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लुधियाना में कांग्रेस नेता इंदी पर फिर FIR: सड़क बना रहे मजदूरों से मारपीट का आरोप, सियासी टकराव तेज

पंजाब डेस्क : लुधियाना पुलिस ने कांग्रेस नेता इंदरजीत सिंह इंदी के खिलाफ एक और आपराधिक मामला दर्ज किया है। डिवीजन नंबर-8 थाना पुलिस ने यह कार्रवाई सग्गू चौक के पास सड़क निर्माण में लगे मजदूरों के साथ मारपीट करने और काम में बाधा डालने के आरोप में की है।

JE की शिकायत और वायरल वीडियो: नगर निगम के जूनियर इंजीनियर (JE) रुपिंदर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ अज्ञात लोग सड़क निर्माण के काम में रुकावट डाल रहे हैं और मजदूरों को धमका रहे हैं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें इंदी एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने जांच के बाद इंदी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (115(2), 351(2), 132 आदि) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

कांग्रेस ने बताया ‘राजनीतिक बदला‘: इस कार्रवाई के बाद शहर की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी ममता आशु और जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवार ने इसे सत्ताधारी दल के दबाव में की गई ‘सियासी बदले’ की कार्रवाई बताया है,। उनका आरोप है कि पुलिस के पास न तो कोई असली पीड़ित है और न ही कोई शिकायतकर्ता सामने आया है।

बचाव में उतरे वकील: इंदी के वकील विजय महेंदरू ने कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन किया है। वकील का कहना है कि इंदी केवल ठेकेदार के करिंदों को सड़कों पर बेतहाशा गड्ढे करने से रोक रहे थे और उनके बीच सिर्फ बहस हुई थी।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले में भी वही धाराएं और वही जांच अधिकारी (IO) लगाए गए हैं, जो पिछले साल दिसंबर में दर्ज एक पुरानी FIR में थे।

CBSE 10वीं सेशन-1 का रिजल्ट घोषित: 93.70% छात्र सफल, लड़कियों ने फिर मारी बाजी

नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने कक्षा 10वीं के सेशन-1 का परिणाम जारी कर दिया है, जिसमें कुल 93.70% छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। इस साल भी लड़कियों ने लड़कों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है; लड़कियों का पास प्रतिशत 94.99% रहा, जबकि लड़कों का परिणाम 92.95% दर्ज किया गया। ट्रांसजेंडर छात्रों ने भी 91.30% रिजल्ट के साथ शानदार प्रदर्शन किया है।त्रिवेंद्रम रीजन रहा सबसे आगे देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में त्रिवेंद्रम रीजन का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहाँ 99.75% छात्र सफल रहे। इस साल लगभग 25 लाख छात्र सेशन-1 की परीक्षा में शामिल हुए थे।

छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in या उमंग (UMANG) ऐप पर अपना रोल नंबर डालकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।

नहीं जारी होगी मेरिट लिस्ट: सीबीएसई की नीति के अनुसार इस बार भी कोई मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गई है और न ही किसी टॉपर की घोषणा हुई है। बोर्ड ने सभी स्कूलों और संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी बच्चे को स्कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें। पास होने के लिए छात्रों को थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट दोनों में न्यूनतम 33% अंक लाना अनिवार्य है।15 मई से सुधार का मौका (सेशन-2) नए ‘टू बोर्ड सिस्टम’ के तहत अब छात्रों के पास अपने अंकों में सुधार करने का विकल्प है।

सेशन-2 की परीक्षाएं 15 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित की जाएंगी। यह परीक्षा उन छात्रों के लिए है जो अपने अंक बढ़ाना चाहते हैं या जो दो विषयों में फेल होकर ‘कंपार्टमेंट’ श्रेणी में आए हैं। यदि कोई छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल होता है, तो उसका बेहतर परिणाम (Best of Two) ही फाइनल माना जाएगा।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…15-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन बड़ी राजनीतिक हलचल और कई दुखद घटनाओं भरा रहा। जहाँ एक तरफ AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की छापेमारी और राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लिए जाने से सियासी पारा चढ़ गया है, वहीं फतेहगढ़ साहिब में हुए एक भीषण बस हादसे ने 8 परिवारों की खुशियां छीन लीं। इसके अलावा, फरीदकोट में एक महिला ASI की अमानवीय क्रूरता और किसानों द्वारा एक बार फिर रेल रोकने के ऐलान ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है,। मोहाली में एक युवती के बिल्डिंग से कूदने और मोगा में एक कारोबारी की संदिग्ध मौत जैसी खबरों के बीच, लुधियाना की एक महिला की इंस्टाग्राम रील्स से जान बचने की कहानी भी चर्चा का विषय बनी रही।आइए, विस्तार से जानते हैं पंजाब और चंडीगढ़ की आज की 10 बड़ी और चुनिंदा खबरें…

1. AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की रेड: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर अशोक मित्तल के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। जालंधर, गुरुग्राम और दिल्ली स्थित उनके ठिकानों पर यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे ‘मोदी स्टाइल’ बताया, जबकि भाजपा नेता रवनीत बिट्टू ने इसे ‘गंदगी की सफाई’ करार दिया।

2. श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 8 की मौत: फतेहगढ़ साहिब में श्रद्धालुओं से भरी एक बस बिजली के खंभे से टकराकर पलट गई, जिससे 8 लोगों की मौत हो गई और 21 घायल हो गए। बस में करंट आने से हादसा और भयानक हो गया; मरने वालों में सगे भाई भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

3. राघव चड्‌ढा की सुरक्षा वापस ली गई: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा की सुरक्षा वापस ले ली है। चर्चा है कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से Z+ सुरक्षा मिल सकती है, हालांकि उनके करीबियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। हाल ही में उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से भी हटाया गया था।

4. चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट पर तकरार: चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने को लेकर सांसद मनीष तिवारी और प्रशासक गुलाब चंद कटारिया आमने-सामने हैं। प्रशासक का कहना है कि मेट्रो शहर के लिए घाटे का सौदा हो सकती है, जबकि मनीष तिवारी का मानना है कि यह भविष्य की ट्रैफिक चुनौतियों और आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।

5. मासूम पोती के साथ क्रूरता करने वाली लेडी ASI सस्पेंड: फरीदकोट में एक महिला एएसआई (ASI) सरबजीत कौर ने अपनी 5 साल की पोती के हाथ-पैर बांधकर उसे कड़ी धूप में गेट से लटका दिया। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो वायरल होने के बाद एसएसपी ने उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया है। बच्ची के माता-पिता पुर्तगाल में हैं।

6. किसान 17 अप्रैल को रोकेंगे रेल: पंजाब के किसान संगठनों ने फसलों की खरीद में देरी और बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान के विरोध में 17 अप्रैल को 3 घंटे के लिए चक्का जाम करने का फैसला किया है। दोपहर 12 से 3 बजे तक रेलवे ट्रैक जाम किए जाएंगे। किसानों की मांग है कि गेहूं की खरीद तुरंत शुरू की जाए।

7. मोहाली में 5वीं मंजिल से कूदी युवती: मोहाली के सिटी सेंटर में अंबाला की रहने वाली एक युवती ने 5वीं मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस को मौके से उसकी स्कूटी और बैग मिला है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह आत्महत्या का प्रयास है या किसी ने उसे धक्का दिया।

8. मोगा में कार में मिला कारोबारी का शव: मोगा में एक कपड़ा कारोबारी गुरप्रीत सिंह का शव उनकी अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में मिला है। उनके सिर में गोली लगी थी और पास ही उनकी लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। पुलिस के अनुसार, कारोबारी ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की है।

9. कनाडा में पंजाबी छात्र ने कबूला जुर्म: कनाडा के कैलगरी में भारतीय मूल के रेडियो होस्ट ऋषि नागर पर हमला करने वाले पंजाबी छात्र दिलप्रीत सिंह ने कोर्ट में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। छात्र एक खबर के प्रसारण से नाराज था। सजा के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया जा सकता है।

10. इंस्टाग्राम रील्स ने बचाई महिला की जान: लुधियाना की राजिंदर कौर ने इंस्टाग्राम पर देखी गई रील्स की मदद से अपनी जान दो बार बचाई। उन्होंने वृंदावन में नाव पलटने पर पानी में बचने की तकनीक और घर में सिलेंडर की आग पर काबू पाने का तरीका सोशल मीडिया से ही सीखा था।

शत प्रतिशत रहा डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक स्कूल का आठवीं कक्षा का नतीजा

लुधियाना, 15 अप्रैल: डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक स्कूल, नजदीक ईसा नगरी  पुली का आठवीं कक्षा का परिणाम हर साल की तरह शत-प्रतिशत रहा। इस बार के नतीजों में भी एक बार फिर से लड़कियों ने बाजी मारते हुए, प्रमुख स्थानों पर कब्जा किया और स्कूल का नाम रोशन किया।

स्कूल के प्रबंधक कमेटी के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और प्रिंसिपल मनीषा गाबा ने शानदार नतीजे के लिए सभी विद्यार्थियों और मेहनत स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शानदार सफलता के लिए स्कूल स्टाफ के साथ-साथ उनकी अपनी मेहनत और परिजनों का सहयोग काफी अहम होता है।

इस परीक्षा में 103 विद्यार्थियों में से अनशिका ने 89 प्रतिशत अंक लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि सोनाक्षी और जानवी ने 88.6 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा और हिमांशी ने 88.5 प्रतिशत नंबर लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह, नेहा कुमारी ने 82.6 प्रतिशत अंक से चौथा और ऊर्वी शर्मा ने 81 प्रतिशत अंक लेकर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार बाकी विद्यार्थी 79 से 70 प्रतिशत तक अंक हासिल करने में सफल रहे।

इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली, प्रिंसिपल मनीषा गाबा, वाइस प्रिंसिपल अमिता राजन, रूबी, रीमा, अमीषा, गुरलीन कौर, सपना, हर्ष बाला, सोनिया आदि स्टाफ के सदस्यों ने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए, कहा कि अपने सपनों को ऊंची उड़ान के पंख लगाकर विश्व विजेता बन जाओ।

*जनगणना 2027: हरियाणा में 16 अप्रैल, 2026 से स्व-गणना शुरू होगी**निवासियों की गोपनीयता और निजता सुनिश्चित की जाएगी*

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

हरियाणा राज्य में, जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना की मुहिम 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक चलेगा, जिससे लोग ऑफिशियल पोर्टल se.census.gov.in के ज़रिए अपनी स्वयं गणना का विवरण ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। ऑफिस ऑफ़ द रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर, इंडिया की यह डिजिटल पहल, नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे हरियाणा के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के परिवार मोबाइल फ़ोन, टैबलेट या कंप्यूटर का इस्तेमाल करके कहीं से भी हिस्सा ले सकते हैं।

स्व-गणना पूरी तरह से स्वयं घोषणा पर आधारित प्रक्रिया है और इसके लिए किसी दस्तावेज की ज़रूरत नहीं है। नागरिकों को मोबाइल नंबर और ओटीपी का इस्तेमाल करके पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा, डिजिटल मैप पर अपने घर या जगह को मार्क करना होगा, और घर के सभी सदस्यों के ब्यौरे के साथ-साथ घर की स्थिति और सुविधाओं की जानकारी डालनी होगी।  इस फ़ॉर्म में लगभग 33 सवाल हैं, जिनमें घर की बनावट, घर का टाइप और स्थिति, पीने के पानी की उपलब्धता, बिजली, सफ़ाई, और सामाजिक-आर्थिक और पढ़ाई-लिखाई की जानकारी शामिल है। मोबाइल नंबर देना ज़रूरी होगा। सबमिट करने पर, एक यूनिक सेल्फ़-एन्यूमरेशन आई डी (SE ID) बनेगी, जिसे फ़ील्ड वेरिफ़िकेशन के दौरान एन्यूमरेटर के साथ साझा करना होगा।

स्वगणना चरण के बाद 1 मई से 30 मई 2026 तक हाउसलिस्टिंग और गृह गणना(HLO) की जाएगी। गृह गणना के दौरान, एन्यूमरेटर ऑनलाइन सबमिट की गई जानकारी को सत्यापित करने और उन घरों की गणना करने के लिए घरों में जाएँगे जिन्होंने स्वगणना नहीं की है।

सेल्फ़-एन्यूमरेशन की सुविधा हरियाणा के सभी ज़िलों में उपलब्ध है और इसे इस प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सरल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस काम से इकट्ठा किया गया डेटा ज़िला-स्तर की योजनाबंदी और हरियाणा में राज्य के विकास और भलाई की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह सेवा को बेहतर बनाने में मदद करेगा।  नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से तथ्यों पर आधारित प्रबंधन मजबूत होगा और हरियाणा के विकास में तेज़ी आएगी।

निवासियों द्वारा दी गई सभी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय और सुरक्षित रहेगी। डेटा का इस्तेमाल सिर्फ़ स्टैटिस्टिकल मकसद और सेंसस एक्ट के नियमों के अनुसार डेवलपमेंट प्लानिंग के लिए किया जाएगा। नागरिकों को भरोसा दिलाया जाता है कि प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा सबसे ज़रूरी हैं।

हरियाणा के सभी निवासियों से अपील है कि वे 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रोसेस में सक्रिय रूप से हिस्सा लें और जानकारी सही और पूरी तरह से जमा करें। उनकी भागीदारी एक मज़बूत, डेटा-ड्रिवन हरियाणा बनाने में मदद करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि देश के सबसे बड़े प्रशासकीय कार्यक्रम में हर घर की गणना हो।

सही समय: महिला आरक्षण से बदलेगी भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर

सुश्री शोभा करंदलाजे

एक राज्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ लेते समय, मैंने उस खचाखच भरे कमरे में चारों ओर नजरें घुमायीं और गिनती की। वहां मौजूद महिलाओं की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी। इस दृश्य ने केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में ही नहीं, बल्कि इस बात के स्पष्ट संकेत के रूप में भी एक छाप छोड़ी कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को अभी भी काफी लंबा सफर तय करना बाकी है।

