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धनबाद में ED की कार्रवाई :कोयला माफिया 160 करोड़ का निवेश फ्रीज, 31 ठिकानों पर छापामारी

झारखंड / सत्ता संदेश

झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला खनन, अवैध परिवजन, कोयला उठाने पर जबरन वसूली, लेवी से जुड़े मामलों में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी की रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की 31 ठिकानों पर चल रही छापेमारी पूरी हो चुकी है। ईडी ने बुधवार को इससे संबंधित अधिकृत बयान जारी किया है।

यह छापेमारी अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव, माधे सिंह व इनसे जुड़ी कंपनियों, सहयोगियों, रिश्तेदारों आदि से जुड़े सभी 31 ठिकानों पर चली है। इस छापेमारी में ईडी ने कोयला माफिया एलबी सिंह के माध्यम से म्यूचुअल फंड में किए गए लगभग 160 करोड़ रुपये के निवेश को फ्रीज कर दिया है।

छापामारी के दौरान क्या मिला?

छापामारी के दौरान ईडी को ठिकानों से 1.02 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुए हैं। निवेश से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें 200 से ज्यादा अचल संपत्तियाें से जुड़ी जानकारी, डेटा, डिजिटल डिवाइस, सेल डीड आदि शामिल हैं।

ईडी को शक है कि उक्त 200 अचल संपत्तियां अपराध की कमाई से खरीदी गई थी। इसकी कीमत 500 करोड़ रुपये हो सकती है। इसके अलावा आरोपितों के नियंत्रण की संस्थाओं के अकाउंट्स की किताबें आदि भी जब्त की गईं हैं।

ईडी ने सभी 31 ठिकानों पर पीएमएल अधिनियम के तहत मंगलवार की सुबह से छापेमारी शुरू की थी। बुधवार को अंतिम रूप से छापेमारी व जब्ती की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है।

झारखंड पुलिस में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने की थी ECIR

झारखंड पुलिस में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) दर्ज की थी। दर्ज प्राथमिकियों में आरोपितों के विरुद्ध धनबाद व आसपास के इलाकों में अवैध कोयला खनन, अवैध रूप से खनन किए गए या चोरी के कोयले की तस्करी, कोयला उठाने पर जबरन वसूली, लेवी और इससे जुड़ी अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था।

पुलिस ने कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की थी। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी को पता चला कि उपरोक्त लोगों ने इस तरह के अपराध से बड़ी मात्रा में ‘अपराध से कमाई गई रकम’ जमा की थी।

इस प्रक्रिया में आरोपितों ने अवैध तरीके से अर्जित की गई राशि को इधर-उधर घुमाने (लेयरिंग) और इसे वैध दिखाने के लिए कई संस्थाओं, लोगों का इस्तेमाल किया। बाद में अपराध से कमाई गई इस राशि का इस्तेमाल चल और अचल संपत्ति खरीदने में किया था।

साल 2025 में भी की गई थी छापेमारी

ईडी ने जारी अधिकृत बयान में बताया कि गत वर्ष 21 नवंबर 2025 को भी ईडी ने इस मामले में अनिल गोयल, एलबी सिंह व उनसे जुड़े लोगों व संस्थाओं के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह छापामारी धनबाद व दुमका के करीब 20 ठिकानों पर एक साथ हुई थी।

इस छापामारी में ईडी को डेढ़ सौ से अधिक जमीन के दस्तावेज और दो करोड़ 20 लाख रुपये नगदी मिले थे। ईडी को छानबीन में अवैध तरीके से कोयला खनन, परिवहन और भंडारण से संबंधित साक्ष्य मिले थे। छानबीन में मिले तथ्यों के आधार पर ईडी ने एक बार फिर छापेमारी की है। ईडी की छानबीन व अनुसंधान अभी जारी है।

महादेव बेटिंग ऐप मामले में ED ने विकास गर्ग की ₹940.77 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ईडी ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में 941 करोड़ रुपये की संपत्ति की कुर्की की पुष्टि के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज इस शिकायत में दिल्ली के व्यापारी विकास गर्ग, उसके परिवार के सदस्यों और कंपनियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

ईडी का आरोप है कि विकास गर्ग से संबंधित संपत्तियां अपराध की कमाई हैं या ऐसी आय से अर्जित की गई हैं। ईडी का कहना है कि मामले में लगभग 941 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है। इनमें 893.03 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 47.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। सबसे बड़ी कुर्की एबिक्स इंक के 12.84 लाख शेयर की है। इनका मूल्य लगभग 766 करोड़ रुपये है और ये शेयर कंपनी में 64.20 प्रतिशत हिस्सेदारी दिखाते हैं।

ईडी ने एबिक्स इंक में 10.66 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी का भी जिक्र किया है, जिसकी कीमत ₹127.26 करोड़ रुपये है। ईडी का आरोप है कि अपराध से अर्जित इस रकम का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है, इसलिए इसे जब्त नहीं किया जा सकता।

ईडी द्वारा जब्त अचल संपत्तियों में दिल्ली के ‘द अमैरिलिस’ में लग्जरी अपार्टमेंट, सफदरजंग विकास योजना में व्यावसायिक संपत्ति, बाबर रोड पर आवासीय संपत्ति, शिवाजी मार्ग पर एक अपार्टमेंट और शिकायत में नामजद कंपनियों की गोवा, उत्तराखंड, राजस्थान और देहरादून में मौजूद संपत्तियां शामिल हैं।

शिकायत में कहा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस, आंध्र प्रदेश पुलिस, रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज शुरुआती मामलों पर आधारित है।

केरल में ईडी अधिकारियों के वाहन पर हमला, मुख्यमंत्री विजयन के आवास के बाहर बढ़ा राजनीतिक तनाव

तिरुवनंतपुरम / सत्ता संदेश

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आधिकारिक आवास के बाहर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के वाहन पर कथित हमला किए जाने की घटना सामने आई। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ईडी अधिकारियों का वाहन मुख्यमंत्री आवास के आसपास मौजूद था, तभी कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया और कथित तौर पर उस पर हमला कर दिया। घटना के दौरान वाहन को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक नुकसान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा बलों ने इलाके में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमले में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, घटना ऐसे समय हुई है जब राज्य में विभिन्न राजनीतिक और वित्तीय मामलों को लेकर ईडी की कार्रवाई चर्चा में बनी हुई है। इससे पहले भी विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं और ईडी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमला अचानक हुई झड़प का परिणाम था या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद केरल की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले से ही राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट से पूर्व आबकारी आयुक्त को राहत, छत्तीसगढ़ शराब नीति घोटाले के दो मामलों में मिली जमानत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को कई करोड़ रुपये के शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमों के निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी काफी समय लगेगा।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मुख्य मामले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों और संबंधित धनशोधन मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व अधिकारी को यह राहत प्रदान की।

पीठ ने कहा कि दास को कथित तौर पर इस मामले का “मुख्य सूत्रधार” बताया गया है, और उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में भूमिका निभाई ताकि अन्य सह-आरोपियों को लाभ पहुंचाया जा सके।

जमानत देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि दास को दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने उन पर वही जमानत शर्तें लागू कीं जो अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं। इसके तहत उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा और वह केवल मुकदमे की सुनवाई तथा जांच में शामिल होने के लिए ही छत्तीसगढ़ आ सकेंगे।

हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि वह भविष्य में जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं।

इससे पहले एक मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को भी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दी थी।