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सोने और चांदी की कीमतों में फिर आ सकता है बड़ा उछाल, जानें एक्सपर्ट्स ने क्या दी है भविष्यवाणी

बिजनेस डेस्क : वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़त देखने को मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि एमसीएक्स (MCX) पर सोने की कीमतें 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकती हैं। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते चांदी की कीमतों में 8,584 रुपये (3.5%) और सोने में लगभग 981 रुपये (1%) की तेजी दर्ज की गई थी।

कीमतों में उछाल की मुख्य वजहें:

डोनाल्ड ट्रंप के फैसले: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने के फैसले ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस व्यापारिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe-haven assets) के रूप में सोने और चांदी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

भू-राजनीतिक जोखिम: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की भावना पैदा की है, जिससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है।

आर्थिक आंकड़े: अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की संभावना ने भी सोने की कीमतों को मजबूती दी है।

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर: विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते निवेशक कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों पर ध्यान देंगे। इनमें अमेरिका का उत्पादक मूल्य सूचकांक, साप्ताहिक बेरोजगारी के दावे और चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर पर लिया जाने वाला फैसला शामिल है। फिलहाल, बाजार में कीमती धातुओं के लिए जोखिम-मुक्त भावना बनी हुई है।

चांदी की कीमतों में 1 लाख रुपये की आ सकती है बड़ी गिरावट ! क्या 1980 की तरह फिर से बाजार में गिरावट आएगी?

बिजनेस डेस्क: देश के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतें भले ही नए रिकॉर्ड बना रही हों, लेकिन एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को बड़ी गिरावट की चेतावनी दी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में चांदी की कीमतों में 1 लाख रुपये तक का बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है। अभी चांदी काफी ‘ओवरवैल्यूड’ (महंगी) हो गई है और अगर यह 3.25 लाख से 3.30 लाख रुपये के टारगेट लेवल तक पहुंच जाती है, तो वहां से इसकी कीमतों में 30 परसेंट तक की गिरावट आ सकती है, जिससे कीमत वापस 2.30 लाख रुपये के लेवल पर आ सकती है।

गिरावट के मुख्य कारण: एक्सपर्ट्स ने इस संभावित गिरावट के कई अहम कारण बताए हैं:

टैरिफ में राहत: अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अगर टैरिफ वापस ले लिए जाते हैं, तो कीमतों में कमी आएगी।

मेटल रिप्लेसमेंट थ्योरी: चांदी इतनी महंगी हो गई है कि अब सोलर पैनल, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियां चांदी के सस्ते विकल्प के तौर पर कॉपर और एल्युमीनियम इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही हैं।

डॉलर इंडेक्स में सुधार: डॉलर इंडेक्स में रिकवरी भी चांदी की कीमतों को नीचे लाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो: अभी यह रेश्यो 14 साल के निचले स्तर पर है, जिसके अब बढ़ने की संभावना है।

इतिहास दोहराने का डर: केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, चांदी में अब रिटर्न की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। उन्होंने 1980 के इतिहास का हवाला दिया, जब चांदी अपने पीक पर पहुंचने के बाद अगले दो महीनों में 70 परसेंट तक गिर गई थी। इसी तरह, 2011 में कीमतों में 32 परसेंट की गिरावट देखी गई थी।गौरतलब है कि पिछले एक महीने में ही चांदी की कीमतों में 50 परसेंट (लगभग 1 लाख रुपये) से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

सोमवार को MCX पर चांदी अपने ऑल-टाइम हाई 3,19,949 रुपये पर पहुंच गई थी। अब सवाल यह है कि क्या निवेशक इस महंगी चांदी में अपनी दिलचस्पी बनाए रखेंगे या प्रॉफिट बुकिंग के कारण बाजार में बड़ी गिरावट आएगी।