मैं कर्नाटक के तटीय इलाके के पुत्तूर के पास स्थित एक छोटे से गांव से आती हूं। पारंपरिक रूप से यह एक समृद्ध इलाका है और यहां की महिलाओं ने हमेशा अपनी दृढ़ता एवं शक्ति का परिचय दिया है। मुझे पता है कि उस शक्ति को सार्वजनिक जीवन में लगाने का क्या मतलब होता है। खासकर, उस स्थिति में जब एक ऐसी राह पर चलना हो जिस पर पहले चंद लोग ही चले हों और हर महिला को वैसे ही जोश के साथ वैसा ही मौका नहीं मिला हो।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही पारित हो चुका है। संसद में सितंबर 2023 में इस पर चर्चा हुई थी और संविधान में संशोधन किया गया था। लेकिन अब उस वादे को निभाने का सबसे मुश्किल काम सामने है।

अपने लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला लोकतंत्र

भारत में कुल 670 मिलियन महिलाएं हैं। लेकिन पिछले कई वर्षों में महज 15 प्रतिशत महिलाएं ही संसद में पहुंच पायीं हैं। जो लोकतंत्र अपने आधे नागरिकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से लगातार बाहर रखे, उसे सच्चा लोकतंत्र तो नहीं कहा जा सकता। ऐसे लोकतंत्र को विकास की प्रक्रिया में ही माना जाएगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन कागज पर लिखे किसी कानून का तभी कोई महत्व होता है, जब उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। जनगणना कराना बेहद जरूरी है। इसके बाद परिसीमन होना चाहिए और संसद तथा प्रत्येक राज्य की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए।

जब कानून बनाने वाली प्रक्रियाओं में महिलाओं को शामिल किया जाता है, तो कानून बनाने का केन्द्रबिंदु ही बदल जाता है। पंचायती राज संस्थाओं में, जहां दशकों पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था, प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलता है। पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के पोषण के लिए अधिक बजट आवंटित किए गए। भ्रष्टाचार के प्रति कम सहनशीलता और समुदायों के प्रति अधिक जवाबदेही देखी गई। यह महज एक संयोग नहीं है। यह प्रतिनिधित्व का जीता-जागता उदाहरण है।

दुष्चक्र को तोड़ना

मैंने अक्सर यह तर्क सुना है कि महिलाओं को “अपनी योग्यता के बल पर” आगे बढ़ना चाहिए। मैं इस भावना का सम्मान करती हूं। लेकिन इस आधार को खारिज करती हूं। योग्यता शून्य में  नहीं पनपती। यह वहीं पनपती है, जहां अवसर मौजूद होते हैं।

पीढ़ियों से, संरचनात्मक बाधाओं – सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक – ने प्रतिभाशाली महिलाओं को राजनीति से बाहर रखा है। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में हमेशा उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी गई है जिनके पास सुस्थापित नेटवर्क एवं संपर्क तथा विरासत में मिली राजनीतिक साख रही है और जो घरेलू जिम्मेदारियों से मुक्त हैं। दूसरी ओर, महिलाओं को इनमें से कोई भी सुविधा हासिल नहीं है।

आरक्षण से स्तर कम नहीं होता, बल्कि यह अड़चन को दूर करता है

जब बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायतों में दाखिल हुईं, तो शुरू में उन्हें नजरअंदाज किया गया। आखिरकार, विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया कि उनके अपने समुदायों ने उन्हें उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक प्रभावी, अधिक सुलभ और अधिक ईमानदार माना। जब महिलाओं को उचित अवसर दिया जाता है, तो वे केवल भाग ही नहीं लेती बल्कि नेतृत्व भी करती हैं।

नीतिगत दृष्टि से इसके मायने

सरकार में रहते हुए अपने व्यापक अनुभवों से मैंने यह जाना है कि निर्णय लेने वाले स्थानों पर आपकी मौजूदगी ही इस बात को निर्धारित करती है कि किस विषय पर चर्चा होगी। महिला जनप्रतिनिधि मातृ स्वास्थ्य निधि में कटौती की आशंका होने पर इसके लिए आवाज उठाती हैं। वे उन नीतियों के लैंगिक प्रभाव को उजागर करती हैं, जिनका व्यवहार में सबसे बुरा असर महिलाओं पर पड़ सकता है। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र की उन चिंताओं को सामने लाती हैं, जिनसे  उनके पुरुष सहकर्मियों का सामना नहीं होता।

संसद और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का मतलब यह है कि पहली बार ये आवाजें अपवाद नहीं रहेंगी। ये आवाजें ढांचागत व्यवस्था का हिस्सा होंगी। स्थायी होंगी। इन्हें नजरअंदाज करना असंभव होगा।

नारी शक्ति: सोच से कानून तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह मानना ​​रहा है कि भारत अपनी महिलाओं की पूर्ण और बराबरी की  भागीदारी के बिना अपनी पूरी क्षमताओं का सदुपयोग नहीं कर सकता। यह महज एक बयानबाजी  भर नहीं, बल्कि एक ऐसा दृढ़ विश्वास है जिसने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘जन धन’, ‘उज्ज्वला’ और ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी वाली नीतियों को दिशा दी है। उन्होंने नारी शक्ति को केवल एक नारा नहीं, बल्कि विकसित भारत का आधार  बताया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सोच की पूर्ण अभिव्यक्ति है। यह सोच महिला सशक्तिकरण को कल्याणकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर शासन की संरचना में समाहित करती  है।

सभी दलों के अपने साथियों से

यह क्षण हम सभी का है। यह मौका किसी एक दल का नहीं, बल्कि एक संस्था के रूप में संसद का है। सरकार के हर स्तर पर इस राष्ट्र की सेवा करने वाली एक महिला के रूप में, मैं सभी से अपील करती हूं और मेरा मानना ​​है कि हम सभी भारत के लोकतंत्र को मजबूत और अधिक पूर्ण देखना चाहते हैं। भारत की महिलाओं के प्रति हमारा अब यह कर्तव्य है कि हम जनगणना कराने, परिसीमन के कार्य को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने में तत्परता बरतें कि इस प्रक्रिया में  एक भी दिन अनावश्यक रूप से बर्बाद न हो।

मैं कार्यान्वयन, आरक्षित सीटों के चक्रण (रोटेशन), परोक्ष (प्रॉक्सी) उम्मीदवारों और सनसेट क्लॉज से जुड़ी चिंताओं से अवगत हूं। ये जायज बहसें हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पर तत्काल ध्यान दिया जाए। सिद्धांत सही है। जरूरत तत्परता की है। हमें पूर्णता को परिवर्तनकारी कदमों के आड़े नहीं आने देना चाहिए।

एक न्यायप्रिय राष्ट्र के रूप में

सितंबर 2023 में इतिहास रचा गया था। लेकिन इतिहास सार्थक तभी होता है जब उसके बाद की घटनायें भी मायने रखें। एक न्यायप्रिय देश अपने द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करके चुपचाप एक चिरस्थायी बदलाव को संभव बनाता है। अपने देश की सेवा करने की आकांक्षा रखने वाली हर युवती, मंच से हमेशा वंचित रहने वाली हर नेता और अभिव्यक्त होने से वाचित हर  आवाज के हित में, अब काम करने का समय है।

इस कानून को लागू कीजिए। दायरे का विस्तार कीजिए। सारा देश देख रहा है।  

(लेखिका केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्यमंत्री हैं)

तेल विपणन कंपनियों ने हरियाणा में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया

चंडीगढ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 15 अप्रैल 2026: तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने हरियाणा भर के नागरिकों को आश्वस्त किया है कि पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर, पर्याप्त है और वर्तमान मांग को पूरी तरह से पूरा करने में सक्षम है। राज्य में किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है।
इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड़, पानीपत मंडल कार्यालय के हरियाणा राज्य स्तरीय समन्वयक , तेल उद्योग, श्री अनिल कुमार सिंह ने बताया कि एलपीजी आपूर्ति की स्थिति आरामदायक बनी हुई है। हरियाणा भर में बॉटलिंग प्लांट्स पर एलपीजी का स्टॉक स्तर ऐतिहासिक मानकों के भीतर है, और पुनःपूर्ति योजनाबद्ध और निरंतर आधार पर की जा रही है। ओएमसी उपभोक्ताओं की आवश्यकता के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके अतिरिक्त, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति सरकार की नीति के अनुरूप पूर्व-संकट स्तर के 70% तक बनाए रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति के माध्यम से विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन 2,000–2,500 सिलेंडरों का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है, जो पूर्व-संकट स्तर के अनुरूप है। इस प्रयास को समर्थन देने के लिए, ओएमसी द्वारा जिला प्रशासन के समन्वय में समर्पित एलपीजी वितरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
श्री अनिल कुमार सिंह ने कहा कि ओएमसी स्थिति की निकटता से निगरानी कर रहे हैं और हरियाणा सरकार के साथ समन्वय में लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करने और डिलीवरी में तेजी लाने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। राज्य सरकार के साथ कई बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और वितरण तथा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार पर चर्चा की गई। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप, राज्य सरकार ने विभिन्न डीम्ड अप्रूवल जारी किए हैं, जिससे सीजीडी परियोजनाओं के सुचारू और तेज कार्यान्वयन तथा पीएनजी के प्रसार को सक्षम बनाया गया है।
एलपीजी उपभोक्ताओं को केवल अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सिलेंडर बुक करने और डिलीवरी के समय डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) का उपयोग कर प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे पारदर्शी, परेशानी मुक्त डिलीवरी अनुभव और वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर सेवा सुनिश्चित होती है।
उन्होंने बताया कि इस बीच, हरियाणा भर में पेट्रोल और एचएसडी (हाई-स्पीड डीजल) का स्टॉक सामान्य बना हुआ है। ओएमसी डिपो में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, और रिटेल आउटलेट्स पर निर्बाध बिक्री के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। ऑटोमोटिव ईंधनों की उपलब्धता को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है।
श्री अनिल ने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 (पूर्व-संकट अवधि) के दौरान एचएसडी की खपत वृद्धि स्थिर (0%) रही, जबकि मार्च 2026 में मांग में 22% की तेज वृद्धि दर्ज की गई। ओएमसी ने इस वृद्धि को बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक प्रबंधन और सुचारू किया। ओएमसी पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं और जनता से घबराहट में खरीदारी से बचने का आग्रह करते हैं। मांग को सुचारू और कुशल तरीके से पूरा करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

