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MSME दिवस 2026 पर विशेष: कैसे डिजिटल पोर्टल भारत के 8 करोड़ MSME के कामकाज के तरीके में चुपचाप बड़ा बदलाव ला रहे हैं

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

एक दशक पहले किसी भी सरकारी जिला कार्यालय में जाइए। वहां कागजों की फाइलों का ढेर, काम के बोझ से परेशान कर्मचारी और पंजीकरण प्रमाणपत्र या भुगतान विवाद के निपटारे के लिए कई दिनों, कभी-कभी कई हफ्तों तक इंतजार करते उद्यमी आम दृश्य हुआ करते थे। आज देश के किसी भी कोने में बैठा एक कारीगर अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में अपना उद्यम पंजीकृत कर सकता है, अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार में बेचने के लिए सूचीबद्ध कर सकता है और अपनी कार्यशाला से बाहर निकले बिना बकाया भुगतान की शिकायत भी दर्ज करा सकता है। यह केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था में आया एक बड़ा बदलाव है।

भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश की अर्थव्यवस्था का छोटा हिस्सा नहीं हैं। वर्ष 2026 के एमएसएमई दिवस पर यह समझना जरूरी है कि इनका योगदान कितना बड़ा है। ये देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत से अधिक और कुल निर्यात में लगभग 48.58 प्रतिशत का योगदान देते हैं। साथ ही, ये लगभग 38 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जो दुनिया के अधिकांश देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। इसके बावजूद, कई दशकों तक ये उद्यम औपचारिक व्यवस्था से दूर रहे। इन्हें संस्थागत ऋण आसानी से नहीं मिला, बड़े सरकारी और निजी खरीद बाजारों तक पहुंच सीमित रही और जटिल नियम-कायदों का सामना करना पड़ा, जिनका लाभ अक्सर बड़े उद्योगों को मिलता था।

अब स्थिति तेजी से बदल रही है। एमएसएमई के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए कई डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक उनकी किसी खास समस्या का समाधान करता है। इन पहलों ने सरकार और छोटे उद्यमियों के बीच संबंधों को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है।

अंगुलियों पर औपचारिक पहचान

सबसे बड़ी और बुनियादी समस्या यह थी कि बिना औपचारिक पंजीकरण के कोई भी उद्यम सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण या सरकारी ठेकों का लाभ नहीं ले सकता था। उद्यम पोर्टल पर कागज रहित, आधार आधारित सत्यापन और स्व-घोषणा की व्यवस्था ने पहले की लंबी और जटिल प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों की ऑनलाइन प्रक्रिया में बदल दिया। आज 8.7 करोड़ उद्यम इस पोर्टल के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इतिहास में इतने बड़े स्तर पर औपचारिक पंजीकरण का यह एक दुर्लभ उदाहरण है।

लेकिन केवल औपचारिक पंजीकरण ही पर्याप्त नहीं है। यदि सबसे छोटे और कमजोर उद्यम इससे बाहर रह जाएं, तो इसका पूरा लाभ नहीं मिल सकता। इसी उद्देश्य से उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म शुरू किया गया। यह उन सूक्ष्म और अनौपचारिक उद्यमों के लिए बनाया गया है, जिनके पास सामान्य पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इस मंच पर अब तक 3.28 करोड़ ऐसे उद्यम जुड़ चुके हैं। इससे पहली बार लाखों छोटे कारोबार सरकारी सहायता और योजनाओं की पहुंच में आए हैं, जो पहले किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।

सरकारी खरीद में समान अवसर

पहले छोटे उद्यमों के लिए ग्राहकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं था। यह अक्सर भौगोलिक दूरी, सीमित संपर्कों और सरकारी खरीद की जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर करता था। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। यह एक पारदर्शी ऑनलाइन मंच है, जहां कोई भी पंजीकृत एमएसएमई सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को सीधे सामान और सेवाएं बेच सकता है। इससे सरकारी खरीद प्रणाली अधिक खुली और सभी के लिए समान अवसर वाली बन गई है।

आज जेम पर 11.14 लाख से अधिक एमएसएमई विक्रेता पंजीकृत हैं। इनमें 2.03 लाख महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले और 61 हजार अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यम शामिल हैं। जेम के माध्यम से अब तक 18.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी खरीद हो चुकी है। यह केवल कारोबार का आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, छोटे उद्यमों की मजबूती और आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार का भी प्रमाण है।

