ब्रेकिंग न्यूज़
हर काम देश के नाम’

सैनिकों के स्वास्थ्य और परिवार की भलाई को मजबूत करने के लिए  सप्त शक्ति कमान 11 एवं 12 मई 2026 को दो दिवसीय लैंडमार्क वेलनेस सेमिनार “ ऑगमेंटेड  वैलनेस : फिट  फॉर  ड्यूटी , फिट  फॉर  लाइफ   ” का आयोजन करने जा रही है।

चंडीगढ़: /सत्ता संदेश

भारतीय सेना गर्व के साथ संवर्धित वेलनेस नामक उच्च प्रभाव वाला दो दिवसीय वेलनेस सेमिनार आयोजित करने जा रही है। यह सेमिनार सैनिकों, अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसका शीर्षक “वेलनेस सेमिनार” है। यह सेमिनार आज के कठिन परिचालन वातावरण में सेवा कर रहे सैन्य कर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, वित्तीय और आध्यात्मिक चुनौतियों का समाधान करेगा।

वेलनेस सेमिनार बठिंडा मिलिट्री स्टेशन के सागत सिंह ऑडिटोरियम में 11 एवं 12 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को तीन शक्तिशाली सत्रों के साथ तैयार किया गया है, जो अत्याधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान को युद्धकालीन सैन्य अनुभव के साथ जोड़कर व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रणनीतियाँ प्रदान करता है, जिससे  सेना की परिचालन तैयारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों में सीधी वृद्धि होगी।

आधुनिक सैन्य जीवन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, वित्तीय समझदारी और आध्यात्मिक शक्ति की मांग करता है। यह सेमिनार प्रतिभागियों को प्रमाण-आधारित उपकरण और सेवा/सेवानिवृत्त सैन्य नेताओं तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों के समय-परीक्षित ज्ञान से सुसज्जित करेगा ताकि “संतुलित योद्धा” का निर्माण किया जा सके, जो मिशन के लिए सदैव तैयार रहे तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कल्याण भी बनाए रखे। यह सेमिनार जीवनशैली संबंधी रोगों में कमी, बेहतर तनाव प्रबंधन, मजबूत परिवार समर्थन प्रणालियों तथा संगठनात्मक लचक में सीधा योगदान देगा।

हमला, घेराबंदी, विजय: ऑपरेशन सिंदूर और वह सिद्धांत जिसे भारत ने 88 घंटों में गढ़ा

एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (सेवानिवृत्त)

6–7 मई 2025 की रात, भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया—यह 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, के जवाब में चलाया गया एक योजनाबद्ध और समयबद्ध सैन्य अभियान था। इसके बाद अगले 88 घंटों में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत के एक नए और पूरी तरह विकसित रणनीतिक सिद्धांत का प्रदर्शन था। यह सिद्धांत स्पष्ट उद्देश्य, तकनीकी आत्मनिर्भरता, राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकजुटता से परिभाषित होता है।

ऑपरेशन सिंदूर ने परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसी देशों के बीच सैन्य टकराव के नियमों को फिर से परिभाषित किया और एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आने वाले दशकों तक दक्षिण एशिया की सुरक्षा दिशा तय करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पहली बार भारत ने ऐसे दुश्मन का सामना किया—और उसे परास्त किया—जो वस्तुतः एक ही मोर्चे पर दो देशों की संयुक्त शक्ति के रूप में सामने आया। चीन ने औपचारिक रूप से दूरी बनाए रखी, लेकिन उसने पाकिस्तान को सैटेलाइट खुफिया जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध समर्थन, साइबर सहायता और PL-15 जैसी ‘बियॉन्ड-विजुअल-रेंज’ (BVR) मिसाइलों सहित अग्रिम सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए। इसके बावजूद भारत ने इस संयुक्त चुनौती को हराया।

नियंत्रित युद्ध का सिद्धांत

आधुनिक संघर्षों की सबसे बड़ी विफलता—चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया के संघर्ष—यह रही है कि उनमें कोई स्पष्ट ‘एग्जिट स्ट्रेटेजी’ नहीं होती। लंबे खिंचने वाले युद्ध अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर करते हैं, जन-मन को थका देते हैं और न तो स्पष्ट जीत दिलाते हैं और न ही स्थायी शांति। इसके विपरीत, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने इस जाल से खुद को बचाया और वह कर दिखाया जो बहुत कम आधुनिक सेनाएं कर पाती हैं—पहली मिसाइल दागने से पहले ही सफलता की परिभाषा तय करना।

