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आगरा में 19 जून को पहला BRICS MSME फोरम और कार्य समूह की बैठक आयोजित होगी

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा 19 जून को आगरा में “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की व्यापक थीम के अंतर्गत प्रथम ब्रिक्स MSME फोरम और तीसरी SME कार्य समूह की बैठक आयोजित की जाएगी।


पहले ब्रिक्स MSME फोरम की बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, बेलारूस, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और भारत सहित ब्रिक्स सदस्य और ब्रिक्स सहयोगी देशों के नीति निर्माता, उद्योगपति, उद्यमी और अन्य प्रमुख हितधारक एक साथ आएंगे और वैश्विक MSME इकोसिस्‍टम को मजबूत करने, स्थिरता को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने पर विचार-विमर्श करेंगे।


भारत का MSME क्षेत्र, जिसमें 86 लाख से अधिक उद्यम शामिल हैं, देश की आर्थिक वृद्धि और विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। यह क्षेत्र GDP में 31.1 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है और भारत के निर्यात में 48.58 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, साथ ही पूरे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।


इस कार्यक्रम का शुभारंभ MSME की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ होगा, जिसके बाद ब्रिक्स सदस्यों के तीसरे एसएमई कार्य समूह की बैठक “एमएसएमई इाकेसिस्‍टम का निर्माण – सतत जड़ों से वैश्विक मार्गों तक” विषय पर होगी।


इसके साथ ही, ब्रिक्स सदस्य देशों के निजी क्षेत्र के हितधारक ‘एमएसएमई के लिए प्रौद्योगिकी तक पहुंच’ और ‘स्थिरता उन्मुख एमएसएमई का विकास’ पर विचार-विमर्श करेंगे। इस फोरम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जो सरल भविष्य के लिए तैयार MSME इाकोसिस्‍टम को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत अनुभवों और सफल केस स्टडीज को साझा करेंगे।


ब्रिक्स एसएमई फोरम से ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और एमएसएमई के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एक सहयोगात्मक वातावरण विकसित करने की उम्मीद है। यह फोरम सहभागी देशों को ज्ञान का आदान-प्रदान करने, उभरते अवसरों की पहचान करने और समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास में योगदान देने वाली साझेदारियां बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा।

भारत ने श्रमिकों, किसानों, MSME के लिए खाड़ी देश में अवसरों के द्वार खोले

दिल्ली / सत्ता संदेश

1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाजार खोलने और रोजगार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है।         

भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200–300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6,000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं। 

दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करता है। यह तुरंत ही ओमान में 98% टैरिफ लाइनों के लिए 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त बाजार पहुंच की सुविधा देता है, जिसमें 99.38 प्रतिशत निर्यात शामिल है।

यह सीईपीए से पहले की प्रणाली की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। पहले की प्रणाली में केवल 15.3 प्रतिशत भारतीय निर्यात ओमान में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश कर सकते थे। भारत की ऐसी वस्तुएं, जिन पर वर्तमान में ओमान में 5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है और जिनकी कीमत लगभग 3.64 बिलियन डॉलर के निर्यात के बराबर है, अब काफी अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी।

भारत के एमएसएमई क्षेत्र के लिए, यह समझौता परिवर्तनकारी हो सकता है, क्योंकि सीईपीए से लाभान्वित होने वाले कई क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों की प्रमुखता है। लोहा और इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, वाहन कल-पुर्जे और औद्योगिक उपकरण जैसे कुछ क्षेत्रों में एमएसएमई को बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के युग में, सीईपीए भारतीय निर्यातकों को, जो आर्थिक मंदी और बढ़ते व्यापार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, अपने बाजारों को विविध बनाने और परंपरागत बाजारों पर निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

रोज़गार सृजन – यह व्यापार समझौता श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण और कुछ इंजीनियरिंग क्षेत्रों को लाभ पहुँचाता है, जो भारत के प्रमुख रोजगार प्रदाता हैं।

ओमान को होने वाले वस्त्र निर्यात में वृद्धि से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, भदोही, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख क्लस्टर में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। भारत भर के कारीगर और बुनकर भी अपने उत्पादों की उच्च अंतरराष्ट्रीय मांग से लाभान्वित होंगे।

भारत भर में, विशेष रूप से तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में, साथ ही महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों समेत चमड़ा और जूता के प्रमुख केंद्रों में भी रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

रत्न और आभूषण क्षेत्र एक अन्य उदाहरण है, जो दिखाता है कि सीईपीए रोजगार वृद्धि को किस प्रकार तेज करेगा। भारत के पास पहले से ही कटे और पॉलिश किए हुए हीरे, सोने और चांदी के आभूषण तथा हस्तनिर्मित आभूषण उत्पादन में मजबूत क्षमताएं हैं। शुल्क बाधाओं के हटने से, भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय और एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर निर्णायक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में ओमान को होने वाला निर्यात बढ़ कर 150 मिलियन डॉलर तक हो सकता है। इससे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के आभूषण निर्माण केन्द्रों में महत्वपूर्ण रोजगार संभावनाएं सृजित होने की उम्मीद है।

किसान और मछुआरे – घरेलू किसानों और संवेदनशील कृषि हितों की सुरक्षा के लिए, भारत ने गेहूं, चावल, मक्का, मोटे अनाज, डेयरी, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, चाय, कॉफी और शहद जैसे प्रमुख उत्पादों पर कोई टैरीफ छूट नहीं दी है।

घी, शहद, मीठे बिस्कुट, अंडे और कुछ मिष्ठान्न उत्पादों में भारत को प्रतिद्वंद्वियों पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा, जिससे देश के कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

यह समझौता भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) प्रमाणन की स्वीकृति और मान्यता भी प्रदान करता है, जो भारतीय किसानों को ओमान में, जो एक प्रमुख खाद्य आयातक है, जैविक उत्पाद बेचने के लिए विशाल अवसर देगा।

समुद्री उत्पादों में भी विशाल संभावनाएँ हैं, जिनका अब तक उपयोग नहीं हो पाया है। 2022 और 2024 के बीच ओमान का समुद्री उत्पादों का आयात लगभग 119 मिलियन डॉलर था। भारत से आयात केवल 7.75 मिलियन डॉलर था, जिससे भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात जैसे झींगा और जमे हुए कटलफिश के लिए विशाल अवसर मौजूद हैं। श्रम-गहन समुद्री उत्पाद उद्योग मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, शीत-श्रृंखला लॉजिस्टिक्स और निर्यात संचालन में अतिरिक्त नौकरियाँ उत्पन्न कर सकता है।  

दवा और पारंपरिक चिकित्सा – यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए और टीजीए जैसे नियामकों द्वारा अनुमोदित भारतीय दवाएं 90 दिनों के भीतर ओमान में स्वचालित विपणन प्राधिकार प्राप्त करेंगी — जो भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए एक बड़ी सफलता है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि सीईपीए भारत की पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए अवसर पैदा करता है। यह पारंपरिक चिकित्सा में संयुक्त अनुसंधान की व्यवस्था करता है।  

सेवाएँ और आवागमन – समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू सेवा और आवागमन में निहित है। ओमान ने भारत के लिए विशिष्ट निर्यात क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएँ व्यक्त की है, जिनमें पेशेवर सेवाएँ, कंप्यूटर और आईटी सेवाएँ, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, अनुसंधान और विकास तथा पर्यावरण सेवाएँ शामिल हैं। लेखा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, निर्माण, शिक्षा और परामर्श जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को बेहतर बाज़ार पहुँच से लाभ मिलने की उम्मीद है।  

महत्त्वपूर्ण रूप से, ओमान ने भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के लिए आवागमन प्रतिबद्धताओं में वृद्धि पर सहमति व्यक्त की है। अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों और संविदा सेवा प्रदाताओं को चार साल तक रहने की अनुमति दी जाएगी, जबकि व्यवसाय आगंतुकों और स्वतंत्र पेशेवरों को आसान अस्थायी प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इसने अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों के लिए ऊपरी-सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।

विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की मोदी सरकार की पहल  प्रत्येक भारतीय के जीवन को बेहतर बनाने के प्रधानमंत्री के मिशन का हिस्सा है।

ओमान के साथ समझौता याद दिलाता है कि व्यापार; विकास, रोजगार सृजन और साझा समृद्धि का एक शक्तिशाली उपकरण है। एक विभाजित और संरक्षणवादी दुनिया में, पीएम मोदी स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि एक नया, आत्मविश्वासी भारत पीछे नहीं हटेगा। यह साझेदारियों, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ेगा।

(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं।)