नकदी की उपलब्धता आसान बनाना

यदि पंजीकरण और बाजार तक पहुंच एमएसएमई सुधारों की मजबूत नींव हैं, तो समय पर धन उपलब्ध होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लंबे समय तक सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बड़े खरीदार छोटे उद्यमों के भुगतान 60, 90 या कभी-कभी 180 दिनों तक रोककर रखते थे। इससे छोटे कारोबारियों को महंगे अनौपचारिक कर्ज का सहारा लेना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए व्यापार प्राप्तियों के छूटकरण प्रणाली (टीआरईडीएस) शुरू की गई। अब एमएसएमई अपने बिल इस डिजिटल मंच पर अपलोड कर सकते हैं, जहां बैंक और वित्तीय संस्थान उन बिलों के बदले तुरंत धन उपलब्ध कराते हैं। इससे कारोबार के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी समय पर मिल जाती है।

वर्ष 2021 से 2026 के बीच टीआरईडीएस के माध्यम से 8.35 लाख करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान कराया जा चुका है। इसका अर्थ है कि हजारों छोटे उद्यम अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर दे सके, उन्हें साहूकारों से महंगा कर्ज नहीं लेना पड़ा और केवल भुगतान में देरी के कारण उनका कारोबार बंद नहीं हुआ।

शिकायतों का समाधान और न्याय तक आसान पहुंच

सबसे अच्छी व्यवस्था में भी कभी-कभी समस्याएं आती हैं। इन्हें दूर करने के लिए एमएसएमई चैंपियंस पोर्टल बनाया गया है। यह एक डिजिटल मंच है, जहां उद्यमी सलाह ले सकते हैं, अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 24 जून 2026 तक इस पोर्टल पर प्राप्त कुल शिकायतों में से 1,85,253 शिकायतों यानी 99.66 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है।

एमएसएमई समाधान पोर्टल विशेष रूप से छोटे उद्यमों के बकाया भुगतान की समस्या को दूर करने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल न्याय तक पहुंच को और आसान बनाता है। इस पोर्टल के माध्यम से छोटे उद्यम अपने व्यावसायिक विवादों का समाधान ऑनलाइन सुलह और मध्यस्थता के जरिए कर सकते हैं। इससे देश के सबसे छोटे कारोबारियों के लिए न्याय प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सुलभ हो गया है।

नई पीढ़ी के डिजिटल मंच

इस वर्ष का एमएसएमई दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि डिजिटल बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत भी है। भारत अब अपनी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीएमईजीपी 2.0 पोर्टल आवेदन से लेकर अनुदान मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को और सरल बनाएगा। एमएसएमई समाधान 2.0 बकाया भुगतान के मामलों का और तेज़ी से निपटारा करेगा। वहीं, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 एक सरकारी सहयोग वाला ऑनलाइन बाजार होगा, जो ओएनडीसी व्यवस्था से जुड़ा रहेगा। इसके माध्यम से छोटे उद्यम एक-दूसरे के साथ और सीधे ग्राहकों को भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे, साथ ही वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के इस दौर में सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि इस परिवर्तन की यात्रा में कोई भी उद्यमी पीछे न छूटे।

बड़ी तस्वीर

ये सभी डिजिटल मंच अलग-अलग काम नहीं करते, बल्कि मिलकर एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाते हैं, जो नियमों का पालन आसान करती है, विभिन्न सरकारी आंकड़ों को आपस में जोड़ती है और सरकार तथा उद्यमों के बीच तुरंत सूचना का आदान-प्रदान संभव बनाती है। इनसे केवल सुविधा ही नहीं बढ़ी है, बल्कि उन पुराने लाभों को भी खत्म किया गया है, जो पहले केवल बड़े, शहरी और प्रभावशाली कारोबारों को मिलते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प में एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। “सबका साथ, सबका विकास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली का आधार है। 1 अप्रैल 2014 को एमएसएमई क्षेत्र को दिया गया बैंक ऋण 10.40 लाख करोड़ रुपये था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 36.79 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी 12 वर्षों में इसमें 268 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बड़े उद्योगों की तुलना में अधिक तेज रही। इस दृष्टि से एमएसएमई के लिए तैयार की गई डिजिटल व्यवस्था, विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का मजबूत आधार बन चुकी है।

