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हिमाचल प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का क्षेत्रीय कार्य प्रारंभ; केरल और नागालैंड में स्व-गणना शुरू

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का क्षेत्रीय कार्य आज हिमाचल प्रदेश में स्व-गणना अवधि पूरी होने के बाद सुरू हो गया है। प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाला कार्य 15 जुलाई तक जारी रहेगा।

केरल और नागालैंड में स्व-गणना (SE) सुविधा भी प्रारंभ हो गई है, जो 30 जून, 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इन राज्यों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के क्षेत्रीय कार्य 1 जुलाई से 30 जुलाई, 2026 तक किए जाएंगे। इन राज्यों के निवासी आधिकारिक स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर सकते हैं।

वर्तमान में गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी तथा उत्तर प्रदेश में घर-घर जाकर किए जाने वाले क्षेत्रीय कार्य जारी हैं। जिन निवासियों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, वे अपने द्वारा प्राप्त स्व-गणना पहचान संख्या सकेगी। जिन परिवारों ने स्व-गणना का विकल्प नहीं चुना है, उन्हें प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर कवर किया जाएगा।

इस बीच, 16 मई से 14 जून, के दौरान महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान एवं झारखंड राज्यों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। पंजाब में भी यह कार्य 13 जून, को सम्पन्न हो गया।

अब तक 23 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र, जिनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं, जनगणना 2027 के प्रथम चरण का कार्य पूर्ण कर चुके हैं।

जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल टूल्स के उपयोग के साथ की जा रही है। इसके अंतर्गत आंकड़ों को एक डेडीकेटेड मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्रित किया जा रहा है। इसके साथ, व्यापक एवं सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर की जाने वाली गणना की प्रक्रिया भी की जा रही है। मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना चरण के दौरान आवासीय स्थिति, परिवार संबंधी विवरण, उपलब्ध सुविधाओं तथा परिवारों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी 33 अधिसूचित प्रश्नों वाली प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र की जा रही है।

जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एकत्र की गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और उसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और विकास योजनाओं के लिए किया जाता है। अधिसूचित राज्यों एवं संघराज्य क्षेत्रों के निवासियों से अनुरोध है कि वे जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रगणकों को अपना पूरा सहयोग दें।

विकसित भारत अभियान के तहत 17 से 26 जून तक मनाया जाएगा ‘नशा मुक्त भारत सप्ताह’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत 17 से 26 जून तक देशभर में “नशा मुक्त भारत अभियान-विकसित भारत की पहचान” विषय के तहत ‘नशा मुक्त भारत सप्ताह’ का आयोजन करेगा। यह अभियान 26 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार का नोडल विभाग है। विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और जमीनी स्तर की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

‘नशा मुक्त भारत सप्ताह’ का वर्चुअल उद्घाटन 17 जून को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर NMM के लिए पर्सनल डैशबोर्ड तथा नशा मुक्त भारत अभियान पर आधारित एक लघु फिल्म का भी शुभारंभ किया जाएगा। इन पहलों का उद्देश्य नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करना, स्वयंसेवकों की सक्रियता बढ़ाना तथा नशे के खिलाफ जन-जागरूकता को और व्यापक बनाना है।

17 से 26 जून के दौरान देशभर में जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें सामूहिक शपथ अभियान, जागरूकता रैलियां, साइकिल रैलियां, युवाओं द्वारा संचालित अभियान, पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिताएं, निबंध प्रतियोगिताएं, वेबिनार, विशेषज्ञ संवाद, नुक्कड़ नाटक, लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा सोशल मीडिया जागरूकता अभियान शामिल हैं।

मंत्रालय ने बताया कि नशे की रोकथाम में स्वस्थ जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर “योग फॉर वेलनेस, से नो टू ड्रग्स” संदेश के साथ योग एवं ध्यान सत्र, स्वास्थ्य कार्यक्रम और समुदाय आधारित जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

