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अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ द्वारा DC कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन; CM का पुतला फूंका

लुधियाना / सत्ता संदेश

अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ ने विवादित वायरल वीडियो मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग करते हुए, राज्यभर में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला के तहत आज लुधियाना में जिला माल अधिकारी को पंजाब के राज्यपाल के नाम एक मांग-पत्र सौंपा। डिप्टी कमिश्नर की अनुपस्थिति में यह मांग-पत्र जिला माल अधिकारी को दिया गया। इससे पहले अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के कार्यकर्ताओं ने डीसी कार्यालय तक रोष मार्च निकाला और मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूंकने से पहले उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं राजीव कुमार लवली, जत्थेदार जसवंत सिंह चीमा और संदीप सिंह रुपालों ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है, जो सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं, पंजाब के लोगों के विश्वास और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से संबंधित एक विवादित वायरल वीडियो सामने आया था, जिसमें उन पर सिख धर्म के गुरु साहिबानों तथा 20वीं सदी के प्रमुख सिख नेता संत जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले के धार्मिक प्रतीकों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे थे।

उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए, श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। उस समय मुख्यमंत्री ने वीडियो को पूरी तरह फर्जी और एआई के माध्यम से तैयार किया गया बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था। लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों पर करवाई गई विभिन्न फोरेंसिक जांचों की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच रिपोर्टों में वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग, टैंपरिंग, डीपफेक तकनीक या एआई के जरिए छेड़छाड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला और वीडियो को वास्तविक पाया गया। इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने एक हुक्मनामा जारी करते हुए कहा कि कोई सिख भगवंत मान से मेलजोल न रखे और उन्हें धार्मिक रूप से बहिष्कृत माना जाए।

पार्टी नेताओं ने कहा कि अब यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा पंजाब के लोगों और सिख समुदाय के सामने किए गए दावों की सत्यता से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में गुरु साहिबानों, भक्तों, शहीदों और संत-महापुरुषों का सम्मान केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सिख जीवन का मूल सिद्धांत है। ऐसे मामलों में उठने वाले आरोप और संदेह पूरे सिख समुदाय की भावनाओं को गहराई से प्रभावित करते हैं।

उन्होंने कहा कि कानून और न्याय के सिद्धांत यह मांग करते हैं कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हो, जांच और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकता। नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग करते हुए यह भी कहा कि उनकी सरकार द्वारा पहले बनाए गए बेअदबी संबंधी कानूनों के तहत उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

जिला लुधियाना की पांच सदस्यीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य कुलविंदर सिंह चंदी, अजीत सिंह बल्ल और हरभजन सिंह इयाली सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं तथा महिला विंग की राष्ट्रीय महासचिव साजिया परवीन ने कहा कि यह स्थिति समूचे सिख समुदाय, नानक नाम लेवा संगतों और आम लोगों के लिए गहरी पीड़ा और चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात पंजाब के लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और कमजोर कर सकता है।

उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए तथा इसकी जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से करवाई जाए। साथ ही जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक आधार पर पद से इस्तीफा लेने की मांग भी की गई, ताकि जांच किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो सके। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए और पंजाब के लोगों को उनके सवालों के जवाब मिलने चाहिए।

यह विरोध प्रदर्शन जत्थेदार जसवंत सिंह चीमा, राजीव कुमार लवली और संदीप सिंह रुपालों के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें एडवोकेट इंदरजीत सिंह, महिला विंग की संयुक्त सचिव बीबी हरप्रीत कौर अकालगढ़, कुलविंदर सिंह चंदी, हरभजन सिंह इयाली, मलकीत सिंह बल्ल, शमशेर सिंह लाडोवाल, भोला सिंह मंगली, बलविंदर सिंह भिंदा, तलविंदर सिंह माछिया, गोपी कनेजा, कुलदीप सिंह मंगली, कुलदीप सिंह तलवंडी, तेजिंदरपाल सिंह तेजी, जगतार सिंह हंबड़ा, परमजीत सिंह हंबड़ा, लखविंदर सिंह हंबड़ा, हरजीत सिंह बाबा रायकोट, महिबूब स्टूडियो वाले, जसपाल सिंह जस सिद्धवां, चौधरी अवतार सिंह लड्डू जगराओं, सुखविंदर सिंह खालसा राऊवाल, जसवीर सिंह जस्सी जगराओं, जसप्रीत सिंह जस्सी ढिल्लो, पूर्व सरपंच बलदेव सिंह सलेमपुरा टिब्बा, मनजीत सिंह मंड बंगसीपुरा, जरनैल सिंह कुरशैदपुरा, जगदीश सिंह गगड़ा, रणजीत सिंह सोनू, गुरदीप कौर, हरप्रीत कौर, गुरप्रीत सिंह काउंके, खालसा बोहड़ सिंह काउंके, शमशेर सिंह खालसा जगराओं, रणजोध सिंह खालसा, जसवीर सिंह खालसा, इंदरजीत सिंह खालसा सहित अनेक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री खाद्यान्न भंडारण के लिए स्मार्ट वेयरहाउसिंह सिस्टम का करेंगे शुभारंभ