देश में भविष्य के अधिकांश नए रोजगार एमएसएमई क्षेत्र से ही आएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार भी इसी क्षेत्र के माध्यम से होगा और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक व्यवस्था की ओर बदलाव भी इसी के जरिए पूरा होगा। इसलिए एमएसएमई के लिए तैयार की जा रही डिजिटल व्यवस्था विकसित भारत की मजबूत नींव है। हर नया पंजीकरण, हर समय पर मिला भुगतान और हर ऑनलाइन सुलझा विवाद वर्ष 2047 के विकसित भारत की दिशा में उठाया गया एक स्थायी कदम है।

आज लाखों छोटे उद्यमों को बाजार, वित्त और सरकारी सेवाओं से जोड़ने वाले ये डिजिटल मंच केवल तकनीकी सुविधा नहीं हैं। वे एक ऐसे भारत की मजबूत आधारशिला हैं, जहां हर छोटे उद्यमी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले और कोई भी पीछे न रह जाए।

(लेखक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं।)

नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में है नारी शक्ति
  • शोभा करंदलाजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सितंबर 2023 में संसद में समर्थन करते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता जब देश की नारियां भी इसके साथ ही उन्नति करें। उनका यह विश्वास एमएसएमई क्षेत्र (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) में सरकार के काम में हर रोज दिखाई देता है।

एमएसएमई  क्षेत्र को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। लेकिन अगर गहराई से देखें तो इसके दिल में महिला उद्यमियों का मूक बल बसता है। आखिरकार आज इस मूक बल को वह राष्ट्रीय मान्यता, संस्थागत समर्थन और नीतिगत गति मिल रही है जिसका वह हमेशा से हकदार है।

आँकड़े बयां करते हैं कहानी

भारत के एमएसएमई  इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हुए हैं। वास्तव में, ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ पंजीकरण के अनुसार, देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई में महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और ये रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। पूरी तरह से ऑनलाइन, कागज रहित और स्व-घोषणा पर आधारित इस व्यवस्था ने उस नौकरशाही बाधा को समाप्त कर दिया, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी। जनवरी 2023 में शुरू किए गए ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ ने अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत उन महिलाओं तक पहुँच बनाकर इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया, जिनके पास ‘पैन’ नंबर या ‘जीएसटीएन’  नहीं था। इसने उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभों के दायरे में लाने का काम किया।

सरकार ने महिलाओं को विकास वाहक के रूप में अपने आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है।

आर्थिक शक्ति के रूप में नारी शक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति है। उन्होंने ही कहा था कि  जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार सशक्त होते हैं और जब परिवार सशक्त होते हैं, तो राष्ट्र निरंतर मज़बूत होता जाता है।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ राजनीतिक क्षेत्र में इस दर्शन की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक व्यापक और बहुआयामी नीतिगत ढांचे के रूप में सामने आई है, जो ऋण, कौशल, बाज़ार तक पहुंच, पहचान और गरिमा जैसे पहलुओं को समाहित करती है।

महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नीतिगत संरचना

एमएसएमई मंत्रालय ने अपने हर बड़े कार्यक्रम और योजना में महिलाओं के सशक्तिकरण को व्यवस्थित रूप से शामिल किया है।

ये सभी मिलकर, आपूर्ति पक्ष पर आठ मुख्य श्रेणियों के माध्यम से उद्यमियों को सहायता प्रदान करते हैं: तकनीक तक पहुँच, ऋण और वित्त तक पहुँच, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, अवसरंचना सहायता, औपचारिकीकरण और समावेशन, बाज़ार तक पहुँच, और उद्योग-स्तरीय कौशल विकास।

पिछले पाँच वर्षों में, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 3.2 लाख से ज़्यादा महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों को सहायता दी गई है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से 39% महिलाएँ हैं जो इस योजना की रूपरेखा और महिलाओं की कुछ कर दिखाने की ललक, दोनों को दर्शाता है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट महिला ऋणदाताओं को 90 प्रतिशत तक का बढ़ा हुआ गारंटी कवर प्रदान करता है। इससे बैंक बिना कुछ गिरवी रखे महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हैं।

इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक खरीद नीति  में संशोधन कर यह अनिवार्य किया गया कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से ही खरीदें। इससे महिला उद्यमियों के लिए एक सुनिश्चित और अनुमानित बाज़ार तैयार होता है, जिससे सरकारी खर्च को महिलाओं के व्यवसाय की वृद्धि में बदला जा रहा है। यह देखकर खुशी होती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा की गई कुल खरीद का 3.5 प्रतिशत हिस्सा महिला एमएसएमई  से ही खरीदा गया था।

‘जेडइडी’ (जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट) प्रमाणन योजना के तहत, महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई को प्रमाणन शुल्क पर सौ प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। ये विस्तृत विवरण काफी महत्वपूर्ण हैं और ये मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में गहराई से विचार किया है कि महिलाओं को कहाँ कहाँ बाधाओं का सामना करना पड़ता है और ठीक उन्हीं बाधाओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ सहायता दी गई।

‘महिला कॉयर योजना’, के तहत कॉयर क्षेत्र में काम करने वाली महिला कारीगरों को विशेष कौशल विकास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ‘एमएसएमई- व्यापार सशक्तिकरण और विपणन’ के तहत महिलाओं को मार्केटिंग के लिए मदद करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 लाख लाभार्थियों में से 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘यशस्विनी अभियान’ में, एमएसएमई  योजनाओं और पंजीकरण से मिलने वाले लाभों के बारे में महिलाओं को जानकारी देने के लिए पूरे देश में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए आयोजित ‘एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन’ 3.0 के तहत 18,888 से अधिक आइडिया प्राप्त हुए, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि महिलाओं में रचनात्मक और उद्यमशीलता की ऊर्जा का भंडार मौजूद है, जो बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहा है।

इसके अलावा, मंत्रालय के पास एक समर्पित महिला उद्यमिता प्रकोष्ठ है, जो विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करके, महिलाओं के लिए प्राप्त परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन करके, तथा इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ जुड़कर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।

इन सभी पहलों ने जेंडर टारगेटिंग (लैंगिक लक्ष्यीकरण) और अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया है। ये कदम योजनाओं के भीतर केवल एक सब्सिडी प्रावधान के रूप में ‘महिलाओं के समावेश’ से आगे बढ़कर, महिला-अनुकूल उद्यमिता सहायता के लिए एक अधिक सुविचारित और व्यापक ढांचे की ओर बढ़ने के सफर को दर्शाते हैं।

कौशल, आत्मविश्वास, समुदाय

क्रेडिट और बाज़ारों से परे, सरकार ने यह माना है कि उद्यमिता कौशल और आत्मविश्वास का भी विषय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, जहाँ महिलाएँ पारंपरिक रूप से अपने समाज की आर्थिक रीढ़ रही हैं, लक्षित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रशिक्षित प्रतिभागियों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक हो।

स्वयं सहायता समूहों को एमएसएमई सहायता तंत्रों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे महिला उद्यमियों के ऐसे समुदाय बने हैं जो एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। वे न केवल अपना व्यवसाय खड़ा करते हैं, बल्कि आपस में जुड़कर एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार करते हैं।

यह एक ऐसी सरकार है जो निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। प्रत्येक बजट, प्रत्येक योजना और प्रत्येक पोर्टल का सरलीकरण उस विशाल इमारत की एक ईंट के समान है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री मोदी ने एक सरल, किंतु क्रांतिकारी विचार के साथ रखी थी—कि भारत की महिलाएं एक ऐसी शक्ति हैं जिन्हें अब स्वतंत्र और सशक्त होने का अवसर मिलना चाहिए।

हर उद्यम में नारी शक्तिकी भावना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने दुनिया को बताया कि भारत की महिलाएँ यहाँ की संसद का हिस्सा हैं। इस सरकार की एमएसएमई नीतियां दुनिया को यह बता रही हैं कि भारत की महिलाएँ देश के बाजारों, कारखानों, उसकी निर्यात श्रृंखलाओं, उसके नवाचार केंद्रों और उसके बोर्डरूम्स की भी हकदार हैं।

ये उसी एक सत्य की अभिव्यक्तियाँ हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के अपने विज़न का आधार बनाया है। एक विकसित भारत वह भारत है, जहाँ 3 करोड़ से भी ज़्यादा महिला उद्यमी (और यह संख्या लगातार बढ़ रही है) विकास की असली ताकत हैं।

अभी हम उस लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुँचे हैं, लेकिन इस सरकार की देखरेख में और प्रधानमंत्री के पक्के इरादों के साथ, हम यकीनन उस राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

(लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)