भारत के उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट थे: आतंकी ढांचे और उन्हें संरक्षण देने वालों को नष्ट करना, दुश्मन को अधिकतम नुकसान पहुंचाना और अपनी शर्तों पर अभियान समाप्त करना—साथ ही नागरिकों को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाना। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर नौ लक्ष्यों की पहचान की, जो लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी नेटवर्क से जुड़े थे। पहला हमला मात्र 23 मिनट में पूरा हुआ और पूरा अभियान 88 घंटों में समाप्त कर दिया गया। इसके बाद भारत ने दुश्मन को अपनी शर्तों पर युद्धविराम के लिए मजबूर किया।

यह सिद्धांत—स्पष्ट उद्देश्य के साथ प्रवेश करना, सटीकता के साथ कार्रवाई करना और बिना अनावश्यक विस्तार के बाहर निकलना—नियंत्रित युद्ध की एक दुर्लभ शैली है, जिसका अध्ययन आने वाले वर्षों में सैन्य संस्थानों में किया जाएगा।

दुश्मन के गढ़ में गहरी चोट

ऑपरेशन सिंदूर का भौगोलिक दायरा अभूतपूर्व था। भारत ने अपने हमले केवल पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं रखे, बल्कि पाकिस्तान के मुख्य भूभाग—विशेषकर पंजाब—के भीतर गहराई तक प्रहार किए। सियालकोट और बहावलपुर जैसे ठिकानों पर सटीक हमले किए गए, जो भारतीय सीमा से 140 किमी से भी अधिक दूर हैं।

बाद में रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस और सरगोधा जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी भारत की मारक क्षमता के दायरे में लाया गया। संदेश स्पष्ट था: कोई भी ठिकाना पहुंच से बाहर नहीं है।

100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें IC-814 अपहरण से जुड़ा यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और पुलवामा हमले से जुड़ा मुदस्सिर अहमद शामिल थे। जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य भी मारे गए। इन हमलों ने आतंकी संगठनों की कमांड संरचना को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया।

सबसे अहम बात यह रही कि इस अभियान ने ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ की अवधारणा को तोड़ दिया। दशकों से पाकिस्तान परमाणु छत्रछाया का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए करता रहा था, इस धारणा के साथ कि भारत प्रतिक्रिया नहीं देगा। भारत ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

सीमापार अधिकतम क्षति, देश के भीतर न्यूनतम प्रभाव

जहां अधिकांश युद्धों का प्रभाव सीमाओं से बाहर फैलता है, वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने इस पैटर्न को तोड़ दिया। भारत ने दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि अपने देश में इसका प्रभाव लगभग शून्य रहा।

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की चीनी मूल की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर दिया। राफेल जेट, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर प्रिसिजन बमों का इस्तेमाल करते हुए शुरुआती हमले 23 मिनट में पूरे किए गए।

9–10 मई को पाकिस्तान द्वारा जवाबी हमले के बाद भारत ने एक ही समय में 11 एयरबेस पर हमला किया—यह इतिहास में पहली बार था। इसमें पाकिस्तान की वायुसेना की लगभग 20% क्षमता नष्ट हो गई।

भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली—जिसमें S-400, आकाश और MRSAM शामिल हैं—ने पाकिस्तान द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को लगभग 100% सफलता के साथ नष्ट कर दिया। यहां तक कि 314 किमी दूर एक पाकिस्तानी AEW&C विमान को मार गिराया गया।

समन्वय, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण

इस अभियान की सफलता ‘JAI’—संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण—पर आधारित थी। तीनों सेनाओं ने मिलकर बेहतरीन तालमेल के साथ काम किया। नौसेना ने अरब सागर में दबदबा बनाए रखा, वायुसेना ने सटीक हमले किए और थलसेना ने रक्षा को मजबूत किया।

भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹1.54 लाख करोड़ हो गया, जिसमें 65% से अधिक उपकरण देश में ही बन रहे हैं। ब्रह्मोस, आकाश और अन्य स्वदेशी प्रणालियों ने निर्णायक भूमिका निभाई।

राजनीतिक इच्छाशक्ति की भूमिका

सैन्य शक्ति तभी प्रभावी होती है जब उसके पीछे मजबूत राजनीतिक नेतृत्व हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान की पूरी जिम्मेदारी ली और सेना को स्पष्ट निर्देश दिए: आतंकियों को निशाना बनाओ, लेकिन नागरिकों को नुकसान नहीं होना चाहिए।

सिंधु जल संधि को स्थगित करना और अन्य रणनीतिक फैसले इस व्यापक नीति का हिस्सा थे, जिससे पाकिस्तान पर दीर्घकालिक दबाव बना।

एकजुट राष्ट्र: ‘Whole-of-Nation’ दृष्टिकोण

यह अभियान केवल सैन्य नहीं था, बल्कि पूरे राष्ट्र का संयुक्त प्रयास था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने उपग्रह निगरानी प्रदान की, जबकि अन्य एजेंसियों ने खुफिया समर्थन दिया।

नागरिक प्रशासन, उद्योग और स्टार्टअप्स ने भी योगदान दिया। सूचना युद्ध में भी भारत ने बढ़त बनाई और गलत सूचनाओं को तुरंत खारिज किया।

निष्कर्ष: एक नया मानक

‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक परिपक्व रणनीतिक सिद्धांत का प्रदर्शन था। इसने दिखाया कि आत्मनिर्भरता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकता के साथ एक लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्णायक जीत हासिल कर सकता है।

हालांकि, आगे की चुनौतियां बनी हुई हैं—फाइटर स्क्वाड्रन बढ़ाना, ड्रोन क्षमता मजबूत करना और रक्षा बजट को बढ़ाना आवश्यक होगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने एक नया मानक स्थापित किया है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह बढ़त बनी रहे—क्योंकि विरोधी भी सीख रहे हैं और स्थिर नहीं रहेंगे।

पीएम मोदी के नेतृत्व का कमाल, 13 सालों में विधायकों की संख्या 773 से बढ़कर 1806 हुई

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 13 सालों में कई राज्यों में बीजेपी की विधायक संख्या तेजी से बढ़ी है. चुनाव आयोग के सूत्रों से मिले डेटा के मुताबिक, सितंबर 2013 में इसके कुल विधायकों की संख्या 773 थी, जो मई 2026 में बढ़कर 1806 हो गई. पीएम मोदी के नेतृत्व में जो उछाल आया है, वह कई इलाकों में लगातार चुनावी बढ़त दिखाता है।

पश्चिम बंगाल जैसे राज्य जहां 2013 में बीजेपी का कोई भी विधायक नहीं था. 2026 के चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा पहली बार न केवल सरकार बना रही है, बल्कि विधायकों की संख्या बढ़कर 207 हो गयी है।

मणिपुर, मेघायल और मिजोरम में 2013 में भाजपा का कोई भी विधायक नहीं था. यहां भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर क्रमश 36, दो और दो हो गयी. डेटा के अनुसार तेलंगाना में भी कोई विधायक नहीं था. वहां विधायकों की संख्या बढ़कर सात हो गयी.

हिंदी पट्टी में भाजपा का बढ़ता दबदबा

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में खास बढ़त दिख रही है, जहां पार्टी के विधायकों की संख्या, जो 2013 में 47 थी, 2026 में 257 हो गई है। इसी तरह, मध्य प्रदेश में, यह 143 से बढ़कर 165 हो गई, और गुजरात में 115 से बढ़कर 161 हो गई, जिससे हिंदी पट्टी और पश्चिमी भारत में इसका दबदबा और मजबूत हुआ है. महाराष्ट्र में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, जहां बीजेपी के विधायकों की संख्या 46 से बढ़कर 131 हो गई है।

खास तौर पर, पार्टी ने नॉर्थईस्ट में काफ़ी बढ़त दर्ज की है। अरुणाचल प्रदेश में, इसके विधायक की संख्या 2013 में सिर्फ तीन से बढ़कर 2026 में 46 हो गई, जबकि असम में यह पांच से बढ़कर 82 हो गई है। इसी तरह, बीजेपी ने मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, जो इस इलाके में उसके स्ट्रेटेजिक दबाव को दिखाता है।

