ब्रेकिंग न्यूज़
सिख संस्थाओं ने “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम” को नामंजूर किया

अमृतसर/सत्ता संदेश

पत्रकार विक्रमजीत सिंह एवं कैमरामैन तरनजीत सिंह

श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज द्वारा ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026’ तथा भाई बलवंत सिंह राजोआणा के मामलों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हेतु सिख संस्थाओं, जत्थेबंदियों, विद्वानों, कानूनी विशेषज्ञों और विचारकों की एक विशेष बैठक आज अमृतसर स्थित भाई गुरदास हॉल में आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में सिख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने विचार रखे।

बैठक में पंजाब सरकार द्वारा पारित ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026’ को लेकर सिख समुदाय में उत्पन्न आशंकाओं और आपत्तियों पर चर्चा हुई। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने बताया कि इन चिंताओं को देखते हुए पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को 8 मई 2026 को सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है।

बैठक में कई वक्ताओं ने कहा कि यह कानून सिख धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और इससे बेअदबी मामलों में दोषियों को सजा देने की बजाय सिख संस्थाओं, गुरुद्वारा प्रबंधकों, संगत और ग्रंथी सिंहों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाल दी गई हैं, जिससे सिख प्रचार-प्रसार में बाधा आएगी।

जत्थेदार गर्गज ने कहा कि खालसा पंथ की सहमति के बिना इस संशोधित कानून को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिखों से जुड़े धार्मिक मामलों में सरकार कोई भी कानून थोप नहीं सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि बेअदबी के दोषियों को सजा देने के लिए सख्त कानून बनाने का सिख पंथ विरोध नहीं करता, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में सिख भावनाओं को कानून के दायरे में लाना स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि 2015 के बेअदबी मामलों में अभी तक मुख्य दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ भी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए।

भाई बलवंत सिंह राजोआणा के मामले पर उन्होंने कहा कि सिखों के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है और केंद्र सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने बंदी सिखों और राजोआणा के समर्थन की बात कही।

बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, विभिन्न निहंग जत्थे, दमदमी टकसाल और अन्य सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।