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लुधियाना के गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में मनाया गया टीचर्स डे, प्रो. गुरभजन सिंह गिल रहे मुख्य अतिथि

लुधियाना के गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में टीचर्स डे धूमधाम से मनाया गया। प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

रोज़ गार्डन स्थित गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में टीचर्स डे बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना के चेयरमैन और गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने की। प्रो. गिल ने पंजाब के विभिन्न बड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 38 वर्षों तक अध्यापन किया है।

अपने संबोधन में प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि एक शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाता ही नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ना और सीखना भी सिखाता है। उन्होंने अपने मेंटर डॉ. NSP सिंह को याद करते हुए कहा कि भले ही वे उनके औपचारिक शिक्षक नहीं रहे, लेकिन उनसे मिली सीख आज भी उनके जीवन में काम आ रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखता है।

प्रो. गिल ने कहा कि गुजरांवाला इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग कमेटी ने उन्हें गवर्निंग काउंसिल का सदस्य बनाकर उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी के योग्य बनने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करेंगे।

स्कूल की प्रिंसिपल सरदारनी गुनमीत कौर ने कहा कि टीचर्स डे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने और शिक्षा को जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने गुजरांवाला खालसा एजुकेशनल काउंसिल के प्रेसिडेंट और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के पूर्व वाइस-चांसलर डॉ. एस. पी. सिंह, जनरल सेक्रेटरी एस. हरशरण सिंह नरूला, मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल, काउंसिल के सदस्य एस. हरदीप सिंह और आर्य कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट एस. एल. शर्मा का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि शिक्षक ही सच्चे राष्ट्र निर्माता होते हैं। शिक्षक वह दीपक हैं जो विद्यार्थियों के जीवन से अज्ञानता का अंधकार दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाते हैं।

इस मौके पर विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के लिए हाथ से बनाए गए सुंदर कार्ड और उपहार भी भेंट किए और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान गुजरांवाला खालसा एजुकेशन काउंसिल, लुधियाना के एडमिनिस्ट्रेटर्स और स्कूल प्रिंसिपल ने मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल को सम्मानित किया। इस अवसर पर सभी शिक्षकों की मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना की गई तथा उन्हें सम्मान के प्रतीक के रूप में स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रिंसिपल सरदारनी गुनमीत कौर ने टीचर्स डे को यादगार बनाने के लिए विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और सभी शिक्षकों को टीचर्स डे की शुभकामनाएं दीं।

कैबिनेट मंत्री सौंद ने गुलज़ार ग्रुप के 14वें कॉन्वोकेशन सेरेमनी में स्टूडेंट्स को डिग्री दीं
  • कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने गुलज़ार ग्रुप के 14वें कॉन्वोकेशन सेरेमनी में स्टूडेंट्स को डिग्री दीं
  • एजुकेशन समाज में बदलाव लाने की सबसे बड़ी ताकत है: तरुणप्रीत सिंह सौंद
  • पंजाब सरकार युवाओं को अच्छी एजुकेशन और नौकरी के मौके देने के लिए पूरी तरह तैयार है: कैबिनेट मंत्री सौंद

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद आज लुधियाना के गुरु नानक देव भवन के ऑडिटोरियम में गुलज़ार ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के 14वें सालाना कॉन्वोकेशन सेरेमनी में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने अलग-अलग कोर्स सफलतापूर्वक पूरे करने वाले स्टूडेंट्स को डिग्री दीं और खास तौर पर उन मेधावी स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जिन्होंने पढ़ाई में बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं।

फंक्शन को संबोधित करते हुए, कैबिनेट मंत्री ने डिग्री पाने वाले सभी स्टूडेंट्स, उनके माता-पिता और टीचर्स को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कॉन्वोकेशन सिर्फ डिग्री लेने का सेरेमनी नहीं है, बल्कि ज़िंदगी के एक नए चैप्टर की शुरुआत है, जहां स्टूडेंट्स को समाज और देश की तरक्की के लिए अपनी नॉलेज, स्किल्स और काबिलियत को समर्पित करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी व्यक्ति को सिर्फ़ नौकरी के काबिल ही नहीं बनाती, बल्कि उसे एक ज़िम्मेदार और संवेदनशील नागरिक के तौर पर भी तैयार करती है।

