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देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का लिया संकल्प

नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस में पहली बार रात तक चला मंथन, खेतों में उतरेगा कृषि प्रगति का मिशन

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्रियों का संकल्प: अपने खेतों में भी करेंगे प्राकृतिक खेती

कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा से समग्र कृषि विकास का संकल्प: ‘बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए’- श्री शिवराज सिंह

दो दिन हुआ गहन विमर्श, खेती के लिए नई दिशा: श्री शिवराज सिंह की पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप

धरती बचाओ, देश बचाओ: पूसा सम्मेलन में राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का श्री शिवराज सिंह ने किया आगाज़

केंद्र-राज्य-वैज्ञानिक एक मंच पर: खरीफ से पहले कृषि परिवर्तन का राष्ट्रीय खाका तैयार

नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में, देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे और देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का संकल्प लिया। यह केवल एक नियमित समीक्षा बैठक बनकर नहीं रही, बल्कि भारतीय कृषि के लिए संकल्प, समन्वय और ज़मीनी क्रियान्वयन का राष्ट्रीय मंच बनकर उभरी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने गहन विचार-विमर्श किया, जबकि दूसरे दिन भी श्री शिवराज सिंह चौहान पूरे समय रहे और उनकी मौजूदगी में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने पहली बार रात तक मंथन कर खरीफ, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे मुद्दों पर एक साझा दिशा तय की। सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर कृषि मंत्रियों ने केवल नीतिगत समर्थन तक सीमित न रहते हुए, अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि किसानों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी के पूसा संस्थान में 28 और 29 मई को संपन्न राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि को केवल उत्पादन के प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, पोषण, किसान आय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देख रही है। सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह ने किसानों को लाभ देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने पर राज्य सरकारों से जोर देकर कहा।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में पहले दिन देशभर से आए राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, फसल नियोजन, जल प्रबंधन और क्षेत्रवार चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया। इस दौरान प्रारंभिक संबोधन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान हॉल में पीछे की तरफ एक प्रतिभागी के रूप में पूरे समय बैठे। अगले दिन श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने इस विचार-मंथन को आगे बढ़ाते हुए इसे नीतिगत प्रतिबद्धता और साझा संकल्प का स्वरूप दिया।

सम्मेलन के समापन पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिभागियों की गंभीरता, तन्मयता और मनोयोग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इतने समर्पण के साथ अधिकारियों और मंत्रियों की भागीदारी बहुत कम अवसरों पर देखी है। उनका यह वक्तव्य सम्मेलन की उस भावना को रेखांकित करता है, जिसमें उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्वयं को केवल प्रशासक नहीं, बल्कि चिंतक, साधक और परिवर्तन के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया।

इस कॉन्फ्रेंस से उभरकर सामने आया सबसे सशक्त संदेश रहा- ‘खेत बचाओ’ ही भविष्य बचाने का मंत्र है। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि धरती, पर्यावरण, देश और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। इसी सोच के साथ सम्मेलन में संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष बल दिया गया। श्री शिवराज सिंह का संदेश साफ था कि रासायनिक उर्वरकों के पूर्ण निषेध की बात नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक आवश्यकता के अनुसार, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरण और संस्थागत अभियान चलाया जाए। यही कारण है कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को केंद्र, राज्य, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक समुदाय का साझा राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात प्रमुखता से सामने आई।

इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए समन्वित तंत्र, मॉनिटरिंग व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं के गठन की बात भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा, ताकि यह केवल अपील बनकर न रह जाए, बल्कि एक परिणामकारी कार्यक्रम में बदले।

सम्मेलन की एक महत्त्वपूर्ण नई बात यह रही कि पहली बार राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सार्वजिनक रूप से, प्राकृतिक खेती को केवल प्रचारित करने की बजाय स्वयं अपने खेतों में भी अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। चूंकि अधिकांश कृषि मंत्री स्वयं खेती-किसानी से जुड़े हैं, इसलिए यह निर्णय प्रतीकात्मक न होकर व्यवहारिक महत्व रखता है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विचार यह रहा कि यदि नीति-निर्माता और जनप्रतिनिधि स्वयं छोटे स्तर पर भी प्राकृतिक खेती का मॉडल प्रस्तुत करेंगे, तो किसानों के बीच इसका संदेश अधिक विश्वसनीय और प्रेरक रूप में पहुंचेगा। गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का उल्लेख भी इसी संदर्भ में प्रासंगिक माना गया, वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने भी काफी देर तक सम्मेलन में सहभागिता कर एक विशेष सत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट हुआ कि खरीफ रणनीति अब केवल मौसमी तैयारी तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत, इनपुट लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन, और कृषि उत्पादन बढ़ाने के समग्र एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी एक ओर उत्पादन बढ़ाना है, तो दूसरी ओर संसाधनों की सेहत भी बचानी है। यही इस सम्मेलन की नीति-दृष्टि का केंद्रीय बिंदु बनकर उभरा। मंथन का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष था- नीतिगत निर्णयों को जन-अभियान में बदलने की संचार रणनीति। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सम्मेलन के समापन सत्र में इस बात पर बल दिया कि जो निर्णय और अभियान तय हुए हैं, उनकी जानकारी विभिन्न प्रचार-प्रसार माध्यम से लगातार किसानों और आमजन तक पहुंचाई जाए। इससे कृषि सुधार कार्यक्रमों को प्रशासनिक फाइलों से निकालकर जनसहभागिता वाले अभियान में बदला जा सकेगा।

सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कृषि प्रशासन में केवल योजनाओं की घोषणाभर नहीं, बल्कि साझा उत्तरदायित्व आधारित कार्य-संस्कृति विकसित करना चाहती है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ा लक्ष्य पाने के लिए बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए। यह पंक्ति इस सम्मेलन की मूल आत्मा बनकर उभरी, जहां मंत्री और अधिकारी दोनों ने अपने-अपने दायित्वों के निर्वहन में कोई कसर न छोड़ने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस को इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि यहां कृषि को विभागीय विषय से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय मिशन मोड में देखने का आग्रह सामने आया। ‘खेत बचाओ अभियान’, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती के प्रायोगिक मॉडल, और दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तय समयसीमा के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे यह मंथन आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित होगा।

सम्मेलन के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में सामूहिक संकल्प के साथ यह संदेश दिया गया कि जो कुछ इन दो दिनों के चिंतन में तय हुआ है, उसे ज़मीन पर उतारकर दिखाया जाएगा। यही इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है- विचार से संकल्प और संकल्प से क्रियान्वयन की ओर बढ़ता कृषि भारत।

अतिरिक्त उपायुक्त पूनम सिंह ने लुधियाना में जनगणना 2027 के कार्यों की समीक्षा की, दिए दिशा-निर्देश

नीति निर्माण और विकास के लिए सही जनगणना डेटा आवश्यक: अतिरिक्त उपायुक्त

जनगणना के दौरान कोई भी घर अनदेखा न रहे: पूनम सिंह

लुधियाना / सत्ता संदेश

अतिरिक्त उपायुक्त-कम-जिला जनगणना अधिकारी पूनम सिंह ने बुधवार को जनगणना 2027 के चरण-1 के तहत लुधियाना पश्चिम तहसील में तैनात गणनाकारों और सुपरवाइजरों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें घरों की सूचीकरण प्रक्रिया और आवासीय जनगणना शामिल थी।

बैठक में जिला जनगणना कोऑर्डिनेटर अलोक कुमार, मास्टर ट्रेनर उपमा कौल, जनगणना स्टाफ, लुधियाना पश्चिम के तहसीलदार और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त ने चल रही फील्ड गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की और जनगणना अभ्यास के दौरान गणनाकारों और सुपरवाइजरों को आने वाली विभिन्न तकनीकी, प्रशासनिक और संचालन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने जनगणना कार्यों के सुचारू, पारदर्शी और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और निर्देश दिए।

निर्धारित कार्यों की शुद्धता और समय पर पूर्णता पर जोर देते हुए पूनम सिंह ने फील्ड स्टाफ को घर सूचीकरण कार्यों को पूरा करते समय जनगणना दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण डेटा संग्रह सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर समन्वय बनाए रखने की भी अपील की। उन्होंने सुपरवाइजरों को गणनाकारों के कार्य की नियमित रूप से निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि सर्वेक्षण प्रक्रिया के दौरान कोई भी घर अनदेखा न रहे।

जनसहयोग के महत्व पर जोर देते हुए अतिरिक्त उपायुक्त ने फील्ड स्टाफ को निवासियों के साथ बातचीत करते समय विनम्र व्यवहार बनाए रखने और जनगणना गतिविधियों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी कहा।

अतिरिक्त उपायुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डेटा नीति निर्माण, कल्याण योजनाओं की योजना, बुनियादी ढांचे के विकास और सरकारी संसाधनों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सही जनगणना डेटा आवश्यक है।

अधिकारियों ने बैठक के दौरान बताया कि जनगणना 2027 के फील्ड कार्यों के लिए जिला लुधियाना में लगभग 10,000 गणनाकार और लगभग 1,600 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त पूनम सिंह ने जिले भर में विश्वसनीय और व्यापक डेटा संग्रह सुनिश्चित करने के लिए जनगणना अभ्यास को कुशलता और योजनाबद्ध तरीके से संचालित करने के प्रशासन के संकल्प को दोहराया।

कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज, सिद्धरमैया ने बुलाई अहम मंत्रिमंडलीय बैठक; अटकलों पर लग सकता है विराम

बेंगलुरु / सत्ता संदेश

Siddaramaiah द्वारा बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों की अहम बैठक बुलाए जाने के बाद Karnataka की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चल रही नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता संतुलन की अटकलों के बीच इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, सरकार के कामकाज और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से राज्य की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिनमें नेतृत्व परिवर्तन, मंत्रिमंडल फेरबदल और पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री द्वारा अचानक बुलाई गई बैठक ने राजनीतिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है। हालांकि सरकार की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक बैठक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बैठक में सरकार की विकास योजनाओं, आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा राज्य में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और जनता से जुड़े मामलों की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रहने की संभावना है।

विपक्षी दल भी इस बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और इसी कारण अचानक बैठक बुलाने की जरूरत पड़ी है। वहीं सत्तारूढ़ Indian National Congress के नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और मुख्यमंत्री नियमित रूप से मंत्रियों के साथ समन्वय बैठक करते रहते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक के बाद कर्नाटक की राजनीति में चल रही कई अटकलों पर विराम लग सकता है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया बैठक के जरिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर किसी तरह की भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।