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Mansa Firing: परमिंदर सिंह झोटा की मौत, नशे के खिलाफ उठाते थे आवाज, साथी भी हुआ घायल

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

Mansa Firing : पंजाब के मानसा में मंगलवार, 13 अक्टूबर को दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मौत हो गई। गोली लगने के बाद उन्हें गंभीर हालत में मानसा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना में उनका एक साथी भी घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Mansa Firing : मेडिकल स्टोर पर हुई गोलीबारी, मालिक पर आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की घटना एक मेडिकल स्टोर पर हुई। बताया जा रहा है कि परमिंदर सिंह झोटा अपने साथी के साथ दवा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार पर दोनों पर गोली चलाने का आरोप लगा है। आरोप है कि झोटा पर लगातार तीन फायर किए गए। हालांकि, गोलीबारी के कारणों और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

Mansa Firing : नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे झोटा

बताया जा रहा है कि घटना के समय परमिंदर सिंह झोटा फेसबुक पर लाइव थे। वह पिछले कुछ वर्षों से पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका अभियान खास तौर पर उन दुकानों के खिलाफ रहता था, जहां कथित तौर पर नशीली गोलियां और अन्य प्रतिबंधित दवाएं बेचे जाने की शिकायतें सामने आती थीं।

Mansa Firing : राजा वड़िंग और बिक्रम सिंह मजीठिया ने उठाए सवाल

परमिंदर सिंह झोटा की मौत पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दुख जताया और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या राज्य सरकार की नाकामी को दर्शाती है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

वहीं, शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब में नशे की समस्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Mansa Firing : पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होंगे घटना के कारण

इस घटना के बाद मानसा में चिंता का माहौल है। गोलीबारी के पीछे की वजह, आरोपों की सच्चाई और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का पता पुलिस जांच के बाद ही चल सकेगा।

ED मामले पर बिक्रम मजीठिया का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- हाई कोर्ट के आदेश से उठे गंभीर सवाल

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

ED की चिट्ठियों और उनसे जुड़े मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने हाई कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा है।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान पंजाब पुलिस और पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की भूमिका सवालों के घेरे में रही। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर सबूतों को नुकसान पहुंचाने और आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।

अकाली नेता के मुताबिक, हाई कोर्ट के आदेश में पंजाब पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ED की ओर से भेजे गए पत्रों और उनकी वैधता की जांच में पुलिस को करीब दो महीने लग गए, जबकि इसी अवधि में कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए। मजीठिया ने सवाल उठाया कि यदि ED के पत्र वैध नहीं थे तो उनके आधार पर अधिकारियों को नोटिस क्यों जारी किए गए।

नितिन गोयल की कथित चैट का हवाला

बिक्रम मजीठिया ने नितिन गोयल की कथित चैट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों, गोपनीय फाइलों, लाइसेंस और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी का इस्तेमाल कुछ निजी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।

उन्होंने OSD राजबीर घुमन समेत कई लोगों को लेकर भी आरोप लगाए। मजीठिया ने दावा किया कि हाई कोर्ट के आदेश में राजबीर घुमन का कई बार उल्लेख किया गया है।

CBI जांच और FIR का दावा

मजीठिया ने दावा किया कि हाई कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।

अकाली नेता ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर कथित तौर पर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। उन्होंने इस मामले में कई अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

भगवंत मान सरकार पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए मजीठिया ने कहा कि एक तरफ सरकार ईमानदार मुख्यमंत्री और गुड गवर्नेंस की बात करती है, जबकि दूसरी ओर हाई कोर्ट के आदेश के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े इतने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपी गई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और मामले में आगे होने वाली जांच व कानूनी प्रक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होगी।

प्रताप सिंह बाजवा को दी बधाई

कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा को लेकर पूछे गए सवाल पर मजीठिया ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि बाजवा के सामने अपनी पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती होगी।

वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकार के वादे पूरे करने के बयान पर मजीठिया ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार के दावों के बारे में जनता को खुद फैसला करना चाहिए।

ड्रग्स और अवैध माइनिंग पर भी सरकार को घेरा

बिक्रम मजीठिया ने पंजाब में ड्रग्स और अवैध माइनिंग के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने रावी नदी में कथित माइनिंग गतिविधियों का मुद्दा उठाते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने का दावा किया। मजीठिया ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से सीमा क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।

फिलहाल ED से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले समय में जांच और अदालती प्रक्रिया के साथ इस मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान मजीठिया का AAP सरकार पर हमला, कहा– लोकतंत्र को दबाने की कोशिश हो रही है

मजीठा / सत्ता संदेश

हाईकोर्ट के दखल से बचा लोकतंत्र, कई वार्डों में नामांकन रद्द करने और वोटों में छेड़छाड़ के लगाए आरोप

पोलिंग बूथ के पास नारेबाजी और धक्कामुक्की के आरोप, मजीठिया ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों को दी चेतावनी

पोलिंग स्टाफ के लिए चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था की मांग, कहा– कर्मचारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ड्यूटी निभा रहे हैं

मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान वोट डालने पहुंचे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और उनकी पत्नी एवं विधायक गनीव कौर मजीठिया ने मतदान के बाद पत्रकारों से बातचीत की। इस मौके पर मजीठिया ने कहा कि जब भी लोकतंत्र को मजबूत करने की बात आती है, उनका परिवार हमेशा आगे रहता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में अमन-शांति, भाईचारे और लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक को बिना किसी डर और दबाव के अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।

मजीठिया ने दावा किया कि मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें रिटर्निंग ऑफिसर और एसडीएम की बदली, अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों के नामांकन पत्र रद्द करना, वोटर सूचियों में हेराफेरी और वोट काटने के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ध्यान में लाया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया।

अकाली नेता ने चुनाव अधिकारियों और पोलिंग स्टाफ से अपील करते हुए कहा कि वीडियोग्राफी और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुनिश्चित की जाए और कोई भी अधिकारी सरकार को खुश करने के लिए ऐसी गलती न करे, जिसके कारण भविष्य में उसे जवाबदेह होना पड़े। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की निगरानी में पूरी चुनाव प्रक्रिया की समीक्षा होगी।

वोटिंग के दौरान पोलिंग बूथ के पास आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी किए जाने का जिक्र करते हुए मजीठिया ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थक 100 मीटर की सीमा के भीतर मौजूद रहे और विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सबूत और वीडियो चुनाव आयोग तथा हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर को भेजे जाएंगे।

इसके अलावा मजीठिया ने पोलिंग स्टाफ की सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी निभा रहे अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के लिए चाय-पानी और भोजन का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए, क्योंकि वे पूरी रात और दिन लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

मजीठिया ने अंत में कहा कि लोग जिसे चाहे वोट दें, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली जीत तभी होगी जब जनता के फैसले को बिना किसी रुकावट के स्वीकार किया जाएगा।