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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं: अर्जुन राम मेघवाल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से समय-समय पर ऐसी मांगें उठती रही हैं।

मेघवाल ने कहा कि भारत के संविधान की व्यवस्था के अनुसार पशुपालन, कृषि और गोसंरक्षण से जुड़े कई विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण गोहत्या से संबंधित कानून देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं और राज्य सरकारें अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस विषय पर निर्णय लेती हैं।

राज्यों में अलग-अलग हैं कानून

कानून मंत्री ने बताया कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू है, जबकि कुछ राज्यों में अलग-अलग शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी जाती है। इसलिए इस विषय पर पूरे देश में एक समान कानूनी व्यवस्था वर्तमान में लागू नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अपने-अपने कानूनों और नीतियों के अनुसार इस विषय का प्रबंधन करती हैं और केंद्र सरकार के समक्ष इस समय ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिस पर विचार किया जा रहा हो।

लंबे समय से उठती रही है मांग

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध की मांग विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा वर्षों से उठाई जाती रही है। समर्थकों का तर्क है कि गाय का भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। वहीं इस विषय को लेकर अलग-अलग राज्यों और समुदायों में भिन्न दृष्टिकोण भी देखने को मिलते हैं।

संवैधानिक और राजनीतिक महत्व का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि गोसंरक्षण और गोहत्या से जुड़ा मुद्दा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में राज्यों को पशुधन संरक्षण और विशेष रूप से गायों एवं दुधारू पशुओं के संरक्षण के लिए प्रयास करने की सलाह दी गई है, लेकिन कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है, लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने अथवा पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने की दिशा में कोई औपचारिक पहल नहीं की जा रही है।

मेघवाल के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल केंद्र सरकार के एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है और इस विषय से जुड़े निर्णय राज्यों की नीतियों और कानूनों के अनुसार ही संचालित होते रहेंगे।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से शांतनु सेन ने दिया इस्तीफा

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Shantanu Sen ने All India Trinamool Congress के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांतनु सेन ने व्यक्तिगत कारणों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कदम को पार्टी के भीतर चल रहे हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन तृणमूल कांग्रेस के उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों और रुख को मीडिया में प्रस्तुत करते थे। वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम पार्टी के भीतर किसी असंतोष या पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करती रही है, और ऐसे में प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस रिक्त पद को कैसे भरता है और क्या शांतनु सेन भविष्य में किसी अन्य भूमिका में पार्टी में सक्रिय रहते हैं।

केरल में ईडी अधिकारियों के वाहन पर हमला, मुख्यमंत्री विजयन के आवास के बाहर बढ़ा राजनीतिक तनाव

तिरुवनंतपुरम / सत्ता संदेश

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आधिकारिक आवास के बाहर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के वाहन पर कथित हमला किए जाने की घटना सामने आई। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ईडी अधिकारियों का वाहन मुख्यमंत्री आवास के आसपास मौजूद था, तभी कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया और कथित तौर पर उस पर हमला कर दिया। घटना के दौरान वाहन को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक नुकसान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा बलों ने इलाके में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमले में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, घटना ऐसे समय हुई है जब राज्य में विभिन्न राजनीतिक और वित्तीय मामलों को लेकर ईडी की कार्रवाई चर्चा में बनी हुई है। इससे पहले भी विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं और ईडी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमला अचानक हुई झड़प का परिणाम था या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद केरल की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले से ही राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

राघव चड्ढा बने राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष, 10 सदस्यीय नई समिति का पुनर्गठन

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण संसदीय बदलाव के तहत आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha को राज्यसभा की याचिका समिति (Committee on Petitions) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही समिति का पुनर्गठन करते हुए राज्यसभा सभापति की ओर से 10 सदस्यों को इसमें नामित किया गया है।

हालांकि, कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में उनके राजनीतिक दल परिवर्तन को लेकर गलत दावे किए गए थे, लेकिन आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी के अनुसार Raghav Chadha अभी भी आम आदमी पार्टी से ही राज्यसभा सदस्य हैं और उन्होंने किसी अन्य दल में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।

संसदीय सूत्रों के मुताबिक, याचिका समिति नागरिकों और संगठनों से प्राप्त याचिकाओं की जांच करती है और उनसे जुड़े मामलों पर संसद को सिफारिशें देती है। इस समिति की भूमिका जनहित से जुड़े मुद्दों को संसद तक पहुंचाने में अहम मानी जाती है।

राज्यसभा सभापति की ओर से किए गए इस पुनर्गठन को संसदीय समितियों के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। नई समिति आने वाले समय में विभिन्न जनहित याचिकाओं पर विचार करेगी और आवश्यक सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संसद की विभिन्न समितियों में नए सिरे से जिम्मेदारियां बांटी जा रही हैं ताकि विधायी कार्यों को और अधिक सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।

केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की दिल्ली यात्रा, कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से की मुलाकात

केरल / सत्ता संदेश

केरल के मुख्यमंत्री V. D. Satheesan ने पदभार संभालने के बाद अपनी पहली दिल्ली यात्रा के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और एआईसीसी महासचिव (संगठन) K. C. Venugopal से अलग-अलग उनके आवास पर मुलाकात की।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा को लेकर पार्टी नेतृत्व सक्रिय है। बैठक को शिष्टाचार भेंट के साथ-साथ संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान केरल की राजनीतिक स्थिति, राज्य सरकार के कामकाज, संगठन विस्तार और आगामी चुनावी तैयारियों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य इकाई के कामकाज को लेकर फीडबैक लिया और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री सतीशन की यह दिल्ली यात्रा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे केरल और केंद्र के बीच समन्वय के साथ-साथ पार्टी संगठन के भीतर रणनीतिक संवाद को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कांग्रेस नेताओं के साथ हुई इस मुलाकात को पार्टी के भीतर एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई आश्वासन दिया है: केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया

 नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को सवाल किया कि क्या ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि भारतीय पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बृहस्पतिवार रात फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की ‘‘गंभीर स्थिति’’ पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है कि वह हमारे पोतों को होर्मुज से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?’’

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है।

भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने तीन दिन पहले उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।