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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन जारी, 31 जुलाई तक कर सकेंगे ऑनलाइन नामांकन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 के लिए देशभर से ऑनलाइन आवेदन और नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं और समाज के लिए प्रेरणादायक योगदान दिया है।

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि यह पुरस्कार 31 जुलाई तक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए है। बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को इस सम्मान के लिए चुना जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से लड़कियों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), कमजोर वर्गों तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि समाज के सभी वर्गों के प्रतिभाशाली बच्चों को समान अवसर मिल सके।

हिमांशु जैन ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और इच्छुक उम्मीदवार या उनकी अनुशंसा करने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है और केवल निर्धारित समयावधि के भीतर प्राप्त आवेदन ही विचारार्थ स्वीकार किए जाएंगे।

उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन अवश्य करें, ताकि उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल सके।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए नामांकन एवं अनुशंसा केवल राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन पोर्टल: https://awards.gov.in

सीसीपीए ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा परिणामों से संबंधित भ्रामक दावों के लिए कोचिंग संस्‍थान पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

संस्थान ने सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई

सीसीपीए ने दोहराया है कि कोचिंग सेवाओं का चयन करने से पहले उपभोक्ताओं को उचित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया है जिसमें उस पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर भ्रामक विज्ञापन देने के लिए 7,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ यह आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 में सफल हुए उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

यूपीएससी सीएसई 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (www.vajiramandravi.com) पर निम्नलिखित दावे प्रकाशित किए गए:

  • शीर्ष 10 में से रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • शीर्ष 50 में रैंक हासिल करने वाले 37 उम्‍मीदवार वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • तथ्य: हर सालयूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वाजीराम एंड रवि के छात्र होते हैं।”
  • विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने निम्नलिखित बातें पाईं:
क्रम संख्यासंस्थान का दावासीसीपीए के निष्कर्ष
 शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।8 में से 7 उम्मीदवारों ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 शीर्ष 50 में 37 रैंक धारक37 उम्मीदवारों में से 29 ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 “तथ्य: हर साल, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वजिराम एंड रवि के छात्र होते हैं।” 2021 में सफल उम्मीदवारों में से 86.36 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2022 में सफल उम्मीदवारों में से 78.31 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2023 में, सफल उम्मीदवारों में से 97.56 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2024 में सफल उम्मीदवारों में से 71.69 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।

उपर्युक्त महत्वपूर्ण जानकारी इन वर्षों में से किसी भी वर्ष संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं की गई थी।

सीसीपीए ने यह भी पाया कि आईजीपी एक ऐसा कार्यक्रम है जो तभी शुरू होता है जब कोई उम्मीदवार यूपीएससी सीएसई की प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं स्वतंत्र रूप से उत्तीर्ण कर लेता है। ये दोनों ही बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिनमें संस्थान का कोई शैक्षणिक योगदान नहीं होता। संस्थान ने व्यापक सशुल्क कोचिंग कार्यक्रमों के विज्ञापनों के साथ ऐसे उम्मीदवारों को प्रमुखता से प्रदर्शित करके, चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम का खुलासा किए बिना, यह भ्रामक धारणा बनाई कि ये उम्मीदवार उसके पूर्ण-स्तरीय कोचिंग कार्यक्रमों के छात्र हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों का खुलासा न करना, जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या उम्मीदवारों ने पूर्ण-अवधि के कक्षा कार्यक्रम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, परीक्षा श्रृंखला या अल्प अवधि के निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, क्योंकि यह संभावित उपभोक्ताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता से वंचित करता है। सीसीपीए ने माना कि विवादित विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत “भ्रामक विज्ञापन” की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, जो महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने पर रोक लगाती है। यह आचरण अधिनियम की धारा 2(9) का भी उल्लंघन पाया गया, जो उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करती है।

अब तक, सीसीपीए ने छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले कोचिंग संस्थानों पर 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखे जा सकते हैं: https://jagograhakjago.gov.in/CCPA_Orders/index.html )।

वर्ष 2026-27 में प्रवेश के लिए गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, लुधियाना में हेल्प डेस्क स्थापित – डिप्टी कमिश्नर

