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महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मिली नई गति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि के रूप में महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।

महाराष्ट्र में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। यह देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में से एक में हुई तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों ओर की पटरियों के लिए हाल ही में बनकर तैयार हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि द्वारा की गई। निर्माण के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

खुदाई की पूरी प्रक्रिया की अवधि में संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और सटीक निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ सहित वास्तविक समय की निगरानी व्यवस्थाओं द्वारा कंपन, सुरंग की गतिविधि और आसपास की संरचनाओं पर निरंतर नजर बनाई रखी गई। सुरंग निर्माण कार्यों के दौरान वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण सहित व्यापक श्रमिक सुरक्षा उपायों में कोई भी ढील नहीं दी गई।

यह सफलता परियोजना के महाराष्ट्र खंड में पहले हासिल की गई उपलब्धियों पर आधारित है। 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग (एमटी-05) का निर्माण 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास पूरा हुआ। यह उपलब्धि महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग निर्माण के रूप में सामने आई। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग (एमटी-06) का निर्माण हुआ, इसमें न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके 454 मीटर लंबी सुरंग खोदी गई। इस तरह पालघर जिले में लगभग एक महीने के भीतर दो सफल निर्माण पूरे हुए।

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से, एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 में अब तक खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एमटी-08 (350 मीटर) में 5 अक्टूबर 2023 को खुदाई का काम पूरा हो गया था, एमटी-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है, एमटी-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में काम लगातार जारी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल आठ पर्वतीय सुरंगों में से सात महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आती हैं और एक गुजरात के वलसाड जिले में है और उस सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच तीनों पर्वतीय सुरंगों की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वहां के निर्माण कार्य तेजी से प्रगति हो रही है। इन दोनों शहरों के बीच के मार्ग में तीन (03) पर्वतीय सुरंगें (एमटी 08, एमटी -07 और एमटी-06) शामिल हैं।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना उन्नत सुरंग, निगरानी और निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य के लिए रेल परिवहन की नींव रखे जाने से देश की हाई-स्पीड रेल अवसंरचना में क्षमताएं मजबूत हो रही हैं।

भारत और ओमान द्वारा एक नए आर्थिक गलियारे को गति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और ओमान के बीच वाणिज्यिक रिश्ते सदियों से चलते आ रहे हैं। दोनों देशों का एक साझा इतिहास प्राचीन नावों के पाल पर सवार होकर आगे बढ़ता रहा है और पीढ़ियों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए कायम रहा है। भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) इस सभ्यतागत बंधन को और मजबूत करता है। एक ऐसे दौर में जब वैश्विक व्यापार भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ते संरक्षणवाद से जूझ रहा है, यह समझौता भरोसेमंद साझेदारों के साथ आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वर्ष 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद, यह सीईपीए खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को मजबूती से स्थापित करता है। 

द्विपक्षीय व्यापार में लगातार विस्तार हुआ है और वित्त वर्ष 2025-26 में यह 11.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि, सेवाओं का व्यापार 2024 में 863 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा। आर्थिक रिश्तों का विविधीकरण हुआ है और इसमें परंपरागत वस्तुओं से परे इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं का समावेश हुआ है। फिर भी, काफी अनछुई संभावनाएं अभी भी बाकी हैं। वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर आवाजाही और नियामकीय सहयोग को शामिल करके, यह सीईपीए अधिक सुदृढ़, समन्वित और व्यापक आर्थिक साझेदारी का एक व्यापक ढांचा तैयार करता है।

भारतीय निर्यात के विकास का प्रवेश द्वार

इस सीईपीए के तहत ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच हासिल है। इस समझौते से पहले, भारत के निर्यात का सिर्फ लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा ही सर्वाधिक तरजीह वाले देश (मोस्ट फेवर्ड नेशन) की व्यवस्था के तहत ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश करता था, जबकि शेष पर 5 प्रतिशत तक का शुल्क लगता था। इस सीईपीए के तहत, भारत के वर्तमान निर्यात की 99.38 प्रतिशत मात्रा अब शुल्क-मुक्त प्रवेश का लाभ उठाएगी।

भारतीय निर्यातकों की दृष्टि से, ये लाभ काफी महत्वपूर्ण हैं। ओमान के ‘विजन 2040’ के तहत बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विविधीकरण में उसके द्वारा किए जा रहे निवेश से मांग में वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में 875.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात के 2030 तक बढ़कर 1.3 से 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच होने का अनुमान है। शून्य शुल्क की सुविधा के जरिए वस्त्र एवं परिधान सेक्टर को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी। इससे तिरुपुर, सूरत, लुधियाना और कोयंबटूर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी और साथ ही रोजगार भी सृजित होगा।

मौके व्यापक और विविध हैं। आयात पर निर्भर ओमान का दवा बाजार भारतीय कंपनियों के लिए मजबूत संभावनाएं पेश करता है। नियामकीय मंजूरियों में तेजी, गुणवत्ता प्रमाणपत्रों की मान्यता और प्रमुख उत्पादों के शुल्क-मुक्त पहुंच से अनुपालन संबंधी लागत में कमी आएगी और बाजार में पैठ बढ़ेगी। चावल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, मसाले और कन्फेक्शनरी सहित कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण आधारित निर्यात को भी लाभ होगा।

खुलते बाजार, हितों का संरक्षण

भारत के हालिया व्यापार समझौतों के अनुरूप, इस सीईपीए में एक संतुलित और सुविचारित दृष्टिकोण का समावेश है। जहां एक ओर भारत प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने के लिए बाजारों को खोल रहा है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहा है। दुग्ध तथा अनाज जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के साथ-साथ रबर, वस्त्र और जूते जैसे उद्योग सुरक्षित बने हुए हैं। यह दृष्टिकोण बाहरी बाजारों तक पहुंच  और घरेलू कमजोरियों से बचाव को एक साथ जोड़ता है।

भारत ने ओमान से आयात होने वाले लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर लागू होने वाली अपनी 77 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों को उदार बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे ओमान के प्रमुख निर्यातों, खासकर मेथनॉल और निर्जल अमोनिया जैसे औद्योगिक इनपुट को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। ओमान को धातुओं और मिश्र धातुओं की एक विस्तृत श्रृंखला में तरजीही बाजार पहुंच हासिल होगी। इससे हमारे दोनों देशों को कम उत्पादन लागत का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

जिन क्षेत्रों में भारत के रक्षात्मक हित हैं, उन क्षेत्रों में टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) के जरिए  ओमान को पहुंच प्रदान की गई है। यह व्यवस्था निर्दिष्ट मात्रा की सीमा के भीतर खजूर, संगमरमर और चुनिंदा पेट्रोकेमिकल जैसे उत्पादों के तरजीही निर्यात की अनुमति देती है। बेहद सावधानीपूर्वक तैयार किया गया जुड़ाव का यह तरीका प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ संक्रमण काल ​​के दौरान कमजोर क्षेत्रों को सहायता भी प्रदान करता है।

व्यापार, प्रतिभा और विश्वास

यह सीईपीए भारतीय सेवा प्रदाताओं को उन सभी क्षेत्रों में बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं प्रदान करता है, जहां भारत की स्थिति स्पष्ट रूप से मजबूत है। इनमें आईटी, पेशेवर सेवाएं और निर्माण क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने वाले प्रावधानों के साथ, भारतीय कंपनियों को ओमान में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के अधिक मौके मिलेंगे।

प्रतिभाओं की दृष्टि से भी, यह समझौता एक बड़ी उपलब्धि है। कंपनी के भीतर स्थानांतरित कर्मचारियों (इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी) की सीमा को 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर, भारतीय कंपनियों को अब विशिष्टता प्राप्त कर्मचारियों को आसानी से तैनात करने तथा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने की सुविधा मिल गई है। इसके अलावा, किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में पहली बार, ओमान ने स्वतंत्र पेशेवरों के लिए एक समर्पित आवाजाही की व्यवस्था स्थापित की है। अब जबकि वैश्विक स्तर पर जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण कारखानों में श्रमिकों की कमी हो रही है और आधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर एआई एवं रोबोटिक्स के साथ जुड़ रहा है, ऐसे में यह प्रावधान भारतीय प्रतिभाओं के लिए दुनिया भर में एक सशक्त मिसाल कायम करता है।

इस सीईपीए में समर्पित स्वास्थ्य सेवा का एक परिशिष्ट भी शामिल है, जो आयुर्वेद जैसी पारंपरिक प्रणालियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने में सुविधा प्रदान करता है। साथ ही, यह चिकित्सा पेशेवरों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित करता है। इसके अलावा, एक अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा समझौते से संबंधित बातचीत से भविष्य में भारतीय प्रवासी समुदाय को दोहरे योगदान के बोझ से बचाया जा सकेगा।

