक्षा का प्रावधान एवं संबंधित मामले, नए कनेक्शन, आपूर्ति, एलपीजी रीफिलिंग एवं संबंधित मामले, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं बीपीएल कार्ड जारी करना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा योजना, शगुन योजना एवं बेरोजगारी भत्ता सेवाओं से संबंधित मामले, जनवितरण सेवाएं, जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित सेवाएं आदि का निपटारा किया जाता है।

उपर्युक्त सेवाओं से संबंधित ऐसे विवाद, शिकायत, विवाद जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं, उन्हें सादे कागज पर लिखित रूप में स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं) के अध्यक्ष के समक्ष दायर करना होगा तथा 5 लाख रुपये तक के विवाद/मामले इस लोक अदालत में 01 करोड़ तक के केस फाइल किए जा सकते हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना की चेयरपर्सन मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने आम लोगों से अपील की कि वे ऊपर बताई गई कैटेगरी में आने वाले अपने केस परमानेंट लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में फाइल करें। लोक अदालत में जल्दी और सस्ता इंसाफ मिलता है और इसके फैसले को सिविल कोर्ट का आदेश माना जाता है। परमानेंट लोक अदालत में केस फाइल करने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती। ज़्यादा जानकारी के लिए 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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