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प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक संयुक्त संपादकीय लेख लिखा

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बताया कि उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मिलकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें इस पक्ष का विस्तार से वर्णन किया गया है कि भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध एक निर्णायक चरण पर पहुंच गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच का संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह मजबूत संबंध नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

मैंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ मिलकर एक संपादकीय लेख लिखा है जिसमें जानकारी दी गई है कि भारत-इटली संबंध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हमारी साझेदारी नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है।

भारत और नॉर्वे के बीच नए द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई

दिल्ली /सत्ता संदेश


भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने नॉर्वे में स्वच्छ ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा, सतत विकास, भूविज्ञान और शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्रों में पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक ओर भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ हुए हैं वहीं, भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए 18 मई 2026 को ओस्लो में नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी के नेतृत्व में डीएसआईआर/सीएसआईआर की ओर से नॉर्वे के सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के क्षेत्रों में भारत-नॉर्वे संबंधों का विस्तार करना है तथा इसके साथ ही दोनों देशों में संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग सहभागिता, शैक्षणिक सहयोग तथा सतत विकास संबंधी पहलों को बढ़ावा देना है।

डीएसआईआर/सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच समझौता ज्ञापन का उद्देश्य अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और क्षमता विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते में जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य सहित वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं, सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान से जुड़ी यात्राओं, विशिष्ट कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यवस्था और समय-समय पर उनकी समीक्षा के लिए तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है।

सीएसआईआर ने नॉर्वे के प्रमुख स्वतंत्र अनुसंधान संगठन स्टिफ्टेल्सन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ) के साथ 2014 से जारी समझौता ज्ञापन के ढांचे के अंतर्गत सहयोग के लिए समझौते (2026-2029) पर भी हस्ताक्षर किए। यह समझौता जैव-आधारित प्रक्रियाओं और सामग्रियों, नवाचार केंद्रों, समुद्री ऊर्जा (जिसमें अपतटीय पवन और हाइब्रिड प्रणालियां शामिल हैं), कार्बन कैप्चर, भंडारण और उपयोग तथा अपशिष्ट को काम में लाने योग्य सामग्रियों में परिवर्तित करने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से अपशिष्ट बनने से रोकने और दीर्घकालिक व्यवस्था में परिवर्तन पर केंद्रित है।

सीएसआईआर के संस्थानों और एसआईएनटीईएफ के संस्थानों के बीच समुद्री ऊर्जा और अपतटीय पवन ऊर्जा के संबंध में एक विशिष्ट परियोजना के लिए सहयोग पर भी समझौता किया गया। इस समझौते में सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (सीएसआईआर-एसईआरसी), सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाएं (सीएसआईआर-एनएएल), सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईओ) और सीएसआईआर-चतुर्थ प्रतिमान संस्थान (सीएसआईआर-4पीआई) के साथ एसआईएनटीईएफ महासागर, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्यूनिटी शामिल हैं। इस सहयोग का उद्देश्य अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता को मजबूत करना तथा राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन और उसके अवशोषण में संतुलन बनाने से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में योगदान देना है। इस संयुक्त कार्यक्रम में तैरती हुई अपतटीय पवन प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा की समतुल्य लागत (एलसीओई) में कमी लाने, स्थिरता, पर्यावरण, सामाजिक और शासन संबंधी विषयों, मानकीकरण, पायलट प्रदर्शन, कौशल विकास तथा औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए सीएसआईआर की ओर से लगभग 341 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

डॉ. एन. कलाइसेल्वीमहानिदेशकसीएसआईआर और सचिवडीएसआईआर के साथ:

अ) प्रो. टोर ग्रांडेरेक्टरएनटीएनयूब) डॉ. एलेक्जेंड्रा बेच गोजर्वसीईओ स्टिफ्टेलसन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ)स) सुश्री ऐनी केजेर्स्टी फाह्लविककार्यकारी निदेशकनॉर्वे की अनुसंधान परिषदऔर द) डॉ. एंड्रियास ए फाफहुबरसीईओ एमराल्ड

सीएसआईआर, वैज्ञानिक और नवाचार संबंधी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनटीएनयू) के बीच “हरित परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी सहयोग” शीर्षक से संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह घोषणापत्र स्थिरता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, महासागर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और असैनिक तथा अवसंरचना संबंधी अभियांत्रिकी से जुड़ी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है। इस सहयोग में छात्रों और शिक्षकों की यात्राएं, संयुक्त अनुसंधान गतिविधियां, अकादमिक आदान-प्रदान, संगोष्ठियां और सहयोग संबंधी अकादमिक कार्यक्रम शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात यह हुई है कि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) ने एमराल्ड जियोमॉडलिंग के साथ भारत में बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भूविज्ञान पर आधारित समाधान प्राप्त करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग स्थापित करने के लिए पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण योजना, डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग, तकनीकी परामर्श सहायता और वैज्ञानिक कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल होगा।