मोदी युग में भाजपा का राजनीतिक विस्तार

ओडिशा में भी तेज बढ़त देखी गई है, जहां भाजपा की सीटें छह से बढ़कर 79 हो गई हैं. हरियाणा में पार्टी की मौजूदगी चार से 48, दिल्ली में 23 से 48 और कर्नाटक में 40 से 64 हो गई है. हालांकि, बिहार और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में थोड़ी गिरावट या सीमित बढ़त हुई है, जो मिली-जुली लेकिन काफी हद तक ऊपर की ओर बढ़त का संकेत है।

अपनी लेजिस्लेटिव बढ़त के साथ-साथ, बीजेपी की एग्जीक्यूटिव मौजूदगी भी बढ़ने वाली है. पश्चिम बंगाल में अपनी जीत के बाद, पार्टी के 17 राज्यों में मुख्यमंत्री होने की उम्मीद है. इसके अलावा, पांच और राज्यों में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के मुख्यमंत्री हैं, जिससे विधानसभा वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से कुल 22 राज्य ऐसे हैं.

गुजरात में देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम लॉन्च

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो बाधा रहित (बैरियर-लेस) टोलिंग प्रणाली के शुभारंभ की घोषणा की। यह अत्याधुनिक प्रणाली ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन और फास्ट टैग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके, वाहनों को बिना रुके निर्बाध टोल संग्रह की सुविधा प्रदान करती है।

एमएलएफएफ की शुरुआत भारत के टोलिंग इकोसिस्टम के डिजिटलीकरण और वैश्विक मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में एक बड़ा मील का पत्थर है। इस प्रणाली से यात्रा के समय में काफी कमी आने, राजमार्गों पर भीड़ कम होने, ईंधन दक्षता में सुधार होने, वाहनों के उत्सर्जन में कमी आने और टोल संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है।

नीतिन गडकरी ने कहा कि बाधा रहित टोलिंग नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन सुगमता) को बढ़ाएगी और देशभर में माल और लॉजिस्टिक्स की तेज एवं अधिक कुशल आवाजाही सुनिश्चित कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देगी। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, यह पहल विश्व स्तरीय, प्रौद्योगिकी-संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा बनाने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो कुशल, पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल है।

पीएम नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान का दौरा करेंगे

दिल्ली \ सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री बलोतरा के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर का उद्घाटन करेंगे

79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर की स्थापना की गई

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन उत्पादन होता है

यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और पेट्रोरसायन आत्मनिर्भरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को राजस्थान का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री बलोतरा के पचपदरा में सुबह लगभग 11:30 बजे देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

यह ऐतिहासिक परियोजना देश के ऊर्जा और पेट्रोरसायन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता वाले इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर की स्थापना 79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से की गई है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन उत्पादन होता है। इसकी पेट्रोरसायन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रोरसायन उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और स्थिरता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है।

इस परियोजना से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोरसायन आत्मनिर्भरता बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। यह क्षेत्र में पेट्रोरसायन और प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए एक आधार उद्योग के रूप में कार्य करेगी, जिससे संबंधित उद्योगों और सहायक क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से रिफाइनरी रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

प्रधानमंत्री 31 मार्च को गुजरात का दौरा करेंगे

महावीर जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री गांधीनगर के कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे
संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है, यह आगंतुकों को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव की कालानुक्रमिक समझ प्राप्त करने में सहायता करेगा
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रधानमंत्री सानंद में केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन करेंगे
भारत में वाणिज्यिक उत्पादन का शुभारंभ करने वाला यह दूसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र होगा
संयंत्र स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग क्षमता के निर्माण में योगदान देगा, भारत के चिप इकोसिस्‍टम में महत्वपूर्ण अंतर को समाप्‍त करते हुए आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा
प्रधानमंत्री वाव-थराद में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे साथ ही उद्घाटन तथा राष्ट्र को समर्पित करेंगे
परियोजनाओं में बिजली, रेलवे, सड़क परिवहन और राजमार्ग, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जनजातीय विकास तथा ग्रामीण विकास सहित प्रमुख क्षेत्र शामिल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 31 मार्च 2026 को गुजरात का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री गांधीनगर में सुबह लगभग 10 बजे सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर जनसभा को संबोधित भी करेंगे। प्रधानमंत्री अहमदाबाद के सानंद में स्थित केयन्स सेमीकॉन प्लांट का दोपहर लगभग 12:45 बजे उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद, प्रधानमंत्री वाव-थराद जाएंगे, जहां शाम लगभग 4 बजे, वे 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करके राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री का गांधीनगर दौरा

