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IPL 2026: वानखेड़े में पंजाब किंग्स का ‘राज’, मुंबई इंडियंस को दी 7 विकेट से करारी शिकस्त; अर्शदीप ने रचा इतिहास

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 के 24वें मुकाबले में पंजाब किंग्स (PBKS) ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए मुंबई इंडियंस (MI) को उनके घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम में 7 विकेट से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही पंजाब किंग्स की टीम पॉइंट्स टेबल में 9 अंकों के साथ शीर्ष (पहले नंबर) पर पहुंच गई है, जबकि मुंबई इंडियंस को लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ा है।

क्विंटन डी कॉक का शतक गया बेकार : टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस ने 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 195 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। मुंबई की ओर से क्विंटन डी कॉक ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए महज 60 गेंदों पर 112 रनों की नाबाद शतकीय पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा नमन धीर ने भी 31 गेंदों में 50 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रभसिमरन और श्रेयस की तूफानी बल्लेबाजी: 196 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया और मात्र 16.3 ओवर में ही जीत हासिल कर ली। पंजाब की जीत के नायक प्रभसिमरन सिंह रहे, जिन्होंने 39 गेंदों पर नाबाद 80 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी मोर्चा संभालते हुए 35 गेंदों पर 66 रन बनाए और टीम की जीत सुनिश्चित की।

अर्शदीप सिंह का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: पंजाब किंग्स के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने इस मैच में इतिहास रच दिया। उन्होंने 4 ओवर में मात्र 22 रन देकर 3 विकेट चटकाए। इसी के साथ अर्शदीप आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए 100 विकेट पूरे करने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। दूसरी ओर, मुंबई के गेंदबाज बेअसर साबित हुए और पंजाब के बल्लेबाजों को रोकने में नाकाम रहे।

वृंदावन नाव हादसा: जगराओं के पीड़ित परिवारों से मिले सुखबीर बादल

पंजाब डेस्क : उत्तर प्रदेश के वृंदावन में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद लुधियाना जिले के जगराओं शहर में मातम का माहौल है। इस हादसे में जगराओं के एक ही परिवार के 4 सदस्यों सहित कुल 6 लोगों की जान चली गई थी। इसी दुख की घड़ी में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पीड़ित परिवारों से मिलने जगराओं पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी।

यूपी सरकार और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल : सुखबीर बादल ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि नदियों और तेज बहाव वाले जलाशयों में चलने वाली नावों में सेफ्टी जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए। बादल ने आरोप लगाया कि इस तरह के हादसों में सामने आने वाली लापरवाहियां सरकार की बड़ी नाकामी को दर्शाती हैं और कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

मुआवजे की मांग: ₹2 लाख को बताया कम केंद्र सरकार द्वारा मृतक परिवारों के लिए घोषित 2 लाख रुपये के मुआवजे पर प्रतिक्रिया देते हुए बादल ने इसे “बेहद कम” बताया। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार अपनी चुप्पी तोड़े और पीड़ित परिवारों को कम से कम 50 लाख रुपये प्रति व्यक्ति की आर्थिक सहायता प्रदान करे।

अकाली दल के नेता रहे मौजूद: इस मुलाकात के दौरान सुखबीर बादल के साथ हल्का इंचार्ज कलेर, पूर्व चेयरमैन कमलजीत सिंह मल्ला और कई अन्य वरिष्ठ अकाली नेता व पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…16-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ की आज की बड़ी और अहम खबरों के बुलेटिन में आपका स्वागत है। आज राज्य की राजनीति में उस वक्त बड़ी हलचल देखने को मिली जब AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर 24 घंटे चली ED की छापेमारी खत्म हुई। वहीं, अमृतसर में 4 बच्चों के पिता की सरेआम हत्या और संगरूर में भाई को ट्रैक्टर से कुचलने जैसी दिल दहला देने वाली घटनाओं ने सनसनी फैला दी है।जहाँ एक तरफ कनाडा में मशहूर पंजाबी रेडियो होस्ट को ड्रग्स तस्करी में सजा सुनाई गई है, वहीं जालंधर के कृष भगत का मुंबई इंडियंस में सिलेक्शन खेल जगत के लिए एक उत्साहजनक खबर है। इसके अलावा, कपूरथला के एक व्यक्ति की 25 साल बाद घर वापसी और बदली हुई पारिवारिक परिस्थितियों की हैरान करने वाली कहानी भी आज चर्चा का केंद्र बनी हुई है।आइए, विस्तार से जानते हैं पंजाब-चंडीगढ़ की दिनभर की 10 बड़ी खबरें…।

1. AAP सांसद अशोक मित्तल के घर 24 घंटे बाद खत्म : ED की रेडआम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर अशोक मित्तल के 9 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी गुरुवार सुबह खत्म हुई। करीब 24 घंटे तक चली इस जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला गया। विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच इस रेड को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

2. अमृतसर में 4 बच्चों के पिता की गोलियां मारकर हत्या: अमृतसर के गांव भुल्लर में 33 वर्षीय मनजीत सिंह की 5 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने वारदात को तब अंजाम दिया जब वह अपनी गाड़ी में बैठा था। परिजनों ने पुरानी रंजिश और गैंगस्टरों से संबंध होने का आरोप लगाया है।

3. महिला आरक्षण पर CM मान की मांग: पंजाब की सीटें बढ़ाकर 20 करेंमुख्यमंत्री भगवंत मान ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए केंद्र से मांग की है कि यदि देश में कुल सीटें बढ़ती हैं, तो पंजाब की लोकसभा सीटें भी 13 से बढ़ाकर 20 की जानी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विकास की नहीं, सिर्फ एक-दूसरे की टांग खींचने की बात करते हैं। 4. अमृतपाल को जेल में ही रखने के लिए हाई कोर्ट पहुंची सरकार: पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि अमृतपाल सिंह पर लगा NSA खत्म होने के बाद भी उसे डिब्रूगढ़ जेल (असम) में ही रखा जाए। सरकार ने सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उसे पंजाब न लाने की दलील दी है।

5. चंडीगढ़ में छिपा दिल्ली का गैंगस्टर गिरफ्तार: दिल्ली पुलिस का वांटेड गैंगस्टर विकास दहिया उर्फ सोनू चंडीगढ़ के सेक्टर-38 की एक कोठी में 3 महीने से पहचान बदलकर रह रहा था। पुलिस ने उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए लोकेशन ट्रेस कर उसे दबोच लिया। वह हत्या के मामले में 9 महीनों से फरार चल रहा था।

6. संगूर में छोटे भाई ने बड़े भाई को ट्रैक्टर से कुचला: संगरूर के गांव बडबर में दिल दहला देने वाली घटना हुई, जहाँ छोटे भाई ने पैसों और पेड़ के विवाद में अपने बड़े भाई मनजिंदर सिंह के ऊपर 4-5 बार ट्रैक्टर चढ़ाकर उसकी जान ले ली। आरोपी भाई वारदात के बाद से फरार है।

7. जालंधर में ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस में लूट: जालंधर में दो बदमाशों ने एक ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस में घुसकर महिला कर्मी का मुंह दबाया और गल्ले से 1.80 लाख रुपए लूट लिए। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

8. जालंधर के कृष भगत का मुंबई इंडियंस में सिलेक्शन: जालंधर के उभरते खिलाड़ी और मध्यम गति के गेंदबाज कृष भगत को आईपीएल 2026 के लिए मुंबई इंडियंस (MI) ने साइन किया है। टीम ने घायल अथर्व अंकोलेकर की जगह कृष को 30 लाख रुपए के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया है।

9. कनाडा में पंजाबी रेडियो होस्ट को 5.5 साल की जेल: कनाडा में रहने वाली पंजाबी रेडियो होस्ट सुखविंदर कौर संघा को 83 करोड़ रुपए की ड्रग्स (मेथामफेटामाइन) की तस्करी के मामले में साढ़े 5 साल की सजा सुनाई गई है। वह जालंधर के नकोदर की रहने वाली है और वहां के पंजाबी समुदाय का एक बड़ा चेहरा थी।

