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यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 समावेशी शासन के लिए डेटा-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करता है

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

5,000 से अधिक टीमों की तरफ ससमाधान प्रस्तुत करने के साथ, यह डीपीआई इकोसिस्टम में सबसे बड़े डेटा नवाचार चुनौतियों में से एक बन गया

नई दिल्ली, 8 मई 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम में डिजिटल पहचान के क्षेत्र में छात्रों द्वारा किए गए उन बेहतरीन नवाचारों का उत्सव मनाया गया, जिनका उद्देश्य शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाना है।

डिजिटल पहचान डेटा के नवीन और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इस हैकाथॉन ने छात्रों और युवा पेशेवरों को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहां वे ऐसे बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और डेटा-आधारित समाधान विकसित कर सकें, जिनका लक्ष्य समावेशिता, कार्यकुशलता और शासन के परिणामों को बेहतर बनाना है।

लगभग 15,000 टीमों के पंजीकरण और 5,000 से ज़्यादा टीमों की तरफ से समाधान जमा करने के साथ, इस पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस तरह, यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) इकोसिस्टम में डेटा नवाचार के सबसे बड़े चैलेंज में से एक बन गया।

एक सख्त, कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद-जिसमें 5,000 से ज़्यादा प्रविष्टियों की जांच, 30 परियोजनाओं की शॉर्टलिस्टिंग और 15 फाइनलिस्ट टीमों का विस्तृत मूल्यांकन शामिल था-टॉप पांच टीमों को अंतिम समारोह में अपने समाधान पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, कोलकाता और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता की विजेता टीम ने यूआईडीएआई द्वारा साझा किए गए, इकट्ठा किए गए आधार नामांकन और अपडेट डेटासेट का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।

उनके काम से अलग-अलग क्षेत्रों, राज्यों और जनसांख्यिकीय समूहों में नामांकन के रुझानों और बायोमेट्रिक अपडेट के तरीकों के बारे में अहम जानकारी मिली, साथ ही सेवा देने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मिले।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्लेषण की बारीकियों को जनहित के मजबूत नजरिए के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नए प्रयोगों में नीतियों और कामकाज में सुधार को सीधे तौर पर मदद करने की क्षमता है; साथ ही उन्होंने शासन में सबको शामिल करने और कुशलता लाने के लिए डेटा के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के महत्व पर भी जोर दिया।

यूआईडीएआई के सीईओ ने इस पहल के लिए यूआईडीएआई के भविष्य के विजन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन को एक सालाना प्लेटफॉर्म के तौर पर संस्थागत रूप दिया जा सकता है, ताकि डिजिटल पहचान और सार्वजनिक डेटा के इस्तेमाल में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

हैकाथॉन के आने वाले संस्करणों में भी उम्मीद है कि इसमें सिर्फ छात्रों तक ही भागीदारी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शिक्षा जगत, शोधकर्ता, स्टार्ट-अप और अन्य गैर-शैक्षणिक योगदानकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे एक ज्यादा विविध और अलग-अलग विषयों वाला नवाचार इकोसिस्टम तैयार होगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026, यूआईडीएआई का मुक्त नवाचार, युवाओं को जोड़ने और प्रमाणों पर आधारित नीति-निर्माण के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है। प्रतिभागियों को असल दुनिया के डेटासेट पर काम करने का मौका देकर, इस पहल ने न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया, बल्कि ऐसे समाधानों को भी प्रोत्साहित किया जिनका सीधा असर जनता पर पड़े।

यूआईडीएआई ने हैकाथॉन की सफलता में योगदान देने के लिए सभी प्रतिभागियों, जूरी सदस्यों और साझेदारों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की।

*पंजाब के मुख्य सचिव ने मिसाल कायम करके नागरिकों से जनगणना 2027 के स्व-गणना अभियान में शामिल होने का आग्रह किया*

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 1 मई 2026: पंजाब के मुख्य सचिव, श्री के ए पी सिन्हा आईएएस, ने अपने आवास पर ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी की।

इस प्रक्रिया को श्री मंजीत सिंह ब्रार, प्रशासनिक सचिव, स्थानीय शासन विभाग, और डॉ. नवजोत खोसा, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, पंजाब एवं चंडीगढ़, द्वारा सुगम बनाया गया।

उन्होंने राज्य के सभी निवासियों से राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की, इसे एक नागरिक जिम्मेदारी बताते हुए, जो सार्वजनिक आवश्यकताओं का आकलन करने, संसाधनों के न्यायसंगत आवंटन को सुनिश्चित करने, और सुशासन को मजबूत करने में मदद करती है। उन्होंने आगे आग्रह किया कि हर परिवार की गणना हो, हर किसी से पहुंच बनाई जाए और कोई भी पीछे न छूटे।

मुख्य सचिव ने कहा कि सक्रिय जनभागीदारी एक अधिक मजबूत, अधिक समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में मदद करेगी। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि विश्वसनीय जनगणना डेटा स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, कल्याणकारी योजनाओं, और विकास नीतियों की योजना का आधार बनता है, जिससे स्व-गणना विकसित भारत के विज़न को साकार करने में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन जाती है।

स्व-गणना, जनगणना 2027 की एक प्रमुख विशेषता है और इसे पंजाब राज्य में 30 अप्रैल, 2026 से 14 मई, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह व्यक्तियों को अपने घरों में आराम से ऑनलाइन अपने जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक विवरण सुविधापूर्वक प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है। इसके महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि एक विश्वसनीय और समावेशी जनगणना के संचालन के लिए स्व-गणना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह नागरिकों को अपने परिवार, समुदाय, और क्षेत्र के सटीक प्रतिनिधित्व के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में सीधे योगदान देने का अवसर देती है। यह पहल भौतिक संपर्क की आवश्यकता को उल्लेखनीय रूप से कम करती है, जबकि डेटा संग्रह की दक्षता, कवरेज, और विश्वसनीयता को बढ़ाती है। इसके बाद 15 मई, 2026 से 13 जून, 2026 तक गृह सूचीकरण चरण आयोजित किया जाएगा।

सभी निवासियों से आग्रह किया जाता है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और जनगणना 2027 की सफलता में पूरे मन से योगदान दें। उनकी सक्रिय भागीदारी एक व्यापक और विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो सूचित निर्णय-निर्माण और भविष्य की योजना के लिए आवश्यक है।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 माह के लिए केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रदर्शन हेतु केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) पर 47वीं मासिक रिपोर्ट जारी की

मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कुल 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया

लगातार 45वें महीने केंद्रीय सचिवालय में मासिक निपटान का आंकड़ा 1 लाख मामलों को पार कर गया

वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-ए श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय ने मार्च 2026 के लिए जारी जीआरएआई रैंकिंग में समूह-बी श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने मार्च 2026 के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) की मासिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों तथा उनके निपटान की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह डीएआरपीजी द्वारा प्रकाशित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों पर 47 वीं रिपोर्ट है।

मार्च 2026 तक की प्रगति के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा 1,81,279 शिकायतों का निवारण किया गया है। 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में शिकायत निवारण का औसत समय 13 दिन रहा। ये रिपोर्ट 10 चरणों वाली सीपीग्राम सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसे डीएआरपीजी ने निपटान की गुणवत्ता में सुधार और समय-सीमा को कम करने के लिए अपनाया था।

इस रिपोर्ट में मार्च 2026 माह में सीपीजीआरएएमएस पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं के आंकड़े दिए गए हैं। मार्च 2026 में विभिन्न माध्यमों से सीपीजीआरएएमएस पर कुल 75,853 नए उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 12,865 पंजीकरण उत्तर प्रदेश से हैं। फीडबैक कॉल सेंटर ने मार्च 2026 माह में 74,069 फीडबैक प्राप्त किए, जिनमें से 45,974 फीडबैक केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए थे।

उक्त रिपोर्ट में मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतों का राज्यवार विश्लेषण भी दिया गया है। सीपीजीआरएएमएस को सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और यह 5 लाख से अधिक सीएससी में उपलब्ध है, जो 25 लाख ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) से संबद्ध है। मार्च 2026 में सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से कुल 12,763 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट में समीक्षा बैठक मॉड्यूल का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है, जिसे 14 मार्च 2025 से सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में लागू किया गया है । यह मॉड्यूल सचिव स्तर पर जनता की शिकायतों की समीक्षा को सुगम बनाता है, जिससे निवारण तंत्र की दक्षता बढ़ती है और नागरिकों की संतुष्टि में सुधार होता है। 31 मार्च 2026 तक कुल 302 समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें से 18 बैठकें मार्च 2026 में हुईं।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए डीएआरपीजी की मार्च 2026 की मासिक सीपीजीआरएएमएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

पीजी मामले:

  • मार्च 2026 में, सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर 1,89,189 पीजी मामले प्राप्त हुए, 1,81,279 पीजी मामलों का निवारण किया गया और 81,187 पीजी मामले लंबित हैं।
  • पीजी अपील:
  • मार्च 2026 में 34,135 अपीलें प्राप्त हुईं और 33,714 अपीलों का निपटारा किया गया।
  • वर्ष 2026 के लिए मार्च 2026 में 21,296 अपीलें लंबित दर्ज की गईं।
  • शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक (जीआरएआई) – मार्च, 2026
  • वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग), दूरसंचार विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड मार्च 2026 के लिए समूह ए (500 या उससे अधिक शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन एवं सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
  • राजभाषा विभाग, भारी उद्योग मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मार्च 2026 के लिए समूह बी (500 से कम शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
*यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव ने ऑनलाइन स्व-गणना कर डिजिटल जनगणना को बढ़ावा दिया।जनगणना 2027 में नागरिकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान।*

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 16 अप्रैल। जनगणना 2027 में डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव H. Rajesh Prasad ने आज ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक अपना स्व-गणना (Self-Enumeration) पूर्ण किया।
स्व-गणना की प्रक्रिया को Navjot Khosa, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ तथा Nishant Kumar Yadav, उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ द्वारा सुगम बनाया गया।
यह पहल यूटी प्रशासन की तकनीक के माध्यम से कुशल, पारदर्शी एवं नागरिक-अनुकूल जनगणना संचालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्य सचिव द्वारा स्व-गणना कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जिससे सभी नागरिकों को इस सरल एवं सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरणा मिलेगी। स्व-गणना के माध्यम से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन अपने विवरण भर सकते हैं, जिससे सटीकता सुनिश्चित होती है और आमजन तथा गणनाकर्ताओं दोनों का समय बचता है।
इस प्रक्रिया के दौरान मुख्य सचिव, यूटी चंडीगढ़ ने प्रभावी योजना निर्माण एवं नीति निर्धारण के लिए सटीक आंकड़ों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी नागरिकों से सहयोग करने तथा इस सरल, सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल स्व-गणना सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।
जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़, उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ तथा चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा स्व-गणना प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने हेतु व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें नागरिकों की सहायता के लिए समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन (1855) भी शामिल है, जहां वे अपनी शंकाओं या तकनीकी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
नागरिकों से आग्रह किया जाता है कि वे आधिकारिक जनगणना पोर्टल (https://se.census.gov.in⁠�) पर जाकर निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी स्व-गणना पूर्ण करें। एकत्रित की गई जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए, जनगणना अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा।
मुख्य सचिव द्वारा सफलतापूर्वक की गई स्व-गणना जनगणना 2027 के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे इस राष्ट्रीय अभियान में व्यापक जनभागीदारी को प्रेरणा मिलने की अपेक्षा है।

भारतीय शासन व्यवस्था की पटकथा फिर से लिख रहा है मिशन कर्मयोगी
  • डॉ जितेंद्र सिंह

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।

चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।

इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर

नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।

‘मिशन कर्मयोगी’ को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित ‘क्षमता निर्माण आयोग’ द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव ‘कर्मचारी’—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से ‘कर्मयोगी’ बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।

पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह’  के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं। जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी ‘पहुँच की संरचना’  है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का ‘लोकतांत्रिक लाभांश’ है।

क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र  के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ ‘वास्तुकार’  और ‘संचालक’ दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त  कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों  के माध्यम से जुड़ चुके हैं  ताकि ऐसी विशिष्ट ‘क्षमता निर्माण योजनाएं’  तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया  है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।

मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ या ‘लॉग किए गए घंटों’ में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक ‘लेन-देन’ वाले संबंध से हटकर ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया  तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत,  जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है। इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ’  के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ‘अमृत ज्ञान कोष’  भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह ‘वि-औपनिवेशीकरण’,  जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।

‘साधना’ सप्ताह  2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। ‘साधना’ शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक ‘राष्ट्रीय सम्मेलन’ के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक ‘नागरिक-चैंपियन’ और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत  माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।

भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार ‘सीखना’ सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)