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन, आई.ए.एस. ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंजाब राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड, चंडीगढ़ के माध्यम से किए जा रहे प्रवेश (Admissions) के लिए ऋषि नगर, छोटी हैबोवाल के पास स्थित एस.आर.एस. सरकारी बहु-तकनीकी (पॉलिटेक्निक) कॉलेज में एक हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्र इस हेल्प डेस्क पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना पंजीकरण (Registration) करवा सकते हैं।
प्रवेश के लिए योग्यता (Eligibility): प्रथम वर्ष डिप्लोमा (1st Year Diploma): 10वीं पास कर चुके छात्र इंजीनियरिंग डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं। द्वितीय वर्ष (Direct 2nd Year / Lateral Entry): आईटीआई (2 वर्षीय), 12वीं (वोकेशनल), या 12वीं (साइंस) पास छात्र सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।
सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में 7 डिप्लोमा स्ट्रीम उपलब्ध हैं: कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (Computer Science & Engineering), इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Information Technology), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Electrical Engineering), इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (Electronics & Communication Engineering), फैशन डिजाइनिंग (Fashion Designing), गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग (Garment Manufacturing), मॉडर्न ऑफिस प्रैक्टिस (Modern Office Practice)
छात्रवृत्ति और फीस में छूट (Scholarships): अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए: भारत/पंजाब सरकार द्वारा संचालित डॉ. अंबेडकर पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत, जिन छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से कम है, उन्हें केवल 1,133 रुपये की मामूली फीस देनी होगी। अन्य श्रेणियों के लिए: मुख्यमंत्री वजीफा (स्कॉलरशिप) योजना के तहत छात्रों को उनकी मुख्य योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर फीस में बड़ी राहत/लाभ दिया जाता है। संपर्क सूत्र और मार्गदर्शन सेल (Contact Details) विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों की जानकारी और मार्गदर्शन के लिए एक गाइडेंस सेल का गठन किया गया है, जो श्रीमती रूपिंदर कौर (विभागाध्यक्ष) और डॉ. पवन कुमार (वरिष्ठ व्याख्याता) की देखरेख में काम कर रहा है: मोबाइल नंबर: 98158-95547, लैंडलाइन नंबर: 0161-2303223
कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए सुरक्षित होस्टल की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ पारिवारिक और अनुशासित माहौल है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास (Personality Development) के लिए बेहतरीन खेल के मैदान और सांस्कृतिक गतिविधियों (Cultural Activities) का भी विशेष प्रबंध है।
डिप्टी कमिश्नर ने लुधियाना जिले और आसपास के युवाओं से पंजाब सरकार की इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।

मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला: 29 कॉलेजों में पीजी प्रथम वर्ष में प्रवेश पर रोक

नांदेड़ / सत्ता संदेश

Swami Ramanand Teerth Marathwada University ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने संबद्ध 29 कॉलेजों में परास्नातक (पीजी) पारंपरिक पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष में प्रवेश पर रोक लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। यह कदम उन कॉलेजों पर कार्रवाई के तौर पर उठाया गया है, जिन्हें शैक्षणिक एवं प्रशासनिक लेखा परीक्षा (एएए) में बेहद कमजोर प्रदर्शन के आधार पर ‘एफ’ ग्रेड प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, कुल 72 कॉलेजों का मूल्यांकन किया गया था, जिसमें 29 संस्थान ‘एफ’ श्रेणी में पाए गए। इन कॉलेजों को न्यूनतम मानकों पर खरा न उतरने के कारण आगामी सत्र में पीजी पारंपरिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने से प्रतिबंधित किया गया है।

परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कॉलेज इस निर्देश का उल्लंघन करता है और फिर भी प्रवेश देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें छात्रों की पात्रता निरस्त करना, परीक्षा फॉर्म अस्वीकार करना, प्रवेश पत्र जारी न करना और परिणाम रोकने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। साथ ही, किसी भी प्रकार के शैक्षणिक नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज की होगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध केवल पारंपरिक पीजी पाठ्यक्रमों पर लागू होगा। फार्मेसी, विधि, बीएड/एमएड और शारीरिक शिक्षा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों को इससे छूट दी गई है।