उन्होंने कहा कि आज का समय तेज़ी से बदलती टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और ग्लोबल कॉम्पिटिशन का है। ऐसे दौर में लगातार सीखते रहना, नए आइडिया अपनाना, रिसर्च और इनोवेशन पर ध्यान देना और ऊँचे नैतिक मूल्यों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना ही सफलता की असली चाबी है। उन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की कि वे अपने टैलेंट का इस्तेमाल देश की तरक्की, समाज की भलाई और इंसानियत की सेवा के लिए करें।

कैबिनेट मंत्री ने पंजाब सरकार की तरफ़ से युवाओं को अच्छी शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रोज़गार के अच्छे मौके देने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार का मकसद युवाओं को आत्मनिर्भर और काबिल बनाना है ताकि वे अपने सपनों को पूरा करते हुए राज्य और देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा इंसान की सबसे बड़ी दौलत है और इसके ज़रिए ही समाज में अच्छा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने गुलज़ार ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस की हाई लेवल की एजुकेशन, मॉडर्न टेक्नोलॉजिकल सुविधाओं और इंडस्ट्री-सेंट्रिक लर्निंग मॉडल की बहुत तारीफ़ की और कहा कि इंस्टिट्यूशन ने एजुकेशन के फील्ड में खास योगदान दिया है और हज़ारों स्टूडेंट्स को उनके करियर में सफल होने के लिए एक मज़बूत नींव दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे इंस्टिट्यूशंस राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

सेरेमनी के दौरान गुलज़ार ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के चेयरमैन एस. गुरचरण सिंह और वाइस चेयरमैन एस. गुरकीरत सिंह ने चीफ गेस्ट का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इंस्टिट्यूशन का मकसद स्टूडेंट्स को वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज, रिसर्च और इनोवेशन के लिए प्रेरित करना है ताकि वे ग्लोबल स्टेज पर अपनी पहचान बना सकें।

सेरेमनी में स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स में बहुत उत्साह देखा गया। डिग्री पाने वाले स्टूडेंट्स ने इस मौके को अपनी ज़िंदगी की एक बड़ी कामयाबी बताया और अपने टीचर्स और पेरेंट्स को धन्यवाद दिया। फंक्शन के दौरान, पढ़ाई में बहुत अच्छा परफॉर्म करने वाले स्टूडेंट्स को स्पेशल मेडल और ऑनरेबल मेंशन भी दिए गए। इस अवसर पर आई. के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नवदीपक संधू, गुलजार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन एस. गुरचरण सिंह, वाइस चेयरमैन एस. गुरकीरत सिंह, बड़ी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक मौजूद थे।

मंत्री हरदीप सिंह ने गांव मंगली नीची और जंडियाली के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को स्कूल बैग बांटे
  • कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने गांव मंगली नीची और जंडियाली के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को स्कूल बैग बांटे
  • सरकार का सरकारी स्कूलों में मॉडर्न सुविधाओं और अच्छी शिक्षा पर ज़ोर: हरदीप सिंह मुंडियां
  • स्टूडेंट्स की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सरकार हर मुमकिन मदद कर रही है: कैबिनेट मंत्री मुंडियां

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की तरफ से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को अच्छी शिक्षा और ज़रूरी सुविधाएं देने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत, कैबिनेट मंत्री श्री हरदीप सिंह मुंडियां ने आज गांव मंगली नीची के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और गांव जंडियाली के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दौरा किया और स्टूडेंट्स को स्कूल बैग बांटे। इस मौके पर उन्होंने स्टूडेंट्स से बातचीत की और उन्हें मेहनत से पढ़ाई करने, अपना लक्ष्य तय करने और ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया।

कैबिनेट मंत्री श्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार शिक्षा क्षेत्र को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासरूम, ज़रूरी पढ़ाई का सामान और स्टूडेंट्स के लिए हर मुमकिन सुविधा पक्की की जा रही है, ताकि हर बच्चे को बराबर मौके मिलें।

उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के बच्चों को हाई-लेवल और क्वालिटी एजुकेशन देना है। इसी मकसद से स्टूडेंट्स को समय-समय पर ज़रूरी पढ़ाई का सामान दिया जा रहा है, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए।