आंध्र प्रदेश से होगी ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन’ की राष्ट्रीय शुरुआत: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ का राष्ट्रीय शुभारंभ 1 जुलाई को आंध्र प्रदेश से किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री विभिन्न फील्ड स्थलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत विकास योजना की जानकारी साझा की जाएगी तथा आंध्र प्रदेश द्वारा विकसित मॉडल पंचायतों और जीरो-वेस्ट ग्राम पंचायतों के सफल कार्यों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने राज्य में चल रहे ग्रामीण विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों को जियो-टैग किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों के सत्यापन के लिए फेस रिकॉग्निशन आधारित प्रणाली का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।

पवन कल्याण ने कहा कि राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा प्रत्येक पंचायत में मवेशियों के लिए पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे पशुपालकों को लाभ मिल रहा है।

उन्होंने VB-G RAM-G पहल के अंतर्गत आंध्र प्रदेश को 7,700 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड अंतरिम राशि उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय का आभार भी व्यक्त किया।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि आंध्र प्रदेश में VB-G RAM-G के तहत कॉफी बागान गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार तटीय क्षेत्रों में मॉडल पंचायतों के विकास की दिशा में भी विशेष प्रयास कर रही है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में मॉडल पंचायतों के विकास के लिए मंत्रालय हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने बताया कि ये पंचायतें ग्रामीण विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण बनेंगी।

बैठक के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों, जिन्हें ‘लखपति दीदी’ के नाम से जाना जाता है, के लिए वाहन खरीद संबंधी पहल को भी समर्थन देने की जानकारी दी गई। इसके लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले डॉ. मनसुख मांडविया मुंबई में फिट इंडिया साइक्लोथॉन का नेतृत्व करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश 21 जून को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के समारोहों की तैयारी में जुटा है, ऐसे में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया बुधवार की सुबह मुंबई के प्रतिष्ठित वर्ली साइकिल ट्रैक पर एक विशेष फिट इंडिया साइक्लोथॉन – साइक्लिंग बाय द सी का नेतृत्व करेंगे।

देशव्यापी फिट इंडिया अभियान के अंतर्गत भारतीय खेल प्राधिकरण का क्षेत्रीय केंद्र मुंबई, 17 जून को मुंबई के वर्ली कोस्टल साइकिल ट्रैक पर फिट इंडिया साइक्लोथॉन के इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है।

साइकिल यात्रा में मुंबई के सुरम्य समुद्र तट के मनोरम दृश्यों के बीच विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लगभग 250 साइकिल चालक डॉ. मनसुख मांडविया के साथ साइकिल चलाएंगे। यह आयोजन व्यापक ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ का हिस्सा है, जो सामुदायिक भागीदारी, साइकिलिंग, योग और अन्य शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से फिटनेस को जीवनशैली के रूप में बढ़ावा देता है।

डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू की गई इस साइकिलिंग पहल ने देश के 3 लाख से अधिक स्थानों पर 30 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल का आयोजन युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन और माय भारत के सहयोग से किया जाता है।

मुंबई में आयोजित होने वाला साइक्लोथॉन 21 जून को मनाए जाने वाले 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के वैश्विक समारोहों की शुरुआत के रूप में भी काम करता है, जिसमें 180 से अधिक देशों के लाखों लोग भाग लेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पिछले एक दशक में विश्व के सबसे बड़े स्वास्थ्य आंदोलनों में से एक बन गया है, जिसमें भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभिन्न महाद्वीपों के देश समग्र स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए एकजुट हो रहे हैं, ऐसे में फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल और योग दिवस जैसी पहलें वैश्विक समुदाय के लिए एक स्वस्थ, सक्रिय और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को और मजबूत कर रही हैं।

WHO की विशेषज्ञ बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व, हर्बल दवाओं के वैश्विक मानकों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया के विकास पर आयोजित 5वीं विशेषज्ञ बैठक में भारत ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। यह बैठक 16 से 18 जून तक हांगकांग एसएआर, चीन में आयोजित की जा रही है।

आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है। बैठक में विभिन्न देशों के विशेषज्ञ हर्बल औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

PCIM एंड एच के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह विशेषज्ञ सदस्य के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आयोग की तकनीकी टीम भी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल होकर अपने सुझाव और विशेषज्ञता साझा कर रही है।

