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जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम का अंतिम मौका, मानसून से पहले बंद होंगी पर्यटन गतिविधियां

देहरादू / सत्ता संदेश

Jim Corbett National Park में पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम और जंगल सफारी का यह अंतिम दौर माना जा रहा है, क्योंकि मानसून सीजन शुरू होने से पहले पार्क के कई पर्यटन जोन और रात्रि ठहराव सुविधाएं बंद की जाने वाली हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हर वर्ष मानसून के दौरान सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पार्क के अधिकांश हिस्सों में पर्यटकों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी जाती है। भारी बारिश, नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने और जंगल के रास्तों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका के कारण यह कदम उठाया जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि मानसून बंदी से पहले बड़ी संख्या में पर्यटक पार्क का रुख कर रहे हैं, ताकि वे जंगल सफारी, वन्यजीव दर्शन और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें। विशेष रूप से रात्रि विश्राम की सुविधा पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय मानी जाती है, क्योंकि इससे उन्हें जंगल के शांत और प्राकृतिक माहौल को करीब से अनुभव करने का अवसर मिलता है।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क देश के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है और यह बाघ संरक्षण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। यहां हर वर्ष देश-विदेश से हजारों पर्यटक पहुंचते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून अवधि के दौरान पार्क को बंद करना पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होता है। इस दौरान जंगलों को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने का समय मिलता है और वन्यजीवों को मानवीय हस्तक्षेप से राहत मिलती है।

पर्यटन विभाग और वन अधिकारियों ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें तथा अधिकृत माध्यमों से ही बुकिंग कराएं।

फिलहाल मानसून से पहले पार्क में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ गई है और होटल, रिसॉर्ट तथा जंगल लॉजों में भी अच्छी बुकिंग देखने को मिल रही है।

भीषण गर्मी से बचने शिमला पहुंचे सैलानी, 72 घंटे में 70 हजार वाहन शहर में दाखिल

शिमला / सत्ता संदेश

मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से शिमला में वाहनों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है और शहर के कई हिस्सों में बार-बार जाम की स्थिति बन रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 दिनों में शिमला में कुल 6 लाख 31 हजार वाहन पहुंचे हैं। इनमें से करीब 70 हजार वाहन सिर्फ पिछले 72 घंटों में शहर में दाखिल हुए।

हालांकि पर्यटन सीजन अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है, लेकिन ‘पहाड़ों की रानी’ शिमला पहले ही पर्यटकों और वाहनों से भर चुकी है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करने की अपील की है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने बताया कि पिछले 24 दिनों में चंडीगढ़-कालका मार्ग से लगभग 3 लाख 70 हजार वाहन शिमला पहुंचे हैं। इसके अलावा किन्नौर, बिलासपुर और कुल्लू मार्ग से भी बड़ी संख्या में पर्यटक वाहनों का आगमन हुआ है।

उन्होंने कहा कि अचानक बढ़े पर्यटक दबाव के कारण शहर की पुरानी पार्किंग समस्या और गंभीर हो गई है। पिछले एक सप्ताह में 1 लाख 54 हजार 450 वाहन शिमला पहुंचे, जबकि केवल पिछले 72 घंटों में करीब 70 हजार वाहनों की एंट्री दर्ज की गई।

यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन ने शिमला को पांच जोनों में बांटा है और प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। ट्रैफिक कंट्रोल में सहायता के लिए स्वयंसेवकों की भी मदद ली जा रही है।

जाम कम करने के लिए पुलिस वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रही है। ऊपरी शिमला जाने वाले वाहनों को शोगी-मेहली मार्ग से भेजा जा रहा है ताकि शहर के मुख्य मार्गों पर दबाव कम किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि जून महीने में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद 31 मई के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

आमतौर पर हिमाचल प्रदेश में पर्यटन सीजन जून के पहले सप्ताह में चरम पर पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष उत्तर और पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पर्यटन सीजन समय से पहले ही शुरू हो गया है।

हिमाचल जाना हुआ महंगा! वाहन एंट्री फीस में भारी बढ़ोतरी से मचा हड़कंप, जानें अब किस गाड़ी के लिए कितनी देनी होगी जेब ढीली

नेशनल डेस्क : हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों की एंट्री फीस में भारी इजाफा करने का फैसला किया है, जिससे अब पंजाब के लोगों के लिए हिमाचल की सैर करना महंगा हो जाएगा। सरकार द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के बाद नंगल और इसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों के निवासियों ने इस बढ़ोतरी का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है।

रिश्तेदारियों पर पड़ेगा असर : इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा वे लोग प्रभावित होंगे जिनकी रिश्तेदारियां हिमाचल प्रदेश के गांवों में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें अपने रिश्तेदारों से मिलने जाने के लिए वाहनों की दोगुनी फीस चुकानी होगी, जो उनके बजट पर भारी बोझ डालेगा।

वाहनों की नई दरें इस प्रकार हैं: नोटिफिकेशन के अनुसार, विभिन्न वाहनों के लिए अब निम्नलिखित शुल्क देय होगा:

-5-सीटर कार: 130 रुपये

-इनोवा, जीप, थार और वैन: 170 रुपये

-मिनी बस और टेम्पो: 320 रुपये-बस और ट्रक: 570 रुपये

-भारी ट्रक: 600 रुपये-टिप्पर: 800 रुपये-भारी ट्राले: 900 रुपये

पर्यटन और व्यापार पर संकट: फीस में इस वृद्धि का असर केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन और माल ढुलाई (freight) पर भी पड़ेगा।

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल आते हैं। शिमला के होटल कारोबारियों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस फैसले से पर्यटकों की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान होगा। कारोबारियों ने सरकार से इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है।