क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण

भारत-ओमान सीईपीए नियामकीय सहयोग, सामंजस्यपूर्ण मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं के जरिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करके टैरिफ से परे जाता है। यह भारत के आधुनिक व्यापार समझौतों से जुड़े उच्च मानकों को दर्शाता है और सीमा के भीतर मौजूद वाणिज्य में रुकावट डालने वाली विभिन्न बाधाओं को दूर करता है।

भारत एक बेहद ही एकीकृत क्षेत्रीय व्यापार संरचना की नींव रख रहा है। भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से जुड़े सभी साझेदार मिलकर अब वैश्विक जीडीपी का लगभग 67 प्रतिशत और वस्तुओं एवं सेवाओं के वैश्विक आयात का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा हैं। खाड़ी, पूर्वी अफ्रीका और व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र के मिलन बिंदु पर स्थित, ओमान को एक अनूठी भौगोलिक हैसियत हासिल है। सोहार, दुक्म और सलालाह जैसे ओमान के लॉजिस्टिक्स व औद्योगिक केन्द्र भारत की मैन्यूफैक्चरिंग संबंधी विशेषज्ञता एवं प्रतिभाओं को व्यापक मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ जोड़कर मूल्य श्रृंखलाओं को एकीकृत कर सकते हैं। इसका परिणाम क्षेत्रीय संपर्क और विकास के लिए निर्मित एक साझेदारी के रूप में सामने होगा।

व्यापार समझौते तभी सफल होते हैं जब वे भरोसा पैदा करते हैं, व्यवसायों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, श्रमिकों को नए कौशल हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं और अर्थव्यवस्थाओं को स्थायी साझेदारी बनाने के लिए आगे बढ़ाते हैं। यह सीईपीए ठीक यही काम कर रहा है। यह सदियों पुराने रिश्ते को इक्कीसवीं सदी की हकीकतों के अनुरूप एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में परिवर्तित कर रहा है।  

बढ़ती मांग के बावजूद पंजाब में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति, घबराकर खरीदारी न करें: तेल कंपनियां

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने पंजाब सहित देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने का भरोसा दिया है। कंपनियों का कहना है कि हाल के दिनों में ईंधन की मांग में अचानक और तेज वृद्धि हुई है, लेकिन उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

इंडियनऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने संयुक्त रूप से बताया कि कृषि गतिविधियों और फसल कटाई के मौसम के कारण कई राज्यों में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ी है। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी है।

तेल कंपनियों ने कहा कि उनके टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन नेटवर्क, एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और खुदरा आउटलेट पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। आपूर्ति और परिवहन से जुड़ी टीमें 24 घंटे कार्यरत हैं ताकि ईंधन की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

कंपनियों ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है। बढ़ती मांग को देखते हुए लॉजिस्टिक्स और वितरण प्रणाली की लगातार निगरानी की जा रही है।

आईओसीएल पंजाब के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख अशुतोष गुप्ता ने नागरिकों से अपील की कि वे सामान्य रूप से ईंधन खरीदें और किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी न करें। उन्होंने लोगों से ईंधन उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल अधिकृत स्रोतों और तेल कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने का आग्रह किया।

सीधी में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत पर NHRC सख्त, मध्य प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वर्ष के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 महिलाओं की मृत्यु हुई। इन मौतों के पीछे जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को प्रमुख कारण बताया गया है।

एनएचआरसी ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृत महिलाओं की औसत आयु 26 वर्ष थी और इनमें से अधिकांश पहली या दूसरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। स्वास्थ्य विभाग की सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य रैंकिंग में भी सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है।

खबरों में यह भी सामने आया है कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में डॉक्टरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। बेहतर इलाज के लिए मरीजों को अक्सर रीवा भेजना पड़ता है, जिससे रास्ते में जोखिम बढ़ जाता है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में सड़क संपर्क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के लिए दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है। मानसून के दौरान यह समस्या और भी बढ़ जाती है।

अब सभी की नजरें मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्ट पर हैं, जिसके आधार पर एनएचआरसी आगे की कार्रवाई तय करेगा।

एम्स बठिंडा के दीक्षांत समारोह में बोले जेपी नड्डा, ‘स्वस्थ भारत से ही बनेगा विकसित भारत’

दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की आबादी स्वस्थ और उत्पादक होगी।

