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दिल्ली में शराब की दुकान पर गोलीबारी और लूट के प्रयास की जांच में अवैध हथियारों के नेटवर्क का खुलासा

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज क्षेत्र में स्थित एक सरकारी शराब की दुकान पर हुई गोलीबारी और लूट के प्रयास के मामले की जांच के दौरान अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 24 मई को हुई उस सनसनीखेज घटना की जांच के दौरान की गई, जिसमें बदमाशों ने मध्य दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में एक सरकारी शराब की दुकान को निशाना बनाया था। घटना के दौरान लूटपाट का विरोध करने पर अपराधियों ने दुकान के सेल्समैन पर हमला किया, उसे चाकू मारकर घायल कर दिया और गोलीबारी भी की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया। इसी कड़ी में पुलिस को अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले एक संगठित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके बाद विशेष अभियान चलाकर एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियार कहां से लाए गए, किन लोगों तक उनकी आपूर्ति की जाती थी और क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य आपराधिक घटनाओं से भी है।

अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में अवैध हथियारों की तस्करी और आपूर्ति पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस मामले में सामने आया नेटवर्क केवल एक स्थानीय गिरोह तक सीमित है या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध हथियारों की उपलब्धता लूट, डकैती, हत्या और संगठित अपराध जैसी घटनाओं को बढ़ावा देती है। ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुलिस ने बताया कि पहाड़गंज गोलीबारी मामले के मुख्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए भी अभियान जारी है। गिरफ्तार व्यक्ति से मिली जानकारी के आधार पर आगे की छापेमारी और जांच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अवैध हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला और उससे जुड़े अन्य अपराधियों के बारे में भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 15,000 रुपये रिश्वत लेते पटवारी को रंगे हाथों काबू किया गया

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही अपनी मुहिम के दौरान माल दफ्तर पायल, जिला लुधियाना में तैनात पटवारी हरकिंदर सिंह को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि उक्त आरोपी को तहसील पायल, जिला लुधियाना के एक निवासी द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि आरोपी पटवारी ने शिकायतकर्ता से उसकी जमीन के इंतकाल में संशोधन करने के बदले 25,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। इस संबंध में आरोपी पहले ही 5,000 रुपये पहली किस्त के रूप में ले चुका था।

शिकायतकर्ता द्वारा गैर-कानूनी रिश्वत देने से इनकार करते हुए विजिलेंस ब्यूरो की आर्थिक अपराध शाखा, लुधियाना से संपर्क किया गया। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में आरोपी को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते समय रंगे हाथों काबू कर लिया।

इस संबंध में आरोपी के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो थाना आर्थिक अपराध शाखा, लुधियाना में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 6,000 रुपये रिश्वत लेते प्रिंसिपल को रंगे हाथों काबू किया गया

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अपनी मुहिम के दौरान कैंप खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अजीतसर मोही, जिला लुधियाना (सरकारी सहायता प्राप्त) में तैनात प्रिंसिपल गुरमीत सिंह को 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि उक्त आरोपी को गांव मोहित, जिला लुधियाना के एक निवासी द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने कोविड काल के दौरान 10वीं कक्षा पास की थी, लेकिन उसे अभी तक 10वीं का पासिंग सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं हुआ था। उसने डुप्लीकेट सर्टिफिकेट के लिए भी ऑनलाइन आवेदन किया था, परंतु वह भी उसे नहीं मिला। इसके बाद वह अपना मैट्रिक सर्टिफिकेट लेने के लिए अपने स्कूल के प्रिंसिपल के पास गया।
इस दौरान आरोपी प्रिंसिपल ने उससे 15,800 रुपये रिश्वत की मांग की और मौके पर ही उससे 10,000 रुपये रिश्वत के रूप में ले भी लिए। उल्लेखनीय है कि डुप्लीकेट सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए सरकारी फीस 900 रुपये तथा तत्काल फीस 2,000 रुपये है।

रिश्वत देने के लिए तैयार न होने पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो लुधियाना से संपर्क किया। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में आरोपी प्रिंसिपल को 6,000 रुपये की रिश्वत लेते समय रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

इस संबंध में आरोपी के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो के पुलिस थाना लुधियाना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।