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फतेह सिंह कॉलोनी गली न:11 से 15 में दूषित पानी की समस्या गंभीर; विधायक और निगम की नाकामी के खिलाफ भड़के डॉ. राम चावला:विक्रमजीत सिंह/ तरजिंदर सिंह)


अमृतसर / सत्ता संदेश


अमृतसर के फतेह सिंह कॉलोनी इलाके में पीने के पानी की समस्या अत्यंत गंभीर रूप धारण कर चुकी है। पिछले काफी समय से स्थानीय निवासियों के घरों में बेहद गंदा और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे इलाके में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है और लोगों की सेहत पर इसका भारी असर पड़ रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय निवासियों द्वारा नगर निगम और मौजूदा विधायक को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद, प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। किसी ने भी इस गंभीर मुद्दे पर कोई कड़ी कार्रवाई या प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।
जनता की समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्वयं भाजपा नेता डॉ. राम चावला तुरंत अपनी टीम के साथ फतेह सिंह कॉलोनी पहुंचे और जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उन्होंने खुद दूषित पानी की स्थिति को देखा और स्थानीय लोगों की व्यथा को बड़े ध्यान से सुना। एकत्रित हुए लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि गंदे पानी के कारण उनके बच्चे और बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं, लेकिन सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
डॉ. राम चावला ने पीड़ित लोगों को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वह इस समस्या का जल्द से जल्द हल करवाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने सख्त शब्दों में पंजाब सरकार और नगर निगम के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए तुरंत कार्यवाही की माँग की।
वार्ड 52 से इंचार्ज कमलजीत गोल्डी ने कहा कि जो सरकार पीने का साफ़ पानी तक मुहैया नहीं करवा सकती वो राज्य कैसे संभालने की बड़ी बातें कर सकती हैं। गुंडाराज, गंदा पानी, नशा सब चर्म पर है। लोगों का विकास, इलाके का नवीनीकरण सब कागजों में है या मशहूरी तक ही सीमित है। गोल्डी जी ने मौजूदा कांग्रेस के पार्षद की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान उठाए। उन्होंने कहा कि ये लोग भी बस वोटों तक ही सीमित हैं। इन्होंने इलाके का ना कोई सुधार करा ना ही कोई मौजूदा हालत पर विचार किया।
डॉ चावला ने कहा कि यदि प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो अधिकारियों और मौजूदा विधायक के खिलाफ तीखा जन-आंदोलन और घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस मौके पर उनके साथ मंडल प्रधान टहल सिंह, वार्ड इंचार्ज कमलजीत गोल्डी, रणजीत राणा, अमित, कृष्ण लाल सहगल, मोनिका, शाम लाल,विक्की कपूर सहित भारी संख्या में स्थानीय निवासी और भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

पंजाब सरकार की बड़ी पहल: 16 जिलों में खरीफ मक्का विविधीकरण योजना, किसानों को 17,500 प्रति हेक्टेयर सहायता

अमृतसर/सत्ता संदेश

संवाददाता-विक्रमजीत सिंह/ कैमरामैन- तरजिंदर सिंह

पानी की अधिक खपत करने वाली धान की फसल से किसानों को बाहर निकालकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वर्ष 2026–27 के लिए खरीफ मक्का विविधीकरण योजना को 6 जिलों से बढ़ाकर 16 जिलों तक लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

यह निर्णय वर्ष 2025–26 के खरीफ सीजन के दौरान छह जिलों में लागू किए गए पायलट प्रोजेक्ट को किसानों से मिले भारी समर्थन के बाद लिया गया है। यह कदम किसानों को धान से मक्का की खेती की ओर प्रेरित कर राज्य में गिरते भूजल स्तर को रोकने की दिशा में एक “निर्णायक कदम” माना जा रहा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला योजना समिति, अमृतसर के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह संधू ने बताया कि इस योजना के तहत अमृतसर, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, पटियाला, पठानकोट, रूपनगर, संगरूर, एसएएस नगर, एसबीएस नगर और तरनतारन जिलों में 20,000 हेक्टेयर (50,000 एकड़) क्षेत्र को खरीफ मक्का के अधीन लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 की सब्सिडी दी जाएगी।

कुल राशि में से 4,500 इनपुट बिल ब्लॉक कृषि कार्यालय में जमा कराने पर जारी किए जाएंगे, जबकि शेष 13,000 अनिवार्य जियो-टैग्ड फसल सत्यापन के बाद दो किस्तों में दिए जाएंगे।

राज्य के बहुमूल्य भूजल संसाधनों के संरक्षण के लिए किसानों से खरीफ मक्का की बुवाई करने की अपील करते हुए चेयरमैन संधू ने कहा कि इच्छुक किसान सरकारी वेबसाइट https://agrimachinerypb.com पर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए अनिवार्य रूप से जे-फॉर्म और खेत की जियो-टैगिंग आवश्यक होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसान ने पिछले वर्ष धान की खेती की थी और इस वर्ष मक्का की ओर रुख कर रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि उन्नत किसान पोर्टल के माध्यम से सत्यापन दो चरणों में किया जाएगा — पहला 15 जुलाई से 25 जुलाई तक तथा दूसरा चरण 5 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक होगा। प्रत्येक सत्यापन के बाद जिला मुख्य कृषि अधिकारी द्वारा 9,500 और 7,500 प्रति हेक्टेयर जारी किए जाएंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजीकरण से लेकर सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और पात्र किसानों को समय पर सब्सिडी मिल सके।

उन्होंने कहा कि धान-गेहूं का पारंपरिक फसली चक्र अब टिकाऊ नहीं रहा। यह योजना केवल फसल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।