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भारत–ब्रिटेन FTA को बढ़ावा, हरियाणा से ब्रिटेन के लिए फास्टनर्स की पहली शिपमेंट रवाना

हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को मिली नई उड़ान, यूपीएस ने हरियाणा से फास्टनर्स की पहली शिपमेंट ब्रिटेन के लिए रवाना

भारत–ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हरियाणा से फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट आज यूपीएस से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अधिकारियों एवं यूपीएस के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डीजीएफटी की सहायक निदेशक हेमलता हेड़ाऊ, सहायक निदेशक हीरा लाला, अनुभाग प्रमुख योगेंद्र मीणा तथा यूपीएस के निदेशक अमित जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विशेष रूप से एमएसएमई एवं विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक बाजारों में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी तथा भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से हरियाणा सहित पूरे देश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। फास्टनर उद्योग के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जो ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर यूपीएस के निदेशक अमित जैन ने कहा कि कंपनी के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हरियाणा से पहली फास्टनर्स निर्यात शिपमेंट उनके संसथान से ब्रिटेन के लिए रवाना की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा देश के निर्यात को नई गति प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट को ब्रिटेन के लिए रवाना किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस उपलब्धि को भारतीय उद्योग, निर्यात क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर राजीव जैन, सन्नी निझावन , बलजीत सिंह, रविंदर , शिमला रानी आदि मौजूद रहे |

भारतीय सेना को मिलेंगे 840 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, टाटा और निबे को 1600 करोड़ का ऑर्डर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंत्रालय ने सेना के लिए 1,600 करोड़ रुपये के टेंडर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को ‘लोइटरिंग म्यूनिशंस’ की सप्लाई के लिए चुना है। इस टेंडर के तहत सेना को 100 किलोमीटर की रेंज वाले 840 आधुनिक ड्रोन मिलेंगे।

​टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा को मिला है. टाटा इसके तहत अपनी पूरी तरह से स्वदेशी ‘ALS सीरीज’ के लोइटरिंग सिस्टम की सप्लाई करेगा।

निबे डिफेंस का ऑर्डर 36% हिस्सा निबे डिफेंस के खाते में गया है। निबे इसके लिए ‘वायु अस्त्र’ ड्रोन की सप्लाई करेगी, जो असल में इजरायल की कंपनी एलबिट सिस्टम्स के ‘स्काईस्ट्राइकर’ का रीब्रांडेड वर्जन है।

जानकारी के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और उससे सेना की जरूरत का 64 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करने की उम्मीद है। वहीं निबे दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) बनकर उभरी है और उससे बाकी बचे 36 प्रतिशत लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई करेगा।

ये पूरी डील ‘फास्ट-ट्रैक’ रूट के जरिए की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले 6 महीने के भीतर ड्रोन की डिलीवरी शुरू करनी होगी. इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ के लिए किया जाएगा, जिससे दुश्मनों के ठिकानों पर बेहद सटीक और लंबी दूरी के हमले किए जा सकें।

यहां टाटा का सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है, वहीं निबे का ड्रोन इजरायली तकनीक पर आधारित है. इसे रक्षा खरीद में घरेलू विकास के मिले-जुले स्तर के रूप में तैयार किया जाएगा।

मूल्य श्रृंखला का जुड़ाव: पीएम मित्र पार्क के ज़रिए कैसे भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र की बदल रही है तस्वीर

पबित्रा मार्गेरिटा

सदियों से, भारत की पहचान उसके परिधानों से गहराई से जुड़ी रही है। चाहे वह कश्मीर के पश्मीना की लंबे समय तक रहने वाली गर्माहट हो, असम के मूंगा सिल्क की सुनहरी चमक हो, तमिलनाडु की शाही कांजीवरम साड़ियाँ हों, चंदेरी की बुनाई हो या सूरत के कारीगरों की कपड़ों पर मशहूर कारीगरी। आज भी यह क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ा है, जो जीडीपी में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 12% का योगदान देता है। खेती के बाद भारत में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला यह क्षेत्र 45 मिलियन लोगों को सीधे तौर पर और 100 मिलियन से ज़्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देता है। इससे ग्रामीण समुदायों को मजबूती मिलती है और देश भर में लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी का रास्ता खुलता है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के एक साथ जुड़ी हुई व्यवस्था के उलट, भारत की वस्त्र मूल्य श्रृंखला ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग जगहों पर फैले हुए मॉडल के तौर पर विकसित हुई। कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, कपड़े सिलने और निर्यात जैसी गतिविधियाँ अलग-अलग राज्यों में स्वतंत्र रूप से विकसित हुईं, जिसका अर्थ था कि एक कपड़ा बनने के दौरान अक्सर कई राज्यों की सीमाओं से गुज़रता था। इस बिखराव के कारण कई संरचनात्मक बाधाएँ पैदा हुईं। इसने बड़े पैमाने पर काम करने, आधुनिकीकरण, ऑटोमेशन और आखिरकार मज़दूरों की उत्पादकता को सीमित कर दिया।

इसके साथ ही, मल्टी-मॉडल संपर्क में कमियों की वजह से लॉजिस्टिक्स का बोझ भी बढ़ जाता है। प्रोडक्शन के अलग-अलग चरणों के बीच हर बार सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या संभालने में अतिरिक्त खर्च और ढुलाई का किराया लगता है। कई चरणों में लंबी दूरी तक सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने से कुल लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है और सामान को तेज़ी से बाज़ार तक पहुँचाने की क्षमता खत्म हो जाती है, जो आज की रिटेल व्यवस्था में बार-बार ऑर्डर देने वाले साइकल में एक बहुत बड़ी और नुकसानदायक कमी है।

वर्तमान में पर्यावरण से जुड़ी ज़रूरतों पर भी ध्यान देने की ज़रुरत है। दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वस्त्र उद्योग की हिस्सेदारी 8% से 10% और औद्योगिक जल प्रदूषण में 20% है। हज़ारों छोटी-छोटी और अलग-अलग जगहों पर फैली इकाइयों में नियमों को लागू करना और सही तरीके से प्रबंधन करना पहले एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है।

इन रुकावटों को व्यवस्थित रूप से दूर करने के लिए, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) योजना शुरू की, जिसके लिए ₹4,445 करोड़ का बजट रखा गया। यह एक अहम कदम था, जो एक ऐसा व्यापक मॉडल पेश करता है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योगों से जुड़े लोगों और निजी साझेदारों के साथ मिलकर विकास को आगे बढ़ाती है।

इस योजना के केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का दूरदर्शी ‘5एफ’ फ़ॉर्मूला है यानी फ़ार्म (खेत) से फ़ाइबर (रेशा) से फ़ैक्टरी (कारखाना) से फ़ैशन और फारेन (विदेश) तक पहुंच। यह सोच सीधे तौर पर उस बात को सामने लाती है, जो भारत को वैश्विक मंच पर अलग बनाती है: हमारी संपूर्ण और बेहद विविध मूल्य श्रंखला। कच्चे माल के आयात या सिर्फ तैयार कपड़ों की बनावट पर निर्भर रहने वाले दूसरे देशों के उलट, भारत वस्त्रों को बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल है, जिसमें किसानों के खेतों से लेकर हाई-फ़ैशन रनवे तक की प्रक्रिया शामिल है। इस अनोखी समझ की वजह से, हमारी विकास रणनीति को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और पूरी तरह से सामाजिक समानता के बीच एक खास संतुलन बनाने की ज़रुरत है। विस्तार करते समय, हमें हर क्षेत्र के कल्याण का ध्यान रखना होगा, ताकि साधारण किसान और ग्रामीण बुनकर से लेकर कपड़े के निर्यातक तक, कोई भी पीछे न छूटे। पीएम मित्र फ़्रेमवर्क इसी संतुलन को हासिल करता है।

इन पार्कों को कच्चे माल के मुख्य केंद्रों के पास रणनीतिक रूप से बनाने से ट्रांसपोर्ट का खर्च कम होता है और निर्माण के लिए बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित होती है। इससे ज़रूरी बात यह है कि इस नज़दीकी से शुरुआत से आखिर तक ट्रैकिंग भी मुमकिन हो पाती है। चूँकि वैश्विक ब्रांड ऑर्गेनिक या सस्टेनेबल प्रमाणीकरण की मांग करते हैं, इसलिए ये एकीकृत पार्क एक सत्यापन योग्य कस्टडी चेन देते हैं। इससे कड़े वैश्विक ईएसजी नियमों का पालन होता है और विदेशों में प्रीमियम कीमत पाने का रास्ता भी बनता है।

1,000 एकड़ से ज़्यादा के एक ही इलाके में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग और कपड़ा बनाने की सुविधाओं को एक साथ लाने से अलग-अलग राज्यों के बीच सामान ले जाने की ज़रूरत खत्म हो जाती है। इससे माल ढुलाई का खर्च और ट्रांसपोर्ट से होने वाला प्रदूषण भी बहुत कम हो जाता है और सामान तेज़ी से बाज़ार तक पहुँच पाता है। समर्पित माल गलियारे और एक्सप्रेसवे जैसे राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जुड़े होने के कारण, विदेशी बाज़ारों तक सामान पहुँचाना बहुत सस्ता और किफायती हो जाता है। हर पार्क में ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, जिसमें बिजली के खास सब-स्टेशन, लगातार पानी की सप्लाई और तुरंत इस्तेमाल के लिए तैयार फैक्ट्री शेड जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ज़ेडएलडी) तकनीक वाले उन्नत एडवांस्ड कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और आधुनिक सुविधाएँ भी होती हैं, जिससे कारोबारियों पर ढ़ांचागत बोझ कम पड़ता है और कारोबार करने में आसानी होती है।

पीएम मित्र पार्क तेज़ी से कागज़ी योजनाओं को असल ज़मीनी हकीकत में बदल रहे हैं। इस योजना में सात रणनीतिक पार्क शामिल हैं: पाँच ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट विरुधुनगर (तमिलनाडु), नवसारी (गुजरात), कलबुर्गी (कर्नाटक), धार (मध्य प्रदेश) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) और दो ब्राउनफील्ड डेवलपमेंट वारंगल (तेलंगाना) और अमरावती (महाराष्ट्र) में। अब तक, इस योजना में कुल ₹69,899 करोड़ के निवेश की दिलचस्पी दिखाई गई है, जिसमें से ₹27,658 करोड़ का निवेश पहले ही हो चुका है।

10 मई, 2026 को माननीय प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के वारंगल में पहले कार्यरत पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन किया। इस पार्क में पहले ही ₹3,862 करोड़ का निवेश हो चुका है और यहाँ विश्व-स्तरीय पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढ़ांचे पर काम किया जा रहा है। ये विशेषताएँ स्थायित्व के उन मानकों को दर्शाती हैं, जिन्हें सभी सात पार्क साइटों पर स्थापित किया जा रहा है।

पूरे देश में एक साथ काम शुरू होने से सहकारी संघवाद की तेज़ी और सफलता दोनों साफ दिखती है, जहां सभी सात राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, 100% ज़मीन का अधिग्रहण हो चुका है और पर्यावरण से जुड़ी मंज़ूरी भी मिल गई है। पाँच ग्रीनफ़ील्ड साइट्स के लिए जेवी एग्रीमेंट और एसपीवी पूरी तरह से तैयार हैं, जिससे तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है। 2,158 एकड़ में फैले सबसे बड़े पार्क, धार (मध्य प्रदेश) में ₹21,436.9 करोड़ के निवेश में दिलचस्पी दिखाई गई है। इसी तरह गुजरात (₹13,084 करोड़), महाराष्ट्र (₹12,925 करोड़), तमिलनाडु (₹6,600 करोड़), उत्तर प्रदेश (₹5,345.8 करोड़) और कर्नाटक (₹1,700 करोड़) में भी काम को लेकर तेज़ी देखी गई है। तेज़ी से हो रहे इस काम के पीछे केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह का सक्रिय नेतृत्व है। उनके कुशल नेतृत्व में वस्त्र मंत्रालय अपने कामकाज के तरीकों में तेज़ी लाया है, मंत्रालय ने प्रशासनिक रुकावटों को दूर किया है और राज्य सरकारों के साथ अभूतपूर्व स्तर पर आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया है।

लेकिन आंकड़े तो कहानी का सिर्फ एक हिस्सा बताते हैं, असली पैमाना इसके मानवीय प्रभाव में दिखता है। प्रत्येक पार्क को संरचनात्मक रूप से इस प्रकार तैयार किया गया है कि इससे लगभग 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यानी सभी सात स्थलों को मिलाकर, 21 लाख से अधिक औपचारिक आजीविकाएं हैं, जो हमारे ग्रामीण परिवारों और महिलाओं को अहम सामाजिक-आर्थिक नींव प्रदान करती हैं, जो पारंपरिक रूप से परिधान निर्माण उद्योग की रीढ़ हैं।

यह व्यापक ढ़ांचागत प्रयास वस्त्र क्षेत्र के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण 2030 के लिए एक अहम लॉन्चपैड का काम करता है, जिसका लक्ष्य इस दशक के अंत तक भारत के वस्त्र उद्योग को 350 बिलियन डॉलर की वैश्विक महाशक्ति में बदलना है। ऐतिहासिक विखंडन को विश्व स्तरीय, एकीकृत पैमाने से बदलकर करके, पीएम मित्र एक बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन ला रहा है। सशक्त नेतृत्व के मार्गदर्शन में, हम भारत को वस्त्रों के निर्विवाद, टिकाऊ और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी केंद्र के तौर पर स्थापित कर रहे हैं।

(लेखक केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)

भारतीय नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत अपनी रक्षा क्षमताओं में लगातार इजाफा कर रहा है। इस बीच भारतीय नौसेना 11 जुलाई को अपनी छठी प्रोजेक्ट-17A स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ (F38) को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल करेगी। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और देश की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का एक और बड़ा उदाहरण है। इसमें ज्यादातर स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

जानकारी के मुताबिक ‘महेंद्रगिरि’ का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह पहली बार है जब भारतीय नौसेना के किसी युद्धपोत को महेंद्रगिरि नाम दिया गया है।

‘महेंद्रगिरि’ की खासियत

इस फ्रिगेट का डिजाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई ने किया है। महेंद्रगिरि में आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, कम रडार सिग्नेचर, बेहतर सुरक्षा और अत्याधुनिक ऑटोमेशन सिस्टम दिए गए हैं। इसमें कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह लंबी दूरी तक तेज गति से समुद्री अभियान चला सकती है।

स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

खास बात ये है कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसका निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत किया गया है, जिसमें कई भारतीय कंपनियों ने योगदान दिया है.

त्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस

महेंद्रगिरि अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है. इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, पनडुब्बी रोधी हथियार और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है।

हवाई, समुद्री और पनडुब्बी खतरों से मुकाबला

यह फ्रिगेट दुश्मन के हवाई, समुद्री और पनडुब्बी खतरों से मुकाबला करने में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, खोज एवं बचाव और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार निगरानी जैसे अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगी।

भारतीय नौसेना के अनुसार, प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार हो रही फ्रिगेट्स के बेड़े में शामिल होने से नौसेना की युद्ध क्षमता और अधिक मजबूत होगी. साथ ही भारत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा। नौसेना का कहना है कि महेंद्रगिरि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नागपुर में 10,000 टन एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस का भूमि पूजन, रक्षा आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई मजबूती: राजनाथ सिंह

नागपुर: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की इकाई आयुध निर्माणी अंबाझरी, नागपुर में अत्याधुनिक 10,000 टन एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि जो देश अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करने में सक्षम होता है, वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है।

रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

10,000 टन क्षमता वाली यह अत्याधुनिक एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस रक्षा प्रणालियों, एयरोस्पेस, विमानन संरचनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों, रेलवे, परिवहन और अन्य रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बड़े एवं जटिल एल्युमीनियम मिश्र धातु प्रोफाइल के निर्माण में सहायक होगी।

इस परियोजना से महत्वपूर्ण एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

बदलते युद्ध स्वरूप में आत्मनिर्भरता जरूरी

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और दुश्मन की पहचान पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई है। इसके बावजूद पारंपरिक रक्षा प्रणालियों और सैन्य अवसंरचना का महत्व आज भी उतना ही है और भविष्य में भी बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि एक मजबूत सैन्य-औद्योगिक आधार किसी भी देश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ होता है और यह नई परियोजना भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत सरकार प्रौद्योगिकी, कुशल मानव संसाधन, ज्ञान और राष्ट्र के प्रति विश्वास जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

इसी तरह, 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।

रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि देश निर्धारित समय से पहले 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात के लक्ष्य हासिल कर लेगा।

वाईआईएल की उपलब्धियों की सराहना

उन्होंने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा रक्षा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण का उद्देश्य रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक स्वायत्तता और नवाचार के अवसर प्रदान करना था।

उन्होंने बताया कि निगमीकरण से पहले वित्त वर्ष 2019-20 में उत्पादन 12,755 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जिसमें वाईआईएल का योगदान 397 करोड़ रुपये रहा।

अनुसंधान एवं पूंजी निवेश पर दिया जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई की दीर्घकालिक सफलता के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पूंजी निवेश सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों से आधुनिक तकनीक अपनाने, नई मशीनरी लगाने और वैश्विक स्तर की उत्पादन प्रणालियों में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।

फडणवीस बोले- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश अब वैश्विक बाजार में एक मजबूत रक्षा निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना नागपुर को रक्षा विनिर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र के बीच बढ़ता सहयोग भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है तथा यह परियोजना क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए।

खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया।

केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया।

पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
नई दिल्ली, 26 मई 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।

केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े

नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि

कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।

राजनाथ सिंह की आतंकियों को चेतावनी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है, हम आतंकी सोच को खत्म कर देंगे

नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जयपुर के SMS स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ प्रोग्राम के दौरान आतंकियों को कड़ी चेतावनी दी। इंडियन आर्मी डे के मौके पर बोलते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है और जब तक आतंकी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, भारत की शांति की कोशिशें जारी रहेंगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ हिम्मत और संयम का प्रतीक है राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन को इतिहास में भारत की हिम्मत, ताकत और संयम के प्रतीक के तौर पर याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ यह कार्रवाई बहुत सोच-समझकर और इंसानी मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई थी। उनके मुताबिक, आतंकियों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि भारतीय सेना इतनी बहादुरी और तेज़ी से जवाब देगी।

आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस प्रोडक्शन देश की बढ़ती मिलिट्री ताकत और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:2014 में घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है।डिफेंस एक्सपोर्ट 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये हो गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारतीय सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाने का लक्ष्य है।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका और मिलिट्री विरासत पर प्रोग्राम के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि अब महिलाओं को सेना में परमानेंट कमीशन दिया जा रहा है और उनके लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के दरवाज़े भी खोल दिए गए हैं।

इस इवेंट में मार्शल आर्ट, कलारीपयट्टू, मल्लखंभ और नेपाल आर्मी बैंड ने अपनी कला दिखाई। इस मौके पर राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और सीनियर आर्मी ऑफिसर भी मौजूद थे।