महावीर जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री गांधीनगर के कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। अशोक के पौत्र और जैन परंपरा में अहिंसा के प्रति समर्पण तथा जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध सम्राट सम्प्रति के नाम पर स्थापित यह संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है।

महावीर जैन आराधना केंद्र परिसर में स्थित इस संग्रहालय में सात अलग-अलग खण्‍ड हैं, जिनमें से प्रत्येक भारत की सभ्यतागत परंपराओं के अनूठे पहलुओं को समर्पित है। यह आगंतुकों को सदियों पुराने ज्ञान और विरासत की एक व्यापक यात्रा के दर्शन कराता है। संग्रहालय पारंपरिक प्रदर्शनों को आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल उपकरणों के साथ एकीकृत करता है, जिससे आगंतुकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक गहन और आकर्षक अनुभव का निर्माण होता है।

यह संग्रहालय सदियों पुराने दुर्लभ अवशेषों, जैन कलाकृतियों और पारंपरिक विरासत संग्रहों का संरक्षण और प्रदर्शन करता है। इनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, विशाल तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्रकारी, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं, जिन्हें सात भव्य दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। विशाल कक्षों में व्यवस्थित दो हजार से अधिक दुर्लभ खजानों से युक्त यह संग्रहालय आगंतुकों को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव की कालानुक्रमिक समझ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

प्रधानमंत्री का सानंद दौरा

प्रधानमंत्री अहमदाबाद के सानंद जीआईडीसी में स्थित केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही इस संयंत्र में वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत होगी, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत उन्नत इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल (आईपीएम) के निर्माण से होगी, जो ऑटोमोटिव और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं और जिन्हें कॉम्पैक्ट, कुशल और विश्वसनीय पावर स्विचिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। प्रत्येक मॉड्यूल में 17 चिप्स होते हैं और इनकी आपूर्ति कैलिफोर्निया स्थित अल्फा एंड ओमेगा सेमीकंडक्टर (एओएस) को की जाएगी। संयंत्र के सभी चरण पूरे होने पर, इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 6.33 मिलियन यूनिट होगी।

केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यक्रम के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में से माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बाद वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाली दूसरी सेमीकंडक्टर सुविधा होगी।

यह परियोजना विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसके अंतर्गत भारत की दूसरी ओएसएटी/एटीएमपी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट/असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकिंग) इकाई उत्पादन चरण में प्रवेश कर रही है। यह परियोजना सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में भारतीय मूल की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनी के प्रवेश का भी प्रतीक है, जिससे घरेलू क्षमताओं को मजबूती मिलती है।

यह सुविधा स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग क्षमता के निर्माण में योगदान देगी, भारत के चिप इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करेगी और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को आगे बढ़ाएगी।

प्रधानमंत्री का वाव-थारद दौरा

प्रधानमंत्री 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, उनका उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। ये परियोजनाएं बिजली, रेलवे, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जनजातीय विकास और ग्रामीण विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती हैं।

प्रधानमंत्री 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाएगा, धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (डीएसआईआर) में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा और आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री पक्की शोल्डर वाली चार लेन की इदर-बडोली बाईपास सड़क के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। वे एनएच-754के के धोलावीरा-मौवाना-वाउवा-संतालपुर खंड (पैकेज-II) को दो लेन की पक्की शोल्डर वाली सड़क में अपग्रेड करने की भी आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं से राजमार्ग बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, धोलावीरा जैसे पर्यटन स्थलों सहित प्रमुख क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री गांधीनगर-कोबा-एयरपोर्ट रोड पर भाईजीपुरा जंक्शन पर बनने वाले फ्लाईओवर सहित कई महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इस फ्लाईओवर से यातायात की भीड़ कम होगी और इसके नीचे व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी। गांधीनगर-कोबा-आरोदराम रोड पर स्थित पीडीपीयू जंक्शन पर भी फ्लाईओवर का उद्घाटन किया जाएगा। गांधीनगर को एयरपोर्ट से जोड़ने वाली इस सड़क पर प्रतिदिन 140,000 से अधिक वाहन गुजरते हैं। यह फ्लाईओवर अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच सीएच-0 जंक्शन से एयरपोर्ट तक सुचारू और निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा।

प्रधानमंत्री खावड़ा पूलिंग स्टेशन-2 और उससे जुड़े 4.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के परिवहन हेतु संबद्ध पारेषण प्रणालियों सहित प्रमुख विद्युत पारेषण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिनकी कुल लागत लगभग 3,650 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और पारेषण क्षमता को मजबूत करेंगी।

रेल क्षेत्र में, प्रधानमंत्री कनलस-जामनगर दोहरीकरण परियोजना (28 किमी), राजकोट-कनलस दोहरीकरण परियोजना का एक भाग (111.20 किमी), और गांधीधाम-आदिपुर खंड (10.69 किमी) के चौगुने विस्तार को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन परियोजनाओं से रेल क्षमता में वृद्धि होगी, भीड़ कम होगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा और यात्रियों और माल की आवाजाही तेज होगी।

प्रधानमंत्री हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा गेज रूपांतरण परियोजना (54.83 किमी) का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे क्षेत्र में रेल संपर्क और यात्री आवागमन में सुधार होगा। वे खेदब्रह्मा-हिम्मतनगर-असरवा ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री गुजरात में शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई लगभग 5,300 करोड़ रुपये की 44 शहरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी विभिन्न पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें अहमदाबाद के असरवा स्थित सिविल अस्पताल में 858 बिस्तरों वाले रेन बसेरा और गांधीनगर के सिविल अस्पताल और जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज में इसी तरह की सुविधाओं का उद्घाटन शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी पाटन स्थित रानी की वाव में लाइट एंड साउंड शो, शर्मिष्ठा झील, वडनगर में वाटर स्क्रीन प्रोजेक्शन शो सहित पर्यटन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और बनासकांठा में बलराम महादेव और विश्वेश्वर महादेव में पर्यटन अवसंरचना कार्यों की आधारशिला रखेंगे, जिनका उद्देश्य पर्यटन अनुभव को बढ़ाना और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री लगभग 1,780 करोड़ रुपये की लागत वाली दो प्रमुख जल पाइपलाइन परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें बनासकांठा में कसारा-दंतीवाड़ा पाइपलाइन और पाटन और बनासकांठा के बीच से गुजरने वाली दिंद्रोल-मुक्तेश्वर पाइपलाइन शामिल हैं। प्रधानमंत्री अंबाजी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल आपूर्ति योजना की आधारशिला रखेंगे। इससे बनासकांठा जिले के दंता और अमीरगढ़ तालुकों के 34 गांवों और अंबाजी शहर को पेयजल उपलब्ध होगा, जिससे लगभग 1.5 लाख लोगों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री गांधीनगर जिले में लगभग 1000 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश से निर्मित तीन साबरमती नदी तट विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।

प्रधानमंत्री अहमदाबाद के वेजलपुर में सरकारी लड़कों के छात्रावास का उद्घाटन करेंगे। यह सुविधा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे जनजातीय छात्रों को सहायता प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री ने श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत माता के वीर सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा को आज उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में एक नई चेतना का संचार किया। श्री मोदी ने कहा, “उनका जीवन और आदर्श देश की हर पीढ़ी को राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

“भारत माता के वीर सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों से आजादी के आंदोलन में नई चेतना जगाई थी। उनका जीवन और आदर्श देश की हर पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

दिल्ली एवं इंदौर की घटनाओं में हुई मौतों पर मोदी ने शोक जताया, अनुग्रह राशि की घोषणा की

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली के पालम और मध्यप्रदेश के इंदौर में आग लगने की घटनाओं में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है तथा प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

बुधवार को हुई इन दोनों घटनाओं में कुल 17 लोगों की मृत्यु हो गयी।

प्रधानमंत्री ने इन घटनाओं में प्रियजनों को खोने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मध्यप्रदेश के इंदौर में आग की दुर्घटना में लोगों की मौत से मैं अत्यंत दुखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50-50 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।”

एक अन्य पोस्ट में मोदी ने कहा, “दिल्ली के पालम में आग की घटना दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये प्रदान किए जायेंगे।”

