ब्रेकिंग न्यूज़
इंदौर से ब्रिक्स कृषि सहयोग को नई दिशा; केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ सत्र को संबोधित

मध्य प्रदेश / सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और स्वच्छता के प्रतीक इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का आज शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण एवं  ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि शक्तिसांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को आगे बढ़ाते हुए इस मंत्र के साथ दुनिया को एक परिवार मानते हुए शांतिसमन्वय और साझेदारी आधारित विकास पर जोर दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित थे।

 केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में “अतिथि देवो भवः” की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए सभी प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि भारत हमेशा वैश्विक एकताशांति और सहयोग का पक्षधर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण युद्ध नहीं शांतिसंघर्ष नहीं समन्वय” पर आधारित हैजो वैश्विक कृषि साझेदारी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।

  उन्होंने कहा कि यह संवाद विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों- जैसे जलवायु परिवर्तनप्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और बाजार की अनिश्चितता का सामूहिक समाधान खोजने के लिए महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होते हैंतो दुनिया की खाद्य सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ हो जाएगी।

  केंद्रीय मंत्री चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में लगभग 4.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश का कुल खाद्य उत्पादन बढ़कर लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन 118 मिलियन टन के करीब पहुंचाजबकि बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो गया है। मछली उत्पादन भी बढ़कर 19 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता हैजिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने किसानों के योगदान को सराहते हुए कहा कि यह उपलब्धियां उनके कठिन परिश्रम और सरकार की संवेदनशील नीतियों का परिणाम हैं।

 शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल कृषि से जुड़ा है और यह क्षेत्र न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं- जैसे उन्नत बीजसिंचाईतकनीक और किसान सहायता कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इनसे किसानों को व्यापक लाभ मिला है।

 उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान इस श्रेणी में आते हैं और इन्हें सशक्त बनाना ही समावेशी विकास की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा हैजबकि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं।

प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए देशव्यापी खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और सेवाएं पहुंचाई जा रही हैंजिससे प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट्स का उपयोग बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने महिला सशक्तिकरण को कृषि विकास का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि आज करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। ड्रोन दीदी” जैसी पहलें ग्रामीण भारत में तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण बन रही हैं।

युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृषि में नवाचारस्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही हैजिससे कृषि क्षेत्र अधिक आकर्षक और आधुनिक बन रहा है।

उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि सभी मिलकर छोटे किसानों को सशक्त बनानेखाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संवाद अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक कृषि को नई दिशा देगा।

‘खेत बचाओ अभियान’ से वंचित किसानों को मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 1 जून से 30 जून तक चलाया जाने वाला ‘खेत बचाओ अभियान’ भारत का एक राष्ट्रीय स्तर का कृषि जागरूकता एवं विस्तार अभियान है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना ने इसके कुछ उद्देश्य बताए है।

खेत बचाओ अभियान के उद्देश्य

• वंचित किसानो को  बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड जारी करना
• रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित खाद उपयोग को कम करना।
• मिट्टी परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना।
• हरी खाद, जैविक एवं जैव-उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
• किसानों को मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि सलाह देना।
• खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर देना।

एसएलबीसी, पंजाब के मुख्य प्रबन्धक सुनील कुमार द्वारा बताया गया की  इस अभियान में पंचायतें Krishi Vigyan Kendra (KVK), Indian Council of Agricultural Research, राज्य कृषि विभाग, बैंकों के अधिकारी सहित  जनप्रतिनिधि भी भाग लेंगे. अभियान के अंतर्गत अन्य गतिविधियां इस प्रकार होगी:

• किसान क्रेडिट कार्ड से लाभार्थियों को जोड़ना।
• पीएम-किसान योजना से छूटे किसानों का पंजीकरण।
• दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम और कॉटन मिशन की जानकारी।
• कृषि यंत्रीकरण (मशीनरी) संबंधी लाभ और योजनाएं।

इस अभियान का लक्ष्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि एक जन आंदोलन खड़ा करना है, ताकि:

• खेत सुरक्षित रहें,
• मिट्टी की गुणवत्ता सुधरे,
• खेती की लागत नियंत्रित रहे,
• किसान वैज्ञानिक खेती अपनाएं,
• गांव स्तर पर बेहतर कृषि प्रबंधन की संस्कृति विकसित हो
• औरवंचित किसान क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े.

पंजाब राज्य मे यह अभियान “कम खाद, सही खाद, सही सलाह” के सिद्धांत पर चलाया जा रहा और किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की ओर प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड से संबन्धित अन्य जानकारी हेतु नजदीकी बैंक शाखा एवं अग्रणी जिला प्रबन्धक से सम्पर्क कर सकते है.

खेत बचाओ अभियान’ बना जन-आंदोलन, 9.42 लाख से अधिक किसानों ने अपनाया संतुलित उर्वरक उपयोग

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां जारी हैं। बृहस्पतिवार तक अभियान के अंतर्गत 9.42 लाख से अधिक किसानों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।

अभियान के तहत देशभर में अब तक 17,834 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 6.983 लाख किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त 3,698 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1,57,438 प्रतिभागियों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई।

किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8,850 प्रदर्शनों का आयोजन किया गया, जिनमें जैविक एवं वैकल्पिक पोषक स्रोतों के उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए 5,237 पंच, सरपंच एवं जिला परिषद सदस्यों को भी जोड़ा गया। वहीं, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 9,609 इनपुट डीलरों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।

किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान हित समूहों के माध्यम से भी अभियान को मजबूती मिली है। अब तक 8,383 किसान-सदस्यों ने इन कार्यक्रमों में भाग लेकर वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की है।

व्यापक जनसंपर्क गतिविधियों के अंतर्गत देशभर में 60,477 स्थानों पर बैनर, पोस्टर एवं होर्डिंग्स प्रदर्शित   किए गए। इसके साथ ही 1,027 रेडियो एवं सामुदायिक रेडियो वार्ताओं तथा 240 टीवी एवं डिजिटल मीडिया कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और आमजन तक अभियान का संदेश पहुंचाया गया।

सोशल मीडिया मंचों के प्रभावी उपयोग से अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अब तक लगभग 3.505 करोड़ लोगों तक अभियान का संदेश पहुंच चुका है।

अभियान का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उत्पादक कृषि भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रमासिया गांव से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में चलाया जाएगा।

अभियान के शुभारंभ पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा।” उन्होंने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण को अपनाने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी और कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगी। किसानों को मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर किसान के पास सॉयल हेल्थ कार्ड होना चाहिए, ताकि वह अपनी जमीन की जरूरत के अनुसार खाद का उपयोग कर सके। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन जैसी फसलों के लिए विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीकों और पानी बचाने वाली खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। सरकार का लक्ष्य खेती को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”

दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है।

एक जून से शुरू हो रहे महीनेभर चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए केंद्रीय कृषि ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस खेत को बचाने, लागत को संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने रसायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन-सी फसल लें, कहाँ फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर किसान को स्थिति-विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए KVKs को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है, साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें KVK, ICAR संस्थान, AICRP केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ICAR संस्थानों और KVKs की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी।