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गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)  ने निगमन दिवस 2026 मनाया; भारत में डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अपना सहयोग जारी रखा

दिल्ली /सत्ता संदेश

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) अपना निगमन दिवस 2026 मना रहा है। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक खरीद के सहयोग में इसकी निरंतर भूमिका को दर्शाता है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी संस्था, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस स्पेशल पर्पस व्हीकल (जेम एसपीवी) को जेम प्लेटफॉर्म के विकास, प्रबंधन और रखरखाव के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 17 मई 2017 को स्थापित किया गया था। वर्षों से, जेम एक प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में उभरा है, जो देश भर के विक्रेताओं के लिए व्यापार में सुगमता और व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देता है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना के अनुरूप स्थानीय क्षमताओं को सरकारी खरीद के अवसरों से जोड़कर घरेलू उद्यमों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन, निर्माण उपकरण, फर्नीचर, वस्त्र और चिकित्सा वस्‍तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रथम श्रेणी के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी देखी गई है।  

आज, इस प्लेटफॉर्म पर 1.36 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और लगभग 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 72% सक्रिय विक्रेता सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, जेम पर मौजूद 11 लाख से अधिक एमएसई को 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए। महिला नेतृत्व वाले एमएसई को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के खरीद ऑर्डर मिले, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्टार्टअप्स को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर मिले, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और सरकारी खरीद तक ​​पहुंच बढ़ाने में जेम की भूमिका को दर्शाता है।

जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा, “जेम की स्थापना सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल खरीद मंच बनाने की परिकल्पना के  साथ की गई थी। आज, जेम घरेलू उद्यमों को खरीद के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।”

जेम निगमन दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हितधारकों के साथ जुड़ाव और ज्ञान साझा करने संबंधी कई पहल आयोजित कर रहा है। समारोह का शुभारंभ 15 मई 2026 को जेम विक्रेता मूल्यांकन कार्यशाला के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य संभावित ओईएम के लिए विक्रेता मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता बढ़ाना था।

इसके अलावा, जेम 21 मई 2026 को “जेम को समृद्ध बनाना” विषय के तहत “जेम मंथन” का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य जेम तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है। जेम 22 मई 2026 को रक्षा सेवाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श सत्र का भी आयोजन करेगा जिसमें रक्षा खरीद और परिचालन आवश्यकताओं के साथ तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रक्रिया सुधार और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 माह के लिए केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रदर्शन हेतु केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) पर 47वीं मासिक रिपोर्ट जारी की

मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कुल 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया

लगातार 45वें महीने केंद्रीय सचिवालय में मासिक निपटान का आंकड़ा 1 लाख मामलों को पार कर गया

वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-ए श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-बी श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) की मासिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों तथा उनके निपटान की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह डीएआरपीजी द्वारा प्रकाशित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों पर 47 वीं रिपोर्ट है।

मार्च 2026 तक की प्रगति के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया है। 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में शिकायत निवारण का औसत समय 13 दिन रहा। ये रिपोर्ट 10 चरणों वाली सीपीग्राम सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसे डीएआरपीजी ने निपटान की गुणवत्ता में सुधार और समय-सीमा को कम करने के लिए अपनाया था।

इस रिपोर्ट में मार्च 2026 माह में सीपीजीआरएएमएस पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं के आंकड़े दिए गए हैं। मार्च 2026 में विभिन्न माध्यमों से सीपीजीआरएएमएस पर कुल 75,853 नए उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 12,865 पंजीकरण उत्तर प्रदेश से हैं। फीडबैक कॉल सेंटर ने मार्च 2026 माह में 74,069 फीडबैक प्राप्त किए, जिनमें से 45,974 फीडबैक केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए थे।

उक्त रिपोर्ट में मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतों का राज्यवार विश्लेषण भी दिया गया है। सीपीजीआरएएमएस को सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और यह 5 लाख से अधिक सीएससी में उपलब्ध है, जो 25 लाख ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) से संबद्ध है। मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से कुल 12,763 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट में समीक्षा बैठक मॉड्यूल का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है, जिसे 14 मार्च 2025 से सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में लागू किया गया है । यह मॉड्यूल सचिव स्तर पर जनता की शिकायतों की समीक्षा को सुगम बनाता है, जिससे निवारण तंत्र की दक्षता बढ़ती है और नागरिकों की संतुष्टि में सुधार होता है। 31 मार्च 2026 तक कुल 302 समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें से 18 बैठकें मार्च 2026 में हुईं।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए डीएआरपीजी की मार्च 2026 की मासिक सीपीजीआरएएमएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

