ब्रेकिंग न्यूज़
कपूरथला में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई बकरीद

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार धार्मिक श्रद्धा, उत्साह और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। शहर की मॉरिशस मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर ईद की नमाज अदा की। नमाज के दौरान लोगों ने देश और दुनिया में अमन-शांति तथा खुशहाली की दुआ मांगी।

मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़

ईद के मौके पर शहर की प्रमुख मस्जिदों में सुबह से ही नमाजियों का पहुंचना शुरू हो गया था। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक परिधानों में नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया। मस्जिदों के बाहर भी त्योहार को लेकर रौनक देखने को मिली।

भाईचारे और प्रेम का दिया संदेश

इस दौरान मुस्लिम भाईचारे के नेताओं ने कहा कि ईद का त्योहार प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दिन लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब आने और खुशियां बांटने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करने का अवसर भी है।

देश-दुनिया में सुख-शांति की मांगी दुआ

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस अवसर पर देश और दुनिया में अमन-शांति बनाए रखने की दुआ की। उन्होंने कहा कि हर वर्ग के लोग सुखी और समृद्ध रहें तथा समाज में प्रेम और भाईचारा लगातार बढ़ता रहे। ईद के इस पावन अवसर पर लोगों ने जरूरतमंदों की मदद करने और समाज सेवा का संदेश भी दिया।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संस्कृति का सम्मान, गायक अनूप जलोटा को मिली मानद सदस्यता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के प्रसिद्ध भजन गायक Anup Jalota को South Africa में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया है। भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (UPDES) ने उन्हें अपनी मानद सदस्यता देकर सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह सोमवार को जोहानिसबर्ग में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

संगठन की ओर से कहा गया कि अनूप जलोटा ने अपने संगीत और भजनों के माध्यम से दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक संगीत को नई पहचान दिलाई है। उनके गीतों और भक्ति संगीत ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी गहरी छाप छोड़ी है। इसी योगदान को देखते हुए उन्हें यह विशेष सम्मान दिया गया।

समारोह के दौरान अनूप जलोटा ने भारतीय प्रवासी समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति को जीवित रखने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है और भारतीय भक्ति संगीत आज भी विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रहा है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिली। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने कहा कि अनूप जलोटा जैसे कलाकार भारतीय संस्कृति के सच्चे दूत हैं, जिन्होंने अपनी कला से देश की पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान न केवल कलाकारों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि विदेशों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जो वर्षों से भारतीय परंपराओं और त्योहारों को संजोए हुए है।

मदर्स डे पर ‘वाओ मॉम सीजन 5’ का भव्य आयोजनश्री राम ग्लोबल स्कूल में मातृत्व को समर्पित भावनाओं की शानदार प्रस्तुति

लुधियान / सत्ता संदेश

लुधियाना — श्री राम ग्लोबल स्कूल, साउथ सिटी में मदर्स डे के उपलक्ष्य में ‘वाओ मॉम सीजन 5’ का भव्य और भावनात्मक आयोजन स्कूल परिसर में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माताओं के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और बच्चों के जीवन निर्माण में उनकी अहम भूमिका को सम्मान देना था।कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल प्रिंसिपल मोनिका शर्मा द्वारा स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा, “मां बच्चे की पहली शिक्षक और जीवनभर की प्रेरणा होती है। इस आयोजन के माध्यम से हम बच्चों में कृतज्ञता के संस्कार विकसित करने के साथ परिवारों के लिए यादगार पल संजोने का प्रयास करते हैं।”शाम के दौरान माताओं को समर्पित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम की थीम ‘जर्नी टू फ्रीडम’ रखी गई थी। आयोजन में 50 से अधिक माताओं ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘रैंप वॉक’ रहा, जिसमें नन्हे बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर वॉक कर सभी का दिल जीत लिया। मंच पर माताओं और बच्चों का उत्साह देखने लायक था।
अंत में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘फिनाले एक्ट’ माताओं को समर्पित रहा, जिसने सभी को भावुक कर दिया। सफल आयोजन के दौरान स्कूल की सामुदायिक और भावनात्मक विकास के प्रति प्रतिबद्धता साफ दिखाई दी। कार्यक्रम का समापन रिफ्रेशमेंट्स और फोटोबूथ पर यादगार फोटो सेशन के साथ हुआ।स्कूल डायरेक्टर अंचल गर्ग और साक्षी गर्ग ने कार्यक्रम में शामिल सभी माताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन परिवार और स्कूल के रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ भावनात्मक मूल्यों को बढ़ावा देना भी स्कूल की प्राथमिकता है। लुधियाना से यादविंदर सिंह की रिपोर्ट

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में श्री गुरु तेग बहादुर जी को समर्पित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

