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UIDAI OVSE Framework: MDU रोहतक और PSEB ने शुरू की डिजिटल पहचान सत्यापन पहल

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागजरहित डिजिटल पहचान सत्यापन को बढ़ावा देने के लिए ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटी (OVSE) फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाया है। इस व्यवस्था के तहत पात्र संस्थाएं UIDAI के केंद्रीय पहचान डेटा भंडार (CIDR) तक सीधे पहुंच के बिना सुरक्षित माध्यमों से आधार से संबंधित पहचान और प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कर सकती हैं।

OVSE फ्रेमवर्क का उद्देश्य पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और गोपनीयता-केंद्रित बनाना है। इसके तहत आधार संख्या धारक की सहमति से उसके द्वारा साझा किए गए आधार वेरिफायबल क्रेडेंशियल्स की प्रामाणिकता की जांच की जा सकती है। जरूरत के अनुसार पूरी जानकारी या केवल आवश्यक चुनिंदा क्रेडेंशियल्स साझा किए जा सकते हैं।

कागजरहित सत्यापन से कम होगी दस्तावेजों पर निर्भरता

UIDAI के OVSE फ्रेमवर्क से संस्थाओं और नागरिकों दोनों को कई फायदे मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कागजरहित और संपर्करहित बनाई जा सकती है। इससे भौतिक दस्तावेजों और उनकी फोटोकॉपी जमा करने की जरूरत कम होगी।

इसके अलावा मैनुअल डेटा एंट्री से होने वाली गलतियों में कमी, सत्यापन प्रक्रिया में लगने वाले समय में बचत और संस्थागत स्तर पर परिचालन दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

यह फ्रेमवर्क डिजिटल रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले क्रेडेंशियल्स और आधार ऐप के साथ एकीकरण की सुविधा भी प्रदान करता है। लागू उपयोग और अनुमत प्रक्रियाओं के आधार पर ऑफलाइन फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से उपस्थिति के प्रमाण और सत्यापन परिणाम को बनाए रखने की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।

सरकारी विभागों से निजी संस्थाओं तक हो सकता है उपयोग

OVSE फ्रेमवर्क उन संस्थाओं के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, लाभार्थियों, ग्राहकों या अन्य पात्र व्यक्तियों को सेवाएं देने के दौरान पहचान सत्यापन की आवश्यकता होती है।

UIDAI की लागू आवश्यकताओं को पूरा करने वाली केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग एवं मंत्रालय, सरकारी संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), वैधानिक एवं स्वायत्त निकाय, शैक्षणिक संस्थान, पंजीकृत सोसायटी, निजी कंपनियां, पंजीकृत फर्म और अन्य पात्र संगठन OVSE के रूप में ऑनबोर्ड हो सकते हैं।

शिक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा OVSE का इस्तेमाल

शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल पहचान सत्यापन की जरूरत विद्यार्थियों के पूरे शैक्षणिक जीवनचक्र में होती है। पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा, विद्यार्थी सत्यापन और शैक्षणिक दस्तावेजों एवं प्रमाण-पत्रों के निर्गमन जैसी प्रक्रियाओं में पहचान की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है।

इसी दिशा में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक UIDAI के साथ OVSE के रूप में ऑनबोर्ड हुआ है। MDU को OVSE के रूप में ऑनबोर्ड होने वाला भारत का पहला विश्वविद्यालय बताया गया है।

इस व्यवस्था के माध्यम से विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में डिजिटल पहचान सत्यापन के लिए OVSE फ्रेमवर्क का इस्तेमाल कर सकेगा। इससे विश्वविद्यालय में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक डिजिटल, कागजरहित और कुशल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

PSEB बना OVSE से जुड़ने वाला पहला शिक्षा बोर्ड

शिक्षा क्षेत्र में दूसरी महत्वपूर्ण पहल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की है। PSEB UIDAI के साथ OVSE के रूप में ऑनबोर्ड होने वाला भारत का पहला शिक्षा बोर्ड बन गया है।

इस सुविधा का उद्देश्य पात्र लोगों को शिक्षा बोर्ड से जुड़ी ऑनलाइन और सिंगल-विंडो नागरिक सेवाओं का इस्तेमाल करते समय सुरक्षित पहचान सत्यापन की सुविधा देना है।

सेवा की जरूरत के अनुसार PSEB की OVSE सुविधा के माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों, संरक्षकों, शिक्षकों, विद्यालय प्रतिनिधियों और अन्य पात्र हितधारकों की पहचान सत्यापित की जा सकती है। इससे ऑनलाइन सेवाओं तक सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच बनाने तथा बार-बार भौतिक पहचान दस्तावेज जमा करने और उनके मैनुअल सत्यापन की आवश्यकता को कम करने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल शिक्षा सेवाओं को मिलेगी नई दिशा

MDU रोहतक और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड का OVSE के रूप में ऑनबोर्ड होना शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल पहचान सत्यापन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों के लिए शिक्षा संबंधी सेवाओं को अधिक सहज और डिजिटल बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

UIDAI का क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ अपने अधिकार क्षेत्र में आधार-सक्षम समाधानों के प्रति जागरूकता और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य पात्र संगठनों के साथ काम कर रहा है।

MDU और PSEB की पहल से अन्य शैक्षणिक संस्थानों एवं संगठनों को भी अपनी सेवाओं में उपयुक्त OVSE आधारित डिजिटल पहचान सत्यापन को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

आधार ऐप का नया रिकॉर्ड … 5 करोड़ डाउनलोड पार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आधार ऐप ने 5 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है। यूआईडीएआई के अनुसार, यह उपलब्धि लोगों के बीच सुविधाजनक और डिजिटल आधार सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है।

आधार ऐप को आधार नंबर धारकों और यूआईडीएआई के बीच एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में विकसित किया गया है। इसके जरिए लोग अपने स्मार्टफोन से कई आधार सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इनमें मोबाइल नंबर अपडेट, पता अपडेट, ईमेल अपडेट, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और ई-आधार डाउनलोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

लाखों लोगों ने ऐप से अपडेट की जानकारी

यूआईडीएआई के मुताबिक, आधार ऐप के जरिए अब तक 60 लाख से अधिक लोगों ने अपना मोबाइल नंबर, जबकि 15 लाख से अधिक लोगों ने अपना पता अपडेट किया है। इसके अलावा 23 लाख से अधिक लोगों ने अपना ईमेल भी अपडेट किया है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग आधार केंद्र जाने के बजाय डिजिटल माध्यम से आधार से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘दिखाएं, साझा करें और सत्यापित करें’ के सिद्धांत पर आधारित है ऐप

आधार ऐप को ‘दिखाएं, साझा करें और सत्यापित करें’ के सिद्धांत पर डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य आधार नंबर धारकों को अपनी आधार जानकारी के इस्तेमाल पर अधिक नियंत्रण देना और सुविधाजनक पहचान सत्यापन उपलब्ध कराना है।

यूआईडीएआई के अनुसार, ऐप की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ऑफलाइन आधार सत्यापन से जुड़े इकोसिस्टम का भी विस्तार किया जा रहा है।

200 से अधिक संस्थाएं OVSE के रूप में शामिल

यूआईडीएआई ने बताया कि जनवरी में ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था की शुरुआत के बाद से 200 से अधिक संस्थाओं को ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं (OVSEs) के रूप में शामिल किया गया है।

इसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं को सुरक्षित, सहमति-आधारित और पेपरलेस तरीके से पहचान सत्यापित करने की सुविधा मिलती है। आधार ऑफलाइन सत्यापन में QR कोड आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया में संस्थाओं को यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से रियल-टाइम कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही, आधार नंबर धारक अपनी जरूरत के अनुसार केवल आवश्यक जानकारी साझा कर सकते हैं।

यूआईडीएआई के अनुसार, ये पहल डिजिटल इंडिया विजन के अनुरूप सुरक्षित, सुविधाजनक, सुलभ और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।