बैसाखी पर खालसा पंथ की स्थापना कर गुरु गोबिंद ने दिया सामाजिक समानता का संदेश: जसवीर सिंह गढ़ी

लुधियाना / सत्ता संदेश

1699 की बैसाखी ने सिख समुदाय को एक अनूठी पहचान दी: जसवीर सिंह गढ़ी

चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने बैसाखी और खालसा पंथ की महान विरासत को नमन किया

अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बैसाखी के अवसर पर गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपनाने की अपील की

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बैसाखी के शुभ दिन खालसा पंथ की स्थापना के लिए दशमेश पिता साहिब स्थित श्री गुरु गोविंद सिंह जी को याद करते हुए कहा कि सन् 1699 में बैसाखी के दिन श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने श्री आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की, जिससे सिख समुदाय को एक अनूठी पहचान मिली और समाज में ऊँच-नीच, जाति और वर्ग के भेदभाव का अंत हुआ। इसी कारण सभी लोग गुरु साहब को याद करते हैं। उन्होंने मानवता के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान दिया।

अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी सोमवार शाम को लुधियाना में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह समारोह भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।

जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि बैसाखी के इस ऐतिहासिक अवसर पर गुरु साहब ने पंज प्यारे की स्थापना करके सिखों को एक नई पहचान दी। खालसा पंथ की स्थापना से सिख समुदाय को एक अनूठा स्वरूप प्राप्त हुआ, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान दर्जा दिया गया। गुरु साहब ने सिद्ध किया कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके कर्म और आध्यात्मिकता से होती है, न कि उसके जन्म या जाति से।

उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने उपदेशों के माध्यम से जातिगत भेदभाव को समाप्त करने का महान संदेश दिया। गुरु साहब ने हमें सिखाया कि सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं और किसी भी प्रकार की असमानता मानवता के विरुद्ध है। खालसा पंथ के सिद्धांतों में न्याय, सत्य, निर्भीकता और सेवा का विशेष महत्व है। ये सिद्धांत आज भी सिख समुदाय को प्रेरित करते हैं और समाज में सत्य और न्याय की स्थापना के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि गुरु साहब का जीवन मानवता के लिए अद्वितीय बलिदानों से परिपूर्ण है। अपने पिता गुरु तेग बहादुर जी की शहादत से प्रेरणा लेकर उन्होंने धर्म और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके चारों पुत्रों की शहादत सिख इतिहास में एक अनूठा उदाहरण है, जो आज भी प्रत्येक मनुष्य को दृढ़ रहने और धर्म की रक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह द्वारा स्थापित ‘खालसा पंथ’ आज भी विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें गुरु साहब द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और सत्य, ईमानदारी और सेवा के मूल मंत्र को अपनाना चाहिए।

जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह द्वारा दिया गया सामाजिक समानता का संदेश आज के समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण है। जब दुनिया में आज भी कई प्रकार के भेदभाव मौजूद हैं, तब गुरु साहब की शिक्षाएं हमें एकजुट होकर मानवता के कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने लोगों से बैसाखी के इस पवित्र दिन पर गुरु साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि 1699 की बैसाखी न केवल सिख समुदाय के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दिन हमें सत्य और न्याय के लिए खड़े होने के महत्व की याद दिलाता है। गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा स्थापित ‘खालसा पंथ’ आज भी हमें निडर और शत्रुता से मुक्त रहने के लिए प्रेरित करता है।

अंत में उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का महान उपहार ‘खालसा पंथ’ केवल एक धार्मिक पहचान नहीं है, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए जीवन जीने का एक तरीका है। यह हमें सिखाता है कि सत्य, न्याय और समानता के मूलभूत सिद्धांतों को अपनाकर हम एक बेहतर समाज का निर्माण कैसे कर सकते हैं।

बैसाखी के इस पवित्र अवसर पर, गढ़ी के अध्यक्ष ने सभी को गुरु साहब द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करने और समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करने में योगदान देने का संदेश दिया।

अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी लुधियाना में डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे

लुधियाना / सत्ता संदेश

15 अप्रैल को फागवारा स्थित विरोध स्थल पर अदालत गठित की जाएगी, अधिकारियों को तलब किया गया।

अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को अपनाने की अपील की।

डॉ. भीम राव अंबेडकर का संविधान आज भी शोषित वर्गों के लिए आशा की किरण है: जसवीर सिंह गढ़ी

भारत के संविधान के निर्माता, भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में पिछले सोमवार शाम को गुरु नानक देव भवन, लुधियाना के सभागार में एक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने बाबासाहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा दी गई निस्वार्थ सेवाओं को याद करते हुए कहा कि उन्हें “भारत के संविधान के निर्माता” और शोषितों के लिए संघर्ष करने वाले महान व्यक्ति के रूप में भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित विविधता में एकता का मूल सिद्धांत आज भी कई चुनौतियों के बावजूद अडिग है।

भारतीय संविधान को विश्व के सर्वश्रेष्ठ संविधानों में से एक बताते हुए अध्यक्ष गढ़ी ने कहा कि यह समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए न्याय की अंतिम आशा है। बाबासाहेब अंबेडकर के दूरदर्शी और बुद्धिमान नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे संविधान ने प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दलितों के अधिकारों की निरंतर सुरक्षा का प्रावधान किया है।

उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को याद करते हुए कहा कि हमें ऐसे महान और दूरदर्शी व्यक्तित्व को किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र के प्रति उनके महान योगदान का वर्णन करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान सभी वर्गों को समान संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं को बाबासाहेब (डॉ. बी. आर. अंबेडकर) के साहित्य को पढ़ने और उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करके एक स्वस्थ समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित किया।

अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने संविधान की पवित्र पुस्तक में शोषित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान करने के लिए डॉ. अंबेडकर को मसीहा बताते हुए कहा कि शिक्षा सभी भेदभाव और असमानता को समाप्त करने की कुंजी है और मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार शिक्षा क्रांति के माध्यम से सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर को निजी स्कूलों के समान उन्नत करके गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रही है।

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के सत्ता में आने के बाद से बाबासाहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर के सपनों को साकार करने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार देश की पहली सरकार है जिसने प्रेरणा और आदर्शों के रूप में डॉ. भीम राव अंबेडकर और शहीद-ए-आजम एस. भगत सिंह की तस्वीरें सभी सरकारी कार्यालयों में स्थापित की हैं।

इससे पहले, पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लुधियाना में ऐसे बौद्धिक कार्यक्रम में भाग लेना उनके लिए गर्व की बात है, जिसे पंजाब का मैनचेस्टर कहा जाता है। उन्होंने आयोजनकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि समाज में प्रतिवर्ष योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करना एक प्रेरणादायक कदम है।

उन्होंने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण मामले का जिक्र करते हुए कहा कि फागवारा के सफाईकर्मी गोविंद घई को फागवारा नगर परिषद द्वारा नौकरी से निकाल दिया गया है, जो कि अन्यायपूर्ण है। गढ़ी ने कहा कि आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और 15 अप्रैल को आयोग स्वयं विरोध स्थल का दौरा करेगा। इस मामले की सुनवाई के लिए एक अदालत का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गरीबों और प्रभावित वर्गों को न्याय दिलाने की दिशा में एक नया कदम होगा।

इसके अलावा, गढ़ी ने गढ़शंकर के गद्दीवाल गांव में एक परिवार के मामले का भी जिक्र किया, जहां पारिवारिक तनाव के कारण एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस से बातचीत हो चुकी है और परिवार को जल्द ही न्याय मिलेगा।

उन्होंने नूरपुर जट्टन के एक मामले के बारे में भी बताया, जहां आयोग ने बेअदबी के मामले को गंभीरता से लिया है। संबंधित परिवार के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए प्रशासन के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।

अंत में, गढ़ी ने कहा कि वे जाति या राजनीति से ऊपर उठकर हर पीड़ित की बात सुनने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि पंजाब के हर नागरिक को न्याय मिले।

इस अवसर पर, मलकीत चंद जनगल को जन चेतना पंजाब रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टडी सर्कल पंजाब के अध्यक्ष कमल कटारिया, जन चेतना के अध्यक्ष डॉ. विनय सौफत, कार्यकारी अध्यक्ष संजय शर्मा, महासचिव सीमा गुप्ता, सचिव ज्योति खेरा, मंच सचिव मंजुला शर्मा, निरात्मा मौदगिल, अतुल भारद्वाज, रजत भाटिया, अनिल अग्रवाल और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

एवन साइकिल्स ने प्रतिष्ठित कॉफी टेबल बुक के विमोचन के साथ अपनी 75 साल की विरासत का जश्न मनाया

पंजाब/ सत्ता संदेश

पचहत्तर साल। साढ़े सात दशक नवाचार, विश्वास और उन उपलब्धियों के, जिन्होंने भारतीय साइकिलिंग जगत को आकार दिया है। गुणवत्ता और विश्वसनीयता का पर्याय बन चुकी एवन साइकिल्स ने अपनी इस उल्लेखनीय यात्रा का जश्न अपनी कॉफी टेबल बुक के विमोचन के साथ मनाया। यह पुस्तक ब्रांड की विरासत, उपलब्धियों और भविष्य की दृष्टि का एक आकर्षक वृत्तांत है।

