ब्रेकिंग न्यूज़
भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने किया उद्घाटन

ओडिशा / सत्ता संदेश

ओडिशा में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में पूर्वी भारत की खेती को नई दिशा देने के लिए साझा रोडमैप पर गहन मंथन

श्री शिवराज सिंह चौहान बोले- पूर्वी भारत बन सकता है देश के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग, दलहन-तिलहन और टिकाऊ खेती पर दिया जोर

खेत बचाओ, माटी बचाओ, किसान बचाओ के संदेश के साथ केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह का संतुलित उर्वरक उपयोग पर बल

फार्मर आईडी, वैज्ञानिक अनुसंधान और खरीद व्यवस्था को श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया बदलाव की कुंजी

नकली खाद व कीटनाशक और घटिया बीज किसानों के खिलाफ बड़ा अपराध, ऐसे तत्वों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जाएगा- श्री शिवराज सिंह

मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने बताई क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन, मिलेट्स, ऑर्गेनिक खेती और किसान-हितैषी पहल

द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी के साथ पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने पूर्वी भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने का सशक्त आह्वान किया। ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से जुड़े इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दलहन-तिलहन उत्पादन, छोटी जोत वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक खेती, किसान रजिस्ट्री, बागवानी, कृषि ऋण, विपणन, नकली कृषि आदानों पर नियंत्रण और किसान आय वृद्धि जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा का खाका रखा गया।

पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की कृषि, किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय कृषि रणनीति को नई दिशा देने के लिए गंभीर विचार-विमर्श का मंच है। श्री चौहान ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरती पर एकत्र हुई यह “टीम एग्रीकल्चर” पूर्वी भारत की खेती की हालत को बेहतर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ बैठी है। उन्होंने पूर्वी भारत की उर्वरा भूमि, जल उपलब्धता, विविध जलवायु और किसानों की मेहनत को इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि थोड़े से सही प्रयासों से यही क्षेत्र भारत के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने किसानों को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता बताते हुए कहा कि किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और शक्तिशाली भारत की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा की रीढ़ कृषि है। उन्होंने कृषि के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे- 140 करोड़ देशवासियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना और किसानों की बेहतर आजीविका व आय वृद्धि सुनिश्चित करना।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना, नुकसान होने पर भरपाई करना और कृषि का विविधीकरण करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केवल धान और गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य उच्च मूल्य फसलों की ओर भी आगे बढ़ना होगा, क्योंकि पूर्वी भारत में इन सभी क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्वी राज्यों में छोटी जोत एक बड़ी वास्तविकता है, इसलिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ मॉडल बनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनाज के साथ फल, सब्जियां, मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने आईसीएआर, कृषि मंत्रियों और अधिकारियों से आग्रह किया कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग के मॉडल किसानों तक प्रेरक और व्यवहारिक रूप में पहुंचें।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने टिकाऊ कृषि की दिशा में मृदा स्वास्थ्य की रक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि बिना मृदा परीक्षण के अंधाधुंध खाद का प्रयोग खर्च भी बढ़ाता है और धरती की सेहत भी बिगाड़ता है, इसलिए किसानों को आवश्यकतानुसार ही उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने प्राकृतिक खेती को भी प्रधानमंत्री के फोकस का क्षेत्र बताते हुए किसानों से अपनी जमीन के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया।