श्री मुंडियां ने कहा कि पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को हर तरह से मज़बूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। एजुकेशन के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की वजह से सरकारी स्कूलों का स्टैंडर्ड लगातार बढ़ रहा है और पेरेंट्स का भी इन स्कूलों के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य के स्टूडेंट्स को ऐसा पढ़ाई का माहौल दिया जा रहा है, ताकि वे कॉन्फिडेंस के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और देश और समाज की तरक्की में अहम योगदान दे सकें।

इस मौके पर एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी, स्कूल प्रिंसिपल, टीचर, स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के नुमाइंदे और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद थे। स्टूडेंट्स ने पंजाब सरकार द्वारा दिए गए स्कूल बैग के लिए शुक्रिया अदा किया और कहा कि इस पहल से उन्हें पढ़ाई के लिए और हिम्मत मिलेगी।

पेपर लीक विधेयक को मिली मंजूरी…दोषियों को होगी 10 साल की सजा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बीच शुक्रवार को हुई बैठक में बिल को मंजूरी मिली। विधेयक में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधन बिल में पेपर लीक माफियाओ के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने में फैसला सुनाना होगा। विधेयक में दोषी को 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सोमवार को संसद में पेश करेंगे।

मौजूदा कानून में क्या है?

पेपर लीक और नक़ल के खिलाफ मौजूदा कानून सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 है। सरकार इसे और सख्त बना रही है। अभी व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच साल की सजा और दस लाख रुपए तक का जुर्माना है। वहीं सर्विस प्रोवाइडर पर एक करोड़ तक का जुर्माना है। संगठित अपराध में पांच से दस साल की सजा और न्यूनतम एक करोड़ का जुर्माना है।

मौजूदा कानून में एक और प्रावधान जोड़ा जाएगा, जिसके तहत ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य होंगे। इसमें विभिन्न स्तरों पर दंड का प्रावधान किया जाएगा। मौजूदा अधिनियम में आवश्यक संशोधन/अपडेट किए जाएंगे. डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) मंत्रालय इस विधेयक का नोडल मंत्रालय होगा।

पीएम मोदी ने दिया था कड़ा संदेश

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा कि विधेयक के मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी, जिसमें प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, सोमवार को जब संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा हफ्ता शुरू होगा, तो प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक विधेयक लाया जाएगा और हम उसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ज्ञात है कि प्रश्नपत्र लीक कोई छोटी समस्या नहीं है और लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद कष्टदायक होती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए, जब से नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए हैं (करीब ढाई महीने पहले)तब से कई कड़े कदम उठाए गए हैं।

विपक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस ने प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा को बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम करार दिया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक रोकने में मोदी सरकार की विफलता, ऐसी घटनाएं होने पर उन्हें स्वीकार नहीं करने और उनकी निष्पक्ष जांच कराने में असमर्थता के लिए विद्यार्थी वास्तविक जवाबदेही चाहते हैं।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, मांगें स्पष्ट हैं-पहली, शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र) प्रधान को बर्खास्त किया जाए। दूसरी, विद्यार्थियों से माफी मांगी जाए। तीसरी, उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

दिल्ली में जारी है प्रदर्शन

बता दें कि दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। सोनम वांगचुक ने भले ही अनशन तोड़ दिया है, लेकिन CJP के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब भी हो रहा है. अभिजीत दिपके ने कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा।

Delhi : VP हाउस में हुई CJP और मोदी सरकार के बीच हुई बैठक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

पेपर लीक से जुड़े मामले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच शुक्रवार को दिल्ली के विट्ठल हाउस में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों की अहम बैठक हुई। यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। बता दें कि आंदोलन शुरू होने के बाद दोनों पक्षों की यह दूसरी मुलाकात रही है। हालांकि बैठक से पहले CJP के फाउंडिंग प्रेसिडेंट अभिजीत दिपके ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा हमें कुछ भी मंजूर नहीं है। जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते है, तब तक हमारा चलता रहेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका सरकार के साथ बातचीत में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अगुवाई में होने वाली यह बैठक पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होनी थी। लेकिन केंद्रीय मंत्रियों की सुरक्षा को देखते हुए जगह बदल कर विट्ठल हाउस कर दिया गया।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही समाधानः दिपके

केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू होने से पहले अभिजीत दिपके ने कहा, “यह विरोध-प्रदर्शन देश के युवाओं का है और यह सिर्फ सोनम वांगचुक या दिपके तक सीमित नहीं है। यह प्रदर्शन देश के युवाओं का है, विपक्षी पार्टियों का नहीं। अगर सरकार विरोध-प्रदर्शन का हल चाहती है, तो वह सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।”

सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल खत्म किए जाने को लेकर दिपके ने कहा, “मुझे लगता है कि सरकार ने वांगचुक को हिरासत में रखा था। जेपी नड्डा उनसे मिल सकते थे, लेकिन कोई भी विपक्षी सांसद उनसे नहीं मिल सका। हम भी उनसे नहीं मिल सके। मुझे बहुत खुशी है कि सोनम सर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।”

बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधानः जितेंद्र सिंह

इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी से सरकार के साथ एक और दौर की बातचीत के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने अपनी अपील में कहा कि बातचीत के जरिए ही मुद्दों का समाधान हो सकता है और आगे का रास्ता निकाला जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक रिपोर्ट में कहा कि पिछले 24 घंटे में सरकार की ओर से सीजेपी को बातचीत के लिए ‘कम से कम चार बार’ न्यौता भेजा गया है। उन्होंने कहा, “मैं इस प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवा साथियों से अपील करना चाहता हूं कि वे बातचीत के लिए आगे आएं। हमारे दरवाजे उनके लिए खुले हैं।” उनका कहना है कि यह सरकार की ओर से की गई एक ‘विनम्र अपील’ है।

उन्होंने बताया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ यह बैठक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नड्डा की अगुवाई में होगी।

छात्रों के समर्थन में उतरे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, महाराष्ट्र में किया मौन आंदोलन

महाराष्ट्र / सत्ता संदेश

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन किया। उनका ये आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ था, जो दोपहर 1 बजे खत्म हो गया। अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया और उसके बाद वो इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बीते बुधवार को पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा है कि हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं।

अन्ना हजारे ने पत्र में आगे कहा है कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बगैर कहा कि अगर किसी मंत्री से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, विश्वास का माहौल बनाने और सकारात्मक संवाद के जरिए समाधान तलाशने का अनुरोध किया है।

22 छात्रों की आत्महत्या की खबरों पर जताई चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट (NEET) परीक्षा का जिक्र करते हुए हजारे ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रश्न पत्र लीक होने और गंभीर अनियमितताओं के आरोप 2024 में और फिर 2026 में सामने आए। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद 22 छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की। अन्ना हजारे ने यह भी लिखा कि जब भी अनियमितताएं या घोटाले सामने आते थे, तो अक्सर जिम्मेदारी पूरी तरह से निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती थी, जबकि सरकार सकारात्मक परिणामों का श्रेय खुद ले लेती थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय जवाबदेही के साथ जवाब देना चाहिए।

सरकार छात्रों से बात करने को तैयार’

वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से हम चर्चा करने को तैयार हैं, सरकार छात्रों से बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर से आज दोपहर तक 4 बार बातचीत करने का प्रस्ताव दिया गया है। पीएम इस विषय को लेकर संवेदानशील हैं, मैं विनम्रता से आग्रह करता हूं आइए बैठिए और चर्चा कीजिए. उन्होंने आगे कहा कि हम छात्रों के शर्तों पर बात करने को तैयार हैं।

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर? 38 इमारतें अवैध घोषित | पूरा विवाद क्या है?

रामपुर / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियां में है। कभी इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता था, लेकिन अब यही यूनिवर्सिटी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने करने का आदेश जारी किया है। इन इमारतों में कई एकेडमिट डिपार्टमेंट, लेबोरेटरी और अन्य सुविधाएं हैं। इससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

इस बीच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है। विभाग ने यूनिवर्सिटी के निर्माण की लागत लगभग 496 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि ट्रस्ट का दावा है कि निर्माण पर केवल 46 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट निर्माण लागत और फंडिंग को लेकर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भी जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जौहर यूनिवर्सिटी पर एक साथ इतनी कार्रवाई क्यों हो रही है और इसके पीछे कानूनी आधार क्या है?