ये समझौते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं और इनसे दोनों देशों के बीच सहयोग से अनुसंधान, नवाचार-आधारित सतत विकास और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत की अध्यक्षता में मुंबई में आयोजित किम्बर्ली प्रक्रिया अंतरसत्रीय सम्मेलन 2026 का प्राकृतिक हीरा क्षेत्र के भविष्य पर ध्‍यान केन्द्रित करने के साथ समापन

मुंबई / सत्ता संदेश

मुंबई /केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने प्राकृतिक हीरा क्षेत्र में विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की

अंतरसत्रीय बैठक में प्राकृतिक हीरा व्यापार में पारदर्शिता, शासन और परिचालन सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया

भारत की अध्यक्षता में मुंबई में आयोजित किम्बर्ली प्रक्रिया (केपी) अंतरसत्रीय बैठक 2026 का समापन हुआ। इस बैठक में प्राकृतिक हीरा क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर केपी प्रतिभागियों, पर्यवेक्षकों, उद्योग हितधारकों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने चार दिनों तक एक मंच पर विचार-विमर्श किया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अंतरसत्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर कहा कि भारत, हीरा तराशने और पॉलिश करने के मामले में विश्व के अग्रणी केंद्र के साथ-साथ प्राकृतिक हीरों को विश्वास, जिम्मेदारी और साझा समृद्धि का प्रतीक बनाए रखने में केपी की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में, देश विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास (3सी) को बढ़ावा देने और तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक बाजार में केपी की प्रासंगिकता को मजबूत करने के लिए सभी प्रतिभागियों और हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्राकृतिक हीरा क्षेत्र उत्पादक, प्रसंस्करण और उपभोक्ता देशों में लाखों लोगों की आजीविका का आधार है और भारत एक ऐसे केपी का समर्थन करना जारी रखेगा जो मजबूत, पारदर्शी और उद्योग तथा उपभोक्ता दोनों की अपेक्षाओं के प्रति उत्तरदायी हो।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित तीन सी (विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास) के विषय के अंतर्गत आयोजित इस अंतरसत्रीय सम्मेलन में किम्बर्ली प्रक्रिया ढांचे के भीतर विश्वास, पारदर्शिता और सहयोग को मजबूत करने पर आगे चर्चा हुई।

अंतरसत्रीय बैठक के दौरान, कार्य समूहों और समितियों ने निगरानी, ​​तकनीकी प्रक्रियाओं, शासन, सांख्यिकी और पारंपरिक उत्पादन पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें पारदर्शिता को मजबूत करने, परिचालन तंत्र में सुधार करने और प्राकृतिक हीरे की मूल्य श्रृंखला में विश्वास को सुदृढ़ करने पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया गया।

केपी चेयर 2026 श्री सुचिंद्र मिश्रा ने कहा कि मुंबई अंतरसत्रीय सम्मेलन के दौरान हासिल की गई प्रगति प्रतिभागियों और पर्यवेक्षकों की किम्बरली प्रक्रिया को विश्वसनीय, प्रासंगिक और वैश्विक हीरा व्यापार एवं उपभोक्ता अपेक्षाओं की बदलती गतिशीलता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विश्वास प्राकृतिक हीरा व्यापार की आधारशिला है। उन्‍होंने हीरा मूल्य श्रृंखला में जिम्मेदार स्रोत, पारदर्शिता और विश्वास के स्तंभ के रूप में किम्बरली प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

अंतरसत्रीय सम्मेलन में किम्बर्ली प्रक्रिया के सकारात्मक प्रभाव को अंतिम उपभोक्ताओं तक बेहतर ढंग से पहुंचाने के लिए संचार और जागरूकता प्रयासों को बढ़ाने के महत्व की भी जानकारी दी गई, जिसमें जिम्मेदार स्रोत प्रथाओं, विकास परिणामों और उत्पादक देशों और समुदायों में आजीविका सहायता शामिल है।

अंतरसत्रीय बैठक के दौरान हुई चर्चाओं को इस वर्ष के अंत में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले केपी पूर्ण सत्र में आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें वर्ष 2026 तक भारत की अध्यक्षता में विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस बैठक में केपी प्रतिभागियों, विश्व हीरा परिषद, नागरिक समाज गठबंधन के सदस्यों, उद्योग निकायों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। अध्यक्ष ने इस बात पर बल दिया कि किम्बर्ली प्रक्रिया की अनूठी त्रिपक्षीय संरचना और सर्वसम्मति-आधारित दृष्टिकोण, जो सरकारों, उद्योग और नागरिक समाज को एक साथ लाता है, इसकी प्रमुख शक्तियों में से एक है।

किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प 55/56, 2000 के अंतर्गत स्थापित किया गया है, एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य संघर्ष क्षेत्रों वाले हीरों को वैध व्यापार में प्रवेश करने से रोकना और प्राकृतिक हीरे की आपूर्ति श्रृंखला में जिम्मेदार स्रोत को बढ़ावा देना है।

हीरा काटने और पॉलिश करने के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में, भारत ने किम्बर्ली प्रक्रिया के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और प्राकृतिक हीरा क्षेत्र में पारदर्शिता, स्थिरता और जिम्मेदार प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ब्रिक्स महिला कार्य समूह की पहली प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई


इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी

दिल्ली /सत्ता संदेश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, 30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स महिला कार्य समूह की प्रथम प्रारंभिक बैठक आयोजित की।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, और संयुक्त राष्ट्र महिला व भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) जैसे ज्ञान भागीदारों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अपर सचिव, सुश्री कैरालीन खोंगवार देशमुख ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और चर्चाओं के लिए माहौल तैयार किया।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय: ‘प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ से प्रेरित होकर, इस बैठक में वैश्विक स्तर पर महिलाओं की प्रमुख समस्याओं और साझा चिंताओं पर गहन चर्चा हुई, जिन्हें चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बांटा गया। इनमें शासन और नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका; वित्तीय और डिजिटल समावेशन; महिला उद्यमिता और कौशल विकास; तथा जलवायु कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।

इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी गई।

ब्रिक्स सदस्य देशों ने अपने वक्तव्यों में भारत को उसकी अध्यक्षता के लिए बधाई दी, और सहयोग एवं सीखने की भावना को अपनाते हुए इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का स्वागत और समर्थन किया।

इन चर्चाओं का निष्कर्ष उन प्रमुख परिणामों में योगदान देगा, जो केरल के कोच्चि में आयोजित होने वाली ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक (6–7 जुलाई 2026) और ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक (8–9 जुलाई 2026) में सामने आएंगे।

रक्षा मंत्री ने जर्मनी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों से अपनी विरासत से जुड़े रहते हुए मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में योगदान बनाए रखने का आग्रह किया 

दिल्ली /सत्ता संदेश


दोनों देशों के बीच भारतीय समुदाय सर्वाधिक सशक्‍त सेतु ह

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 21 अप्रैल, 2026 को जर्मनी की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन बर्लिन में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया। उन्होंने लगभग 300,000 सक्षम भारतीय प्रवासी समुदाय की प्रशंसा के साथ-साथ उन्हें दोनों देशों के बीच सबसे मजबूत सेतु बताते हुए कहा कि उनका योगदान व्यापार, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विस्‍तारित है।

रक्षा मंत्री ने इस तथ्य को दोहराया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर भारत का कद बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन आज पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है। उन्होंने जर्मनी में मौजूद भारतीयों से वैश्विक स्तर पर भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का आग्रह किया।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2026 जर्मनी के साथ राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जो विश्वास, आपसी सम्मान और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने भारतीय प्रवासियों से आग्रह किया कि वे अपनी विरासत से जुड़े रहते हुए भारत-जर्मनी साझेदारी को और मजबूत बनाने में अपना योगदान जारी रखें। उन्होंने विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को सरकार के निरंतर समर्थन और सुरक्षा का आश्वासन देते हुए उनके प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।

रक्षा मंत्री ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और तकनीकी प्रगति के बारे में चर्चा करते हुए बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप, अंतरिक्ष और डिजिटल नवाचार में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना का उद्देश्य घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना, विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।

श्री राजनाथ सिंह ने इस संवाद को एक विशेष क्षण बताते हुए अपने पेशेवर दायित्वों के बावजूद उपस्थित होने के लिए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका और उनके प्रतिनिधिमंडल का उत्‍साहपूर्ण स्वागत भारत-जर्मनी की मजबूत और बढ़ती साझेदारी का प्रतीक है।

फ्रांस के राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर उत्साहित है भारत: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की यात्रा और द्विपक्षीय संबंधों को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने को लेकर उत्साहित है।

मोदी ने ‘एक्स’ पर मैक्रों की एक ‘पोस्ट’ पर टिप्पणी करते हुए यह बात कही। फ्रांस के राष्ट्रपति ने पोस्ट में कहा था कि वह भारत रवाना हो गए हैं और मुंबई एवं नयी दिल्ली की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान वह एवं मोदी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे ले जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भारत में आपका स्वागत है! भारत आपकी यात्रा और हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उत्साहित है। मुझे विश्वास है कि हमारी चर्चा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगी तथा वैश्विक प्रगति में योगदान देगी। मेरे प्रिय मित्र- इमैनुएल मैक्रों, मुंबई में और फिर दिल्ली में मिलते हैं।’’

इससे पहले, मैक्रों ने भारत के लिए रवाना होते समय सोमवार को ‘एक्स’ पर लिखा था, ‘‘भारत रवाना हो गया हूं। मुंबई से नयी दिल्ली तक तीन दिन का सफर… ताकि हमारी रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। मेरे साथ विमान में व्यापार जगत के दिग्गज और आर्थिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक एवं डिजिटल क्षेत्र के वे लोग हैं जो भारत और फ्रांस के बीच संबंधों को वास्तविक, ठोस रूप देते हैं। हम साथ मिलकर सहयोग को और आगे ले जाएंगे। मेरे प्रिय मित्र- नरेन्द्र मोदी, कल मिलते हैं।’’

दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे।

राष्ट्रपति मैक्रों भारत की मेजबानी में आयोजित एआई (कृत्रिम मेधा) शिखर सम्मेलन में भाग लेने और मुंबई में द्विपक्षीय शिखर बैठक करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 17 से 19 फरवरी तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं।

यह राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी और मुंबई की पहली यात्रा है।