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खेल मंत्रालय ने NSDF के तहत राष्ट्रीय खेल डिजिटल इकोसिस्टम के लिए NSF में IT सलाहकार तैनात करने की योजना बनाई

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत की खेल प्रशासनिक संरचना को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों की कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युवा कार्य और खेल मंत्रालय तथा भारतीय खेल प्राधिकरण राष्ट्रीय खेल डिजिटल इकोसिस्टम की व्यापक रूपरेखा के अंतर्गत एनएसएफ आईटी सलाहकारों की तैनाती की योजना बना रहे हैं।

इस तरह की पहली पहल के बारे में बताते हुए केन्‍द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डा. मनसुख मांडविया ने कहा, “यह पहल महासंघ-विशिष्ट डिजिटल प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने तथा प्रतियोगिताओं, राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों, खिलाड़ियों की भागीदारी, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और रियल-टाइम समन्वय की अधिक प्रभावी योजना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और दीर्घकालिक ओलंपिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत खेल इकोसिस्‍टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

पिछले कुछ वर्षों में एमवाईएएस और एसएआई ने वार्षिक नवीनीकरण पोर्टल, वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर, गेम्स मैनेजमेंट सिस्टम, स्पोर्ट्स फॉर वीमेन पोर्टल, नेशनल स्पोर्ट्स रिपॉजिटरी सिस्टम तथा आगामी डिजिलॉकर एकीकरण जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से एनएसएफ के साथ कई महत्वपूर्ण परिचालन प्रक्रियाओं का क्रमिक डिजिटलीकरण किया है। इन प्रणालियों ने खेल इकोसिस्‍टम में पारदर्शिता, जवाबदेही, खिलाड़ियों की ट्रैकिंग, फंड मॉनिटरिंग तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय सुधार किया है।

जैसे-जैसे महासंघ वार्षिक मान्यता एवं अनुपालन, प्रतियोगिता कैलेंडर प्रबंधन, खिलाड़ियों और कोचों की मैपिंग, खेल नामांकन, परिणाम अपलोड, वित्तीय दस्तावेज़ीकरण तथा डिजिलॉकर-आधारित प्रमाणन सहित विभिन्न डिजिटल कार्यप्रवाहों के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे महासंघ स्तर पर समर्पित डिजिटल समन्वय सहायता की आवश्यकता भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रशिक्षित एनएसएफ आईटी सलाहकारों को महासंघ-सहायता संसाधन के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो एनएसडीई ढाँचे के अंतर्गत डिजिटल प्रणालियों के सुचारु ऑनबोर्डिंग, संचालन और समन्वय में राष्ट्रीय खेल महासंघों की सहायता करेंगे।

आईटी सलाहकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को एसीटीसी कैलेंडर और प्रस्ताव तैयार करने, गेम्स मैनेजमेंट सिस्टम पर खिलाड़ियों और अधिकारियों के नामांकन, वार्षिक नवीनीकरण प्रस्तुत करने, डिजिलॉकर एकीकरण हेतु टूर्नामेंट परिणाम अपलोड करने, एनएसआरएस प्रोफ़ाइल सत्यापन, रिपोर्टिंग एवं रिकॉर्ड प्रबंधन तथा भारतीय खेल प्राधिकरण और युवा कार्य और खेल मंत्रालय के साथ डिजिटल समन्वय जैसे कार्यों में सहयोग प्रदान करेंगे।

इस पहल से प्रतियोगिताओं में भागीदारी की योजना और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर प्रबंधन की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे खिलाड़ियों के डेटा, कार्यक्रम, नामांकन और अनुमोदन समयबद्ध तथा एकीकृत तरीके से संसाधित किए जा सकेंगे। इसके अलावा, यह पहल परिचालन समन्वय में मौजूद कमियों को कम करने, डेटा की गुणवत्ता को मजबूत करने, समयसीमा के पालन में सुधार लाने तथा महासंघों को खिलाड़ियों के विकास और खेल उत्कृष्टता पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केन्‍द्रित करने में सहायता करेगी।

एनएसएफ आईटी सलाहकार ढाँचा भारत की खेल प्रशासन प्रणाली के विकास के अगले चरण का प्रतीक है, जो अलग-अलग डिजिटलीकरण प्रयासों से आगे बढ़कर एक एकीकृत, खिलाड़ी-केन्‍द्रित और महासंघ-सक्षम डिजिटल सहायता संरचना की ओर अग्रसर है।

जैसे-जैसे भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों को तेज कर रहा है और अपने घरेलू मैदान पर रिकॉर्ड पदक जीतने का लक्ष्य बना रहा है, वैसे-वैसे डिजिटल प्रशासन प्रणालियों को मजबूत करना खिलाड़ियों के प्रबंधन, प्रतियोगिता तैयारी, प्रदर्शन निगरानी तथा खेल इकोसिस्‍टम में संस्थागत समन्वय सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एनएसडीई, एनएसआरएस, महासंघ सहायता प्रणालियों और एनएसएफ आईटी सलाहकारों के संयुक्त ढाँचे के माध्यम से सरकार का उद्देश्य एक निर्बाध, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम खेल इकोसिस्‍टम का निर्माण करना है, जो अधिक पारदर्शिता, मजबूत खेल राष्ट्र और विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप हो।

राष्ट्रमंडल खेल दिवस 24 मई को, अहमदाबाद में होगा मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देशभर में 24 मई को राष्ट्रमंडल खेल दिवस उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष का मुख्य आयोजन गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा, जिसे वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के संभावित मेजबान शहर के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस अवसर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं, जागरूकता कार्यक्रमों और खिलाड़ियों को सम्मानित करने जैसे आयोजन किए जाएंगे। खेल मंत्रालय और संबंधित खेल संगठनों की ओर से युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है।

अहमदाबाद में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख खिलाड़ी, खेल प्रशासक और गणमान्य हस्तियां शामिल हो सकती हैं। आयोजन के दौरान खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और भारत की खेल मेजबानी क्षमता को प्रदर्शित करने पर भी जोर रहेगा।

राष्ट्रमंडल खेल दिवस हर वर्ष खेल भावना, एकता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संदेश के साथ मनाया जाता है। इस बार अहमदाबाद में मुख्य आयोजन होने से शहर को वैश्विक खेल मंच पर अपनी तैयारियां दिखाने का अवसर मिलेगा।

चिंतन शिविर: साझा दृष्टिकोण के ज़रिए भारत में खेलों के भविष्य को दिशा देना

श्री पुलेला गोपीचंद


दो चिंतन शिविरों का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त करने के बाद, मैं भरोसे के साथ कह
​​सकता हूँ कि यह आज भारतीय खेल जगत की सबसे सामयिक और असरदार पहलों में से
एक है। हम अपने राष्ट्र की खेल यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, एक ऐसा मोड़ जहाँ इरादा,
निवेश और प्रेरणा अभूतपूर्व रूप से एक साथ मिल रहे हैं।
पिछले एक दशक में, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत में खेल हाशिये से मुख्यधारा में आ गया
है। इसके महत्व के प्रति भी साफ तौर पर राष्ट्रीय जागरूकता देखी जा सकती है, न केवल एक
प्रतिस्पर्धी गतिविधि के रूप में, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव के साधन के रूप
में भी। आज, हम एक विशाल और विविध तंत्र देख रहे हैं, जहां राज्य सरकारें, गैर-सरकारी
संगठन, निगम, संघ और ज़मीनी स्तर के संस्थान सभी मिलकर खेलों के विकास में सक्रिय रूप
से योगदान दे रहे हैं।
चिंतन शिविर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाता
है। खेल अपने आप में कई क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जिनमें विनिर्माण, मनोरंजन, फिटनेस, मीडिया
और शिक्षा शामिल हैं। यह शिविर इन सभी क्षेत्रों को एक साथ लाने में मदद करता है, जिससे
एक साझा दृष्टिकोण बनता है, जो दीर्घकालिक सफलता के लिए बेहद ज़रुरी है। यह देश के
सामूहिक दृष्टिकोण को सामने लाता है और साथ ही विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को
प्रदर्शित करता है, जिससे अनुकरण और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलता है।
चिंतन शिविर महज एक सम्मेलन से कहीं बढ़कर, एक शिक्षण तंत्र है। यह इसमें शामिल होने
वाले लोगों को विचारों का आदान-प्रदान करने, चुनौतियों को समझने और मिलकर समाधान
विकसित करने का अवसर देता है। यह एक शक्तिशाली प्रेरक के रूप में भी काम करता है,

सफलता की तमाम कहानियों को सामने लाता है और इस विचार को और पुख्ता करता है कि
भारत में खेल महज़ विशिष्ट पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भागीदारी, समावेशिता
और राष्ट्र निर्माण भी शामिल है।
फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन और साइक्लिंग
प्रतियोगिताओं जैसी सामुदायिक गतिविधियों ने खेल के प्रति हमारे नज़रिए को नया रूप दिया
है। आज के वक्त में जोर “सभी के लिए खेल” के साथ-साथ, उच्चतम स्तर पर उत्कृष्टता पर
है। पदक जीतने की आकांक्षाएं और व्यापक भागीदारी अब अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं, बल्कि वे
एक ही प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
श्रीनगर में शिविर का आयोजन करने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस शहर की शांत
सुंदरता न केवल खेलों की विचारधारा के लिए एक मनोरम पृष्ठभूमि प्रदान करती है, बल्कि शांत
चिंतन का भाव भी देती है, जो सार्थक संवाद के लिए बेहद ज़रुरी है।
इस चिंतन शिविर का एक अहम केंद्र बिंदु श्रीनगर खेल संकल्प को अपनाना था। यह संकल्प
महज़ एक आशय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह एक एकीकृत ढांचा है, जो भारतीय खेल जगत
के सभी हितधारकों की आकांक्षाओं को एक साथ बांधता है। साझा लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और
जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करके, यह एक ऐसा रोडमैप तैयार करता है, जो विखंडन
के बजाय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
श्रीनगर खेल संकल्प की असली ताकत विभिन्न भागीदारों—सरकारों, संघों, निजी क्षेत्र और
नागरिक समाज को एक मंच पर लाने की क्षमता में निहित है। यह इस विचारधारा को और
पुख्ता करता है कि भारत के खेल जगत का उत्थान अलग-थलग प्रयासों से नहीं हो सकता।
इसके बजाय, इसे एक समन्वित, सहयोगात्मक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए, जहां
संसाधनों, ज्ञान और विशेषज्ञता को एक साथ लाया जाए।
भारत को 2036 तक ओलंपिक खेलों में शीर्ष 10 देशों में शामिल होने की अपनी दीर्घकालिक
महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए यह समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व स्तरीय एथलीट
तैयार करने के लिए न केवल प्रतिभा की ज़रुरत होती है, बल्कि एक सुचारू तंत्र की भी
आवश्यकता होती है, जिसमें जमीनी स्तर पर पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट
कोचिंग, प्रतिस्पर्धा का अनुभव और निरंतर वित्तीय एवं संस्थागत समर्थन शामिल हैं। संकल्प वही
रणनीतिक कड़ी है, जो इन सभी तत्वों को एक सुसंगत प्रणाली में जोड़ सकता है।

इन वार्ताओं से जो बात सबसे अधिक उभरकर सामने आई है, वह है इस व्यवस्था में मौजूद
आशावाद। सभी का यह मानना ​​है कि भारत का खेल भविष्य उज्ज्वल है और सहयोग से हम
एक सशक्त, समावेशी और उच्च प्रदर्शन वाली खेल संस्कृति का निर्माण कर सकते हैं।
चिंतन शिविर कई मायनों में एक अनूठा प्रयोग है, लेकिन यह पहले से ही सफल साबित हो रहा
है। यह संवाद, समन्वय और आपसी समझ के महत्व को दर्शाता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण
देश के लिए, ऐसे मंच न केवल लाभकारी हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं।
अगर हम वैश्विक खेल मंच पर अपनी महत्वाकांक्षाओं को सही मायने में साकार करना चाहते हैं,
तो इन संवादों का जारी रहना और इन्हें सामूहिक कार्रवाई से मदद मिलना भी ज़रुरी है। श्रीनगर
खेल संकल्प हमें वह दिशा प्रदान करता है। चिंतन शिविर हमें वह मंच प्रदान करता है। ये दोनों
मिलकर भारत को अपनी खेल संबंधी आकांक्षाओं को स्थायी ओलंपिक सफलता में बदलने के
लिए एक सशक्त आधार प्रदान करते हैं।
(लेखक भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच हैं)