बैठक के दौरान PCIM एंड एच द्वारा WHO के सहयोग से तैयार किए गए हर्बल मोनोग्राफ और अन्य तकनीकी दस्तावेजों को समीक्षा और चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। इन दस्तावेजों का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी औषधियों के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता के वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही इससे भारतीय आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को भी मजबूती मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया के निर्माण में भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि देश पारंपरिक और हर्बल चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के विकास में भारत के योगदान को भी मजबूत करती है।


हारिस रऊफ के साथ खेलेंगे अश्विन, अमेरिका की T20 लीग में इस टीम से हुआ करार

San Francisco Unicorns-Ravichandran Ashwin: भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अमेरिका की T20 लीग मेजर लीग क्रिकेट में खेलते दिखेंगे. इसके लिए उनका करार मेजर लीग क्रिकेट की टीम सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स के साथ हुआ है. बड़ी बात ये है कि सैन फ्रैंसिस्को की टीम से हारिस रऊफ का भी करार है. यानी कि अश्विन को उनके साथ मिलकर इस टीम के लिए जीत का जोर लगाना होगा.

हारिस रऊफ के साथ खेलेंगे अश्विन

हारिस रऊफ पहले से ही सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स का हिस्सा हैं. अश्विन को पाकिस्तान के हारिस रऊफ के साथ खेलना होगा. हारिस रऊफ के साथ सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स का करार शुरुआती सीजन यानी 2023 से ही है.

MLC के चौथे सीजन के लिए अश्विन का करार

2023 से शुरू हुए मेजर लीग क्रिकेट का इस बार चौथा सीजन होने जा रहा है, जिसके लिए सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स ने अश्विन के साथ करार किया है. चौथे सीजन की शुरुआत 19 जून से होने जा रही है. वहीं सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स इसमें अपना पहला मैच 20 जून को लॉस एंजिलिस नाइट राइडर्स के खिलाफ खेलेगी. अश्विन कब से MLC में अपनी टीम जॉइन करेंगे ये फिलहाल साफ नहीं है.

MLC में कैसा रहेगा अश्विन की टीम का शेड्यूल?

मेजर लीग क्रिकेट 6 टीमों के बीच का T20 टूर्नामेंट है. इसमें सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2024 में देखने को मिला था, जब वो रनर-अप रही थी. चौथे सीजन में सैन फ्रैंसिस्को यूनिकॉर्न्स के शेड्यूल की बात करें तो 20 जून को पहला मुकाबला खेलने के बाद ये टीम अगले दो मुकाबलों में बैक टू बैक टेक्सास सुपर किंग्स का सामना करेगी. ये मुकाबले 21 जून और 25 जून को खेले जाएंगे. 27 जून को सिएटल ओरकास से मुकाबला होगा जबकि 29 जून को सैन फ्रैंसिस्को की टीम वॉशिंगटन फ्रीडम का सामना करेगी.

5 जुलाई को फिर से सैन फ्रैंसिस्को का सामना वॉशिंगटन फ्रीडम से होगा. वहीं 6 जुलाई को ये MI न्यूयॉर्क की चुनौती का सामना करती दिखेगी. 9 जुलाई को फिर से MI न्यूयॉर्क से मुकाबला होगा. 11 जुलाई को लॉस एंजिलिस नाइट राइडर्स से मैच होगा. जबकि 12 जुलाई को आखिरी लीग मैच ये टीम सिएटल ओरकास के खिलाफ खेलेगी.

15 हजार दिल्लीवासियों ने मिलकर यमुना से निकाला 116.6 टन कचरा, 28 घाटों पर एक साथ चला सफाई अभियान

दिल्ली / सत्ता संदेश

यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से रविवार को चलाए गए ‘मां यमुना तट स्वच्छता अभियान’ में 15 हजार से अधिक नागरिकों, स्वयंसेवकों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। राजधानी के विभिन्न हिस्सों में यमुना तटों और घाटों पर हुए इस व्यापक अभियान के दौरान 116.6 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही लोगों ने यमुना को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प भी लिया।

सार्वजनिक स्थलों पर बड़े स्तर पर सफाई की गई। आवासीय कल्याण संघों, सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और स्थानीय नागरिकों ने श्रमदान कर न केवल सफाई अभियान में हिस्सा लिया, बल्कि लोगों को स्वच्छता और नदी संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया। 