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून से “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से संतुलित खाद उपयोग, मिट्टी की सेहत, आधुनिक तकनीक, योजनाओं की जानकारी और किसान जागरूकता पर विशेष बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के डायवर्जन पर रोक लगानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सब्सिडी वाला खाद केवल किसान और खेती के काम में ही उपयोग हो। उन्होंने नकली खाद, घटिया बीज और नकली कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ बड़ा अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कड़े कानून की आवश्यकता है और राज्यों को इस दिशा में सख्ती से कार्रवाई करनी होगी, ताकि किसानों की लागत न बढ़े और उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान मिल सके।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि पूर्वी क्षेत्र देश को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि दाल और तिलहन की खेती को बढ़ावा तभी मिलेगा जब किसान को यह भरोसा होगा कि उसकी उपज की खरीद सुनिश्चित है, इसलिए पीएम-आशा, खरीद प्रणाली, नैफेड, एनसीसीएफ और राज्य एजेंसियों की भूमिका को और प्रभावी बनाना होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने वैज्ञानिक शोध और तकनीक को खेत तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक संस्थानों का ज्ञान सीधे किसानों तक पहुंचे, यह समय की मांग है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे अपनी परिस्थितियों के अनुरूप विशेष अभियान चलाएं, ताकि रिसर्च, अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और योजनाओं की जानकारी समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचे।

उन्होंने फार्मर आईडी को किसान तक सुविधाएं सरल, पारदर्शी और तेज तरीके से पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उनके अनुसार फार्मर आईडी से किसान की जमीन, परिवार और अन्य विवरण एक जगह उपलब्ध होने से ऋण, उर्वरक वितरण और योजना लाभ में अनावश्यक देरी तथा परेशानी कम होगी, इसलिए इसे तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

श्री चौहान ने बागवानी, आम जैसी उच्च मूल्य फसलों, निर्यात क्षमता, स्वच्छ पौध सामग्री, नर्सरी व्यवस्था और बाजारोन्मुख कृषि पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत के कई राज्यों में फल, सब्जियां और विशिष्ट फसलें न केवल देश के भीतर बल्कि निर्यात के स्तर पर भी किसानों को अधिक मूल्य दिलाने की क्षमता रखती हैं।

ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन पूर्वी राज्यों के लिए कृषि भविष्य का साझा रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन पूर्वोदय की परिकल्पना को बल देगा और पूर्वी भारत की कृषि उत्पादकता, जलवायु-अनुकूल खेती और समावेशी कृषि विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री श्री मांझी ने कहा कि ओडिशा मूल रूप से कृषि प्रधान राज्य है और कृषि यहां की आजीविका, खाद्य सुरक्षा तथा सामाजिक-आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि को अधिक समावेशी, जलवायु अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इसी दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि दाल उत्पादन, खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता, क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन और खेती के विस्तार पर राज्य विशेष रूप से काम कर रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि धान उत्पादन और खरीद बढ़ने के साथ भंडारण, निकासी और विपणन की चुनौतियां भी सामने आई हैं, इसलिए अधिक उत्पादन के साथ बेहतर प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था पर समानांतर रूप से कार्य करना आवश्यक है।

श्री मांझी ने राज्य की किसान-हितैषी पहलों का उल्लेख करते हुए धान खरीद, इनपुट सहायता, पीएम-किसान के साथ सीएम-किसान सहायता, फसल बीमा, कृषि यंत्रीकरण, एफपीओ सशक्तीकरण, कोल्ड स्टोरेज विस्तार और कृषि उद्योग प्रोत्साहन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती से जोड़ने के लिए नीति समर्थन, बुनियादी ढांचा, संगठित विपणन और उद्यमिता आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने मिलेट्स को सुपर फूड बताते हुए कहा कि यह कम पानी और कम खाद में उगने वाली महत्वपूर्ण फसल है, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के लिए इसकी बड़ी उपयोगिता है। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती, पारंपरिक खाद्यान्न प्रजातियों के संरक्षण, जैव विविधता के पुनर्जीवन और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इन क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने एफपीओ, कोल्ड स्टोरेज, कृषि उद्यमिता, कॉफी उत्पादन और स्थानीय कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन को ओडिशा की प्राथमिकताओं में बताया। उनके अनुसार पूर्वी भारत के राज्यों के बीच श्रेष्ठ प्रथाओं, नवाचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान इस सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि बनेगा और यहां से निकले निष्कर्ष कृषि आत्मनिर्भरता तथा किसान समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी एवं श्री रामनाथ ठाकुर, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव, बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधि-मंत्री श्री अशोक कीर्तनिया, केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, केवीके, एफपीओ, स्टार्टअप्स, नाबार्ड और बैंकों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सतारा से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र को दी सौगात: महाराष्ट्र के 5 लाख ग्रामीण परिवारों को पक्के घरों का गौरवपूर्ण गृह प्रवेश

