फार्माकोइन्फॉर्मेटिक्स पर सम्मेलन सह कार्यशाला: टॉक्सिसिटी एवं मेटाबोलिज़्म 2026 (PIToxMet)
फार्माकोइन्फॉर्मेटिक्स पर आयोजित टॉक्सिसिटी एवं मेटाबोलिज़्म 2026 (PIToxMet) सम्मेलन सह कार्यशाला का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण के साथ हुआ। इस अवसर पर शोधकर्ता, उद्योग जगत के वैज्ञानिक तथा शिक्षाविद एकत्रित हुए, ताकि औषधि सुरक्षा और मेटाबोलिज़्म के लिए भविष्यवाणी आधारित (प्रेडिक्टिव) दृष्टिकोणों को आगे बढ़ाया जा सके।
सम्मेलन का भव्य उद्घाटन पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन तथा सरस्वती वंदना के साथ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन की यह औपचारिक परंपरा ज्ञान की खोज का प्रतीक है और इसने सम्मेलन के उस उद्देश्य को रेखांकित किया, जिसके तहत टॉक्सिकॉलोजिकल संबंधी परिणामों की बेहतर भविष्यवाणी के लिए कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस को प्रयोगात्मक सत्यापन के साथ एकीकृत करने पर बल दिया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने इस सम्मेलन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि PIToxMet जैसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों से सहयोगात्मक अनुसंधान के नए अवसर उत्पन्न होते हैं और नवोन्मेषी वैज्ञानिक विधियों को वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को गति मिलती है।
डॉ. पी. वी. भरतम ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए विषविज्ञान और फार्माकोइन्फॉर्मेटिक्स के समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए कम्प्यूटेशनल विधियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान को एक साथ लाने की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस सम्मेलन को केवल तकनीकी प्रस्तुतियों तक सीमित न मानते हुए, बल्कि विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सामूहिक और अंतःविषयक समाधान खोजने का एक सशक्त मंच बताया।
उद्घाटन सत्र का एक विशेष आकर्षण PIToxMet 2026 एब्स्ट्रैक्ट बुक का विमोचन रहा, जिसमें प्रतिभागियों और वक्ताओं के शोध योगदानों को संकलित किया गया है। इस पुस्तक का विमोचन निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने वरिष्ठ शिक्षाविदों और आमंत्रित गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया।
उद्घाटन कार्यक्रम में अकादमिक क्षेत्र, सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यानों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की गई। वक्ताओं में डॉ. देबासिसा मोहंती (निदेशक, एनआईआई, नई दिल्ली), डॉ. एंड्रयू लिन (प्रोफेसर, जेएनयू), डॉ. प्रभा गर्ग, डॉ. ऋचि महाजन (वैज्ञानिक ‘डी’, डीबीटी), डॉ. मनोज कुमार, डॉ. रजनीश कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी बीएचयू), डॉ. नेहा त्रिपाठी (जेनोस्कोप – सेंटर नेशनल द सेकेन्साज, फ्रांस), डॉ. प्रकाश राठी, डॉ. जियान मार्को घिडिनोनी (एस्ट्राजेनेका), डॉ. वैभव दीक्षित (असिस्टेंट प्रोफेसर, नाइपर गुवाहाटी) तथा डॉ. सुजीत तंगड़पल्लीवार (सह-संस्थापक, बायोलिजेन) शामिल थे।
इन विशेषज्ञों के व्याख्यानों में कम्प्यूटेशनल टॉक्सिकोलॉजी में पद्धतिगत प्रगति से लेकर ऐसे ट्रांसलेशनल केस स्टडीज़ तक के विषय शामिल रहे, जिनमें मॉलिक्यूलर सिग्नल्स को क्लिनिकल सुरक्षा मानकों से जोड़ने के प्रयासों को प्रस्तुत किया गया।
वक्ताओं ने उद्घाटन सत्र को आने वाले कई दिनों तक चलने वाले तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं और नेटवर्किंग गतिविधियों की एक सशक्त एवं गतिशील शुरुआत बताया, जिनका उद्देश्य प्रेडिक्टिव टॉक्सिकोलॉजी और औषधि मेटाबोलिज़्म अनुसंधान को गति देना है। मशीन लर्निंग और मल्टी-मॉडल डेटा इंटीग्रेशन को तेजी से अपनाते इस क्षेत्र में, सम्मेलन ने स्वयं को कम्प्यूटेशनल नवाचार और प्रयोगात्मक कठोरता के संगम पर स्थापित किया।
PIToxMet 2026 का समापन इस स्पष्ट उद्देश्य के साथ किया जाएगा कि विचार-विमर्श को ठोस साझेदारियों और क्रियान्वित किए जा सकने वाले अनुसंधान में परिवर्तित किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि यह प्रयास अत्यंत आवश्यक है, ताकि तेजी से जटिल होते चिकित्सीय उपचारों के दौर में औषधि सुरक्षा की भविष्यवाणी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