अपने संबोधन में नड्डा ने एम्स बठिंडा की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी और 600 आईपीडी मरीजों को सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संस्थान आसपास के 59 गांवों में नियमित आयुष्मान स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है, जहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच की जाती है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब स्वास्थ्य सेवाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोकथाम, पुनर्वास और बुजुर्गों की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नड्डा ने बताया कि देशभर में 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों लोगों की कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की जांच की जा चुकी है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो चुकी है। मेडिकल सीटों में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और सरकार अगले पांच वर्षों में 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एम्स बठिंडा में अत्याधुनिक पीईटी-सीटी सुविधा, दूसरी हाई एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर इकाई, बर्न आईसीयू, बाल विकास एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (सीडीईआईसी) तथा जिम एवं वेलनेस सेंटर का उद्घाटन भी किया। इन सुविधाओं से कैंसर उपचार, गंभीर मरीजों की देखभाल और बच्चों के स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

क्वांटम तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे भारत-जर्मनी, डॉ. जितेंद्र सिंह से मिले थुरिंगिया के मंत्री-प्रमुख

नई दिल्ली

भारत और जर्मनी ने क्वांटम संचार, फोटोनिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डीप-टेक नवाचार जैसे भविष्य की तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट ने केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में दोनों देशों की सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य नवाचार और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देना था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पिछले 50 वर्षों से लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का केंद्र है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में वैश्विक साझेदारी के बड़े अवसर मौजूद हैं।

बैठक में क्वांटम तकनीकों और फोटोनिक्स पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने क्वांटम संचार, क्वांटम उपग्रह संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन और क्वांटम नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और अन्य मिशन-मोड कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाकर नई तकनीकों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत और जर्मनी ने उपग्रह संचार, पृथ्वी अवलोकन, मानव अंतरिक्ष उड़ान, ड्रोन तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की। मंत्री ने बताया कि भारत अब तक अपने प्रक्षेपण यानों के माध्यम से 11 जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है।

बैठक में यह भी सहमति बनी कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाकर अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकों और वैश्विक स्तर के उत्पादों में बदला जाएगा।

दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि क्वांटम तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फोटोनिक्स, अंतरिक्ष और डीप-टेक नवाचार के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

ममता बनर्जी का भाजपा पर हमला, बोलीं- 177 सीटों पर धांधली हुई, पुलिस कार्यकर्ताओं को रोक रही है

कोलकाता /सत्ता संदेश

पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 15 साल के बाद सत्ता से बेदखल हुई है। 15 साल बाद तृणमूल को उखाड़ फेंकने वाली भाजपा आत्मविश्वास से लबरेज है। तृणमूल कांग्रेस इस करारी हार के बाद चुनाव में धांधली के आरोप लगा रही है। दोनों दलों के आक्रामक तेवरों के बीच आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध-प्रदर्शन का एलान किया। टीएमसी की तरफ से हुए इस हल्लाबोल के बीच भाजपा ने सोनारपुर में हुई मारपीट और हिंसा के मामले में तृणमूल को घेरा है। भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि उनके दल पर तृणमूल के ऐसे राजनीतिक हथकंडों का कोई असर नहीं पड़ेगा।

कल्याण बनर्जी ने क्या-क्या आरोप लगाए?

कल्याण बनर्जी ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी शांतिनिकेतन से पैसा लाकर पुलिस का वेतन नहीं देते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को याद दिलाया कि समय हमेशा बदलता रहता है, इसलिए सभी को अपनी ड्यूटी निष्पक्ष तरीके से करनी चाहिए। टीएमसी नेता के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि 29 मई को ही प्रशासन को 2 जून के धरना प्रदर्शन की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने आखिरी समय तक कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि देर रात अनुमति मिलने के कारण प्रदर्शन स्थल पर साउंड सिस्टम और स्पीकर नहीं लगाए जा सके। टीएमसी ने इसे प्रशासन की जानबूझकर की गई देरी बताया है।

कल्याण बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ लगातार हिंसा और कार्रवाई की जा रही है। पार्टी की ओर से कहा गया कि अब तक 25 से 30 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जबकि 5,000 से 8,000 समर्थकों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। टीएमसी का दावा है कि करीब 3,000 घरों को भी तोड़ दिया गया है।

टीएमसी सोनारपुर में मारपीट होने के अलावा कई अन्य मामलों के खिलाफ भी आक्रोशित
इससे पहले टीएमसी नेताओं ने पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों के विरोध में प्रदर्शन किया। तृणमूल इसलिए भी आक्रामक है भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ सोनारपुर में मारपीट होने के अलावा कई अन्य नेताओं के साथ भी कथित तौर पर ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। 

बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के बाद धरना
ममता बनर्जी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेताओं के इस विरोध-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य नेताओं के खिलाफ हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाना है। प्रदर्शन से पहले टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारत रत्न बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व सीएम ममता हाथ में संविधान की किताब लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचीं थीं।