एएए मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 72 कॉलेजों में से पांच को ‘ओ’ ग्रेड, 11 को ‘ए’ ग्रेड, 13 को ‘बी’, चार को ‘सी’, पांच को ‘डी’ और पांच को ‘ई’ ग्रेड मिला है। वहीं सबसे अधिक 29 कॉलेज ‘एफ’ श्रेणी में रहे, जो सीधे तौर पर गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक कमियों को दर्शाता है।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, ‘एफ’ ग्रेड पाने वाले 29 कॉलेजों में से 18 नांदेड़ जिले, सात लातूर जिले और चार परभणी जिले के हैं।

यह निर्णय विश्वविद्यालय के कुलपति Manohar Chaskar की अध्यक्षता में हुई शैक्षणिक परिषद और बोर्ड ऑफ डीन्स की बैठकों में लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और कॉलेजों को न्यूनतम मानकों के पालन के लिए प्रेरित करने की दिशा में उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से कमजोर शैक्षणिक संस्थानों पर दबाव बढ़ेगा और उन्हें अपने ढांचे, शिक्षण गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि, इसका असर उन छात्रों पर भी पड़ सकता है जो इन कॉलेजों पर निर्भर हैं, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी एक चुनौती होगी।

फिलहाल इस फैसले के बाद प्रभावित कॉलेजों में हलचल है और कई संस्थान अब विश्वविद्यालय के सामने अपनी स्थिति में सुधार का मौका देने की मांग कर सकते हैं।

NEET UG 2026: NTA ने बढ़ाई फीस रिफंड की तारीख, अब 22 जून तक जमा करें बैंक डिटेल्स

नेशनल डेस्क : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा के पीड़ित अभ्यर्थियों को एक बड़ी राहत दी है। एजेंसी ने नीट परीक्षा फीस रिफंड (Fee Refund) के लिए बैंक खातों की जानकारी जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 22 जून 2026 कर दिया है। इससे पहले बैंक डिटेल्स पोर्टल पर अपलोड करने की आखिरी तारीख 27 मई तय की गई थी।

13 लाख से अधिक आवेदन: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 13 लाख उम्मीदवारों ने फीस वापसी के लिए पंजीकरण करा लिया है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में छात्र डेटा सबमिट नहीं कर पाए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए एजेंसी ने विंडो को एक महीने और खुला रखने का निर्णय लिया है ताकि कोई भी पात्र छात्र वंचित न रहे। छात्र अब 22 जून की रात 11:50 बजे तक अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं।

सावधानी बरतने की सलाह: NTA ने छात्रों को सख्त चेतावनी दी है कि बैंक खाते की जानकारी एक बार सबमिट होने के बाद उसे अंतिम (Final) माना जाएगा और इसमें सुधार का कोई मौका नहीं मिलेगा। छात्रों को सुझाव दिया गया है कि वे अपना अकाउंट नंबर और IFSC कोड ध्यान से भरें और सटीकता के लिए कैंसिल्ड चेक (Cancelled Cheque) की कॉपी भी अपलोड करें। साथ ही, सर्वर क्रैश या तकनीकी खराबी से बचने के लिए आखिरी समय का इंतजार न करने की सलाह दी गई है।

लुधियाना में यू.पी.एस.सी. प्रीलिम्स परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न, 14 परीक्षा केंद्रों पर किए गए थे सख्त प्रबंध

लुधियाना /सत्ता संदेश

सुबह और दोपहर की दो शिफ्टों में हुई यू.पी.एस.सी. परीक्षा, हजारों उम्मीदवार हुए शामिल

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन द्वारा यू.पी.एस.सी. परीक्षा केंद्रों का किया गया निरीक्षण

लुधियाना में यू.पी.एस.सी. परीक्षा दौरान सुरक्षा और सुविधाओं के पूरे इंतजाम मौजूद रहे

जिला प्रशासन ने रविवार को जिले भर के 14 केंद्रों पर संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित किया।

4,353 पंजीकृत उम्मीदवारों में से 2,753 उम्मीदवार, जिनमें 1,300 पुरुष और 1,453 महिलाएं शामिल थीं, सुबह के सत्र में उपस्थित हुए, जबकि 2,758 उम्मीदवारों ने दोपहर के सत्र की परीक्षा दी, जिनमें 1,287 पुरुष और 1,442 महिलाएं शामिल थीं।

परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित की गई। पहला पेपर सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित किया गया, जबकि दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक आयोजित हुआ।

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा, परिवहन, बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी, निर्बाध बिजली आपूर्ति, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं सहित व्यापक प्रबंध किए थे।

निर्धारित परीक्षा केंद्रों में डी.सी.एम. प्रेसीडेंसी स्कूल, अर्बन एस्टेट-III, जमालपुर कॉलोनी, चंडीगढ़ रोड, लुधियाना; एम.जी.एम. पब्लिक स्कूल, अर्बन एस्टेट फेज-1, दुगरी, लुधियाना; भारती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, किचलू नगर, लुधियाना; आर.एस. मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, शास्त्री नगर, मॉडल टाउन, लुधियाना; और सरकारी कॉलेज फॉर गर्ल्स, रेख बाग, भारत नगर चौक, लुधियाना शामिल थे।

अतिरिक्त केंद्रों में एस.सी.डी. सरकारी कॉलेज, सिविल लाइंस, लुधियाना शामिल था, जहां परीक्षाएं इसकी पुरानी इमारत (ब्लॉक-ए), पी.टी.ए. बिल्डिंग (ब्लॉक-बी) और पी.जी. बिल्डिंग (ब्लॉक-सी) में आयोजित की गईं। इसके अलावा एस.डी.पी. कॉलेज फॉर वूमेन, दरेसी रोड; खालसा कॉलेज फॉर वूमेन, सिविल लाइंस; सरकारी कॉलेज फॉर गर्ल्स, रेख बाग (सब-सेंटर ए); मालवा सेंट्रल कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर वूमेन, बसंत सिटी; स्कूल ऑफ एमिनेंस, मॉडल टाउन; और गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज (एम.बी.ए. ब्लॉक), गिल पार्क, गिल रोड, लुधियाना भी परीक्षा केंद्रों में शामिल थे।

प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पुरुष और महिला कर्मचारियों सहित आवश्यक पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई थी। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर उम्मीदवारों की तलाशी भी ली गई।

यूपीएससी सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी परीक्षा के बाद तुरंत जारी करेगा


यूपीएससी अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने अनंतिम उत्तर कुंजी शीघ्र जारी करने की पहल को अधिक पारदर्शिता की दिशा में एक ‘नई शुरुआत’ बताया

संघ लोक सेवा आयोग पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षा संचालन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए पहली बार सिविल सेवा परीक्षा 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी परीक्षा के तुरंत बाद जारी करेगा।

इसे “एक नई शुरुआत” बताते हुए यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा, “ पहली बार, संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा के अनंतिम उत्तर कुंजी जारी करेगा। यह पहल उम्मीदवारों के साथ अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर संवाद स्थापित करने के आयोग के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।” उन्होंने आगे कहा, “इस नीति का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता, अखंडता और योग्यता-आधारित ढांचे को बनाए रखते हुए इसे उम्मीद्वारों के लिए अधिक सहभागी बनाना है।”

अनंतिम उत्तर कुंजी जारी होने के बाद  सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवार, यदि कोई अपत्ति हो, तो 31 मई, 2026 शाम 6 बजे तक अपने अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल “ऑनलाइन पश्न पत्र अभ्यावेदन पोर्टल (क्यूपीआरईपी)” उपलब्ध कराया गया है,  जो https://upsconline.nic.in/login पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अपनी समझ के अनुसार सही उत्तर कुंजी का संकेत देते हुए एक संक्षिप्त विवरण और तीन प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त सहायक दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इससे न केवल उम्मीदवार परीक्षा में अपने प्रदर्शन का जल्दी और सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे, बल्कि उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर भी मिलेगा।

उम्मीदवारों से प्राप्त सभी अभ्यावेदनों को विषय-विशेषज्ञों की टीमों के समक्ष विस्तृत एवं सावधानीपूर्वक समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह विशेषज्ञ संबंधित विषयों का गहन ज्ञान और विशेषज्ञता रखते हैं। वे प्रत्येक अभ्यावेदन की बारीकी से जांच करेंगे, प्रसतुत दस्तावेजों का मूल्यांकन करेंगे और संबंधित प्रश्नों की उत्तर कुंजी की शुद्धता पर अपना विचार दर्ज करेंगे। इसके बाद प्राप्त सभी अभ्यावेदनों पर समुचित विचार करने के उपरांत ही अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की जाएगी।

यह नया सुधार उम्मीद्वारों की उस लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लाागू किया गया है, जिसमें अनांतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित करने की मांग की जा रही है। यह कदम आयोग की पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवारों के विश्वास को और सुदृढ करने की प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।

सिल्वर ओक स्कूल स्टूडेंट काउंसिल का चुनाव, पारसदीप सिंह और गुरनूर कौर बने स्कूल कैप्टन

टांडा / सत्ता संदेश

Silver Oak International Senior Secondary School में छात्र परिषद का चुनाव बड़े ही धूमधाम और शानो-शौकत के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन संस्था की प्रिंसिपल मुनीशा संगर की अगुवाई में सफलतापूर्वक किया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हरप्रीत सिंह औलख तथा संस्था के चेयरमैन सरदार तरलोचन सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रिंसिपल मुनीशा संगर ने छात्र परिषद की जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल के होनहार विद्यार्थियों पारसदीप सिंह और गुरनूर कौर ने स्कूल कैप्टन के रूप में जिम्मेदारी संभाली। करमजीत कौर और जसमीत सिंह को वाइस कैप्टन चुना गया।

दक्ष खडवाल, रणदीप सिंह, मनजीत कौर, नमनीत कौर और अर्शदीप कौर ने डिसिप्लिन कैप्टन की जिम्मेदारी संभाली। जसनूर कौर को स्पोर्ट्स कैप्टन तथा गुरनूर सिंह, लक्ष्य टंडन और हरमनप्रीत सिंह लखा को स्पोर्ट्स काउंसिल सदस्य चुना गया।

चरणप्रीत कौर और राजदीप कौर को सीसीए कैप्टन तथा सौरभी और हरलीन कौर को वाइस सीसीए कैप्टन नियुक्त किया गया। ईको क्लब के कैप्टन के रूप में धर्मप्रीत सिंह, साहिबप्रीत सिंह, दमनप्रीत कौर और तरनप्रीत कौर सैणी ने पदभार संभाला।

दीप सुरिंदर सिंह, मनराज सिंह मुल्तानी और मनप्रीत सिंह को यूथ क्लब कैप्टन जबकि जसलीन कौर और ब्लैसी को वाइस यूथ क्लब कैप्टन चुना गया। इसके अलावा प्रभलीन कौर, रमणदीप कौर, शबनमप्रीत कौर, हरमनदीप सिंह, गुरमनप्रीत सिंह, मितुल बहल, माधव पासी, साहिजप्रीत कौर, हरलीन कौर और लवप्रीत कौर को इवेंट कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया।

हाउस कैप्टन के रूप में मरकरी हाउस से मनराजप्रीत सिंह और जसमीन सैणी, अर्थ हाउस से गुरजीत सिंह और सिमरनप्रीत, जुपिटर हाउस से बलराज सिंह और सिमरन तथा थार हाउस से रितनप्रीत सिंह और रवजोत कौर को चुना गया। इनके साथ विभिन्न हाउसों के वाइस कैप्टनों की भी नियुक्ति की गई।

मुख्य अतिथि लवप्रीत सिंह औलख ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि स्कूल कैप्टन का चयन एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। संस्था के चेयरमैन तरलोचन सिंह ने उम्मीद जताई कि नव-नियुक्त छात्र प्रतिनिधि स्कूल की प्रगति और अनुशासन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