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी अभियान की विशेषता रही।जल एवं सिंचाई मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सोमवार को कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की आस्था, संस्कृति और जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक यमुना की सफाई पर चर्चा होती रही, लेकिन अब इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।

दिल्ली में 22 जून से शुरु होगा मेगा पौधारोपण कार्यक्रम, 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में 22 जून से मेगा पौधरोपण अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने मंत्रिमंडल के साथ अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे जनभागीदारी आधारित हरित  अभियान बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भावना को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक संस्थाओं, आरडब्ल्यूए, स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों को इसमें शामिल किया जाएगा। अभियान से जुड़ने वालों को ‘पर्यावरण रक्षक’ का ई-प्रमाणपत्र दिया जाएगा। 

नागरिकों तक मुफ्त पौधे पहुंचाने के लिए वृक्ष रथ कॉलोनियों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर भेजे जाएंगे। दूसरे चरण में जुलाई के पहले सप्ताह में दिल्ली रिज क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में करीब 2.5 लाख पौधे लगाए जाएंगे। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह अभियान दिल्ली को अधिक हरित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।


ई-फॉरेस्ट ग्रीन ड्राइव पोर्टल से होगी अभियान की निगरानी : अभियान की निगरानी के लिए ई-फॉरेस्ट ग्रीन ड्राइव पोर्टल तैयार किया गया है। इसके माध्यम से नागरिक पौधरोपण के लिए पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और पौधों की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सकेंगे। सभी पौधों को डिजिटल हरित मानचित्र पर दर्ज किया जाएगा।

भारत इनोवेट्स 2026 : निवेशकों और स्टार्टअप के बीच सहभागिता पर हुई चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत इनोवेट्स 2026 के दूसरे दिन वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहन सहभागिता देखने को मिली और इसका ध्यान नवाचार को गति देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और डीपटेक समाधानों के व्यावसायीकरण को आगे बढ़ाने पर केंद्रित था।

भारत सरकार की एक पहल और शिक्षा मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित, भारत इनोवेट्स 2026 एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है जो भारत के तेजी से विस्तारित नवाचार इकोसिस्टम कोक वैश्विक पूंजी, उद्योग विशेषज्ञता, अनुसंधान नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। 

दिन की शुरुआत इनोवेशन शोकेस के साथ हुई, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, गतिशीलता, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप और प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया गया।

मुख्य भाषण देते हुए, एशियन पेंट्स लिमिटेड के सह-प्रवर्तक और एंजेल निवेशक श्री जलज दानी ने वैज्ञानिक नवाचार को बाजार की मांग, औद्योगिक साझेदारी और दीर्घकालिक संस्था निर्माण के साथ संरेखित करने के महत्व पर जोर दिया।

पैनल चर्चाओं में उद्योग, निवेश और अनुसंधान जगत की प्रमुख वैश्विक हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें इंस्टीट्यूट पाश्चर के प्रोफेसर चेतन चिटनिस; सैफरान रिओस्क की सीईओ सुश्री ऑरेली गिरौ; थेल्स एलेनिया स्पेस के श्री बर्ट्रेंड डेनिस; जीआईएफएएस के सीईओ श्री फ्रेडरिक पैरिसोट; सोनी इनोवेशन फंड की सुश्री योको फुकाटा और मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप के श्री सुनील बख्शी शामिल थे। चर्चाओं में जैव-नवाचार, उन्नत विनिर्माण, अंतरिक्ष, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक निवेश जैसे विषयों को शामिल किया गया, जिसमें धैर्यवान पूंजी, अंतरराष्ट्रीय सह-विकास और अनुसंधान से वाणिज्यिक स्तर तक मजबूत पहुंच के मार्गों पर जोर दिया गया।