पीजी मामले:

  • मार्च 2026 में, सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर 1,89,189 पीजी मामले प्राप्त हुए, 1,81,279 पीजी मामलों का निवारण किया गया और 81,187 पीजी मामले लंबित हैं।
  • पीजी अपील:
  • मार्च 2026 में 34,135 अपीलें प्राप्त हुईं और 33,714 अपीलों का निपटारा किया गया।
  • वर्ष 2026 के लिए मार्च 2026 में 21,296 अपीलें लंबित दर्ज की गईं।
  • शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक (जीआरएआई) – मार्च, 2026
  • वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड मार्च 2026 के लिए समूह ए (500 या उससे अधिक शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन एवं सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
  • राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मार्च 2026 के लिए समूह बी (500 से कम शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने धन शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

दिल्ली/ सत्ता संदेश

एफआईयू-आईएनडी के निदेशक श्री अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य श्री रणदीप सिंह जगपाल ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष श्री शिवसुब्रमणियन रामन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों एजेंसियों को विनियमित/रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम बनाना है जिसमें पीएफआरडीए द्वारा विनियमित संस्थाओं के बीच मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/सीएफटी) क्षमताओं को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष लागू अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित करेंगे और सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करेंगे।

समझौते के प्रत्येक पक्ष द्वारा एक नोडल अधिकारी और एक वैकल्पिक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी ताकि दोनों एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय और संवाद सुगम हो सके। यह समझौता ज्ञापन एगमोंट सूचना विनिमय सिद्धांतों के माध्यम से विदेशी एफआईयू के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी सहायता करेगा।

इस सहयोग में प्रासंगिक वित्तीय उप-क्षेत्रों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण (एमएल/टीएफ) के जोखिमों और कमियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए चेतावनी संकेतकों की पहचान और प्रसार और पीएमएलए, पीएमएल नियमों और पीएफआरडीए दिशानिर्देशों के अंतर्गत दायित्वों के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा अनुपालन की निगरानी और पर्यवेक्षण भी शामिल होगा।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंड)

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, प्रोसेस करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए)

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) भारत में पेंशन क्षेत्र के विनियमन, विकास और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार वैधानिक नियामक निकाय है जिसकी स्थापना पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के अंतर्गत की गई है। इसमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। पीएफआरडीए पेंशन फंड, केंद्रीय अभिलेखपालन एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटरों और उपस्थिति केंद्रों जैसे मध्यस्थों के लिए एक व्यापक नियामक और पर्यवेक्षी ढांचा प्रदान करता है ताकि पेंशन इकोसिस्टम का सुचारू रुप से विकास सुनिश्चित हो सके और ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके।

संजीव अरोरा ने अटल अपार्टमेंट्स के लिए पारदर्शी लॉटरी का संचालन किया; प्रमुख शहरी विकास पहलों की घोषणा की

संजीव अरोरा ने अटल अपार्टमेंट्स की लॉटरी का नेतृत्व किया, लुधियाना में नागरिक अवसंरचना को बढ़ावा देने वाली प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की

संजीव अरोरा के मार्गदर्शन में अटल अपार्टमेंट्स की लॉटरी आयोजित की गई; नए सामुदायिक केंद्र और सीवर की सफाई अभियान का शुभारंभ किया गया

पंजाब सरकार की पारदर्शी शासन और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, पंजाब के स्थानीय सरकार मंत्री, माननीय कैबिनेट मंत्री संजीव अरोरा ने आज नेहरू सिद्धांत केंद्र में लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा आयोजित अटल अपार्टमेंट्स की लॉटरी का संचालन किया। यह लॉटरी जनता की प्रबल मांग के जवाब में आयोजित की गई थी।

इस अवसर पर, मंत्री ने बी. आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि इस योजना को पहले ही प्रीमियम मूल्य प्राप्त हो चुका है और इसे जनता से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, उपलब्ध फ्लैटों की संख्या से लगभग दस गुना अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरी लॉटरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है, जिसमें आवेदकों को प्रक्रिया देखने के लिए आमंत्रित किया गया है।

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने आवास योजना को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। विभिन्न श्रेणियों में 43 उच्च श्रेणी के फ्लैटों के लिए कुल 571 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 136 मध्यम श्रेणी के फ्लैटों के लिए 963 आवेदन जमा किए गए।
निर्माण कार्य का लगभग 70-80% पूरा हो चुका है, केवल अंतिम चरण का काम शेष है। फ्लैटों का कब्ज़ा इस वर्ष के अंत तक देने की योजना है;
जो सुधार ट्रस्ट के कामकाज में जनता के विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।

शहरी अवसंरचना को मजबूत करने पर सरकार के फोकस पर जोर देते हुए मंत्री जी ने घोषणा की कि किचलू नगर, मॉडल टाउन एक्सटेंशन और कबीर सोसाइटी (एसबीएस नगर) में तीन नए सामुदायिक केंद्रों के लिए अगले महीने निविदाएं जारी की जाएंगी। उन्होंने आगे बताया कि स्थानीय सरकार विभाग ने पंजाब भर में सीवेज प्रणालियों की बड़े पैमाने पर गाद निकालने के लिए दर अनुबंधों को अंतिम रूप दे दिया है। इस पहल के तहत, राज्य में आगामी मानसून के मौसम में जलभराव को रोकने के लिए नौ ठेकेदारों को चौबीसों घंटे तैनात किया जाएगा।

मंत्री ने दोहराया कि इस तरह के सक्रिय उपाय शहरी क्षेत्रों में नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने और निवासियों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बताया कि इस पहल को आम जनता से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। जनता ने आवेदन जमा करने से लेकर ड्रॉ निकालने तक की पूरी प्रक्रिया के पारदर्शी और कुशल संचालन की सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि यह योजना न केवल नागरिकों को आवश्यक आवास प्रदान करेगी, बल्कि सरकार के लिए राजस्व भी उत्पन्न करेगी, जिसे लुधियाना के विकास में पुनर्निवेश किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट जल्द ही कई नई परियोजनाएं शुरू करेगा, जिनमें निम्न आय वर्ग के लिए एक और दो बेडरूम वाले फ्लैट, साथ ही निवासियों के लिए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने वाली वाणिज्यिक संपत्तियां शामिल हैं।

ड्रॉ का संचालन संजीव अरोरा, जिला अध्यक्ष जतिंदर सिंह खंगुरा, मनु जयराथ, परमिंदर सिंह संधू, ट्रस्टी अमनदीप सिंह भाथल, संदीप मिश्रा और लुधियाना के अतिरिक्त उपायुक्त (शहरी विकास) के प्रतिनिधि बलबीर चौधरी के साथ-साथ इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया।

खान मंत्रालय ने खनिज रियायत नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए, जिनमें बीएचक्‍यू और बीएचजे सहित निर्धारित सीमा से नीचे के हेमेटाइट लौह अयस्क के एएसपी की प्रकाशन पद्धति का प्रावधान है

दिल्ली / सत्ता संदेश

खान मंत्रालय ने 10 अप्रैल, 2026 को खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिसमें सीमा मूल्य से नीचे हेमेटाइट लौह अयस्क के औसत विक्रय मूल्य (एएसपी) के प्रकाशन के लिए कार्यप्रणाली प्रदान की गई है। इसमें बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (बीएचक्यू) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) भी शामिल हैं।

किसी खनिज का सीमा मान वह अधिकतम सीमा है जिसके नीचे खनन के बाद प्राप्त सामग्री को अपशिष्ट मानकर हटाया जा सकता है। हीमैटाइटिक लौह अयस्क के लिए अधिसूचित सीमा मान 45 प्रतिशत एफइ (न्यूनतम) है। देश में इस सीमा मान से नीचे लौह अयस्क की विशाल मात्रा विद्यमान है, जिसमें से कुछ बीएचक्‍यू या बीएचजे के रूप में है, जो लौह अयस्क की प्रमुख आधार चट्टानें हैं। प्रसंस्करण और संवर्धन की प्रौद्योगिकी में सुधार के साथ, बीएचक्‍यू और बीएचजे सहित सीमा मान से नीचे के लौह अयस्क संसाधनों का संवर्धन करके उच्च श्रेणी का लौह अयस्क प्राप्त किया जा सकता है, जिसका उपयोग इस्पात निर्माण के लिए कच्चे अयस्क के रूप में किया जा सकता है। इस प्रकार के निम्न श्रेणी के लौह अयस्क के संवर्धन को सुगम बनाने के लिए एक उपयुक्त नीति की आवश्यकता थी।