3 जून को केंद्रीय मंत्री राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 प्रदान करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 का वितरण समारोह बुधवार, 3 जून को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल द्वारा देश भर की 42 उत्कृष्ट पंचायतों को ये पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज संस्थानों के निर्वाचित प्रतिनिधि इस उपस्थित रहेंगे।

इससे पहले, 24 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने तीन विशेष श्रेणियों के अंतर्गत राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 प्रदान किए थे। 3 जून 2026 को होने वाले समारोह में एनपीए-2025 की शेष श्रेणियों को शामिल किया जाएगा, जिसमें दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार श्रेणी के अंतर्गत 34 ग्राम पंचायतों को और नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार श्रेणी के अंतर्गत 8 पंचायतों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस समारोह के दौरान, पुरस्कार प्राप्त पंचायतों के कार्यों और सर्वोत्तम कार्य प्रणाली को प्रलेखित करने वाली एक ई-पुस्तक और देश भर में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने की सर्वोत्तम कार्य प्रणाली पर एक संकलन भी जारी किया जाएगा। पुरस्कार समारोह से पहले दो विशेष सत्रों में पुरस्कार प्राप्त पंचायतों के प्रमुख अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं और उपलब्धियों पर प्रस्तुतियां भी देंगे। 

स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत से जनता का भरोसा साबित: जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत को जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि चार जिलों में हुए चुनावों में मंडी, सोलन और धर्मशाला में पार्टी की जीत यह दर्शाती है कि लोगों का विश्वास लगातार बीजेपी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सबसे निचले स्तर का चुनाव होता है और इसमें जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना संदेश दिया है। उनके अनुसार सरकार ने चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे नहीं किए, जिसके कारण लोगों में नाराजगी है।

हिमाचल में लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोगों के पंजाब से पारिवारिक और सामाजिक संबंध हैं, लेकिन इस तरह का टैक्स लगाने से पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब की ओर से भी हिमाचल के वाहनों पर टैक्स लगाने की बात सामने आई है, जिससे दोनों राज्यों के बीच आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

सरकारी नौकरियों में डोप टेस्ट को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्णय लेने का तरीका काफी अलग है। उन्होंने माना कि प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर होती जा रही है और अब ड्रग्स गांवों तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान और टास्क फोर्स का गठन किया गया है, लेकिन अब नौकरी से पहले डोप टेस्ट लागू करने का निर्णय लिया गया है।

हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारियों की हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। मुख्यमंत्री पहले ही वेतन हर महीने की पहली तारीख को देने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, जिसके कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

मानसून की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार आगामी बारिश के मौसम के लिए तैयार नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की आपदा के बाद सड़कों पर पड़ा मलबा अभी तक नहीं हटाया गया है। ऐसे में मानसून के दौरान यह मलबा फिर सड़कों पर आ सकता है, जिससे सड़कें बंद होने और लोगों को परेशानियों का सामना करने की आशंका बढ़ जाएगी।

गुरदासपुर जोन 2 में धान बुवाई का काम शुरू, किसानों ने सुनाई आपबीती

गुरदासपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : लवप्रीत सिंह

पंजाब में धान का सीजन 15 मई से शुरू हो गया था। धान के सीजन में अलग-अलग जिलों को पांच जोन में बांटा गया है। वहीं जिला गुरदासपुर को जोन 2 में रखा गया है। जहां धान की बुआई का काम शुरू हो गया है।

गुरदासपुर की बात करें तो यहां ज्यादातर किसानों ने पौधे लगा दिए हैं और खेतों को समतल करने (कद्दू) का काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन लेबर की कमी के कारण अभी तक धान की बुआई शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि किसान इस बात से खुश हैं कि सरकार ने बिजली की सप्लाई शुरू कर दी है और उम्मीद है कि यह सप्लाई बिना रुके जारी रहेगी, लेकिन साथ ही खाद की कमी किसानों के लिए परेशानी बनती जा रही है।

किसानों का कहना है कि ज्यादातर खाद स्टोर किसानों को खाद नहीं दे रहे हैं और अगर देते भी हैं तो उन्हें फालतू दवाइयां देकर खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि इस बार ज़्यादा समय और बारिश होने से उम्मीद है कि किसानों की मुश्किलें कम होंगी और पैदावार भी अच्छी होगी। किसानों ने यह भी कहा कि हालांकि बासमती से पानी की बचत होती है, लेकिन बासमती की मार्केटिंग में मुश्किलें आती हैं, इसलिए किसान धान की कम समय वाली किस्मों को प्राथमिकता दे रहे है।