महाराष्ट्र /सत्ता संदेश


शिवराज सिंह ने दी महाराष्ट्र को PMAY-G के लिए 8,368.50 करोड़ रुपए की बड़ी केंद्रीय सहायता, ग्रामीण विकास को नई रफ्तार

शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी 35 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी: 122.98 करोड़ रु. से 35 बसावटों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

शिवराज ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर गरीब को पक्की छत’ का भरोसा दोहराया, बोले- बचे हुए पात्र परिवारों को भी मिलेगा आवास

1 जुलाई से विकसित भारत जी राम जी योजना की शुरुआत, गांवों के समग्र विकास को मिलेगी नई दिशा- शिवराज सिंह

प्याज किसानों को बड़ी राहत: आज से NAFED 12.35 रु. प्रति किलो की दर से खरीदी शुरू करेगा- शिवराज सिंह

शिवराज सिंह ने गन्ना उत्पादकों की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा: केंद्र और राज्य मिलकर निकालेंगे रास्ता

महा आवास अभियान में रिकॉर्ड समय में आवास पूर्ण कर महाराष्ट्र ने पेश किया सुशासन का मॉडल- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया, 5 लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपीं और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खननकर्म एवं माजी सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालकमंत्री श्री शंभूराज देसाई, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री श्री शिवेंद्रसिंह भोसले, मदद एवं पुनर्वसन मंत्री श्री मकरंद जाधव (पाटील), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य मंत्री श्री योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे और प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्की छत मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 5 लाख आवास पूर्ण कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणामोन्मुख प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महाराष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 8,368.50 करोड़ रु. की केंद्रीय अंश सहायता जारी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में ग्रामीण गरीबों के आवास निर्माण अभियान को और तेज करेगी तथा बेघर-मुक्त ग्रामीण महाराष्ट्र के संकल्प को मजबूत आधार देगी। 

श्री चौहान ने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम अब तक छूट गया है, उनके लिए भी रास्ता खुला है और सर्वे तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि बिजली, जल, स्वच्छता और सम्मानपूर्ण जीवन के साथ समग्र ग्रामीण जीवन-स्तर को ऊंचा उठाना है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए 122.98 करोड़ रु. की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री श्री फडणवीस को सौंपी। 95.99 किलोमीटर लंबाई की इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम होगी। 

शिवराज सिंह चौहान ने ‘महा आवास अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, इकाइयों और अधिकारियों को मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ सम्मानित करते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण का भाव साथ आता है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में जिस गति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विकसित भारत जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने जा रही यह पहल गांवों के समग्र और सुनियोजित विकास की नई आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की व्यापक रूपरेखा तैयार करेंगी, जिससे गांवों के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को विकसित गांवों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।

किसानों के मुद्दों पर विशेष रूप से बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार भाव प्रभावित हुए हैं, इसलिए आज से ही NAFED द्वारा 12 रु. 35 पैसे प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को तत्काल सहारा मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी और खरीदी व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। श्री चौहान ने अधिकारियों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहे और वास्तविक किसानों को उसका लाभ मिल सके। 

गन्ना उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक विमर्श कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि किसान देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। 

श्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने MSP में हालिया बढ़ोतरी, तिलहन-दलहन खरीदी, कपास मिशन, फार्मर आईडी, किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विस्तार जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 

शिवराज सिंह चौहान ने सतारा की पावन धरती को छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और सुशासन की प्रेरणास्थली बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के नायक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने देश को यह संदेश दिया कि सुशासन का अर्थ गरीबों के आँसू पोंछना, माताओं-बहनों का सम्मान सुनिश्चित करना, किसानों को समृद्ध बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाना है; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील शासन-दृष्टि को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को रिकॉर्ड 30 लाख आवासों की स्वीकृति मिली और राज्य ने रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूर्ण कर आज लाभार्थियों को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवासों की गुणवत्ता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली सुविधा उपलब्ध कराने और जमीनविहीन पात्र परिवारों को भी सहायता देकर इस अभियान को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के मॉडल में बदला है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य बेघर-मुक्त राज्य का निर्माण है और आने वाले समय में और अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्याज किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा घोषित NAFED खरीदी का स्वागत किया तथा गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय से समाधान निकालने का भरोसा व्यक्त किया। 

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़े जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, लाभार्थियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति रही।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना का दौरा किया; महत्वपूर्ण समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

अप्रैल 11, 2026:  केंद्रीय विद्युत एवं आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भूटान यात्रा के दूसरे दिन पुनात्सांगचू-I और पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना स्थलों का दौरा किया।

केंद्रीय मंत्री ने बांध के निर्माण हेतु पुनात्सांगछू-I परियोजना स्थल पर, कंक्रीट डालने हेतु आयोजित समारोह में भाग लिया, जो परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत परियोजना के पूरा होने पर, भूटान की जलविद्युत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

इस यात्रा के दौरान, श्री मनोहर लाल ने ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर दिया, भारत द्वारा वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग सहित निरंतर समर्थन के बारे में बताया और परियोजना को सुरक्षित और कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाने में दोनों पक्षों के इंजीनियरों और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्युत संयंत्र का निरीक्षण भी किया और परियोजना के कार्यान्वयन की स्थिति और हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद श्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगचू-II परियोजना का दौरा किया। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और श्री जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक द्वारा 11 नवंबर, 2025 को इसका संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया था। तब से यह भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरी है।

केंद्रीय मंत्री ने परियोजना के संचालनात्मक निष्पादन की समीक्षा की और बताया कि इससे पहले ही पर्याप्त बिजली और राजस्व उत्पन्न हो चुका है, साथ ही भारत को स्वच्छ ऊर्जा का निर्यात भी संभव हो रहा है। उन्होंने परियोजना के सफल क्रियान्वयन और संचालन दक्षता की सराहना की, भूटान के आर्थिक विकास में इसके योगदान को स्वीकार किया और सतत ऊर्जा विकास में भूटान को सहयोग देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया। इस दौरे में विद्युत संयंत्र और बांध स्थल का निरीक्षण भी शामिल था, जहां उन्हें चल रहे कार्यों की जानकारी दी गई।

श्री मनोहर लाल ने वांगडु फोडरंग द्जोंग का भी दौरा किया, जो भूटान की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भंडार है

केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले दो-दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे

आयुष मंत्रालय 10 अप्रैल, 2026 को विज्ञान भवन में विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 मनाएगा।  इस अवसर पर दो-दिवसीय संवादात्मक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में प्रमुख नीति निर्माता, शोधकर्ता, चिकित्सक और प्रतिनिधि एक साथ आकर सतत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण में होम्योपैथी की उभरती भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस संगोष्ठी का विषय सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है। इस वर्ष का आयोजन इस बात पर प्रकाश डालेगा कि होम्योपैथी किस प्रकार स्वास्थ्य सेवा के लिए एक समग्र, लागत प्रभावी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण प्रदान करती है – जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण पर सतत विकास लक्ष्य 3 (एसडीजी 3) जैसी वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के साथ-साथ देश भर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रख्यात विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में होम्योपैथी के क्षेत्र में प्रमुख अनुसंधान उन्नयन, जन स्वास्थ्य पहल और नीतिगत विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक मान्यता, नैतिक मानकों को मजबूत करने और होम्योपैथी को स्वास्थ्य प्रणालियों के मुख्यधारा में एकीकृत करने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों के बढ़ते बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में, यह आयोजन एक स्थायी चिकित्सा प्रणाली के रूप में होम्योपैथी की क्षमता को रेखांकित करेगा – जो न्यूनतम पारिस्थितिक पदचिह्न, संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग और शरीर के जन्मजात उपचार तंत्र को उत्तेजित करने पर केंद्रित है।

विशेष सत्रों में निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली संबंधी और पुराने रोगों के प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका और पारंपरिक औषध चिकित्सा पर निर्भरता कम करने में इसके योगदान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल औषधीय पद्धतियों, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में, देश में और वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी पहलों में, होम्योपैथी की स्वीकार्यता में वृद्धि देखी गई है। आयुष मंत्रालय साक्ष्य-आधारित पद्धतियों, बेहतर पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकरण के माध्यम से इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करने तथा एक लचीला, समावेशी और सतत स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों को नई गति प्रदान करने की उम्मीद है।

यह आयोजन हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा जिससे एक ऐसे भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा जहां स्वास्थ्य सेवा न केवल प्रभावी हो बल्कि न्यायसंगत, पर्यावरण के प्रति जागरूक और टिकाऊ भी हो।

एलपीजी संकट पर काबू पाने के प्रयास जारी: केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी

 त्रिशूर (केरल), 12 मार्च (भाषा) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बृहस्पतिवार को कहा कि एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) संकट से निपटने के प्रयास जारी हैं और भारत के लिए अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के रास्ते खुल रहे हैं।

गोपी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को संसद में एलपीजी संकट से जुड़े सवालों के जवाब दिए थे।

उन्होंने कहा कि कूटनीतिक संवेदनशीलता के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति से जुड़े कुछ मामलों का खुलासा नहीं किया जा सकता।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस संकरे मार्ग से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के लगभग एक चौथाई हिस्से और एलपीजी एवं उर्वरकों का परिवहन होता है।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया जाता है तो वैश्विक व्यापार एवं विकास के लिए बड़े जोखिम पैदा होंगे जिनमें खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और जीवनयापन की लागत में वृद्धि शामिल है।

गोपी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने सभी देशों से इस बारे में बात की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे ने जीवन को किस तरह प्रभावित किया है और छूट दिए जाने की मांग की है। मैं सटीक आंकड़े नहीं दे रहा लेकिन हमारे लिए अधिक एलपीजी प्राप्त करने के रास्ते खुल रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि अस्पतालों और श्मशान घाटों जैसी आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘मंत्रालय के तौर पर हमें लगता है कि स्थिति नियंत्रण में है लेकिन देश के बाहर के कई तकनीकी पहलुओं पर हमारा नियंत्रण नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि एलपीजी संकट ने कई देशों में दैनिक जीवन को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।’’

गोपी ने कहा कि गैस की कीमत विनियमित करने के लिए एक तंत्र मौजूद है और उसके निर्देशों के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कीमत तय करने का अधिकार पेट्रोलियम कंपनियों को दिया गया है क्योंकि वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आप यह कैसे कह सकते हैं कि चूंकि प्रधानमंत्री मोदी शासन संभाल रहे हैं इसलिए इसे वापस ले लिया जाना चाहिए? पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य हमारे लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर अन्य देशों के साथ युद्ध में शामिल नहीं हो सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर लोगों की तरह वह भी युद्ध के खिलाफ हैं।

गोपी ने कहा कि एलपीजी संकट से निपटने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान प्रशासन को संकट प्रबंधन के लिए कदम उठाने का अधिकार था और यह केवल मंत्रालय पर निर्भर नहीं करता।

उन्होंने गैस की कमी के कारण रेस्तरां बंद होने के बारे में कहा कि इसका समाधान खोजने और उन्हें फिर से खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘संकट के विरोध में हड़तालें हो सकती हैं लेकिन इस गंभीर स्थिति में पूरी दुनिया को हड़ताल पर जाना पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि संकट के समय लोगों को संयम बरतना चाहिए