14 अप्रैल को आयोजित भव्य विमोचन समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें मुख्य अतिथि पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया; विशिष्ट अतिथि पंजाब के कैबिनेट मंत्री श्री संजीव अरोरा; और विशेष अतिथि मेड इन भारत फॉर द वर्ल्ड के अफ्रीका में विशेष सलाहकार डॉ. दीपक वोहरा शामिल थे। यह समारोह विरासत, नेतृत्व और राष्ट्रीय गौरव का एक यादगार अवसर था।

नवस्वतंत्र भारत में अपनी स्थापना से लेकर मेड इन इंडिया के वादे के वैश्विक राजदूत बनने तक, एवन साइकिल्स ने दृढ़ता और साहस के साथ हर बदलाव का सामना किया है। यह कॉफी टेबल बुक उन सभी लोगों को समर्पित है जिन्होंने इस यात्रा में योगदान दिया। इसमें कंपनी के विकास, प्रमुख उपलब्धियों और नवाचार की भावना को दर्शाया गया है, जिसने इसकी कहानी को परिभाषित किया है।

श्री ओंकार सिंह पाहवा, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ने कहा,

“75 वर्ष पूर्व, युवा भारत के साथ जन्मी, एवन साइकिल्स राष्ट्र के साथ-साथ विकसित हुई है और हर दिन गुणवत्ता, विश्वास और विश्वसनीयता के अपने वादे को निभाती आई है। भारत से लेकर वैश्विक स्तर तक, हम गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारी कॉफी टेबल बुक हमारे लोगों, हमारी यात्रा और इस परिवार का हिस्सा रहे हर व्यक्ति को समर्पित है। पचहत्तर वर्ष, एक वादा और आगे एक रोमांचक सफर।”

प्रबंध निदेशक श्री ऋषि पाहवा ने आगे कहा,

“यह उपलब्धि उद्देश्य, गौरव और अटूट प्रतिबद्धता का उत्सव है। अपने काम में विश्वास रखने वाले लोगों द्वारा निर्मित, एवन साइकिल्स दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। हमारी कॉफी टेबल बुक हर उपलब्धि, साहसिक निर्णय और निर्णायक छलांग को दर्शाती है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है – इस विरासत को आगे बढ़ाना और न केवल एक कंपनी, बल्कि टीम भावना, विकास और उत्कृष्ट प्रदर्शन पर आधारित एक संस्था का निर्माण करना।”

संयुक्त प्रबंध निदेशक श्री मनदीप सिंह पाहवा ने कहा,

“75 वर्ष पूरे होने पर हम अपनी विरासत और विकास दोनों का जश्न मना रहे हैं। एवन के ई-वर्ल्ड के साथ सतत गतिशीलता से लेकर एवन फिटनेस के साथ स्वास्थ्य और कल्याण तक, हम बदलते समय के साथ लगातार आगे बढ़ते रहे हैं। यह कॉफी टेबल बुक

इस यात्रा, हर पड़ाव, हर नई दिशा और हर गौरवपूर्ण क्षण को खूबसूरती से दर्शाती है। स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ, हम अगले 75 वर्षों की ओर देख रहे हैं।”

मुख्य अतिथि, पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक, गुलाब चंद कटारिया ने कहा,

“एवन साइकिल्स के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाना विश्वास, नवाचार और राष्ट्र की प्रगति में योगदान की विरासत को दर्शाता है। यह ब्रांड लाखों लोगों, विशेषकर ग्रामीण भारत में, के जीवन का अभिन्न अंग बना हुआ है। स्थिरता और फिटनेस पर इसका निरंतर ध्यान इसे आज और भी अधिक प्रासंगिक बनाता है।”

विशिष्ट अतिथि, पंजाब के मंत्रिमंडल मंत्री, श्री संजीव अरोरा ने कहा,

“जब मैंने 1951 में इसकी स्थापना के बाद से एवन साइकिल्स की यात्रा देखी, तो यह उद्योग नेतृत्व का एक सच्चा उदाहरण बनकर उभरा। आज, भारत के सबसे बड़े साइकिल निर्माताओं में से एक के रूप में, यह अपनी व्यावसायिक उत्कृष्टता और परोपकार की विरासत से युवाओं को प्रेरित करता रहता है। पंजाब द्वारा 2026-27 तक 75,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित करने के साथ, मुझे विश्वास है कि एवन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।”

यह शुभारंभ एवन साइकिल्स की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इसकी विरासत का जश्न मनाते हुए भविष्य के लिए इसके दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है। यह ब्रांड की नवाचार, नेतृत्व और भारत की साइकिलिंग गाथा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।