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हेगसेथ ने भारत-पाक संघर्षविराम पर ट्रंप के दावे का किया समर्थन, भारत को बताया हिंद-प्रशांत रणनीति का प्रमुख साझेदार

सिंगापुर / सत्ता संदेश

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने शनिवार को राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने तथा संघर्षविराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया।

सिंगापुर में आयोजित Shangri-La Dialogue के दौरान अपने संबोधन और बातचीत में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से किया जाना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। नई दिल्ली कई अवसरों पर इस नीति को स्पष्ट रूप से दोहरा चुकी है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर

हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को और करीब लाती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत के योगदान की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, खुफिया साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक नजर

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दक्षिण एशिया, चीन, ताइवान, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने क्षेत्रीय स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ का बयान एक ओर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

हालांकि भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी भूमिका को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना रखते हैं, विशेषकर रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में।

क्वाड की वास्तविक चुनौती उसके उद्देश्यों को धरातल पर उतारना: विशेषज्ञ

वाशिंगटन / सत्ता संदेश

Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड को लेकर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि समूह की वास्तविक परीक्षा अब उसके घोषित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में है। विशेषज्ञों ने यह टिप्पणी भारत की ओर से हाल में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में की।

क्वाड में India, United States, Japan और Australia शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्वाड ने अपनी उपस्थिति और गतिविधियों को काफी विस्तार दिया है, लेकिन अब सदस्य देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे घोषणाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणाम प्रस्तुत करें।

हाल ही में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सहयोग और मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। भारत ने इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस समूह की भूमिका पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि क्वाड को केवल सुरक्षा मंच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, वैक्सीन सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे गैर-सैन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत क्वाड में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वह समूह को संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि क्वाड का उद्देश्य किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्वाड की सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश अपने साझा हितों को किस हद तक ठोस परियोजनाओं और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग में बदल पाते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को मिलेगी रफ्तार, एक जून से चार दिवसीय दौरे पर आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक जून से चार दिवसीय भारत दौरे पर आएगा। इस महत्वपूर्ण वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के अधिकारी व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बातचीत में अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के साथ-साथ बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़े हैं और अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित समझौते को द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल व्यापारिक अड़चनों को दूर करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना भी है। खासतौर पर डिजिटल व्यापार, विनिर्माण, कृषि उत्पादों की पहुंच, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को अधिक मजबूत और स्थिर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतरिम समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों में तत्काल राहत और सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके। इससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच और कुछ गैर-शुल्क प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। वहीं अमेरिका भी भारत में निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और सहूलियत चाहता है। ऐसे में आगामी वार्ता को दोनों देशों के व्यापारिक हितों के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

भारत-साइप्रस रिश्तों को मिली नई मजबूती, रणनीतिक साझेदारी के साथ कई अहम समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को Nikos Christodoulides के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत और Cyprus ने अपने संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें औपचारिक रूप से “रणनीतिक साझेदारी” में बदलने का ऐलान किया।

दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, नौवहन, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही साझा परियोजनाओं और निवेश को गति देने के उद्देश्य से एक संयुक्त कार्यबल गठित करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं तथा नई रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक सहयोग को और मजबूत करेगी।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत को वैश्विक स्तर पर उभरती महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भविष्य में व्यापारिक और समुद्री संपर्क को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक संयुक्त संपादकीय लेख लिखा

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बताया कि उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मिलकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें इस पक्ष का विस्तार से वर्णन किया गया है कि भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध एक निर्णायक चरण पर पहुंच गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच का संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह मजबूत संबंध नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

मैंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ मिलकर एक संपादकीय लेख लिखा है जिसमें जानकारी दी गई है कि भारत-इटली संबंध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हमारी साझेदारी नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है।

बहुपक्षीय अभ्यास प्रगति-2026 का उमरोई, मेघालय में शुभारंभ हुआ

मेघालय / सत्ता संदेश

मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आज बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास प्रगति-2026 का शुभारंभ हुआ। इस सैन्य अभ्यास में भूटानकंबोडियाइंडोनेशियालाओसमलेशियामालदीवम्यांमारनेपालफिलीपींससेशेल्सश्रीलंका और वियतनाम सहित 12 मित्र देशों ने भागीदारी कर रहे हैं। भारतीय सेना ने इन सैन्य टुकड़ियों के आगमन पर उनका गर्मजोशी और पारंपरिक रूप से स्वागत किया और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य सत्कार को दर्शाता है।

प्रगति (पीआरएजीएटीआई) , जिसका अर्थ हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी है, समानता, मित्रता और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को पेशेवर आदान-प्रदान करने, एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और घनिष्ठ सैन्य संबंध बनाने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।

उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में भारतीय सेना के अपर महानिदेशक (इन्फैंट्री) मेजर जनरल सुनील शेओरान ने सभी टुकड़ियों का स्वागत किया और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सामूहिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को खुलेपन, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की तत्परता के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि प्रत्येक राष्ट्र की क्षमता और दृष्टिकोण अभ्यास के सामूहिक उद्देश्यों को हासिल करने में सार्थक योगदान देंगे।

इस अभ्यास के उद्देश्यों में संयुक्त अभियानों में भाग लेने वाले देशों के बीच निर्बाध समन्वय स्थापित करना और सहयोग के सामान्य क्षेत्रों की पहचान करना; विशेषज्ञता साझा करना एवं व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से विकसित सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना; संयुक्त प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रक्षा संबंधों और सौहार्द को मजबूत करने के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय परिवेश में खुफिया जानकारी के प्रबंधन और साझाकरण के लिए सामान्य अवधारणाओं को विकसित करना शामिल है।

दो सप्ताह तक संचालित होने वाले इस अभ्यास में अर्ध-पहाड़ी और जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयुक्त योजना अभ्यास, सामरिक स्तर के अभ्यास और समन्वित अभियान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य भाग लेने वाले सैनिकों की अनुकूलन क्षमता, सहनशक्ति और सामरिक दक्षता में सुधार करना है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालन के दौरान शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और समन्वय पर विशेष बल दिया जाएगा।

इस अभ्यास के अंतर्गत, भारतीय प्रौद्योगिकी और रक्षा कंपनियां आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत स्वदेशी उपकरणों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी, जो ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा और रक्षा उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता में भारत की बढ़ती क्षमताओं को उजागर करेगा।

अभ्यास प्रगति-2026 से सैन्य सहयोग को और मजबूत करने, पेशेवर संबंधों को परिपुष्ट करने और क्षेत्रीय भागीदारों के बीच सामान्य सुरक्षा चुनौतियों के लिए एक साझा दृष्टिकोण में योगदान देने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्री वियतनाम और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे


दिल्ली /सत्ता संदेश

सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी और समुद्री सहयोग को सशक्त बनाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को प्रोत्साहन देने पर ध्यान: श्री राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 18 से 19 मई, 2026 तक वियतनाम और 19 से 21 मई, 2026 तक दक्षिण कोरिया की आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। अपनी यात्रा से पहले एक पोस्ट में, रक्षा मंत्री ने इन दोनों एशियाई देशों की यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों के और अधिक प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।

रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। वियतनाम के राष्ट्रपति की 5 से 7 मई, 2026 तक भारत यात्रा के दौरान इस व्यापक रणनीतिक साझेदारी को उन्नत करते हुए इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर ले जाया गया था। श्री राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

रक्षा मंत्री की 8 से 10 जून, 2022 के दौरान की पिछली यात्रा में भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी को लेकर 2030 तक के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण बयान पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह दृष्टिकोण वक्तव्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए एक स्पष्ट और परिभाषित मार्ग को दर्शाता है। दोनों लोकतांत्रिक देशों का क्षेत्र की शांति और समृद्धि में साझा हित है।

श्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती (19 मई, 2026) के अवसर पर हो रही है। रक्षा मंत्री हो ची मिन्ह समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

दक्षिण कोरिया की अपनी यात्रा के दौरान, श्री राजनाथ सिंह कोरिया गणराज्य के रक्षा मंत्री श्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों मंत्री दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर विचार-विमर्श करेंगे। वे साझा हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के मंत्री श्री ली योंग-चेओल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।

कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत द्वारा समर्थन देने का निर्णय भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस तैनात करके युद्ध में शांति और सद्भाव लाने के उद्देश्य से लिया गया था। तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवा करते हुए, इस यूनिट ने दो लाख से अधिक रोगियों का इलाज किया और लगभग 2,500 ऑपरेशन किए, साथ ही कई नागरिकों का भी उपचार किया। भारत का दूसरा प्रमुख योगदान तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता करना था, जो संयुक्त राष्ट्र को भारत का एक प्रस्ताव था और जिसे बहुमत से स्वीकार किया गया था। इसके अनुसार, युद्धोत्तर चरण में, 5,230 सैनिकों वाली भारतीय सेना की कस्टोडियन फोर्स ने लगभग 2,000 युद्धबंदियों का शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन किया।

शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए, 21 मई को दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन किया जाएगा, जिसमें दक्षिण कोरिया के मंत्री श्री क्वोन ओह-यूल भी शामिल होंगे।

भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ का स्वाभाविक तालमेल और साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

प्रधानमंत्री ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ (ईआरटी) को संबोधित किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 17 मई 2026 को गोथेनबर्ग में यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ (ईआरटी) को संबोधित किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टेर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय उद्योग जगत के वरिष्ठ नेता तथा प्रमुख यूरोपीय और भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस बातचीत में भाग लिया, जिसकी मेज़बानी वोल्वो ग्रुप द्वारा की गई थी।

अपने मुख्य भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्‍य को रेखांकित किया तथा एक अधिक जटिल और अनिश्चित वैश्विक परिवेश में विश्वसनीय साझेदारियों के महत्व पर बल दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में हो रही प्रगति का स्वागत किया, जिसमें ऐतिहासिक भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ताओं का सफल समापन भी शामिल है। उन्होंने इस समझौते को एक परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी बताया, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, सेवाओं तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं में नए अवसर सृजित करेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) जैसी संपर्क परियोजनाएँ भारत-यूरोप व्यापार साझेदारी में नया मूल्य जोड़ती हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि आज भारत निवेश, नवाचार और विनिर्माण के लिए विश्व के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक है। उन्होंने भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति, अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधारों, शासन में व्यापार सुगमता पर केंद्रित प्रयासों, विस्तृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं, जीवंत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तथा तीव्र गति से रूपांतरित हो रहे अवसंरचना क्षेत्र को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के “भारत के लिए डिज़ाइन करें, भारत में निर्माण करें और भारत से निर्यात करें” के दृष्टिकोण को दोहराया तथा यूरोपीय कंपनियों को भारत के साथ एक विश्वसनीय और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में अपने जुड़ाव को और गहरा करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत और यूरोप को मिलकर लचीली एवं विविधीकृत आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी अवसंरचना और ऊर्जा परिवर्तन को रेखांकित किया, जिसमें परिवहन, लॉजिस्टिक्स, अक्षय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन तथा परमाणु ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश शामिल है। उन्होंने यूरोपीय उद्योग जगत के नेताओं को दूरसंचार और डिजिटल अवसंरचना; कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप टेक विनिर्माण; ग्रीन ट्रांज़ीशन तथा स्वच्छ ऊर्जा; अवसंरचना, गतिशीलता और शहरी रूपांतरण; तथा स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच प्रतिभा गतिशीलता, शिक्षा तथा कौशल साझेदारियों के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने भारत के युवा और कुशल कार्यबल को भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए एक प्रमुख शक्ति बताया तथा जन-से-जन संबंधों और नवाचार साझेदारियों को और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोप सीईओ राउंड-टेबल को वार्षिक रूप से आयोजित करने तथा ईआरटी में एक ‘इंडिया डेस्क’ स्थापित करने का सुझाव दिया। इस बातचीत ने भारत-यूरोप आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया तथा सतत् विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग और लचीली वैश्विक साझेदारियों के प्रति भारत और यूरोप की साझा प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहुंचे मुंबई; पीएम मोदी के साथ आज होगी द्विपक्षीय बैठक

मुंबई/नई दिल्ली: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर भारत आए राष्ट्रपति मैक्रों का यह चौथा और मुंबई का पहला दौरा है।रणनीतिक साझेदारी और ‘हॉरिजोन 2047’ पर चर्चा :आज दोपहर 3:15 बजे मुंबई के लोक भवन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी। इस मीटिंग के दौरान दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे और इसे नए क्षेत्रों में विस्तार देने पर चर्चा करेंगे। साथ ही, ‘हॉरिजोन 2047’ रोडमैप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा।

ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन :शाम करीब 5:15 बजे दोनों नेता ‘भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वे दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स, स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स की एक संयुक्त बैठक को भी संबोधित करेंगे।

दिल्ली में एआई समिट में होंगे शामिल: मुंबई के कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति मैक्रों दिल्ली रवाना होंगे, जहाँ वे 19 फरवरी को ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ (AI Impact Summit) में हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि इस समिट का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया है और इसमें फ्रांस सहित 13 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।