10. 25 साल बाद लौटा पति, पत्नी ने देवर से कर ली थी शादी: कपूरथला का हंसा सिंह 25 साल बाद अपने गांव शिव दयालवाला वापस लौटा। घर आकर उसे पता चला कि उसकी पत्नी ने उसके ही छोटे भाई से शादी कर ली है और उसके बच्चे भी हैं। फिलहाल उसके भाई ने उसे अपने साथ रखने और देखरेख करने की बात कही है।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 माह के लिए केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रदर्शन हेतु केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) पर 47वीं मासिक रिपोर्ट जारी की

मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कुल 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया

लगातार 45वें महीने केंद्रीय सचिवालय में मासिक निपटान का आंकड़ा 1 लाख मामलों को पार कर गया

वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-ए श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-बी श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) की मासिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों तथा उनके निपटान की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह डीएआरपीजी द्वारा प्रकाशित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों पर 47 वीं रिपोर्ट है।

मार्च 2026 तक की प्रगति के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया है। 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में शिकायत निवारण का औसत समय 13 दिन रहा। ये रिपोर्ट 10 चरणों वाली सीपीग्राम सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसे डीएआरपीजी ने निपटान की गुणवत्ता में सुधार और समय-सीमा को कम करने के लिए अपनाया था।

इस रिपोर्ट में मार्च 2026 माह में सीपीजीआरएएमएस पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं के आंकड़े दिए गए हैं। मार्च 2026 में विभिन्न माध्यमों से सीपीजीआरएएमएस पर कुल 75,853 नए उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 12,865 पंजीकरण उत्तर प्रदेश से हैं। फीडबैक कॉल सेंटर ने मार्च 2026 माह में 74,069 फीडबैक प्राप्त किए, जिनमें से 45,974 फीडबैक केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए थे।

उक्त रिपोर्ट में मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतों का राज्यवार विश्लेषण भी दिया गया है। सीपीजीआरएएमएस को सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और यह 5 लाख से अधिक सीएससी में उपलब्ध है, जो 25 लाख ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) से संबद्ध है। मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से कुल 12,763 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट में समीक्षा बैठक मॉड्यूल का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है, जिसे 14 मार्च 2025 से सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में लागू किया गया है । यह मॉड्यूल सचिव स्तर पर जनता की शिकायतों की समीक्षा को सुगम बनाता है, जिससे निवारण तंत्र की दक्षता बढ़ती है और नागरिकों की संतुष्टि में सुधार होता है। 31 मार्च 2026 तक कुल 302 समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें से 18 बैठकें मार्च 2026 में हुईं।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए डीएआरपीजी की मार्च 2026 की मासिक सीपीजीआरएएमएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

पीजी मामले:

  • मार्च 2026 में, सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर 1,89,189 पीजी मामले प्राप्त हुए, 1,81,279 पीजी मामलों का निवारण किया गया और 81,187 पीजी मामले लंबित हैं।
  • पीजी अपील:
  • मार्च 2026 में 34,135 अपीलें प्राप्त हुईं और 33,714 अपीलों का निपटारा किया गया।
  • वर्ष 2026 के लिए मार्च 2026 में 21,296 अपीलें लंबित दर्ज की गईं।
  • शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक (जीआरएआई) – मार्च, 2026
  • वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड मार्च 2026 के लिए समूह ए (500 या उससे अधिक शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन एवं सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
  • राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मार्च 2026 के लिए समूह बी (500 से कम शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
न्याय विभाग ने स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया

न्याय विभाग ने 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया, जिसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।

विभाग द्वारा 2 अप्रैल, 2026 को सभी कर्मचारियों के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को योग को अपने जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। यह सत्र पखवाड़ा अवधि के दौरान आयोजित किया गया था ताकि कर्मचारियों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुन:सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

स्वच्छता और साफ-सफाई पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए विभाग में 09 अप्रैल, 2026 को अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी में एक निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

10 अप्रैल, 2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके बाद सचिव (न्याय) श्री नीरज वर्मा के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य अधिकारियों को अपने निवास स्थान के आस-पास या किसी उपयुक्त स्थान पर वृक्षारोपण में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है ताकि पर्यावरण को हरा-भरा बनाया जा सके। सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

स्वच्छता दिवस के अवसर पर न्याय विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए 10 अप्रैल, 2026 को एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह उनके लिए एक मजबूत प्रेरणा का स्रोत बना।