बठिंडा/सत्ता संदेश

, 25 अप्रैल 2026: पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा के पंजाबी विभाग द्वाराइंटैक पंजाब चैप्टर और बठिंडा चैप्टर के सहयोग से श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत “श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं और शहादत: सर्वकालिक सार्थकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 24 अप्रैल 2026 को किया गया। कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रसिद्ध पंजाबी चिंतक और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस डॉ. मनमोहन सिंह (पूर्व आईपीएस) ने मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि पंजाबी यूनिवर्सिटी के सिख इनसाइक्लोपीडिया विभाग के प्रो. परमवीर सिंह ने विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। इंटैक पंजाब चैप्टर के संयोजक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बलविंदर सिंह तथा बठिंडा चैप्टर के संयोजक श्री कंवर भीम सिंह ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। इसके अतिरिक्त विभिन्न अकादमिक सत्रों की अध्यक्षता प्रो. सतनाम सिंह जस्सल, प्रो. राजिंदर सिंह तथा हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. नरेश कुमार ने की। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के डीन (अकादमिक) प्रो. रामाकृष्ण वुसिरिका ने की।

अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. मनमोहन सिंह ने शहादत की अवधारणा का ऐतिहासिक विश्लेषण करते हुए गुरु तेग बहादुर जी की अद्वितीय शहादत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह शहादत धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए दी गई थी तथा इसे केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी समझने की आवश्यकता है।

प्रो. परमवीर सिंह ने अपने विशेष व्याख्यान में कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने उपदेशों को व्यवहार में उतारा और समाज को निर्भयता का संदेश दिया। उनकी शहादत ने भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने की चेतना को मजबूत किया और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी।

इंटैक के संयोजक मेजर जनरल (से.नि.) बलविंदर सिंह ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सिख इतिहास के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया तथा नई पीढ़ी को अपने समृद्ध विरासत से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

डीन (अकादमिक) प्रो. रामाकृष्ण वुसिरिका ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस संगोष्ठी के आयोजन के लिए पंजाबी विभाग की सराहना की तथा विश्वविद्यालय में स्थापित किए जा रहे “श्री गुरु तेग बहादुर सेंटर ऑफ स्टडीज़ इन इंडिक सिविलाइज़ेशन एंड रिलीजियस स्टडीज़” के बारे में जानकारी दी।

संगोष्ठी के लिए 70 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और तीन अकादमिक सत्रों में चयनित शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। शोधकर्ताओं ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, बाणी और शहादत के विभिन्न पहलुओं पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. अमनदीप सिंह के स्वागत भाषण से हुई तथा प्रो. रमनप्रीत कौर ने संगोष्ठी का परिचय प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. सरबजीत सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सतप्रीत सिंह जस्सल और गुरप्रीत कौर ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे, साथ ही आसपास के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भी संगोष्ठी में सक्रिय भागीदारी निभाई।

संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बुद्धा दरिया और कवि दरबार

लुधियाना / सत्ता संदेश

आइए धरती, जल, वायु और पंजाबियत को बचाएं – प्रो. गुरभजन सिंह गिल

बैसाखी के पवित्र दिन को समर्पित तीसरा कवि दरबार लुधियाना के ताजपुर रोड स्थित केंद्रीय जेल के संगत घाट (बेस कैंप) के पास पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कवि दरबार में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आइए हम गुरु नानक पातशाह से जुड़ी इस पवित्र नदी की पवित्रता को बहाल करने के लिए चल रहे कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लें और इन ऐतिहासिक क्षणों के प्रत्यक्षदर्शी बनें। प्रख्यात साहित्यकार प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल ने संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा किए जा रहे महान कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आइए हम पंजाबी अपने जल, वायु, भूमि, संस्कृति, स्वच्छ गीतों और पंजाबियत को बचाने का प्रयास करें। आइए हम उच्च और शुद्ध कर्म योगी बनें। आइए हम अपने गांवों और शहरों को एक नई दिशा दें। श्रीमती नीरू कत्याल गुप्ता (आईएएस) कमिश्नर निगम लुधियाना ने भी बुड्ढा नदी की सफाई में लुधियाना निवासियों को सहयोग का संदेश दिया। नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने भी बुड्ढा नदी शुद्धिकरण अभियान को लुधियाना के लिए वरदान बताया। मंच का संचालन करते हुए, राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कवि करमजीत सिंह ग्रेवाल ने कवि दरबार में कवियों की उपस्थिति सुनिश्चित की। प्रख्यात लेखिका डॉ. गुरचरण कौर कोचर द्वारा श्री गुरु गोविंद सिंह जी की स्तुति में पढ़ी गई रचना ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। अपने स्वच्छ और अर्थपूर्ण गायन के लिए जाने जाने वाले, गायक पाली देतवालिया ने ‘गिव अस बैक रंगला पंजाब’, ‘चली गोलम दी जमीन लुधियाना खा गए’ और ‘मावां गीत’ सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल, अमरजीत सिंह शेरपुरी, जगपाल सिंह जग्गा जमालपुरी, करमजीत ग्रेवाल, सुखबीर संधे, दविंदर सिंह खासी कलां जेई और दलबीर कलेर ने ऊंची आवाज में गीत और कविताएं सुनाकर रचनात्मक संदेश दिया। संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल और संत सुखजीत सिंह सीचेवाल ने कवियों और सेवकों को पौध, सिरोपा, पगड़ी और अन्य कई सम्मान देकर उनका आदर और आशीर्वाद किया। बुढ़ा नदी के किनारे आयोजित इस सफल कवि सम्मेलन ने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी। इस अवसर पर सेवक सुखजीत सिंह सीचेवाल, हरदेव सिंह दाउधर, पाल सिंह नौली, क्षेत्र के पंचायत सदस्य और कई अन्य प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे।