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टी20 सीरीज में भारत की दमदार शुरुआत, इंग्लैंड को 38 रन से हराया; रोड्रिग्स, यास्तिका और नंदनी चमकीं

लंदन / सत्ता संदेश

India women’s national cricket team ने इंग्लैंड दौरे की टी20 श्रृंखला में शानदार शुरुआत करते हुए England women’s national cricket team को 38 रन से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। भारतीय टीम की जीत में Jemimah Rodrigues, Yastika Bhatia और पदार्पण कर रहीं Nandini Kashyap का प्रदर्शन बेहद अहम रहा।

भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संतुलित और आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। जेमिमा रोड्रिग्स ने मध्यक्रम में शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होंने तेज रन गति बनाए रखते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

यास्तिका भाटिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए टीम की पारी को स्थिरता दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई साझेदारी ने भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

मैच की सबसे खास बात रही युवा खिलाड़ी नंदनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण। पहली बार भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने खेल से सभी का ध्यान आकर्षित किया। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनके प्रदर्शन को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। इंग्लैंड की बल्लेबाजी कभी भी लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ती नहीं दिखी।

भारतीय टीम की क्षेत्ररक्षण भी बेहद प्रभावशाली रही। खिलाड़ियों ने कैच पकड़ने और रन बचाने में शानदार तालमेल दिखाया, जिससे इंग्लैंड की टीम पर दबाव लगातार बना रहा।

इस जीत के साथ भारत ने श्रृंखला में बढ़त हासिल कर ली है और टीम का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों और अनुभवी बल्लेबाजों के संयोजन ने भारतीय टीम को संतुलन दिया है।

महिला क्रिकेट में भारत का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि टीम आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत तैयारी कर रही है। अब सभी की नजर श्रृंखला के अगले मुकाबले पर टिकी है, जहां इंग्लैंड वापसी की कोशिश करेगा जबकि भारत अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तेजी, अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और United States के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत “उत्साहजनक” दिशा में आगे बढ़ रही है और एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है।

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहमति के करीब पहुंच चुके हैं और जल्द ही एक अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता का उद्देश्य शुल्क, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश से जुड़े मुद्दों को सरल बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौता होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिल सकती है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीक, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है।

फिलहाल व्यापार जगत की नजर इस संभावित अंतरिम समझौते पर टिकी है, क्योंकि इससे निवेश माहौल और निर्यात क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल कनाडा जाने वाले व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे


व्यापार, निवेश और सीईपीए वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ओटावा और
टोरंटो में द्विपक्षीय बैठकें

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल कनाडा जाने वाले भारतीय व्यापारिक प्रमुखों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल 25 मई को ओटावा में और 26 से 27 मई तक टोरंटो में दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेगा। यह यात्रा मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों द्वारा दिए गए जनादेश को आगे बढ़ाती है और व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और जन-जन संबंधों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान करने का प्रयास है।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की वार्ता को आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री कार्नी की मार्च 2026 में भारत यात्रा के दौरान इसकी शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वार्ता का पहला दौर मार्च में वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुआ और दूसरा दौर 8 मई, 2026 को संपन्न हुआ। इस यात्रा के दौरान, वार्ता का एक और दौर 25 से 29 मई तक ओटावा में होगा। दोनों पक्ष 2026 के अंत तक एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सीईपीए को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका साझा लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 बिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 8.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसमें सभी क्षेत्रों में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।

प्रतिनिधिमंडल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता; स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज; फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी; एयरोस्पेस और रक्षा; और खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-तकनीक क्षेत्रों सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कनाडाई समकक्षों के साथ विचार-विमर्श करेगा इन क्षेत्रों में भारत और कनाडा के पास अत्यधिक समान क्षमताएं हैं और इनमें संयुक्त निवेश, अनुसंधान एवं विकास और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी के अवसर सबसे महत्वपूर्ण हैं।

भारत–केन्या संयुक्त व्यापार समिति की 10वीं बैठक नैरोबी में आयोजित, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर

केन्या के लिए भारत एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा; व्यापार बढ़कर 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर हुआ

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) का 10वां सत्र 27-28 अप्रैल, 2026 को नैरोबी, केन्या में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की समीक्षा और उसे मजबूत करना था। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य के व्यापार राज्य विभाग की प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोटा ओम्बम ने की।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि का उल्लेख किया, जिसमें भारत केन्या के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार 2025-26 में 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2024-25 के 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर से 24.91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। चर्चा व्यापार विविधीकरण को बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को हल करने और इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में पूरकर्ताओं का लाभ उठाने पर केंद्रित थी।

समिति ने मानकीकरण और अनुरूपता मूल्यांकन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केन्या मानक ब्यूरो (केईबीएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) सहित चल रही व्यापार सुविधा पहलों पर प्रगति की समीक्षा की। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या राजस्व प्राधिकरण (केआरए) के बीच आगमन से पहले सीमा शुल्क सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और व्यापार करने में आसानी में सुधार पर जोर दिया गया।

जेटीसी बैठक के दौरान, व्यापार, निवेश और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारत-केन्या वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

दोनों पक्षों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की संभावना को स्वीकार किया। यह उल्लेख किया गया कि केन्याई बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (एसआरवीए) खोले हैं, और इस व्यवस्था का अधिक उपयोग द्विपक्षीय लेनदेन को सुगम बना सकता है। स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) तंत्र अपनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

उभरते क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया, साथ ही ऑटोएक्सपो केन्या और द बिग 5 कंस्ट्रक्ट केन्या जैसी प्रदर्शनियों में भागीदारी पर भी चर्चा हुई। रेलवे सहित अवसंरचना विकास में सहयोग पर भी विचार किया गया, जिसमें भारत ने केन्या की मानक गेज रेलवे के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, परियोजना प्रबंधन और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति में सहायता प्रदान करने की पेशकश की। भारतीय शिपयार्डों के साथ जहाज निर्माण में सहयोग के अवसरों की भी खोज की गयी।

फार्मास्यूटिकल्स में, भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका पर प्रकाश डाला और बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। दोनों पक्षों ने स्वच्छता और पादप स्वच्छता बाधाओं को दूर करते हुए कृषि उत्पादों में व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा की।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत ने सौर और पवन परियोजनाओं सहित केन्या की स्वच्छ ऊर्जा पहलों का समर्थन करने की तत्परता व्यक्त की। केन्याई पक्ष ने सूचित किया कि उसने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने का अपना निर्णय बता दिया है और वह जल्द से जल्द इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर हुई चर्चा में यूपीआई जैसी भुगतान प्रणालियों, भारत कनेक्ट और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले डिजिटल प्लेटफार्मों पर सहयोग शामिल था।

क्षमता निर्माण को सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम जैसी पहलों के तहत खनन, भूविज्ञान, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए। उच्च शिक्षा, डिजिटल शिक्षण प्लेटफार्मों और कौशल विकास में सहयोग के साथ-साथ “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने विविधतापूर्ण, संतुलित और भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और व्यापार को सुगम बनाने, लंबित मुद्दों को हल करने और व्यापार-से-व्यापार जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

संयुक्त व्यापार सम्मेलन (जेटीसी) के दौरान, भारत-केन्या संयुक्त व्यापार मंच का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और केन्या राष्ट्रीय वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर (केएनसीसीआई) के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख भारतीय और केन्याई व्यवसायों ने भाग लिया। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य की व्यापार प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोता ओम्बम ने मुख्य भाषण दिए। उनके साथ केएनसीसीआई के अध्यक्ष और इन्वेस्टकेन्या के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी उपस्थित थे। इस मंच ने उद्योग जगत के नेताओं को विनिर्माण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, अवसंरचना, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों का विस्‍तार करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त, बैठक के दौरान, भारत-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय के साथ एक संवाद का आयोजन किया। इस संवाद में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय और उनके साथ आए सीआईआई व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया और केन्या में व्यापार करने से संबंधित अवसरों और अनुभवों पर ध्यान केंद्रित किया गया।