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मारुति सुजुकी ने खर्च में कटौती के लिए उठाए कदम, जरूरत पर वर्क फ्रॉम होम और विदेश यात्राओं पर रोक लागू

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Maruti Suzuki India Limited ने परिचालन खर्च कम करने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने के लिए कई अहम कदम उठाने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि परिस्थितियों के अनुसार ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा दी जाएगी और विदेश यात्राओं पर अस्थायी रूप से रोक लगाई जाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की, जिसमें उसने कहा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi की मितव्ययिता (austerity) की अपील को गंभीरता से ले रही है और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

मारुति सुजुकी ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण कंपनी अपने संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

कंपनी के अनुसार, जहां संभव होगा वहां कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाएगी, जिससे परिचालन में लचीलापन बना रहे और यात्रा व अन्य खर्चों में कमी लाई जा सके। इसके साथ ही गैर-जरूरी विदेशी दौरों पर रोक लगाने का निर्णय भी लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर की सप्लाई चेन और लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में कंपनियां पहले से ही लागत नियंत्रण और दक्षता बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।

मारुति सुजुकी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय ऑटो सेक्टर मांग और वैश्विक आपूर्ति परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भी वह स्थिति के अनुसार अपने परिचालन में आवश्यक बदलाव करती रहेगी।

दो जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस अब वर्चुअल मोड में, 20% रोटेशनल वर्क फ्रॉम होम होगा लागू- श्री शिवराज सिंह


दिल्ली /सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों में सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग का फैसला; बिजली, ईंधन और सरकारी दौरों पर सख्त संयम- श्री शिवराज सिंह

शादी जैसे अतिआवश्यक अवसरों को छोड़कर 1 साल तक सोना नहीं खरीदेंगे कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी

खाद्य तेल की खपत घटाने को चलेगा अभियान, खेत बचाओ अभियान और प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस- श्री शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील पर श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बड़े निर्णय

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील को प्रशासनिक अमल का रूप देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बड़े फैसले किए। अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में एक तरफ जहां बचत, ईंधन-संरक्षण, बिजली नियंत्रण, वर्चुअल कार्यप्रणाली और सरकारी खर्च घटाने के उपाय तय किए गए, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने एक वर्ष तक विशेष पारिवारिक परिस्थितियों को छोड़कर सोना नहीं खरीदने का भी सामूहिक संकल्प लिया।वैश्विक चुनौतियों और बदलते आर्थिक माहौल के बीच केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संदेश दे रही है कि राष्ट्रहित में संयम और बचत की शुरुआत सरकार खुद से करेगी। इसी दिशा में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि शिक्षा और भूमि संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर कई ऐसे फैसले किए, जो शासन, समाज और कृषि – तीनों स्तरों पर सकारात्मक असर डालने वाले हैं।

कृषि भवन, नई दिल्ली में आज आयोजित इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण संदेश उस समय उभरा, जब अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के आह्वान पर सामूहिक रूप से यह फैसला किया कि अगले एक वर्ष तक, केवल बेटी की शादी या किसी विशेष अपरिहार्य पारिवारिक अवसर जैसी परिस्थितियों को छोड़कर, वे सोना नहीं खरीदेंगे। यह निर्णय औपचारिक सरकारी आदेश से अधिक एक स्वैच्छिक नैतिक-सामाजिक संकल्प के रूप में है, जिसे श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अपील के प्रति गंभीर प्रतिक्रिया और राष्ट्रहित में व्यक्तिगत संयम का उदाहरण बताया।

प्रशासनिक स्तर पर बैठक में तय किया गया कि गुवाहाटी और विशाखापट्टनम में आगामी दिनों में होने वाली दो जोनल कॉन्फ्रेंस अब फिजिकल मोड में नहीं होंगी बल्कि वर्चुअल मोड में आयोजित की जाएंगी। इससे यात्रा, आवास, स्थल, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित खर्चों में कमी आएगी जबकि राज्यों और हितधारकों के साथ संवाद और समीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।

कार्यालयों में बिजली संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। लाइट, पंखे, एसी, कंप्यूटर और अन्य उपकरण आवश्यकता न होने पर बंद रखने के निर्देश केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा दिए गए हैं जबकि एयर-कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनावश्यक बिजली खपत रोकी जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए रोटेशन के आधार पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि इसके साथ यह भी कहा गया है कि फाइल निस्तारण, बैठकों, समन्वय, राज्य-संबंधी कार्य और नियमित कार्यालयीन कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। घर से काम करने वाले कर्मचारी फोन, ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस के माध्यम से उपलब्ध रहेंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि ईंधन बचत और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था निदेशक स्तर तक बढ़ाई जाएगी जबकि मंत्रालय में लगभग एक-तिहाई वाहनों के उपयोग को कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है, जिससे ईंधन, वाहन रखरखाव, चालक व्यवस्था और अन्य संबंधित खर्चों में कमी लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकारी दौरों और बैठकों को भी अब अधिक नियंत्रित और जरूरत-आधारित बनाया जाएगा। केवल अत्यावश्यक दौरे ही किए जाएंगे और जहां संभव होगा, समीक्षा, परामर्श और बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएंगी ताकि बड़े दलों की अनावश्यक यात्रा रोकी जा सके और खर्च में कमी लाई जा सके।

बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खाद्य तेल की खपत को लेकर भी रहा। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह के निर्देश पर मंत्रालय ने फैसला किया है कि खाद्य तेल के संतुलित और स्वस्थ उपयोग के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अत्यधिक खपत कम हो, स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़े और देश की खाद्य तेल आयात निर्भरता घटाने के लक्ष्य को बल मिले। खाद्य तेल और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए चल रहे मिशन को और प्रभावी बनाया जाएगा।

कृषि क्षेत्र को लेकर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग और आईसीएआर ने “खेत बचाओ अभियान” चलाने का फैसला किया है, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर मिट्टी की जांच और उसमें मौजूद तत्वों के आधार पर किसानों को यह सलाह देंगे कि कौन-सा खाद, कितनी मात्रा में और किस जरूरत के अनुसार डाला जाना चाहिए। इसका उद्देश्य अनावश्यक उर्वरक उपयोग रोकना और आयातित खादों पर निर्भरता कम करना है। श्री चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान को 1 जून से 15 दिनों तक पूरे देश में अधिक संगठित और प्रभावी रूप से चलाया जाएगा। राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों को जागरूक किया जाएगा कि आवश्यक खाद का उपयोग जरूर करें लेकिन अनावश्यक उपयोग से बचें ताकि लागत भी घटे और जमीन की सेहत भी सुरक्षित रहे।

खरीफ सीजन की तैयारी को भी इस पूरी रणनीति से जोड़ा गया है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 मई को होने वाली खरीफ कॉन्फ्रेंस में संतुलित खाद उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा जबकि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग से एक विशेष सत्र रखा जाएगा। इस सत्र में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है ताकि प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक और प्रेरक अनुभव राज्यों के साथ साझा किए जा सकें। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में छोटे-छोटे कदम भी बड़े राष्ट्रीय परिणाम दे सकते हैं। उनका कहना है कि बचत, संयम और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और यह सब करते हुए खेती, खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आजीविका किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

दिल्ली में प्रदूषण पर सख्त फैसला: कल से सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में 50% ‘वर्क फ्रॉम होम’ ज़रूरी, वर्कर्स को 10,000 रुपये का मुआवजा

नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से हालात गंभीर हो गए हैं, जिसके चलते ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) 4 लागू है। इस खतरनाक हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कल से शहर के सभी सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में 50% ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) ज़रूरी कर दिया है। इसका मतलब है कि इन संस्थानों में सिर्फ़ 50% अटेंडेंस की ही इजाज़त होगी। इस फैसले की जानकारी दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने दी।

वर्कर्स को मुआवजा

सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि GRAP-3 के दौरान काम बंद होने से प्रभावित रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को 10,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि GRAP 3 में 16 दिनों तक कंस्ट्रक्शन का काम बंद रहा था, और दिल्ली सरकार यह 10,000 रुपये सीधे रजिस्टर्ड वर्कर्स के अकाउंट में जमा करेगी।नियमों से छूट

हालांकि, यह 50% WFH नियम सभी सुविधाओं पर लागू नहीं होगा। हेल्थ केयर हॉस्पिटल, फायर सर्विस, जेल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी ज़रूरी सेवाओं को इस नियम से छूट दी गई है।सरकार ने साफ़ कर दिया है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।