पखवाड़े के दौरान, विभाग ने 13 अप्रैल, 2026 को आईजीओटी मिशन एलआईएफई (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) पर एक सत्र/मॉड्यूल का आयोजन किया, ताकि सभी लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत दैनिक कार्यों को सीख सकें और अपना सकें, साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘पर्यावरण समर्थक लोगों’ का एक नेटवर्क विकसित कर सकें। सत्र का उद्देश्य ‘उपयोग करो और फेंक दो’ अर्थव्यवस्था को ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ से बदलने के लिए जागरूकता पैदा करना था, जिसमें पर्यावरण स्थिरता के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया था।

स्वच्छता पखवाड़ा समारोह के दौरान, न्याय विभाग ने भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर, मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा का ‘माल्यर्पण’ समारोह भी आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय संविधान के निर्माता को श्रद्धांजलि अर्पित करने और समानता, न्याय, सामाजिक सशक्तिकरण और महिलाओं, श्रमिकों और हाशिए पर पड़े समुदायों के सामाजिक सुधारों के उनके आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए आयोजित किया गया था। विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जैसलमेर हाउस परिसर के सामने स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

डॉ. अंबेडकर के समाज में किए गए अभूतपूर्व योगदान को याद करते हुए, न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा, विभाग के पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस अवसर पर डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इन गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कार्यस्थलों और अन्य स्थानों पर स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखने के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित स्वच्छता गतिविधियों/प्रतियोगिताओं की विभिन्न श्रेणियों में अधिकारियों को कई पुरस्कार दिए गए। विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और नियमित पहलों, अभियानों और गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता और स्थिरता को बढ़ावा देना जारी रखेगा।

*मुख्य मंत्री ने हरियाणा में जनगणना 2027 के पहले चरण का शुभारंभ किया*

*स्व-गणना आज से शुरू, पहली बार डिजीटल गणना का क्रियान्वयन*

चंडीगढ़: 16 अप्रैल, 2026

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज राज्य में स्व-गणना प्रोसेस शुरू करके जनगणना 2027 के पहले चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना एक अनिवार्य राष्ट्रीय दायित्व है जो नियमित अंतराल पर किया जाता है, और एकत्रित किया गया डेटा आसान, सुरक्षित और पूरी तरह से गोपनीय होता है।

उन्होंने आगे कहा कि डेटा समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए योजनाएं बनाने और विकास का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इस जनगणना की थीम पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, जनगणना 2027 की टैगलाइन, ‘हमारी सेंसस, हमारा डेवलपमेंट,’ इस देश भर में चलने वाले अभियान की अहमियत को दिखाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेंसस डेटा 2047 तक एक विकसित भारत के विज़न को पाने में बहुत काम आएगा, और उन्होंने सभी नागरिकों से इस प्रक्रिया में सहयोग देने की अपील की।

 इस मौके पर, जनगणना 2027 के लिए हरियाणा स्टेट नोडल ऑफिसर, रेवेन्यू और डिज़ास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंशियल कमिश्नर डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि सेल्फ-एन्यूमरेशन 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक चलेगा, इसके बाद 1 मई से 30 मई, 2026 तक हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस गतिविधि होगी। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय मिशन के लिए पूरे हरियाणा में अच्छी तरह से ट्रेंड टीमों को लगाया जा रहा है।

हरियाणा स्टेट डायरेक्टरेट ऑफ़ सेंसस ऑपरेशंस के डायरेक्टर, श्री ललित जैन ने कहा कि उनका विभाग हरियाणा राज्य की पहली डिजिटल जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है। 7,000 से 65,000 ट्रेंड सेंसस वर्कर्स के साथ, नागरिक सुविधाजनक मल्टीलिंगुअल पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके कहीं से भी स्व-गणना कर सकते हैं, जिससे गणक के साथ सिर्फ़  आई डी शेयर करके समय की बचत होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सारा डेटा गृह मंत्रालय के सुरक्षित सर्वर पर स्टोर है, जिसे रिस्पॉन्डेंट सहित कोई भी एक्सेस नहीं कर सकता, और सिर्फ़ मैक्रो-लेवल डेटा ही रिलीज़ किया जाएगा।