इंदौर में बुधवार तड़के एक तीन मंजिला मकान में आग लगने से एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत हो गयी। यह आग इमारत के बाहर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग प्वॉइंट पर हुए विस्फोट के बाद लगी।

एक अन्य घटना में, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के नौ लोगों की मृत्यु हो गई, जिनमें 70-वर्षीय एक महिला और उनकी तीन पोतियां शामिल थीं।

जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, वही नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया: जयराम रमेश

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा का सदस्य बनने के फैसले को लेकर शुक्रवार को भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो इस साल जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ किया था, वही अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के छोड़ने का फैसला जनादेश के साथ विश्वासघात है क्योंकि पिछले साल नवंबर में राज्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि नीतीश को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था।

नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में यह ऐलान किया था कि वह राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं और बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

बिहार की राजनीति के इस बड़े घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बिहार के चुनाव प्रचार के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे जी और राहुल गांधी जी ने कहा था कि नीतीश कुमार ज्यादा समय के लिए मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे क्योंकि भाजपा का मकसद यही है कि उनको हटाया जाए। आखिरकार यही हुआ। नीतीश को इस बार मुख्यमंत्री बने चार महीने भी नहीं हुए और उन्हें हटाया जा रहा है।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, यहां मोदी जी ने नीतीश कुमार के साथ किया है।’’

उल्लेखनीय है कि इस साल तीन जनवरी को अमेरिका के विशेष सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला में एक सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर अमेरिका ले गए थे। अब इनके खिलाफ अमेरिका में कानूनी कार्रवाई चल रही है।

रमेश ने नीतीश कुमार के मामले को लेकर दावा किया, ‘‘यह तो तख्तापलट है। यह तो होना ही था। यह बिहार की जनता और उसके जनादेश के साथ विश्चासघात है।’’

उनके मुताबिक, जनादेश भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं था, जनादेश नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था।

रमेश ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘हो सकता है कि कल नायडू को भी तख्तापलट कर राज्यसभा में लाया जाए और मंत्री बना दिया जाए। महाराष्ट्र में भी तो तख्लापलट हुआ था…यह सब ‘जी2’ का कमाल है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से सुधारों पर अपना एजेंडा पेश करने को कहा

नेशनल डेस्क (सत्ता संदेश)-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुधारों को लेकर महत्वाकांक्षी एजेंडा सामने रखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से कहा है कि वे अपने-अपने मंत्रालयों में आने वाले वर्षों में किए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर विस्तृत नोट तैयार करें। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि यह कवायद सरकार के सुधारों पर केंद्रित ‘रिफॉर्म एक्सप्रेसÓ एजेंडा का हिस्सा है जिसके तहत प्रक्रियाओं को सरल बनाना, कारोबारी सुगमता में सुधार करना और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन का दायरा बढ़ाना लक्ष्य है। मंत्रियों से कहा गया है कि वे यह नोट स्वयं तैयार करें और केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उसे पेश कर अपने मंत्रालय की गतिविधियों और सुधार दृष्टिकोण की जानकारी दें। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडलीय सचिवालय ने एक निर्धारित प्रारूप प्रसारित किया है, जिसमें हरेक मंत्रालय को पिछले कुछ वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों के साथ भविष्य की सुधार पहलों का विवरण देना होगा। इस प्रारूप में यह स्पष्ट करना होगा कि सुधार कब लागू किए गए या कब प्रस्तावित हैं और उन सुधारों से क्या परिणाम अपेक्षित हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि हरेक मंत्रालय अपने सुधार एजेंडे को प्राथमिकता दे ताकि उसके परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दें। यह समूची प्रक्रिया वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की व्यापक रूपरेखा का हिस्सा मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पी.टी.आई.-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि उनकी सरकार की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेसÓ से आम नागरिकों को व्यापक लाभ मिल रहा है। अगले दशक की शीर्ष प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘हमारी दिशा स्पष्ट है, इसे किसी निश्चित संख्या तक सीमित नहीं किया जा सकता।Ó प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार एवं वित्तÓ विषय पर आयोजित एक बजट-पश्चात वेबिनार में सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच सहयोग के लिए ‘सुधार साझेदारी चार्टरÓ विकसित करने का सुझाव भी दिया