दूसरे दिन का एक प्रमुख हिस्सा व्यापक निवेशक-स्टार्टअप सहभागिता कार्यक्रम था। भारत इनोवेट्स के 80 से अधिक डीपटेक स्टार्टअप्स ने छह विषयगत पिच रूम (प्रस्‍तुति‍करण सत्रों) में 10 से अधिक देशों के 50 से अधिक वैश्विक निवेशकों के पैनल के सामने अपने नवाचारों को प्रस्तुत किया: अंतरिक्ष और रक्षा; कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर्स; स्वास्थ्य सेवा और मेडटेक; जैव प्रौद्योगिकी और कृषि प्रौद्योगिकी; ऊर्जा और जलवायु प्रौद्योगिकी; और उन्नत विनिर्माण। पिचिंग (प्रस्‍तुतिकरण) सत्रों ने वैश्विक वेंचर फंडों और कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल शाखाओं के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद की। 40 से अधिक स्टार्टअप्स को निवेशकों से आगे की प्रतिबद्धता की पुष्टि मिली, जिससे मजबूत डील-फ्लो (निवेश अवसरों का सृजन) और निवेश में रुचि पैदा हुई।

शिखर सम्मेलन में पहले दिन घोषित लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया।

दूसरे दिन के समापन तक, भारत इनोवेट्स 2026 ने निम्नलिखित कार्य सुगम बनाए हैं:

  • भारत इनोवेट्स के नवप्रवर्तकों के साथ 1,350 से अधिक बी2बी बैठकें आयोजित की गईं
  • 50 से अधिक सहयोग समझौते
  • 10 से अधिक देशों के 50 से अधिक वैश्विक निवेशकों के समक्ष 80 से अधिक स्टार्टअप प्रस्तुतियां
  • 40 से अधिक स्टार्टअप्स को निवेशकों से आगे की बातचीत के लिए पुष्टि प्राप्त हुई है
  • भारत इनोवेट्स इनोवेटर्स से संबंधित लगभग 254.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग प्रतिबद्धताओं और उन्नत चरण के निवेशों की घोषणा की गई

निवेशकों के साथ लक्षित जुड़ाव, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और सीमा पार सहयोग मंचों के माध्यम से, भारत इनोवेट्स 2026 ने डीपटेक नवाचार के लिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत किया है, साथ ही भारत, यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच सहयोग के नए रास्ते भी बनाए हैं।

दूसरे दिन आयोजित गतिविधियों के पैमाने और सार ने वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारी, डीपटेक निवेश और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में भारत इनोवेट्स 2026 को और मजबूत किया।

शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन प्रौद्योगिकी पार्कों और एक्सेलरेटरों, जलवायु प्रौद्योगिकियों, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, वैश्विक विस्तार रणनीतियों और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनका उद्देश्य इस आयोजन के दौरान स्थापित नवाचार संबंधों को बनाए रखना है।

गांवों में बिना लाइसेंस खांसी की सिरप की बिक्री पर रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने वापस ली छूट

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने खांसी की दवाइयों की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री पर दी गई विशेष छूट को वापस ले लिया है। इस संबंध में मंत्रालय ने 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी, जिसे 30 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

पहले औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘के’ के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए कुछ लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई थी। अब संशोधन के तहत “सीरप” शब्द को हटाए जाने के बाद यह छूट समाप्त हो गई है।

इस फैसले के बाद छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के माध्यम से ही किया जा सकेगा। बिना लाइसेंस के खांसी की सिरप बेचने की अनुमति नहीं होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह कदम दवाइयों के निर्माण, वितरण और बिक्री पर नियामक निगरानी को मजबूत करने तथा जन स्वास्थ्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खांसी की दवाइयों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और पूरे देश में दवा बिक्री संबंधी नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के सभी लाइसेंसिंग और नियामक प्रावधानों का सख्ती से पालन करें।

इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने खांसी की दवाइयों की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री पर दी गई विशेष छूट को वापस ले लिया है। इस संबंध में मंत्रालय ने 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी, जिसे 30 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

पहले औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘के’ के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए कुछ लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई थी। अब संशोधन के तहत “सीरप” शब्द को हटाए जाने के बाद यह छूट समाप्त हो गई है।

इस फैसले के बाद छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के माध्यम से ही किया जा सकेगा। बिना लाइसेंस के खांसी की सिरप बेचने की अनुमति नहीं होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह कदम दवाइयों के निर्माण, वितरण और बिक्री पर नियामक निगरानी को मजबूत करने तथा जन स्वास्थ्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खांसी की दवाइयों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और पूरे देश में दवा बिक्री संबंधी नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के सभी लाइसेंसिंग और नियामक प्रावधानों का सख्ती से पालन करें।

इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।