 मुख्यमंत्री ने हरियाणा के सभी निवासियों से अपील की कि वे सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रोसेस में सक्रिय भागीदारी निभाएं और *se.census.gov.in* के ज़रिए सही जानकारी दें, ताकि देश के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य में हर घर की गणना हो सके।

भारत का फार्मा सेक्टर: नवाचार और युवाओं के लिए नया आकाश

श्री मती अनुप्रिया पटेल

भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है, और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप अब हम केवल जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर एक नवाचारआधारित वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतियां बनाना है जिससे देश के हर नागरिक कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण दवाएं से मिल सकें। साथ ही सरकार निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रही है और भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम कर रही है।

भारत की अब तक की सफलता उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और गुणवत्ता मानकों पर आधारित रही है। विश्व की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं और 60 प्रतिशत वैक्सीन आपूर्ति के साथ देश ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसको देखते हुए भारत सरकार ने 8 से 10 वर्षों में देश को उच्च-मूल्य, नवाचार-आधारित बायोफार्मा और उन्नत चिकित्सीय उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

इसकी आधारशिला के रूप में हालिया केंद्रीय बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम देश में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार आधारित उद्योगों और अगली पीढ़ी की दवाओं के विकास को गति प्रदान करेगा।

आर्थिक आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वर्तमान में 50 अरब डॉलर का है। जिस रफ्तार से हम आगे बढ़ रहे हैं, 2030 तक इसके 130 अरब डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है। इसे केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के रोडमैप के तौर पर भी देखने की जरूरत है।

वर्तमान में फार्मास्युटिकल उद्योग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। 2030 तक हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र में 20 से 25 लाख नए रोजगार सृजित होंने की उम्मीद है। बायोफार्मा, मेडटेक और क्लीनिकल रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों ने संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

हमारी सरकार का मानना है कि युवाओं की सफलता की नींव एक मजबूत शैक्षणिक ढांचे पर टिकी होती है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट में फार्मा सेक्टर के लिए और भी कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने देश में तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, वर्तमान में कार्यरत सात नाईपर संस्थानों को अपग्रेड किया जा रहा है। इन सात संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंसकी स्थापना की गई है, जो अनुसंधान और विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, नाईपर मोहाली में एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं की खोज एवं विकास, नाईपर अहमदाबाद में मेडिकल डिवाइसेज, नाईपर हैदराबाद में बल्क ड्रग्स, नाईपर कोलकाता में फ्लो केमिस्ट्री और सतत विनिर्माण, नाईपर रायबरेली में नोबेल ड्रग डिलीवरी सिस्टम, नाईपर गुवाहाटी में फाइटोफार्मास्यूटिकल्स तथा नाईपर हाजीपुर में बायोलॉजिकल थेरैप्यूटिक्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इन संस्थानों का सीधा लाभ हमारे विद्यार्थियों को मिलेगा। नाईपर केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं रह जाएंगे, बल्कि वे ऐसे केंद्र बनेंगे जहां छात्र उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करेंगे। इससे हमारे छात्र केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ और नवाचारी बनेंगे।

बदलते दौर में काम करने के तरीके बदल रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक फार्मा सेक्टर के लगभग 30-35 प्रतिशत कार्यबल को रीस्किलिंग यानी नए कौशल सीखने की जरूरत होगी। केयर डिलीवरी, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की परिभाषाएं बदल रही हैं। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ और नियामक मामलों में उच्च कौशल वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारी सरकार का ध्यान इसी ‘स्किल गैप’ को भरने पर है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र क्लीनिकल रिसर्च और अनुसंधान और विकास में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें।

शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। जब तक हमारे कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतें एक समान नहीं होंगी, तब तक हम ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।

इसीलिए, हम उद्योगअकादमिक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। इसी दिशा में, शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बिठाने के लिए नाईपर और उद्योग के बीच 356 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही स्किल डेवलपमेंट मिशनों के माध्यम से छात्रों को सीधे कंपनियों के साथ जुड़ने के मौके दिए जा रहे हैं। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनेगा।

औषधि क्षेत्र का विकास जीडीपी बढ़ाने के साथ-साथ देश के युवाओं को सशक्त बनाने का भी एक मिशन है। ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की नींव हमारे युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के कंधों पर है। नाईपर का विस्तार और बजट में किए गए प्रावधान इस बात का प्रमाण हैं। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां एक छात्र अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सके। भारत के औषधि क्षेत्र का यह स्वर्णिम युग हमारे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

  • लेखक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।

*यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव ने ऑनलाइन स्व-गणना कर डिजिटल जनगणना को बढ़ावा दिया।जनगणना 2027 में नागरिकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान।*

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 16 अप्रैल। जनगणना 2027 में डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव H. Rajesh Prasad ने आज ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक अपना स्व-गणना (Self-Enumeration) पूर्ण किया।
स्व-गणना की प्रक्रिया को Navjot Khosa, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ तथा Nishant Kumar Yadav, उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ द्वारा सुगम बनाया गया।
यह पहल यूटी प्रशासन की तकनीक के माध्यम से कुशल, पारदर्शी एवं नागरिक-अनुकूल जनगणना संचालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्य सचिव द्वारा स्व-गणना कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जिससे सभी नागरिकों को इस सरल एवं सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरणा मिलेगी। स्व-गणना के माध्यम से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन अपने विवरण भर सकते हैं, जिससे सटीकता सुनिश्चित होती है और आमजन तथा गणनाकर्ताओं दोनों का समय बचता है।
इस प्रक्रिया के दौरान मुख्य सचिव, यूटी चंडीगढ़ ने प्रभावी योजना निर्माण एवं नीति निर्धारण के लिए सटीक आंकड़ों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी नागरिकों से सहयोग करने तथा इस सरल, सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल स्व-गणना सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।
जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़, उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ तथा चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा स्व-गणना प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने हेतु व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें नागरिकों की सहायता के लिए समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन (1855) भी शामिल है, जहां वे अपनी शंकाओं या तकनीकी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
नागरिकों से आग्रह किया जाता है कि वे आधिकारिक जनगणना पोर्टल (https://se.census.gov.in⁠�) पर जाकर निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी स्व-गणना पूर्ण करें। एकत्रित की गई जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए, जनगणना अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा।
मुख्य सचिव द्वारा सफलतापूर्वक की गई स्व-गणना जनगणना 2027 के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे इस राष्ट्रीय अभियान में व्यापक जनभागीदारी को प्रेरणा मिलने की अपेक्षा है।

नाको की राष्ट्रीय रणनीति को गति प्रदान करते हुए पंजाब राज्य ने जिला-आधारित एचआईवी प्रतिक्रिया को बल दिया

ज़ीरकपुर / सत्ता संदेश

प्राथमिकता वाले 21 जिलों ने लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई के माध्यम से 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु रणनीतियों को क्रियान्वित किया

ज़ीरकपुर, 16 अप्रैल 2026: एचआईवी नियंत्रण में अधिक प्रभाव वाले जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत National AIDS Control Organisation (नाको) ने आज चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पंजाब के प्राथमिक जिलों को एक मंच पर लाकर 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं महानिदेशक, नाको ने की। इस अवसर पर पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री कुमार राहुल सहित राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी भी उपस्थित रहे।

डॉ. राकेश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा, “पंजाब जैसे राज्यों में, जहाँ इंजेक्शन से नशे का उपयोग एचआईवी संक्रमण को बढ़ावा देता है, इस स्तिथि में हमारी प्रतिक्रिया तुरंत एवं तीव्र होनी चाहिए। डेटा पर आधारित जिला-स्तरीय रणनीतियाँ तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जुड़ाव इस इस स्तिथि को बदलने के लिए बहुत जरूरी है” । उन्होंने आगे कहा कि जिलों को अधिक सशक्त बनाना एवं जवाबदेही प्रदान करना राष्ट्रीय लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह कार्यशाला राज्यों में National AIDS Control Organisation (NACO) द्वारा संचालित संरचित पहलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विकेन्द्रीकृत और डेटा आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से उच्च भार वाले जिलों में एचआईवी कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना है। पंजाब, जहाँ एचआईवी प्रसार दर 0.42% हे और अनुमानित 1,10,715 लोग एचआईवी के साथ जीवनयापन कर रहे हैं (PLHIV), इस लक्षित रणनीति के अंतर्गत एक प्राथमिकता वाला राज्य बना हुआ है।