प्रिंसिपल मुनीशा संगर ने छात्र परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी जिम्मेदारियां ही भविष्य के नेताओं और अधिकारियों का निर्माण करती हैं तथा विद्यार्थियों को बड़े दायित्व निभाने के योग्य बनाती हैं।

NEET-UG परीक्षा की नई तारीख का ऐलान, 21 जून को होगा दोबारा एग्जाम

नेशनल डेस्क : मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET-UG परीक्षा की नई तारीख की घोषणा कर दी है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।

क्यों रद्द हुई थी परीक्षा? बता दें कि इससे पहले NEET-UG की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि, परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एग्जाम को रद्द करने का फैसला लिया गया था। अब एजेंसी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए दोबारा परीक्षा कराने का शेड्यूल जारी कर दिया है।

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहासकार प्रो. मालविंदरजीत सिंह वराइच का निधन

पार्श्व अनुसंधान के लिए पीजीआई चंडीगढ़ को दान किया गया

लुधियाना /सत्ता संदेश

स्वतंत्रता संग्राम के तथ्यात्मक इतिहासकार और गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना में मानविकी के प्रोफेसर रहे प्रो. मालविंदरजीत सिंह वराइच का आज सुबह सकेतरी (पंचकुला) में निधन हो गया। उन्होंने कुछ समय पहले ही अपना 96वां जन्मदिन मनाया था।कवि ने इस स्थान की लोक कविता परंपरा से प्रेरित होकर रोती हुई बेटी और उसके नायकों और सेवकों के दुःख को अत्यंत सुंदर ढंग से व्यक्त किया है, और कहा है, “मेरी माँ, मेरे देश से विवाह मत करो।”चाहे वह मेहराज वाले के भाई भगवान सिंह की कविता हो या करनैल सिंह पारस रामूवालिया की, बाबू राजब अली की कविता, जो किशोर चंद बद्दोवालिया की लघु कहानियों के समानांतर चलती है, ने मुझे हमेशा मंत्रमुग्ध किया है।

बाबू रजब अली लंबे समय से जगराओं के पास अखारा गांव की ओर जाने वाले पुल के निकट एक घर में रह रहे हैं। मेरा सुझाव है कि अखारा के पास बने इस पुल का नाम “बाबू रजब अली पुल” रखा जाए। लगभग दो साल पहले, मैंने जगराओं की विधायक सरबजीत कौर मानुके और इस पुल का निर्माण कर रहे इंजीनियर और पंजाबी कवि सहजप्रीत सिंह मंगत से पंजाब सरकार से औपचारिक स्वीकृति प्राप्त करने का अनुरोध किया था।मुझे बाबू रजब अली की कविता के बारे में पहली बार 1973 में पता चला। लुधियाना के विद्वान डॉ. आतम हमराही और कोट कपूरे के भाई डॉ. रुलिया सिंह सिद्धू के संयुक्त प्रयासों के कारण, गुरदेव सिंह सहोकेवाले की कविश्री जत्था उन्हें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लेकर आई।अमृतसर में बाबू रजब अली द्वारा रचित कविता में विविधतापूर्ण रंग देखने को मिलते थे। पंजाब के मुख्यमंत्री ज्ञानी ज़ैल सिंह और प्रख्यात विद्वान डॉ. अतर सिंह ने 1975 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान बाबू रजब अली से मुलाकात की थी। कुछ महीनों बाद रजब अली ने हमें अलविदा कह दिया।बाबू रजब अली, जिन्होंने ‘पंजाब से अधिक सुंदर कोई देश नहीं’ लिखा, मालवा क्षेत्र को अपने पंजाब की सीमा मानते हैं, क्योंकि नहर विभाग में काम करते हुए वे इस क्षेत्र की बारीकियों से भली-भांति परिचित हो गए थे। इस स्थान की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांप्रदायिक रीति-रिवाजों पर उनके सूक्ष्म अवलोकन उनकी कविताओं में मिलते हैं।भाषा विभाग पंजाब ने बाबू रजब अली के चयनित कलाम को प्रकाशित किया है और डॉ. आतम हमराही ने बाबू रजब अली के कलाम का संपादन भी किया है। अब पिछले कुछ सालों से बाबू रजब अली के कलाम के संपादन का जिम्मा पक्का कलां निवासी कविशर सुखविंदर सिंह सुतंतर ने उठाया है। अब तक उन्होंने संगम प्रकाशन समाना की ओर से रंगीला रजब अली, बाबू रजब अली दे किस्से, दशमेश महिमा, अंखिला रजब अली, अनमोल रजब अली, अनोखा रजब अली, अनोखा रजब अली और अलबेला रजब अली नामक पुस्तकों का संपादन किया है।राजब अली के कलामों का एक और संग्रह कवि सुखविंदर सिंह सुत्तर द्वारा तैयार किया गया है। इसमें गुरु अर्जन देव जी की शहादत, महाभारत युद्ध की कथा, बीबी हरनाम कौर की वीरता, हरफूल सिंह सूरमा की कहानी और कलियों वाले रत्न की कहानी शामिल है। बाबू राजब अली इन संदर्भों को प्रस्तुत करते समय लोक परंपरा को नहीं छोड़ते। गुरु अर्जन देव जी की शहादत के संदर्भ को लिखते समय, वे एक जीवंत वातावरण बनाने के लिए लोक परंपरा के संदर्भों का भरपूर उपयोग करते हैं। दूसरे छंद में उनकी शैली देखें:

चंदू मगर शासक है और धनी लोगों का धन है।
गुरु को बताते हुए, मोरी स्वयं चाचा बन जाता है।
मांग को पीछे छोड़कर, वह बड़े साहस के साथ चला गया।
गुरु अर्जन गर्म तवे पर बैठ गए और माला चढ़ाने चले गए।

दोपहर की गर्मी में ये पट्टियाँ कितनी गर्म हैं।
हृदय ठंडा है, गर्मी झुलसा देने वाली लगती है, गर्मी मछुआरों के लिए है।
अत्याचार बंद करके, यज्ञ करने वाले अंधेरे तूफान में चले गए।
गुरु अर्जन गर्म तवे पर बैठ गए और माला चढ़ाने चले गए।

बाबू रजब अली लिखते समय यह भूल जाते हैं कि उनका जन्म एक इस्लामी परिवार में हुआ था। दरअसल, उस समय इस्लाम या धर्म का जोश इतना चरम पर नहीं था, जब बाबू रजब अली ने इतिहास के साक्षी बनकर यह कहानी लिखी। देश के विभाजन से पहले, हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई धर्म के लिए तीसरी जाति श्वेत फरंगी थी। वह शत्रु था और शहीद भगत सिंह जैसे वीर योद्धाओं की शहादत, जिन्होंने उसके विरुद्ध लड़ाई लड़ी, बाबू रजब अली की कलम से लिखी गई थी। अपने समकालीन देशभक्ति के माहौल में खड़े होकर वे इतिहास पर नजर डालते हैं।गुरु अर्जन देव जी की शहादत ने उन्हें अपनी रचना का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया होगा। छंदों की विविध व्यवस्था, विविध सौंदर्य और अनुभवों की अभिव्यक्ति की उनकी विलक्षण क्षमता ने उनकी कविता को और भी समृद्ध बना दिया। यही कारण है कि आज भी मालवा क्षेत्र में बाबू रजब अली के कलाम गाने वाले कवियों की संख्या 200 से अधिक है। बाबू रजब अली के गीतों को मुहम्मद सादिक जैसे परिपक्व गायकों और सतिंदर सरताज जैसे नए और मधुर गायकों ने भी गाया है।महाभारत की कहानी लिखते हुए भी बाबू राजब अली हमें पंजाब की मिट्टी के हर कण से परिचित कराते हैं। इतिहास के प्राचीन पन्नों को खोलते हुए वे कहानी को इस तरह सुनाते हैं मानो सब कुछ हमारे सामने घट रहा हो या बाबू राजब अली स्वयं महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में उपस्थित हों। संदर्भ के लिए ये पंक्तियाँ देखें:

उन्होंने अपने माता-पिता से विवाह करने की बात कहना शुरू कर दिया।
पांडो बलिदान देकर द्रौपदी को जीत लेगा।
पिता भीष्म ने अपने पोते-पोतियों को आमंत्रित किया।
सड़क किनारे से फल तोड़कर तोतों को बाँटे गए।हे प्रभु, आधा राज्य विभाजित हो गया है।
जो भाई भोग-विलास में लीन है, उसे जाने दो।
स्थिर पाण्डो का चिन्ह अभी भी सही है।
इंद्रप्रसात दिल्ली के निकट है।

माथा दीवार से टकराया।
मज़बूत दीवार से टकराने पर माथे पर निशान पड़ गया।
द्रौपदी बोली, “हे अंधे, मैं क्या करूँ?”
उस आदमी ने दीवार पर हाथ मारा और चिल्लाया, “बंदा।”
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बाबू रजब अली के पास शब्दों का अपार भंडार है। उन्होंने यह शक्ति किताबों से नहीं, बल्कि लोकवेदों से प्राप्त की है। इसीलिए शब्द उनके मन में अनमोल रत्नों की तरह बसे हैं। बीबी हरनाम कौर और हरफूल सिंह सुरमा की वीरता की कहानियां लिखते समय भी वे लोकवेदों के संदर्भों से मुक्त नहीं हैं। सुनिए, बाबू रजब अली के शब्दों में हरनाम कौर की वीरता की कहानी:

पंजाब के मालवा योद्धा की कहानी सुनो
यहाँ माताएँ अपने बच्चों की देखभाल करती हैं
काकी हरनामी का जन्म इन्हीं झाड़ियों में हुआ था
मौत से मत डरो, बराड़ों की संतानो

जब वह इस भूमि की बेटियों की बहादुरी का वर्णन करना शुरू करता है, तो वह यह कभी नहीं भूलता कि वह एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि बहादुरी की कहानी सुना रहा है। शायद इसीलिए वह डाकुओं के प्रति घृणा और बहादुर बेटी के प्रति सम्मान का माहौल बनाता है। मालवा के जंगल में दिखाई गई यह बहादुरी महिलाओं को हमारे सामने एक सशक्त शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। यह वही भूमि है,जहां एक समय माई भागो ने अपने भाइयों और बेटों को दसवें पिता, श्री गुरु गोविंद सिंह जी का साथ छोड़ने की चुनौती दी थी। यहां तक ​​कि जब उन्होंने वीर नायक की कहानी सुनाना शुरू किया, तो उन्होंने मुहावरे का इस तरह प्रयोग किया मानो विरासत के अनमोल शब्द उनके लेखन की प्रतीक्षा कर रहे हों। विभिन्न श्लोक घटनाओं के अनुसार बदलते हैं। मनोहर भवानी श्लोक मेरे ध्यान में पहले कभी नहीं आया था। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो बाबू रजब अली के अलावा किसी और ने इस श्लोक का इतना व्यापक प्रयोग नहीं किया है।

पीली हल्दी से बना,
दर्जी ने दर्द को शांत किया, आहों के साथ खून पिया,
घुटन ने उसे मार डाला।
घंटे दर घंटे, सौ साल बीत गए।
दिल की ऊँचे-नीचे चाहतों से, निस्वार्थता के गीत गूंज उठे,
कोमल शरीर के। बहादुर, गाल से लिपटा हुआ,

अनुभव की ऐसी शुद्ध, स्वच्छ और संयमित अभिव्यक्ति दुर्लभ कवियों के नसीब में होती है। बाबू रजब अली शब्दों का प्रयोग रंगों की तरह करते हैं। वे विभिन्न रंगों से चेहरे उकेरते हैं। वे रंगों को जीवंतता से बोलना और गति करना सिखाते हैं। यह शक्ति दुर्लभ रचनाकारों के हिस्से में आती है कि उनके लिखे शब्द इच्छित परिणाम के अनुसार आगे बढ़ते हैं। हमें बाबू रजब अली के लेखन में समाजशास्त्रीय अध्ययन की संभावनाओं को भी तलाशने का प्रयास करना चाहिए।