2006 में रखी गई थी यूनिवर्सिटी की नींव

जौहर यूनिवर्सिटी की नींव साल 2006 में रखी गई थी। इसे मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने स्थापित किया और धीरे-धीरे यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य एकेडमिक बिल्डिंग्स तैयार किए गए। करीब 98 एकड़ में फैला यह परिसर उत्तर प्रदेश के बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटी परिसरों में गिना जाता है। साल 2012 में इसका उद्घाटन हुआ और बाद में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। हालांकि, समय के साथ इस प्रोजेक्ट पर जमीन विवाद, निर्माण की मंजूरी, पैसों में गड़बड़ी और सरकारी नियमों के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगते रहे।

  1. क्या 38 इमारतें अवैध हैं- प्रशासन का दावा है कि इन भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए, इसलिए इन्हें अवैध माना गया है।
  2. क्या तुरंत बुलडोजर चलेगा- नहीं, पहले ट्रस्ट को 15 दिन का समय दिया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
  3. क्या ट्रस्ट के पास बचाव का मौका है- हां, ट्रस्ट इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकता है।
  4. निर्माण लागत पर विवाद क्या है- इनकम टैक्स का दावा है कि निर्माण पर 496 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि ट्रस्ट 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कह रहा है।
  5. क्या इससे पढ़ाई प्रभावित होगी- अगर कार्रवाई होती है, तो कुछ विभाग और सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. अंतिम स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

अब सबसे बड़ा विवाद 38 भवनों के नक्शे को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का नक्शा कभी पास नहीं कराया गया, इसलिए इन्हें अवैध निर्माण माना गया है. दूसरी ओर ट्रस्ट का कहना है कि वह कानूनी विकल्प अपनाएगा और आदेश को अदालत में चुनौती देगा. ऐसे में यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि निर्माण नियमों, प्रशासनिक प्रक्रिया और कानून के पालन का भी बन गया है.

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में क्यों है?

रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों के नक्शे संबंधित प्राधिकरण से कभी स्वीकृत नहीं कराए गए. जांच के दौरान यह पाया गया कि मेडिकल कॉलेज और कुछ एकेडमिक बिल्डिंग्स को छोड़कर ज्यादातर निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है. इसी आधार कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया.

क्या हर निर्माण के लिए मंजूरी जरूरी है?

किसी भी बड़े निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से भवन का नक्शा पास कराना जरूरी होता है. जब जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था, तब यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता था. उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 (संशोधित 1994) की धारा 239 के अनुसार, निर्माण से पहले अनुमति लेना जरूरी था. प्रशासन का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने सभी भवनों के लिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं की.

निर्माण की मंजूरी किससे लेनी थी?

साल 2015 में रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन हुआ, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी वाला क्षेत्र सितंबर 2024 में उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया. उससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी जिस सिंगनखेड़ा गांव में स्थित था, वह जिला पंचायत के अधीन आता था. इसलिए शुरुआती निर्माण के समय जिला पंचायत से मंजूरी आवश्यक थी. बाद में 38 भवनों के नक्शा न पास होने की शिकायत की गई थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया.

निर्माण में कितना खर्च आया?

निर्माण में कितना पैसा लगा, यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा है. जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर कितना खर्च हुआ, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं. कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. समाजवादी पार्टी सरकार के समय श्रम विभाग ने इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई थी. वहीं, बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने CPWD से निर्माण लागत का आकलन कराया, जिसमें खर्च करीब 494 करोड़ रुपये बताया गया.

इसके आधार पर अप्रैल 2025 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जौहर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भेजा. विभाग का आरोप था कि ट्रस्ट के खातों में सिर्फ 100 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है, जबकि असल निर्माण लागत करीब 450 करोड़ रुपये है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दोनों के बीच 350 करोड़ रुपये के अंतर को कथित बेनामी निवेश मानते हुए ब्याज सहित वसूली का नोटिस जारी किया. अलग-अलग आंकड़ों की वजह से ये विवाद और बढ़ गया है.

38 इमारतें कब गिराई जाएंगी?

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, नियमानुसार ट्रस्ट को पहले 15 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके. अगर निर्धारित समय में ऐसा नहीं किया जाता, तो रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.

जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द हुआ?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है. डिपार्टमेंट का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां जनहित के अनुरूप नहीं थीं और कई वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में आरोप लगा कि ट्रस्ट ने चंदा जुटाने में गड़बड़ी की, कुछ डमी ट्रस्टी बनाए और निर्माण लागत कम दिखाकर टैक्स से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया. ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें 9 लोग शामिल हैं. इन लोगों में 5 आजम खान के परिवार के ही सदस्य हैं.

अब ट्रस्ट के पास क्या है विकल्प?

ट्रस्ट इस आदेश के खिलाफ अदालत जा सकता है. वह निचली अदालत या इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. अगर कोर्ट से राहत मिलती है, तो फिलहाल इमारतें गिराने की कार्रवाई रुक सकती है. आगे क्या होगा, इसका फैसला अदालत के आदेश के बाद ही तय होगा.

Varansai News : सीएम योगी ने कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाओं का किया शुभारंभ, DBT के माध्यम से भेजी राशि

वाराणसी / सत्ता संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी से प्रदेश के शिक्षकों व उनके परिजनों को मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना का तोहफा दिया। पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल बड़ालालपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इसका शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। योजना में नियमित शिक्षकों के साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के पात्र कार्मिकों को भी शामिल किया गया है।

हमारा दायित्व है कि विद्यालय अच्छा हो, स्वच्छ हो: सीएम योगी

सीएम योगी ने योजना का शुभारंभ करने के साथ ही माध्यममिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा के सभी शिक्षकों और बच्चों को हृदय से बधाई दी। कहा कि तीन योजनाएं हैं, कैशलेस चिकित्सा, डिबीटी, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी। आपने मांगा नहीं लेकिन आपने स्वास्थ्य की चिंता हमें है। इसमें 12 लाख शिक्षक लाभान्वित हो रहे हैं, सबको बधाई देते हुए आपका अभिनंदन भी करता हूं। बेसिक शिक्षा परिषद के बच्चों को जो धनराशि हस्तांतरित की जा रही है प्रत्येक छात्र 1200 रुपये दिया जा रहा है। हमारा दायित्व है कि विद्यालय अच्छा हो, स्वच्छ हो, आंतरिक अनुशासन बनाए। छात्र पूरी यूनिफॉर्म में आएं, इसके लिए अभिभावकों से बात करें। सीएम ने कहा कि कल बारिश हुई तो बच्चे उसी में नहा रहे थे, अभिभावकों को उन्हें समझाना चाहिए, बच्चे अबोध हैं। हम बताएं कि तीन दिन एक और तीन दिन दूसरा यूनिफार्म पहनो, घर के कपड़े दूसरे हों। यह बच्चों को बताना हमारा दायित्व है, यह उनके लिए प्रेरणा होगी। आज 1320 करोड़ रुपये भेजे गए। नागरिक के अलावा शिक्षकों का दायित्व है कि हर बच्चे को स्कूल पहुंचाएं। निपुण भारत के तहत हर बच्चे योग्य बनाए जाएं, ये पीएम मोदी  का विजन है। 

बच्चों कि पढ़ाई पर ध्यान दें शिक्षक

सीएम ने कहा कि आज एक एमओयू स्टेट बैंक के साथ किया। इसमें सामाजिक सुरक्षा कि गारंटी है, अस्थायी शिक्षक जिनका वेतन 10,000 है को 10 लाख का रिस्क कवर दिया जा रहा है। इसमें पढ़ाई, विवाह, एक्सीडेंटल, फिजिकल डैमेज क्लेम कवर होगा। पहले लोग मानते थे कि शिक्षक अमर हो गया है, ऐसी सुविधा देश में सबसे पहले यूपी में लागू हो रही है। कैशलेस सुविधा के बदले में सरकार आपसे कुछ नहीं चाहती, सिर्फ एक चीज मांगती है कि बच्चों कि पढ़ाई पर ध्यान दें। स्कूल में स्वछता, पढ़ाई, और बच्चों के विकास पर काम हो। अरुणाचल प्रदेश में हर व्यक्ति हिंदी बोलता है, वहां के सांसद ने बताया कि जितने शिक्षक हमारे यहां हैं सब यूपी से हैं। एमपी में भी भारी संख्या में लोग यूपी से हैं। शिक्षा समाज कि आधारशीला है, इसके बगैर कुछ भी हो पाना संभव है।

अब यूपी के लोग पहचान के संकट से नहीं गुजरते

सीएम योगी ने कहा कि यूपी बीमारू राज्य, आठ साल पहले लोग बाहर राज्यों में भटकते थे। आज ऐसा नहीं है, आज लोग पहचान के संकट से नहीं गुजरते। शिक्षा के उन्नयन हुआ तो प्रदेश के विकास ने रफ्तार पकड़ ली। पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परिक्षा तीन महीना चलती थी जिसका कोई मतलब नहीं था, मैं शिक्षकों को धन्यवाद दूंगा, जिनकी बदौलत आज 15 दिन में परीक्षा हो ही रही है, परिणाम भी घोषित हो रहे हैं।

शिक्षक सिर्फ पढ़ाता ही नहीं है बल्कि राष्ट्र का निर्माण करता है: मंत्री संदीप सिंह

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाता ही नहीं है बल्की राष्ट्र का निर्माण करता है। लंबे समय से शिक्षक परिवार की मांग थी कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले, यह मांग आज पूरी होने जा रही है। यह केवल सुविधा ही नहीं बल्की सभी परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का काम सरकार कर रही है। शिक्षक जब चिंता मुक्त हो तभी वह बेहतर प्रदर्शन कर पाएगा, तभी बच्चों के भविष्य को संवार पा

कहा कि बेसिक शिक्षा और एसबीआई के बीच एमओयू होगा। इससे लाइफ इंश्योरेंस, एक्सीडेंटल क्लेम और फिजिकल डैमेज का लाभ मिलेगा। बच्चों की शिक्षा भी इसमें सम्मिलित है। 2017 के पहले बेसिक स्कूल सम्मानित नहीं हो पाते थे, लेकिन आज हो रहे हैं। स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के तहत प्रदेश के 12 विद्यालयों को सम्मानित किया गया।

आज से शिक्षकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा: मंत्री गुलाब देवी

माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि आज सौभाग्य का दिन है। प्रदेश के शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक क्षण है। काशी की पावन धरती से इस सुविधा का शुभारंभ हो रहा है। यूपी सरकार द्वारा शिक्षक, स्वास्थ्य, सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत कार्य किए गए हैं। कहा कि आज से शिक्षकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा, उन्हें समय पर गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा मिलेगी। परिवार सुखी रहता है तो कोई भी चिंता मुक्त होकर काम करता है। धर्म की धुरी को धारण करने वाले मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया की खुशी अस्थाई होती है, लेकिन प्रसन्नता स्थाई है, वही मुख्यमंत्री ने आप लोगों को दी है, जब तक जीवन है तब तक सुविधा मिलेगी। उन्होंने आध्यात्मिकता का संदेश दिया। उन्होंने प्यार और प्रेम का भाव स्पष्ट किया। प्यार में बदले की भावना होती है, प्रेम में समर्पण और त्याग होता है। 

गुलाब देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री का डंडा इतना जबरदस्त था, तभी इस बार की बोर्ड परीक्षा में कोई नकल करते नहीं पकड़ा गया, न ही पेपर लीक किया गया। अयोध्या में हुई चंदा चोरी के मामले में ऐसी टीम गठित की कोई बच नहीं सकता। चाहे कितना भी बड़ा धुरंधर हो। कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के द्वारा राजकीय, अशासकीय, शासकीय सहायता प्राप्त आदि का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। आईसीटी लैब स्थापित हो रहे हैं। प्रदेश के 18 माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम लैब बनाए जा रहे हैं, जिसका एमओयू हो चुका है। 

उत्तर प्रदेश को विकसित भारत का सबसे विकसित प्रदेश बनाना है: अनिल राजभर

मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि जितने भी गुरु यहां आए हैं सभी के चरणों में शीश नवाकर स्वागत करता हूं। कहा कि हमें वो दिन याद है जब न्यायलय के फैसले ने असमंजस में डाल दिया था, मुख्यमंत्री ने तब कहा था कि शिक्षा मित्र हमारे परिवार हैं। शिक्षामित्र के नेता गुमराह करते थे। मुख्यमंत्री योगी ने फैसला लिया। कहा कि उत्तर प्रदेश को विकसित भारत का सबसे विकसित प्रदेश बनाना है। यह बिना आपका मनोबल बढ़ाए नहीं हो सकता है। जो संवेदना मुख्यमंत्री के मन में आप लोगों के लिए होती है वह किसी में देखने को नहीं मिलती। 

1.10 करोड़ बच्चों के अभिभावकों के खाते में हस्तांतरित की गई धनराशि

इस कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, स्टेशनरी आदि के लिए 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से धनराशि भी हस्तांतरित की गई। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) की मंत्री गुलाब देवी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में 10 लाख शिक्षकों व संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इससे पात्र कार्मिकों को अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ व हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित भी किया। 

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन जारी, 31 जुलाई तक कर सकेंगे ऑनलाइन नामांकन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 के लिए देशभर से ऑनलाइन आवेदन और नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं और समाज के लिए प्रेरणादायक योगदान दिया है।

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि यह पुरस्कार 31 जुलाई तक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए है। बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को इस सम्मान के लिए चुना जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से लड़कियों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), कमजोर वर्गों तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि समाज के सभी वर्गों के प्रतिभाशाली बच्चों को समान अवसर मिल सके।

हिमांशु जैन ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और इच्छुक उम्मीदवार या उनकी अनुशंसा करने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है और केवल निर्धारित समयावधि के भीतर प्राप्त आवेदन ही विचारार्थ स्वीकार किए जाएंगे।

उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन अवश्य करें, ताकि उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल सके।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए नामांकन एवं अनुशंसा केवल राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन पोर्टल: https://awards.gov.in

सीसीपीए ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा परिणामों से संबंधित भ्रामक दावों के लिए कोचिंग संस्‍थान पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

संस्थान ने सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई

सीसीपीए ने दोहराया है कि कोचिंग सेवाओं का चयन करने से पहले उपभोक्ताओं को उचित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया है जिसमें उस पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर भ्रामक विज्ञापन देने के लिए 7,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ यह आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 में सफल हुए उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

यूपीएससी सीएसई 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (www.vajiramandravi.com) पर निम्नलिखित दावे प्रकाशित किए गए:

  • शीर्ष 10 में से रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • शीर्ष 50 में रैंक हासिल करने वाले 37 उम्‍मीदवार वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • तथ्य: हर सालयूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वाजीराम एंड रवि के छात्र होते हैं।”
  • विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने निम्नलिखित बातें पाईं:
क्रम संख्यासंस्थान का दावासीसीपीए के निष्कर्ष
 शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।8 में से 7 उम्मीदवारों ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 शीर्ष 50 में 37 रैंक धारक37 उम्मीदवारों में से 29 ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 “तथ्य: हर साल, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वजिराम एंड रवि के छात्र होते हैं।” 2021 में सफल उम्मीदवारों में से 86.36 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2022 में सफल उम्मीदवारों में से 78.31 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2023 में, सफल उम्मीदवारों में से 97.56 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2024 में सफल उम्मीदवारों में से 71.69 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।

उपर्युक्त महत्वपूर्ण जानकारी इन वर्षों में से किसी भी वर्ष संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं की गई थी।

सीसीपीए ने यह भी पाया कि आईजीपी एक ऐसा कार्यक्रम है जो तभी शुरू होता है जब कोई उम्मीदवार यूपीएससी सीएसई की प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं स्वतंत्र रूप से उत्तीर्ण कर लेता है। ये दोनों ही बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिनमें संस्थान का कोई शैक्षणिक योगदान नहीं होता। संस्थान ने व्यापक सशुल्क कोचिंग कार्यक्रमों के विज्ञापनों के साथ ऐसे उम्मीदवारों को प्रमुखता से प्रदर्शित करके, चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम का खुलासा किए बिना, यह भ्रामक धारणा बनाई कि ये उम्मीदवार उसके पूर्ण-स्तरीय कोचिंग कार्यक्रमों के छात्र हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों का खुलासा न करना, जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या उम्मीदवारों ने पूर्ण-अवधि के कक्षा कार्यक्रम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, परीक्षा श्रृंखला या अल्प अवधि के निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, क्योंकि यह संभावित उपभोक्ताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता से वंचित करता है। सीसीपीए ने माना कि विवादित विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत “भ्रामक विज्ञापन” की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, जो महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने पर रोक लगाती है। यह आचरण अधिनियम की धारा 2(9) का भी उल्लंघन पाया गया, जो उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करती है।

अब तक, सीसीपीए ने छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले कोचिंग संस्थानों पर 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखे जा सकते हैं: https://jagograhakjago.gov.in/CCPA_Orders/index.html )।