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ईरान पर अमेरिका का फिर बड़ा प्रहार: 4 ड्रोन मार गिराए, 5वें के ठिकाने को किया तबाह; ट्रंप बोले- “ईरान अब कमजोर”

इंटरनेशनल डेस्क : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर एक बार फिर जोरदार हमला किया है, जिसे अमेरिकी सेना ने “रक्षात्मक कार्रवाई” करार दिया है। इस हफ्ते में यह दूसरी बार है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई की है।

ड्रोन हमलों को किया नाकाम: अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया जब ईरानी सेना की ओर से आक्रामक गतिविधियां देखी गईं। अमेरिकी सेना ने ईरान के 4 ड्रोन मार गिराए और एक ऐसे सैन्य ठिकाने पर हमला किया, जहां से पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी हो रही थी। अधिकारियों का दावा है कि इन ड्रोनों से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को गंभीर खतरा था।

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान कमजोर स्थिति में” इस सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान अब “कमजोर स्थिति में बातचीत” कर रहा है। ट्रंप ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच जल्द ही समझौता हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते के अंत में उनकी सरकार और तेहरान के बीच समझौते को लेकर काफी प्रगति हुई थी, हालांकि अभी बातचीत को अंतिम रूप देना बाकी है।

रणनीतिक उद्देश्य और चुनौतियां : राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समझौता करना है जिससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ फिर से सामान्य रूप से खुल सके और ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर किया जा सके। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे ईरान के यूरेनियम को चीन या रूस ले जाने की अनुमति नहीं देंगे। हालांकि, अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर रिपब्लिकन नेताओं में चिंता बनी हुई है।

होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमला: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, शेयर बाजार में गिरावट के आसार

बिजनेस डेस्क : खाड़ी देशों में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि जास्क द्वीप के करीब एक अमेरिकी युद्धपोत पर दो मिसाइलें दागी गई हैं। बताया जा रहा है कि ईरानी चेतावनियों को नजरअंदाज करने के कारण हुए इस हमले के बाद अमेरिकी जहाज को अपनी सुरक्षा के लिए वापस लौटना पड़ा।

कच्चे तेल में लगी आग: इस हमले की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% की भारी तेजी के साथ 113.35 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं,। जानकारों का मानना है कि यदि कीमतें इसी स्तर पर रहीं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का भारी दबाव बनेगा, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।

शेयर बाजार पर संकट के बादल: वैश्विक बाजारों में इस तनाव का असर साफ़ दिख रहा है। अमेरिकी बाजार (नैस्डैक, डाउ जोंस) और यूरोपीय सूचकांक लाल निशान में आ गए हैं। भारतीय निवेशकों के लिए भी मंगलवार की सुबह चिंताजनक हो सकती है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) में गिरावट को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मंगलवार (5 मई) को सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत ‘गैप-डाउन’ (बड़ी गिरावट) के साथ हो सकती है।

ट्रंप का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम‘: यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक नौसैनिक मिशन की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना है।

भारत के लिए बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर एलएनजी टैंकर ‘मुबाराज’ पहुंचा भारतीय जलक्षेत्र के करीब

नेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर आई है। एलएनजी (LNG) से लदा एक विशाल टैंकर जहाज, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, अब कुछ ही दिनों में भारत पहुंचने वाला है।

युद्ध के बीच फंसा था जहाज : जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस जहाज का नाम ‘मुबाराज’ है। यह जहाज मार्च 2026 में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दास द्वीप संयंत्र से एलएनजी भरकर निकला था। मार्च में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से यह जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ था और 31 मार्च के आसपास इसने सिग्नल भेजना भी बंद कर दिया था।

तनाव कम होने का संकेत: युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब किसी एलएनजी टैंकर ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार किया है। सोमवार को यह जहाज भारतीय जलक्षेत्र के पास फिर से दिखाई दिया, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक में तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मुबाराज मई के पहले सप्ताह में भारत पहुंच सकता है।

एलएनजी का महत्व: एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है ताकि इसे लंबी दूरी तक आसानी से ले जाया जा सके। भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी की कड़ी: 31 जहाजों को रोका, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा

इंटरनेशनल डेस्क: U.S. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को और सख्त कर दिया है, जिसके तहत अब तक 31 जहाजों को वापस लौटने या बंदरगाह पर जाने के लिए मजबूर किया गया है। यह नाकेबंदी 13 अप्रैल, 2026 से शुरू हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को पूरी तरह से रोकना है। CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या वहां से निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

भारी सैन्य तैनाती : इस व्यापक ऑपरेशन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी बड़ी सैन्य ताकत झोंक दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नाकेबंदी के लिए 10,000 से अधिक सैनिक, 100 से ज्यादा फाइटर और निगरानी विमान, और 17 से अधिक युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इन सैन्य संसाधनों में एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर, ड्रोन और रिफ्यूलिंग विमान शामिल हैं, जो निरंतर निगरानी कर रहे हैं। जिन जहाजों को रोका गया है, उनमें से अधिकतर तेल टैंकर हैं और अधिकांश ने अमेरिकी आदेशों का पालन किया है।

वैश्विक तेल मार्ग पर प्रभाव: इस नाकेबंदी का सबसे बड़ा प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहाँ जहाजों की आवाजाही अत्यंत धीमी हो गई है और विशेषज्ञों का मानना है कि 30 जून तक स्थिति सामान्य होने की संभावना लगभग शून्य है। बाजार के आंकड़ों और निवेशक की धारणा के अनुसार, आने वाले समय में भी इस क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है।

आर्थिक और रणनीतिक दबाव : विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सैन्य कदम नहीं है, बल्कि ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बनाने की अमेरिका की एक रणनीति है। हालांकि सीजफायर की अवधि बढ़ाई गई थी, लेकिन बातचीत में कोई ठोस परिणाम न निकलने के कारण अमेरिका ने अपनी सख्ती जारी रखी है। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जब तक कोई समझौता नहीं होता, ईरानी बंदरगाहों पर यह नौसैनिक नाकेबंदी जारी रह सकती है।

24 घंटे के भीतर पलटा फैसला: ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में गनबोट्स ने की जहाजों पर फायरिंग

इंटरनेशनल डेस्क : खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। शुक्रवार को ईरान ने जिस होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का ऐलान किया था, उसे 24 घंटे के भीतर ही दोबारा बंद कर दिया गया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने के जवाब में की गई है।

बाजार में उथल-पुथल और अमेरिकी रुख : शुक्रवार को जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर रास्ता खोलने की पुष्टि की थी, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% की गिरावट दर्ज की गई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कदम का स्वागत किया था। लेकिन, जब ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौते तक अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी, तो ईरान ने अपना फैसला बदल दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया गया है।

युद्ध जैसी स्थिति: गनबोट्स से हमला हालात तब और बिगड़ गए जब शनिवार को ओमान के तट से 20 मील दूर दो व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की गई। जहाज के कप्तानों के अनुसार, यह हमला ईरानी गनबोट्स द्वारा किया गया था। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सख्त लहजे में कहा है कि उनकी नेवी दुश्मनों को करारी हार देने के लिए तैयार है।

22 अप्रैल की समयसीमा और संभावित खतरा: क्षेत्र में लागू युद्धविराम अब केवल तीन दिन में, यानी 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि इस तारीख तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने भी मई 2026 में विकसित अपनी नई मिसाइलों के इस्तेमाल की धमकी दी है।

सोने-चांदी की कीमतों में आया ‘भूचाल’: एक ही दिन में ₹11,000 महंगी हुई चांदी, सोना भी ₹1.56 लाख के पार; जानें आज का नया रेट

बिजनेस डेस्क: सर्राफा बाजार में बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जिसने खरीदारों और निवेशकों को हैरान कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदले हालातों के कारण घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं।

चांदी की तूफानी तेजी: दिल्ली बुलियन मार्केट में चांदी की कीमत में एक ही दिन में 11,000 रुपये (करीब 5%) का भारी उछाल आया है। अब एक किलो चांदी का भाव 2,51,000 रुपये पर पहुँच गया है, जबकि मंगलवार को यह 2,40,000 रुपये पर थी।

सोना भी हुआ बेकाबू: 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत में भी 3,200 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है। सोना अब 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुँच गया है।

तेजी की असल वजह: इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण सात समंदर पार अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 2 हफ्ते का सीजफायर (संघर्ष विराम) है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि ईरान ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को सुरक्षित व्यापारिक आवाजाही के लिए खोल देगा।

मार्केट एक्सपर्ट्स की राय: एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक, वैश्विक तनाव कम होने से डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। इस राहत भरी खबर के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख किया है, जिससे मांग और कीमतें दोनों बढ़ गई हैं।

ग्लोबल मार्केट का हाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने का भाव 2.07% बढ़कर 4,803.33 डॉलर प्रति औंस और चांदी 6% की छलांग लगाकर 77.33 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।यदि आप इस सीजन में गहने बनवाने या निवेश करने की योजना बना रहे थे, तो आपको अपना बजट दोबारा चेक करने की जरूरत पड़ सकती है।

ईरान-अमेरिका युद्ध : ट्रंप ने किया 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान; ‘विनाशकारी’ डेडलाइन से ठीक पहले रुकी जंग

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच मंडरा रहे महायुद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘पूरी सभ्यता’ को तबाह करने की अपनी रात 8 बजे की डेडलाइन खत्म होने से मात्र दो घंटे पहले ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान किया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि यह सीजफायर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध के बाद हुआ है।

सबसे बड़ी शर्त: यह युद्धविराम इस शर्त पर आधारित है कि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित रूप से फिर से खोल देगा।

इजराइल भी शामिल: व्हाइट हाउस के अनुसार, इजराइल भी इस दो हफ्ते के सीजफायर का हिस्सा है और वह भी बातचीत जारी रहने तक अपनी बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है।

ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: ट्रंप ने बताया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10-पॉइंट का प्रस्ताव मिला है, जिसे वे बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार मानते हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और वे एक स्थायी शांति समझौते के काफी करीब हैं।

ईरान का दावा: दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी जीत बताते हुए कहा है कि अमेरिका को उनका प्रस्ताव मानने के लिए विवश होना पड़ा है।

इस प्रस्ताव में प्रतिबंधों को हटाने, यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी जैसी शर्तें शामिल हैं।अगले दो हफ्तों का समय इस समझौते को अंतिम रूप देने और लंबे समय तक चलने वाली शांति स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

‘होर्मुज में सिर्फ हमारे नाविक मारे गए’: 60 देशों की बैठक में भारत ने दुनिया को चेताया

इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन की पहल पर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए आयोजित 60 से अधिक देशों की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक में भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है।

इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि होर्मुज संकट में अब तक 3 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं, जो विभिन्न विदेशी जहाजों पर कार्यरत थे। भारत ने जोर देकर कहा कि वह एकमात्र ऐसा देश है जिसने खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के दौरान अपने नागरिकों की जान गंवाई है।

ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा: विदेश सचिव ने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी (LNG) गुजरता है, और इसके बंद होने से वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है।

कूटनीति की अपील: भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के जरिए रास्ता निकालने की अपील की है। भारत का मानना है कि इस पूरे संकट का समाधान केवल बातचीत और शांतिपूर्ण कूटनीति से ही संभव है।

सप्लाई पर असर: ईरान की सेना (IRGC) द्वारा स्ट्रेट को अवरुद्ध किए जाने से भारत के साथ-साथ चीन, जापान, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की पेट्रोल-डीजल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।यह बैठक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की सरकार द्वारा वैश्विक व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए बुलाई गई थी।

ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: ईरानी तेल से हट सकता है अमेरिकी बैन, वैश्विक स्तर पर कम होंगी कच्चे तेल की कीमतें

बिजनेस डेस्क: दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में टैंकरों में फंसे लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा सकता है।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। प्रतिबंध हटने से ग्लोबल सप्लाई में इजाफा होगा, जिससे कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह तेल अगले 10 दिनों से लेकर दो हफ्तों तक की सप्लाई सुनिश्चित कर सकता है।

कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह: कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल का मुख्य कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) का बंद होना है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से प्रतिदिन 10 से 14 मिलियन बैरल तेल की कमी पैदा हो गई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका फिजिकल सप्लाई बढ़ाने के कदम उठा रहा है।

रूस के बाद अब ईरान पर नरम रुख: इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी ने इसी तरह का कदम उठाते हुए टैंकरों में फंसे प्रतिबंधित रूसी तेल को बेचने की अनुमति दी थी, जिससे ग्लोबल सप्लाई में 130 मिलियन बैरल का इजाफा हुआ था।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserve) से भी भंडार जारी करने की योजना बना रहा है, जो पिछले हफ्ते G7 देशों द्वारा जारी किए गए 400 मिलियन बैरल के अलावा होगा।

जापान के साथ महत्वपूर्ण बैठक: इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को व्हाइट हाउस में जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से भी मुलाकात करेंगे। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से जहाजों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करना और जापान के रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करने पर चर्चा करना होगा।

ईरान के परमाणु हथियार पर ट्रंप की बड़ी चेतावनी: ‘एक घंटे में कर देगा इस्तेमाल, पूरा मध्य-पूर्व हो जाएगा तबाह’

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान के हाथ परमाणु हथियार लग गए, तो वह उनका इस्तेमाल करने में एक घंटा या एक दिन भी नहीं लगाएगा और तुरंत हमला कर देगा। उन्होंने आगाह किया कि इससे न केवल इज़राइल, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व (Middle East) तबाह हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को ‘हिंसक और क्रूर’ बताते हुए दावा किया कि ईरानी प्रशासन ने पिछले तीन हफ्तों में अपने ही 32,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। उन्होंने ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि केवल दो हफ्तों के हमलों में ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। ट्रंप के दावों के अनुसार, अब ईरान के पास न तो वायुसेना बची है, न ही नौसेना और उनके एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी नष्ट हो चुके हैं।इसके अलावा, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि यह दुनिया के लिए एक बड़ा ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से कई देश अपनी ऊर्जा का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन और जापान जैसे देशों को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वहाँ अपने युद्धपोत (Warships) तैनात करने चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी थी।