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग बुधवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम स्थित लीडर्स लाउंज में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में खाद्यान्न भंडारण के लिए स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम का शुभारंभ करेगा।

इस कार्यक्रम के दौरान, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, डिपो दर्पण मूल्यांकन ढांचे के तहत पहचाने गए केंद्रीय भंडारण निगम और भारतीय खाद्य निगम के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले गोदामों को सम्मानित करेगा।

यह पहल आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और कुशल सार्वजनिक भंडारण अवसंरचना के माध्यम से भारत की खाद्य सुरक्षा संरचना को मजबूत करने पर सरकार के निरंतर जोर को दर्शाती है। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम को गोदाम प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करने और खाद्यान्न भंडारण कार्यों में दक्षता बढ़ाने के लिए एक एकीकृत प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान के रूप में पेश किया जा रहा है।

यह प्रणाली गोदाम संचालन को बेहतर बनाने और शासन तंत्र को मजबूत करने के लिए एआई, आईओटी, स्वचालन और विश्लेषण सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों को शामिल करेगी। प्रस्तावित प्रणाली गेट और वेइंगब्रिज संचालन के स्वचालन, डिजिटल एक्सेस प्रबंधन, गोदाम की स्थिति की बुद्धिमानीपूर्ण निगरानी, ​​बेहतर इन्वेंट्री दृश्यता और एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से तत्‍क्षण परिचालन निरीक्षण का भी समर्थन करेगी। यह पहल खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल परिवर्तन और आधुनिकीकरण पर केंद्रित विभाग के व्यापक सुधार एजेंडा पर आधारित है। हाल के वर्षों में, खरीद, भंडारण और वितरण प्रणालियों में पारदर्शिता, परिचालन दक्षता और सेवा वितरण में सुधार के लिए कई पहलें की गई हैं।

इस कार्यक्रम के तहत उन गोदामों को भी मान्यता दी जाएगी जिन्होंने डिपो दर्पण के तहत उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। डिपो दर्पण एक संरचित मूल्यांकन और प्रदर्शन-निगरानी ढांचा है जिसे बुनियादी ढांचे, संचालन, सुरक्षा, स्वच्छता और सेवा तत्परता में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया है।

स्मार्ट वेयरहाउसिंग पहल से एक आधुनिक वेयरहाउसिंग प्रणाली के निर्माण में योगदान मिलने की उम्मीद है, जो कुशल खाद्यान्न प्रबंधन में सहायक होगी और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा लक्ष्यों को मजबूत करेगी। यह पहल डिजिटल इंडिया, इंडिया एआई मिशन, पीएम गतिशक्ति और आत्मनिर्भर भारत के तहत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

पीएम-वीबीआरवाई के तहत 2400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितिरित करेंगे पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 19 जून को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत लगभग 2400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे।

यह राशि वितरण PM_VBRY के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। PM_VBRY भारत सरकार की प्रमुख रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन में तेजी लाना, रोजगार को औपचारिक बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सभी सेक्‍टरों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से देश भर में पहले ही 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं।

PM_VBRY योजना का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे उन्हें कार्यबल में शामिल होने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है, जिससे सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है।

यह योजना रोजगार-आधारित विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लाभ उसके युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण औपचारिक रोजगार के अवसरों में परिवर्तित हों।

PM_VBRY 1 अगस्त 2025 से प्रभावी हुई। 99,446 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करेंगे। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की सहायता करने के जरिये, यह योजना औपचारिक रोजगार के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस: भारत ने 2030 के लक्ष्य से पहले 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाल की

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 2026 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत ने भूमि बहाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। उन्होंने कहा कि नीतिगत प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से पर्यावरण बहाली को सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है।

हर वर्ष 17 जून को मनाया जाने वाला विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस, मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि भारत ने बॉन चैलेंज के तहत वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षतिग्रस्त एवं वनों की कटाई से प्रभावित भूमि को बहाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें से अब तक 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाली प्रयासों के दायरे में लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और सतत भूमि प्रबंधन की दिशा में निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के तहत पुनर्स्थापन गतिविधियों से लगभग 1.22 बिलियन व्यक्ति-दिवस रोजगार का सृजन भी हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलसंभर विकास घटक के अंतर्गत 27 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपचार किया जा चुका है और 61.3 मिलियन से अधिक भू-टैग प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन परिसंपत्तियां विकसित की गई हैं।

मंत्री ने बताया कि ग्रीन इंडिया मिशन के तहत लगभग 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरित एवं पुनर्स्थापन गतिविधियां संचालित की गई हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में सीएएमपीए समर्थित कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम वर्तमान में 81.53 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जो विश्व की सबसे बड़ी सामुदायिक वन प्रबंधन प्रणालियों में से एक है। इसके अतिरिक्त 1.21 लाख हेक्टेयर भूमि को कृषि वानिकी के अंतर्गत लाया गया है तथा लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों के बाहर बांस के वृक्षारोपण किए गए हैं।

श्री यादव ने बताया कि अरावली ग्रीन वॉल पहल एक महत्वपूर्ण भूदृश्य-स्तरीय पुनर्स्थापन कार्यक्रम के रूप में उभरी है और वित्त वर्ष 2025-26 में अपने वार्षिक लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, मिष्टी कार्यक्रम के तहत वर्ष 2028 तक 54 हजार हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र के पुनर्स्थापन का लक्ष्य रखा गया है।

इस वर्ष विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस की थीम “चारागाह: पहचानें, सम्मान करें, पुनर्स्थापित करें” रखी गई है। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि चारागाह और घास के मैदान जैव विविधता संरक्षण, पशुधन आधारित आजीविका, कार्बन पृथक्करण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत की शुष्क भूमि लगभग 228 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जबकि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 29.77 प्रतिशत हिस्सा, यानी 97.85 मिलियन हेक्टेयर भूमि, भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण से प्रभावित है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने इंडियन फॉरेस्टर के विशेष अंक और बॉन चैलेंज (2011-2020) पर भारत की दूसरी प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया। रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए भूमि बहाली प्रयासों, उनके सामाजिक-आर्थिक लाभों तथा पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण में उनकी भूमिका का विस्तृत विवरण दिया गया है।

इस अवसर पर वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, पर्यावरण मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव डॉ. एंजेला लुसिगी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में केंद्र एवं राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज संगठनों के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का समापन मरुस्थलीकरण की चुनौती से निपटने, भूमि बहाली को गति देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित एवं टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।

रेलवे ने गुजरात में 493 करोड़ की आदिपुर-भुज दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी दी

दिल्ली / सत्ता संदेश

गुजरात में रेलवे के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और क्षमता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, भारतीय रेलवे ने पश्चिमी रेलवे के आदिपुर-भुज खंड (49 किमी) के दोहरीकरण को 493 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी है।

भारतीय रेलवे के मौजूदा दोहरीकरण, तिहरीकरण और अन्य नेटवर्क सुधार कार्यों के माध्यम से क्षमता वृद्धि कार्यक्रम के तहत यह परियोजना स्वीकृत की गई है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस खंड के दोहरीकरण से कच्छ क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत होगा और यात्री एवं माल ढुलाई दोनों में अपेक्षित वृद्धि को समर्थन मिलेगा।

बढ़ते यातायात गलियारे पर क्षमता वृद्धि

गांधीधाम-नालिया कॉरिडोर पर स्थित आदिपुर-भुज खंड में क्षेत्र में पहले से ही चल रही कई रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं के कारण यातायात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो वर्तमान में एक सिंगल-लाइन रूट है। इनमें भुज-नालिया गेज रूपांतरण, नालिया-वायोर लाइन का विस्तार और नालिया-जाखौ, वायोर-लखपत और देशालपार-लूना को जोड़ने वाली नई रेलवे लाइनें शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ, भुज-आदिपुर खंड से यात्री और माल ढुलाई में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। इसलिए पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और भविष्य की यातायात मांग को पूरा करने के लिए दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी दी गई है।

यात्री और माल ढुलाई संचालन में सुधार

इस परियोजना से प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो अतिरिक्त यात्री ट्रेन सेवाओं के संचालन में सुविधा होने की उम्मीद है, जिससे पूरे क्षेत्र में यात्रियों के लिए यात्रा की सुविधा और कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

दोहरी लाइन से प्रति वर्ष अतिरिक्त 12 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई यातायात को भी समर्थन मिलेगा, जिससे पश्चिमी गुजरात में रसद और औद्योगिक संपर्क मजबूत होगा।

भविष्य के विकास और परिचालन दक्षता को समर्थन

इस खंड की वर्तमान क्षमता का उपयोग 2029-30 तक बढ़कर 123 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो समय रहते क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है। दोहरीकरण कार्य से मार्ग पर भीड़ कम होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं दूर होंगी और रेल परिचालन की विश्वसनीयता में सुधार होगा। इस परियोजना से यात्रियों और माल ढुलाई में वृद्धि होने से भारतीय रेलवे के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होने की भी उम्मीद है, साथ ही कच्छ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस परियोजना की मंजूरी के साथ, भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे के निर्माण, कनेक्टिविटी में सुधार और बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखता है।

कोयला मंत्रालय 18 जून को कोल गैसीकरण परियोजनाओं पर तीसरा रोडशो आयोजित करेगा

कोयला मंत्रालय 18 जून, 2026 को मुंबई में सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर तीसरा रोडशो का आयोजन करने जा रहा है। इससे हितधारकों की सहभागिता और बढ़ेगी एवं भारत के कोयला गैसीकरण अभियान में उद्योग की भागीदारी में तेजी आएगी। नई दिल्ली और हैदराबाद में आयोजित पिछले रोडशो को मिली उत्साहजनक सराहना के बाद मुंबई रोडशो में प्रमुख उद्योग हितधारकों, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, नीति निर्माताओं, कोयला क्षेत्र के प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकार के अधिकारियों के एक साथ आने की उम्मीद है ताकि कोयला गैसीकरण के उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके और कोयला संसाधनों के स्वच्छ और अधिक टिकाऊ उपयोग के राष्ट्र के दृष्टिकोण का समर्थन किया जा सके।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस विशेष अतिथि, जबकि कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे विशिष्ट अतिथि होंगे। कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त, अपर सचिव श्री सनोज कुमार झा और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित महत्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता कम करने, घरेलू कोयला संसाधनों में मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने और संबंधित उद्योगों के विकास में सहयोग देने की रणनीति में कोयला गैसीकरण एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। कोयले को संश्लेषण गैस (सिन्गैस) में परिवर्तित करके, कोयला गैसीकरण मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और अन्य रासायनिक कच्चे माल सहित कई मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन को सुगम बनाता है, जिससे औद्योगिक विकास और आयात प्रतिस्थापन के नए रास्ते खुलते हैं।

सरकार ने कोयला गैसीकरण की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 46,000 करोड़ रुपए की एक पहल को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं की स्थापना में तेजी लाना, रणनीतिक औद्योगिक और रासायनिक उत्पादों के उत्पादन के लिए घरेलू कोयले के उपयोग को प्रोत्साहित करना, प्राकृतिक गैस, मेथनॉल, अमोनिया और अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल पर आयात निर्भरता को कम करना और औद्योगिक विकास एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

मंत्रालय ने व्यापक स्तर पर हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने और कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाने के प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) को सार्वजनिक डोमेन में रखा है और हितधारकों से टिप्पणियां तथा सुझाव आमंत्रित किए हैं।

यह रोडशो भारत के विशाल कोयला संसाधनों को औद्योगिक नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में परिवर्तित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। मंत्रालय साझेदारी को बढ़ावा देकर निवेश को प्रोत्साहित करके और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सक्षम बनाकर  एक मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्‍टम का मार्ग प्रशस्त कर रहा है जो आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण की दिशा में राष्ट्र की यात्रा का समर्थन करेगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ पहुंचा रक्षा उत्पादन का रिकॉर्ड

नई दिल्ली / सत्ता संदेश


वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 1.54 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है और वित्त वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये के आंकड़े से 110 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के 43,746 करोड़ रुपये से लगभग चार गुना बढ़कर इस स्तर पर पहुंचा है।


रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का कुल उत्पादन में लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा रहा, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 22 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र का हिस्सा लगभग 42,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह रक्षा इकोसिस्टम में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में हुई वृद्धि ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार के बढ़ते प्रयासों को दर्शाती है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक पोस्ट में, भारत के रक्षा उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व को दिया और इस उपलब्धि के लिए रक्षा उत्पादन विभाग और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि निरंतर नीतिगत समर्थन, कई नई पहलों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात क्षमताओं में वृद्धि के साथ, रक्षा उत्पादन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और भी तेजी से विकास करने के लिए तैयार है।

भारत-थाईलैंड रक्षा सहयोग को मिला नया बल, विनिर्माण और नवाचार पर सहमति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

थाईलैंड और भारत के बीच 10वां रक्षा सम्मेलन 16 जून को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा उप स्थायी सचिव एडमिरल नट्टापोल डिएववानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।


दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रहे सुरक्षा परिवेश पर चर्चा के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को मजबूत करने के महत्व को दोहराया। प्रतिनिधिमंडलों ने पिछली वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा में वर्तमान में जारी सैन्य समन्वय, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग और पारस्परिक हित के अन्य क्षेत्रों को शामिल किया गया।


इस संवाद में दोनों देशों के बीच जारी रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने रक्षा तंत्रों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता विकास में सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की।


प्रतिनिधिमंडलों ने दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा ढांचों के अंतर्गत सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने और संवाद एवं सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

नाभा की बाहरी कॉलोनियों में फूटा लोगों का गुस्सा, AAP सरकार और MLA देव मान पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप

नाभा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : चेतन मेहता

सीवरेज, सड़क और पीने के पानी की मांग को लेकर बड़ी सभा, ढाई करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच की उठी मांग

नाभा की बाहरी कॉलोनियों के लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान लोगों ने एक बड़ी सभा कर आम आदमी पार्टी सरकार और नाभा के विधायक देव मान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोगों का आरोप है कि चुनाव से पहले कॉलोनियों को नगर परिषद में शामिल करने और विकास कार्य करवाने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जीत के बाद उनकी कोई सुध नहीं ली गई।

सभा में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन जस्सी सोहियांवाला भी पहुंचे, जहां लोगों ने उनके सामने सीवरेज, पक्की सड़कों और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई। इतना ही नहीं, लोगों ने पिछली सरकार के समय कॉलोनियों में विकास कार्यों के नाम पर पास हुए करीब ढाई करोड़ रुपये के खर्च की जांच की भी मांग की। वहीं जस्सी सोहियांवाला ने लोगों की समस्याओं के जल्द समाधान और कथित घोटाले की जांच का भरोसा दिया।

सुल्तानपुर लोधी रोड पर स्विफ्ट कार और रेहड़ी की टक्कर, दो गंभीर घायल

कपूरथला: सुल्तानपुर लोधी रोड स्थित आरसीएफ जगदंबे पेट्रोल पंप के नजदीक सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार स्विफ्ट कार और रेहड़ी की टक्कर में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।

छल्लियां बेचकर घर लौट रहे थे दोनों

सिविल अस्पताल में उपचाराधीन शंभू पुत्र राम सेवक निवासी पंजाबी बाग, मंसूरवाल दोना ने बताया कि वह अपने भतीजे नितेश पुत्र नवल माथो के साथ आरसीएफ क्षेत्र में छल्लियां बेचकर रेहड़ी पर घर लौट रहे थे। देर रात जब वे जगदंबे पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार स्विफ्ट कार ने उनकी रेहड़ी को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण कि दोनों हुए गंभीर घायल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि रेहड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उस पर सवार शंभू व नितेश सड़क पर जा गिरे। हादसे में दोनों को गंभीर चोटें आईं।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची SSF टीम

घटना की जानकारी मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स के एएसआई हरप्रीत सिंह, कांस्टेबल लवप्रीत सिंह और दीपक बाबू तुरंत मौके पर पहुंचे। एएसआई हरप्रीत सिंह ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त स्विफ्ट कार घटनास्थल पर पलटी हुई अवस्था में मिली, लेकिन कार में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था।

सिविल अस्पताल में चल रहा उपचार

SSF टीम ने प्राथमिक सहायता प्रदान करने के बाद दोनों घायलों को सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. युगता की देखरेख में उनका इलाज जारी है।

पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे की सूचना संबंधित थाना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कार चालक की तलाश में जुटी हुई है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को दुर्घटना का संभावित कारण माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।