ब्रेकिंग न्यूज़
जम्मू में टूटा पुल बना ग्रामीणों की मुसीबत, जान जोखिम में डाल नदी पार कर स्कूल और धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहे लोग

जम्मू,/ सत्ता संदेश

Jammu and Kashmir के कई ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां पुल बह जाने के कारण गांवों का संपर्क स्कूलों, धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया है। मजबूरी में ग्रामीण अब कामचलाऊ नावों और अस्थायी साधनों के सहारे उफनती नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार हाल की बारिश और तेज बहाव के चलते नदी पर बना पुराना पुल क्षतिग्रस्त होकर बह गया। इसके बाद कई गांवों के लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है, जबकि धार्मिक स्थलों तक जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने छोटी नावों और अस्थायी लकड़ी के सहारों से नदी पार करने का इंतजाम किया है। हालांकि तेज बहाव और खराब मौसम के कारण यह सफर बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद पुल निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया।

क्षेत्र के निवासियों ने कहा कि बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। यदि जल्द नया पुल नहीं बनाया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल अस्थायी पुल या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पुल निर्माण और वैकल्पिक संपर्क बहाल करने को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता, तब तक उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी।

इस घटना ने एक बार फिर दूरदराज ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां एक पुल टूटने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो जाती है।

पीड़िता के परिवार से मिलने से रोकने का आरोप, मीरवाइज उमर फारूक ने कहा- घर में नजरबंद किया गया

कश्मीर / सत्ता संदेश

कश्मीर के धार्मिक नेता Mirwaiz Umar Farooq ने आरोप लगाया है कि उन्हें बडगाम जिले में कथित दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता के परिवार से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया।

मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को दावा किया कि वे पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त करना और उन्हें सांत्वना देना चाहते थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके।

यह मामला उस समय सामने आया है जब कश्मीर में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर पहले से ही तनाव और गुस्से का माहौल है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर न्याय की मांग तेज हो रही है और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध भी जताया जा रहा है।

मीरवाइज ने आरोप लगाया कि प्रशासन लोगों को संवेदना व्यक्त करने और पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने से रोक रहा है, जो कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पाबंदियां जनता के बीच असंतोष को और बढ़ा सकती हैं।

प्रशासन की ओर से हालांकि इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अक्सर संवेदनशील मामलों में नेताओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

इस घटना के बाद घाटी में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूरे क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था को भी सतर्क रखा गया है।

जम्मू में टूटा पुल बना ग्रामीणों की बड़ी परेशानी, 10 महीने से नावों के सहारे जिंदगी, कई गांव अब भी दुनिया से कटे

जम्मू / सत्ता संदेश

Jammu and Kashmir के जम्मू क्षेत्र में पिछले वर्ष आई बाढ़ और तेज बहाव के कारण बहा पुल आज भी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। लगभग 10 महीने बीत जाने के बाद भी कई गांव अब तक मुख्य मार्गों से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों, इलाज, शिक्षा और बाजार तक पहुंचने के लिए अब भी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल बह जाने के बाद प्रशासन की ओर से अस्थायी व्यवस्थाएं तो की गईं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। प्रभावित गांवों के लोग हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम के करीब आने से उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि पुल टूटने के कारण बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को नावों के जरिए नदी पार करनी पड़ती है, जिससे अभिभावकों में हमेशा डर बना रहता है। कई बार खराब मौसम और तेज बहाव के कारण नाव सेवा भी बंद करनी पड़ती है, जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। गांव के लोगों का कहना है कि किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय व्यापार और खेती-किसानी भी इस समस्या से प्रभावित हुए हैं। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कतें हो रही हैं, जबकि रोज कमाने-खाने वाले लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ा है। गांवों में जरूरी सामान पहुंचाने में देरी होने से आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। लोगों ने सरकार से जल्द स्थायी पुल बनाने और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया पर काम चल रहा है और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक उनकी जिंदगी खतरे और परेशानियों के बीच ही गुजरती रहेगी।

क्षेत्र के लोगों को अब डर है कि यदि मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ा, तो हालात और अधिक खराब हो सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने सरकार से जल्द राहत और निर्माण कार्य तेज करने की अपील की है।

स्वालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर बढ़ा तनाव: पाकिस्तान ने भारत को लिखी एक और चिट्ठी, सिंधु जल संधि का दिया हवाला

इंटरनेशनल डेस्क : जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहे स्वालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट के बारे में भारत से जानकारी और सलाह मांगी है।

पाकिस्तान की नई चिट्ठी: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की है कि 11 फरवरी, 2026 को भारतीय सिंधु जल कमिश्नर को एक नई चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी के जरिए पाकिस्तान ने 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) के तहत स्वालकोट प्रोजेक्ट पर विस्तृत जानकारी और परामर्श की मांग की है। इससे पहले पिछले साल जुलाई में भी पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर पत्र लिखा था।

प्रोजेक्ट की खासियत:क्षमता: यह 1,856 मेगावाट (MW) का एक विशाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है।प्रकार: यह ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट है, जिसका अर्थ है कि इसमें नदी के प्राकृतिक बहाव का उपयोग किया जाता है और पानी का स्टोरेज बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता।

स्थान: यह केंद्र शासित प्रदेश के रामबन में चिनाब नदी पर बनाया जा रहा है।

महत्व: इसे जम्मू-कश्मीर के लिए सामरिक (स्ट्रैटेजिक) और ऊर्जा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तनावपूर्ण संबंधों के बीच विवाद: पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को “रोक” (Suspend) देने सहित कई सख्त फैसले लिए थे। पाकिस्तान का कहना है कि भारत की कोई भी एकतरफा कार्रवाई कानूनी हकीकत को नहीं बदल सकती और उसने भारत से संधि का पूरी तरह पालन करने की अपील की है।

लंबे समय से लंबित योजना: स्वालकोट प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 1984 में हुई थी, लेकिन निर्माण में देरी के कारण यह लंबे समय से चर्चा में रहा है। वर्तमान में रामबन में इसका काम चल रहा है, जिसे लेकर पाकिस्तान अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है।

कश्मीर में 4.6 तीव्रता का भूकंप
श्रीनगर, दो फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में सोमवार तड़के 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि तड़के पांच बजकर 35 मिनट पर आए इस भूकंप का केंद्र पट्टन क्षेत्र में था।
 उन्होंने बताया कि भूकंप से किसी प्रकार के नुकसान की कोई जानकारी फिलहाल नहीं मिली है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में बड़ा हादसा: आर्मी की गाड़ी 200 फीट गहरी खाई में गिरी, 10 जवान शहीद

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, जहां इंडियन आर्मी की कैस्पर गाड़ी के गहरी खाई में गिरने से 10 जवान शहीद हो गए हैं और 10 अन्य घायल हो गए हैं। यह हादसा तब हुआ जब आर्मी की गाड़ी डोडा में भद्रवाह चंबा रोड से गुजर रही थी।

कंट्रोल खोने से हुआ हादसा: सूत्रों के मुताबिक, आर्मी की गाड़ी एक ऊंची पहाड़ी पोस्ट की ओर जा रही थी। रास्ते में ड्राइवर ने गाड़ी से कंट्रोल खो दिया, जिससे गाड़ी सड़क से फिसलकर 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। बताया जा रहा है कि जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, उसकी हालत पहले से ही बहुत खराब थी। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया और घायल जवानों को एयरलिफ्ट करके अस्पताल पहुंचाया गया है।

लेफ्टिनेंट गवर्नर ने दुख जताया: जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने इस दुखद हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने शहीद सैनिकों की सेवा और सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश दुखी परिवारों के साथ खड़ा है और घायलों के सबसे अच्छे इलाज के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

इलाके में सुरक्षा की स्थिति: डोडा जिले में पिछले कुछ समय से सुरक्षा की स्थिति बहुत संवेदनशील बनी हुई है क्योंकि यहां आतंकवादी गतिविधियां और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन बढ़ गए हैं। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिले के पहाड़ी और जंगली इलाकों में पाकिस्तानी मूल के 30-35 आतंकवादी छिपे हो सकते हैं।