नियमों में वर्तमान संशोधन से पहले, 45 प्रतिशत से कम एफइ सामग्री वाले हेमेटाइट लौह अयस्क (जिसमें बीएचक्‍यू और बीएचजे भी शामिल हैं) के लिए एएसपी प्रकाशित करने की कोई कार्यप्रणाली नहीं थी। इस प्रकार, 45 प्रतिशत से 51 प्रतिशत एफइ से कम एफइ ग्रेड वाले हेमेटाइट लौह अयस्क के निम्नतम ग्रेड के लिए प्रकाशित एएसपी को ही इन ग्रेडों के लिए एएसपी माना जाता था। थ्रेशोल्ड से कम ग्रेड पर रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम आदि लगाने के लिए उच्च ग्रेड के एएसपी का उपयोग करने से ऐसे खनिजों का लाभकारीकरण अलाभकारी हो जाता था। नियमों में वर्तमान संशोधन इस समस्या का समाधान करता है। इस प्रकार, संशोधित नियम में यह प्रावधान है कि थ्रेशोल्ड से कम एफइ सामग्री वाले हेमेटाइट लौह अयस्क के एएसपी की निम्नलिखित तरीके से गणना की जाएगी:

(क) 35 प्रतिशत से 45 प्रतिशत से कम लौह अयस्क श्रेणी के लिए, औसत विक्रय मूल्य 45 प्रतिशत से 51 प्रतिशत से कम लौह अयस्क श्रेणी के औसत विक्रय मूल्य के पचहत्तर प्रतिशत के बराबर होगा;

(ख) 35 प्रतिशत से कम लौह अयस्क के लिए, औसत विक्रय मूल्य 45 प्रतिशत से 51 प्रतिशत से कम लौह अयस्क के औसत विक्रय मूल्य के पचास प्रतिशत के बराबर होगा।

निम्न श्रेणी के संसाधनों को उपयोग योग्य श्रेणी में लाने से उच्च श्रेणी के लौह अयस्क संसाधनों के क्षय की चिंता का समाधान होगा और इससे इस्पात उद्योग को खनिज की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। निम्न श्रेणी के लौह अयस्क संसाधनों का उपयोग खनिज संरक्षण के हित में होगा और साथ ही लौह अयस्क संसाधनों के वैज्ञानिक और इष्टतम खनन को बढ़ावा देगा। परिणामस्वरूप, देश लौह अयस्क में आत्मनिर्भर बना रहेगा।

नियमावली में संशोधन से यह भी स्पष्ट हुआ है कि यदि खदान से निकले कच्चे माल के प्रसंस्करण से उसके आर्थिक मूल्य में कमी आती है, तो प्रारंभिक जांच के बाद बचे हुए कच्चे माल और महीन कणों पर रॉयल्टी लागू होगी। खदान से निकला कच्चा माल, पट्टे वाले क्षेत्र के खनिज क्षेत्र से विस्फोट या खुदाई के बाद प्राप्त प्राकृतिक अवस्था में बिना संसाधित या बिना कुचले कच्चे पदार्थ को संदर्भित करता है। कच्चे बिना संसाधित खनिजों को संसाधित करना आवश्यक है ताकि लक्षित खनिज की सांद्रता बढ़ाई जा सके, अशुद्धियों को दूर किया जा सके और पदार्थ को ऐसे रूप में परिवर्तित किया जा सके जिसका उद्योग वास्तव में उपयोग कर सकें। नियमावली में वर्तमान संशोधन यह स्पष्ट करता है कि खदान से निकले अप्रसाधित अयस्‍क के प्रसंस्करण के नाम पर खनिज के आर्थिक मूल्य को कम नहीं किया जा सकता है।

भारतीय शासन व्यवस्था की पटकथा फिर से लिख रहा है मिशन कर्मयोगी

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।

चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।

इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।

‘मिशन कर्मयोगी’ को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित ‘क्षमता निर्माण आयोग’ द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव ‘कर्मचारी’—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से ‘कर्मयोगी’ बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।

पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह’  के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं।

जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी ‘पहुँच की संरचना’  है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का ‘लोकतांत्रिक लाभांश’ है।

क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र  के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ ‘वास्तुकार’  और ‘संचालक’ दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त  कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों  के माध्यम से जुड़ चुके हैं  ताकि ऐसी विशिष्ट ‘क्षमता निर्माण योजनाएं’  तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया  है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।

मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ या ‘लॉग किए गए घंटों’ में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक ‘लेन-देन’ वाले संबंध से हटकर ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया  तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत,  जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है।

इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ’  के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ‘अमृत ज्ञान कोष’  भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह ‘वि-औपनिवेशीकरण’,  जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।

‘साधना’ सप्ताह  2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। ‘साधना’ शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक ‘राष्ट्रीय सम्मेलन’ के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक ‘नागरिक-चैंपियन’ और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत  माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।

भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार ‘सीखना’ सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपने उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में जानें

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

  1. असम और केरल राज्यों की विधानसभाओं और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभाओं के चुनावों के साथ-साथ चार राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए कुल 1,955 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके लिए 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा।
  2. पश्चिम बंगाल (चरण-I और II) और तमिलनाडु की विधानसभाओं के चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-I) के लिए अप्रैल और पश्चिम बंगाल (चरण-II) के लिए 13 अप्रैल है।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी के अपने उम्मीदवारों को जानें (केवाईसी)” मॉड्यूल का उपयोग करके उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों, संपत्ति और देनदारियों, शैक्षणिक योग्यताओं और उनके प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  4. उपयोगकर्ता ईसीआईएनईटी के “चुनाव संचालन” टैब के अंतर्गत KYC मॉड्यूल तक पहुँच सकते हैं । वे ईसीआईएनईटी का उपयोग करके उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए संपूर्ण शपथ पत्र (फॉर्म 26) को भी डाउनलोड कर सकते हैं।
  5. ईसीआईएनईटी दुनिया का सबसे बड़ा चुनावी सेवा मंच है, जो भारत के निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एकीकृत करके दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सभी चुनावी सेवाओं को एक सहज अनुभव में एक साथ लाता है।
  6. ईसीआईएनईटी मतदाताओं को मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची खोज, अपने आवेदनों को ट्रैक करना, चुनाव अधिकारियों से संपर्क करना, बीएलओ के साथ कॉल बुक करना, ई-ईपीआईसी डाउनलोड, मतदान रुझान और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं एक सुरक्षित मंच पर प्रदान करता है।
  7. यह वास्तविक समय में सूचना तक पहुंच और शिकायत समाधान के लिए एक एकल-खिड़की मंच भी प्रदान करता है, जिसमें उल्लंघन की रिपोर्टिंग के लिए सी विजिल जैसे उपकरण और विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ चुनावी सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम जैसे उपकरण शामिल हैं।
भारतीय शासन व्यवस्था की पटकथा फिर से लिख रहा है मिशन कर्मयोगी
  • डॉ जितेंद्र सिंह

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।

चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।

इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर

नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।

‘मिशन कर्मयोगी’ को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित ‘क्षमता निर्माण आयोग’ द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव ‘कर्मचारी’—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से ‘कर्मयोगी’ बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।

पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह’  के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं। जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी ‘पहुँच की संरचना’  है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का ‘लोकतांत्रिक लाभांश’ है।

क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र  के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ ‘वास्तुकार’  और ‘संचालक’ दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त  कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों  के माध्यम से जुड़ चुके हैं  ताकि ऐसी विशिष्ट ‘क्षमता निर्माण योजनाएं’  तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया  है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।

मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ या ‘लॉग किए गए घंटों’ में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक ‘लेन-देन’ वाले संबंध से हटकर ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया  तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत,  जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है। इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ’  के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ‘अमृत ज्ञान कोष’  भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह ‘वि-औपनिवेशीकरण’,  जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।

‘साधना’ सप्ताह  2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। ‘साधना’ शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक ‘राष्ट्रीय सम्मेलन’ के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक ‘नागरिक-चैंपियन’ और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत  माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।

भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार ‘सीखना’ सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)