कार्यक्रम के सुदृढ़ कार्यक्रम कार्यवाही हेतु कुल 21 प्राथमिक जिलों-तरण तारण, अमृतसर, मोगा, पठानकोट, मानसा, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, होशियारपुर, एस.ए.एस. नगर, जालंधर, कपूरथला, गुरदासपुर, बरनाला, फरीदकोट, संगरूर, पटियाला, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर, बठिंडा, रूपनगर एवं श्री मुक्तसर साहिब-की पहचान की गई है। कार्यशाला में जिला टीमों ने अपनी प्रगति प्रस्तुत की, कार्यक्रम संचालन से जुड़ी चुनौतियों को प्रस्तुत किया तथा एचआईवी की रोकथाम, जाँच एवं उपचार सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु रणनीतियाँ विकसित कीं।

राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, श्री कुमार राहुल ने कहा, “पंजाब लक्षित और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से अपने एचआईवी प्रत्युत्तर को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला ने जिलों को अपनी रणनीतियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और बेहतर सेवा वितरण तथा स्वास्थ्य परिणामों के लिए जवाबदेही को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाया है।”

कार्यशाला में वरिष्ठ जिला अधिकारियों, जिनमें उप आयुक्त, अतिरिक्त उप आयुक्त, सिविल सर्जन और जिला एचआईवी/एड्स नियंत्रण अधिकारी शामिल थे, की सक्रिय भागीदारी रही, जिसने एचआईवी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समन्वित एवं परिणाम केंद्रित नजरिए को बल मिला। इस एक दिवसीय कार्यशाला ने पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित किया तथा जिलों ने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु ठोस कार्ययोजनाएँ बनाई ।

नाको वर्ष 2030 तक एड्स उन्मूलन की दिशा में एक समन्वित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु, राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

चंडीगढ़ कार्यशाला का सफल आयोजन भारत के जिला-आधारित प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने धन शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

दिल्ली/ सत्ता संदेश

एफआईयू-आईएनडी के निदेशक श्री अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य श्री रणदीप सिंह जगपाल ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष श्री शिवसुब्रमणियन रामन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों एजेंसियों को विनियमित/रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम बनाना है जिसमें पीएफआरडीए द्वारा विनियमित संस्थाओं के बीच मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/सीएफटी) क्षमताओं को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष लागू अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित करेंगे और सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करेंगे।

समझौते के प्रत्येक पक्ष द्वारा एक नोडल अधिकारी और एक वैकल्पिक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी ताकि दोनों एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय और संवाद सुगम हो सके। यह समझौता ज्ञापन एगमोंट सूचना विनिमय सिद्धांतों के माध्यम से विदेशी एफआईयू के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी सहायता करेगा।

इस सहयोग में प्रासंगिक वित्तीय उप-क्षेत्रों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण (एमएल/टीएफ) के जोखिमों और कमियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए चेतावनी संकेतकों की पहचान और प्रसार और पीएमएलए, पीएमएल नियमों और पीएफआरडीए दिशानिर्देशों के अंतर्गत दायित्वों के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा अनुपालन की निगरानी और पर्यवेक्षण भी शामिल होगा।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंड)

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, प्रोसेस करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए)

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) भारत में पेंशन क्षेत्र के विनियमन, विकास और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार वैधानिक नियामक निकाय है जिसकी स्थापना पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के अंतर्गत की गई है। इसमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। पीएफआरडीए पेंशन फंड, केंद्रीय अभिलेखपालन एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटरों और उपस्थिति केंद्रों जैसे मध्यस्थों के लिए एक व्यापक नियामक और पर्यवेक्षी ढांचा प्रदान करता है ताकि पेंशन इकोसिस्टम का सुचारू रुप से विकास सुनिश्चित हो सके और ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके।