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बिरसा हरित ग्राम योजना ने बदली झारखंड के किसानों की तस्वीर, बंजर भूमि बनी आय का मजबूत स्रोत

रांची / सत्ता संदेश

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनती जा रही है। कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी भूमि अब फलदार पौधों, हरित खेती और बागवानी गतिविधियों के जरिए किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है। योजना के प्रभाव से हजारों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिले हैं।

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य बंजर और परती भूमि का उत्पादक उपयोग करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। इसके तहत किसानों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, पपीता और अन्य फलदार पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही पौधारोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत बड़ी मात्रा में अनुपयोगी भूमि को बागवानी क्षेत्र में परिवर्तित किया गया है। इससे न केवल हरित आवरण बढ़ा है बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आय का नया साधन भी मिला है। कई गांवों में ऐसे किसान सामने आए हैं जिन्होंने पहले खाली पड़ी जमीन पर फलदार पौधे लगाए और अब उनकी फसल से नियमित आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसे ग्रामीण रोजगार से जोड़ा गया है। पौधारोपण, सिंचाई, रखरखाव और फसल प्रबंधन के कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे राज्य, जहां बड़ी मात्रा में भूमि वर्षो तक अनुपयोगी पड़ी रहती है, वहां ऐसी योजनाएं कृषि और पर्यावरण दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बागवानी आधारित खेती किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर और स्थायी आय देने की क्षमता रखती है।

योजना का पर्यावरणीय प्रभाव भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा मिला है और स्थानीय जैव विविधता को भी लाभ पहुंचा है। इसके अलावा जल संरक्षण और सूक्ष्म जलवायु सुधार में भी ऐसे प्रयास सहायक साबित हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के कई लाभार्थियों का कहना है कि योजना ने उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। जहां पहले भूमि बेकार पड़ी रहती थी, वहीं अब वही जमीन परिवार की आय बढ़ाने का माध्यम बन गई है। कई किसानों ने फल उत्पादन के साथ-साथ सब्जी और अन्य सहायक कृषि गतिविधियां भी शुरू की हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है और किसानों को बाजार, भंडारण तथा प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़ा जाता है, तो यह झारखंड के ग्रामीण विकास मॉडल की एक बड़ी सफलता बन सकती है।

बिरसा हरित ग्राम योजना इस बात का उदाहरण बनकर उभरी है कि सही नीति, सामुदायिक भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से बंजर भूमि को भी समृद्धि और रोजगार का आधार बनाया जा सकता है।

देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का लिया संकल्प

नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस में पहली बार रात तक चला मंथन, खेतों में उतरेगा कृषि प्रगति का मिशन

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्रियों का संकल्प: अपने खेतों में भी करेंगे प्राकृतिक खेती

कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा से समग्र कृषि विकास का संकल्प: ‘बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए’- श्री शिवराज सिंह

दो दिन हुआ गहन विमर्श, खेती के लिए नई दिशा: श्री शिवराज सिंह की पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप

धरती बचाओ, देश बचाओ: पूसा सम्मेलन में राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का श्री शिवराज सिंह ने किया आगाज़

केंद्र-राज्य-वैज्ञानिक एक मंच पर: खरीफ से पहले कृषि परिवर्तन का राष्ट्रीय खाका तैयार

नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में, देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे और देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का संकल्प लिया। यह केवल एक नियमित समीक्षा बैठक बनकर नहीं रही, बल्कि भारतीय कृषि के लिए संकल्प, समन्वय और ज़मीनी क्रियान्वयन का राष्ट्रीय मंच बनकर उभरी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने गहन विचार-विमर्श किया, जबकि दूसरे दिन भी श्री शिवराज सिंह चौहान पूरे समय रहे और उनकी मौजूदगी में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने पहली बार रात तक मंथन कर खरीफ, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे मुद्दों पर एक साझा दिशा तय की। सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर कृषि मंत्रियों ने केवल नीतिगत समर्थन तक सीमित न रहते हुए, अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि किसानों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी के पूसा संस्थान में 28 और 29 मई को संपन्न राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि को केवल उत्पादन के प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, पोषण, किसान आय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देख रही है। सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह ने किसानों को लाभ देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने पर राज्य सरकारों से जोर देकर कहा।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में पहले दिन देशभर से आए राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, फसल नियोजन, जल प्रबंधन और क्षेत्रवार चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया। इस दौरान प्रारंभिक संबोधन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान हॉल में पीछे की तरफ एक प्रतिभागी के रूप में पूरे समय बैठे। अगले दिन श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने इस विचार-मंथन को आगे बढ़ाते हुए इसे नीतिगत प्रतिबद्धता और साझा संकल्प का स्वरूप दिया।

सम्मेलन के समापन पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिभागियों की गंभीरता, तन्मयता और मनोयोग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इतने समर्पण के साथ अधिकारियों और मंत्रियों की भागीदारी बहुत कम अवसरों पर देखी है। उनका यह वक्तव्य सम्मेलन की उस भावना को रेखांकित करता है, जिसमें उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्वयं को केवल प्रशासक नहीं, बल्कि चिंतक, साधक और परिवर्तन के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया।

इस कॉन्फ्रेंस से उभरकर सामने आया सबसे सशक्त संदेश रहा- ‘खेत बचाओ’ ही भविष्य बचाने का मंत्र है। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि धरती, पर्यावरण, देश और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। इसी सोच के साथ सम्मेलन में संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष बल दिया गया। श्री शिवराज सिंह का संदेश साफ था कि रासायनिक उर्वरकों के पूर्ण निषेध की बात नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक आवश्यकता के अनुसार, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरण और संस्थागत अभियान चलाया जाए। यही कारण है कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को केंद्र, राज्य, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक समुदाय का साझा राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात प्रमुखता से सामने आई।

इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए समन्वित तंत्र, मॉनिटरिंग व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं के गठन की बात भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा, ताकि यह केवल अपील बनकर न रह जाए, बल्कि एक परिणामकारी कार्यक्रम में बदले।

सम्मेलन की एक महत्त्वपूर्ण नई बात यह रही कि पहली बार राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सार्वजिनक रूप से, प्राकृतिक खेती को केवल प्रचारित करने की बजाय स्वयं अपने खेतों में भी अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। चूंकि अधिकांश कृषि मंत्री स्वयं खेती-किसानी से जुड़े हैं, इसलिए यह निर्णय प्रतीकात्मक न होकर व्यवहारिक महत्व रखता है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विचार यह रहा कि यदि नीति-निर्माता और जनप्रतिनिधि स्वयं छोटे स्तर पर भी प्राकृतिक खेती का मॉडल प्रस्तुत करेंगे, तो किसानों के बीच इसका संदेश अधिक विश्वसनीय और प्रेरक रूप में पहुंचेगा। गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का उल्लेख भी इसी संदर्भ में प्रासंगिक माना गया, वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने भी काफी देर तक सम्मेलन में सहभागिता कर एक विशेष सत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट हुआ कि खरीफ रणनीति अब केवल मौसमी तैयारी तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत, इनपुट लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन, और कृषि उत्पादन बढ़ाने के समग्र एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी एक ओर उत्पादन बढ़ाना है, तो दूसरी ओर संसाधनों की सेहत भी बचानी है। यही इस सम्मेलन की नीति-दृष्टि का केंद्रीय बिंदु बनकर उभरा। मंथन का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष था- नीतिगत निर्णयों को जन-अभियान में बदलने की संचार रणनीति। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सम्मेलन के समापन सत्र में इस बात पर बल दिया कि जो निर्णय और अभियान तय हुए हैं, उनकी जानकारी विभिन्न प्रचार-प्रसार माध्यम से लगातार किसानों और आमजन तक पहुंचाई जाए। इससे कृषि सुधार कार्यक्रमों को प्रशासनिक फाइलों से निकालकर जनसहभागिता वाले अभियान में बदला जा सकेगा।

सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कृषि प्रशासन में केवल योजनाओं की घोषणाभर नहीं, बल्कि साझा उत्तरदायित्व आधारित कार्य-संस्कृति विकसित करना चाहती है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ा लक्ष्य पाने के लिए बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए। यह पंक्ति इस सम्मेलन की मूल आत्मा बनकर उभरी, जहां मंत्री और अधिकारी दोनों ने अपने-अपने दायित्वों के निर्वहन में कोई कसर न छोड़ने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस को इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि यहां कृषि को विभागीय विषय से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय मिशन मोड में देखने का आग्रह सामने आया। ‘खेत बचाओ अभियान’, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती के प्रायोगिक मॉडल, और दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तय समयसीमा के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे यह मंथन आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित होगा।

सम्मेलन के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में सामूहिक संकल्प के साथ यह संदेश दिया गया कि जो कुछ इन दो दिनों के चिंतन में तय हुआ है, उसे ज़मीन पर उतारकर दिखाया जाएगा। यही इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है- विचार से संकल्प और संकल्प से क्रियान्वयन की ओर बढ़ता कृषि भारत।

नहरी पानी का उपयोग 78 प्रतिशत से अधिक होना पंजाब की कृषि के लिए एक अच्छा प्रयास है : परमवीर सिंह एडवोकेट

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के सक्षम नेतृत्व में राज्य में कृषि को फिर से लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के वाइस चेयरमैन परमवीर सिंह एडवोकेट ने विचार साझा करते हुए बताया कि पंजाब में सिंचाई के लिए नहरी पानी से जुड़े जो कार्य चल रहे हैं, उनकी देखरेख मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।

2022 में जब मान सरकार ने कार्यभार संभाला था, उस समय पिछली सरकारों के कार्यकाल में केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का ही उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। मान सरकार पिछले चार वर्षों से खेतों की सिंचाई सीधे नहरी पानी से सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसके तहत टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों और कच्ची नालियों (कस्सियों) की मरम्मत की गई है। सैकड़ों किलोमीटर नई कच्ची नालियां और पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब अब 78 प्रतिशत से अधिक नहरी पानी का उपयोग कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ महीनों में इस आंकड़े को 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाना है।

इस पहल से पंजाब की भूमि को कई लाभ हुए हैं। राज्य के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पंजाब का भूजल स्तर लगभग 2 मीटर ऊपर आया है। पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार दर्ज किया गया सुधार है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर मोटरें कम चलने के कारण बिजली की भारी बचत हुई है, जिसे अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नहरी पानी के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रयासों के कारण पंजाब तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। नहरी पानी की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए।

खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया।

केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया।

पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
नई दिल्ली, 26 मई 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।

केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े

नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि

कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर 19 मई को भुवनेश्वर में होगा पूर्वी क्षेत्र का कृषि सम्मेलन


ओडिशा के मुख्य़मंत्री श्री मोहन चरण मांझी भी पूर्वी क्षेत्र का कृषि सम्मेलन में शामिल होंगे।

पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, कृषि विकास एवं किसान कल्याण के विभिन्न मुद्दों पर होगा व्यापक मंथन

ओडिशा / सत्ता संदेश

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 19 मई, 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। सम्मेलन में ओडिशा के मुख्य़मंत्री श्री मोहन चरण मांझी सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्टार्टअप, बैंकों एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी होगी।

इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय वृद्धि तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करना है। सम्मेलन के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान किसान रजिस्ट्री की प्रगति, बागवानी क्षेत्र की संभावनाएं, दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन (NMEO-OS), पीएम-आशा, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन, फार्म क्रेडिट एवं किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित मुद्दों पर विशेष चर्चा की जाएगी।

इसके अतिरिक्त नकली कीटनाशकों एवं उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों द्वारा कृषि क्षेत्र में अपनाई गई सफल पहलों एवं नवाचारों की प्रस्तुति भी दी जाएगी। ओडिशा राज्य कृषि विस्तार कार्यों, पश्चिम बंगाल बीज उत्पादन की श्रेष्ठ पद्धतियों, झारखंड एफपीओ आधारित मूल्य श्रृंखला एवं कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र तथा बिहार मक्का उत्पादन एवं विपणन संबंधी सफल अनुभवों को साझा करेगा।

यह सम्मेलन किसानों के हित में कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान, नवाचारों के आदान-प्रदान तथा कृषि क्षेत्र के सतत विकास के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। सम्मेलन के पश्चात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री मीडिया को संबोधित करेंगे।

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम- विकसित भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम- राजेँद्र चौधरी

चंडीगढ़/अंबाला : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के अपर महानिदेशक (ग्रामीण विकास) श्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ‘विकसित भारत – जी राम जी’ कानून विकसित भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है भारत में आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है । हरियाणा के अंबाला में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 पर आयोजित वार्तालाप को संबोधन करते हुए पत्र सूचना कार्यालय, दिल्ली में अपर महानिदेशक श्री राजेंद्र चौधरी ने इस महत्वाकांक्षी पहल के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि यह कानून रोजगार सृजन को मज़बूती देने, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और गाँवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस प्रयास है।उन्होंने कहा कि पहले की व्यवस्था में मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी तो थी, लेकिन कई स्थानों पर न तो समय पर काम मिल पाता था और न ही मज़दूरी का भुगतान समय पर हो पाता था।

इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कमियों को दूर करने और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए सरकार ने ‘विकसित भारत – जी राम जी’ क़ानून के माध्यम से सुधार किए हैं।उन्होंने बताया कि नए क़ानून के तहत रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो मज़दूरों को बेरोज़गारी भत्ता दिया जाएगा।

इसी प्रकार, यदि मज़दूरी के भुगतान में 15 दिनों से अधिक की देरी होती है, तो उस पर ब्याज भी दिया जाएगा। श्री चौधरी ने कहा कि नए क़ानून के तहत ग्राम पंचायत को सशक्त बनाया गया है, और अब गाँव की सभाएँ स्वयं तय करेंगी कि उनके गाँव में कौन-से विकास कार्य कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि विकास से संबंधित निर्णय अब गाँव स्तर पर ही लिए जाएँगे।श्री चौधरी ने कहा विकसित भारत- रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025, भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में एक निर्णायक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

नया कानून एक आधुनिक, जवाबदेह और अवसंरचना-केंद्रित ढांचे को मजबूती प्रदान करता है। इस मौके पर अंबाला के उपायुक्त एवं कार्यक्रम के मुख्यातिथि श्री अजय तोमर ने कहा कि नया कानून एक आधुनिक, जवाबदेह और अवसंरचना-केंद्रित ढांचे के माध्यम से उनकी कमियों को दूर करते हुए पिछले सुधारों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि गारंटीकृत रोजगार का विस्तार करके, राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं और कार्यों के बीच ताल-मेल बिठाते हुए मजबूत डिजिटल शासन को शामिल करके, यह कानून ग्रामीण रोजगार को सतत विकास और यथोचित आजीविका के लिए एक कार्यनीतिक साधन के रूप में स्थापित करता है, जो पूरी तरह से विकसित भारत 2047 के विजन के साथ जुड़ा हुआ है।

तोमर ने बताया कि 125 दिनों के रोजगार की गारंटी घरेलू आय को बढ़ाती है, ग्राम-स्तर की खपत को प्रोत्साहित करती है, और डिजिटल उपस्थिति, मजदूरी भुगतान और डेटा-संचालित योजना के माध्यम से प्रवासन को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने मीडिया से आहवान किया कि इस कानून के बारे में लोगों को जागरूक करें और यदि कोई भी व्यक्ति इस कानून के बारे में भ्रमक भ्रांति फैलाता है तो मीडिया तथ्यों पर आधारित उसका सकारात्मक जवाब प्रस्तुत करें ।

इससे पहले कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए पीआईबी चंडीगढ़ के मीडिया एवं संचार अधिकारी ने वार्तालाप कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यशाला मीडिया और सरकार के बीच सेतु का काम करती है। इस मौके पर सूचना प्रसारण मंत्रालय की विभिन्न इकाइयों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला।

उन्होंने पीआईबी की अनुसंधान इकाई द्वारा विभिन्न विषयों पर किए जा रहे विश्लेषण और तथ्य परक सूचनाओं के बारे में भी जानकारी दी।उन्होंने इन विश्लेषक से जी राम जी एक्ट पर महत्वपूर्ण विश्वसनीय आंकड़ों एवं जानकारियों का उपयोग अपने लेख और समाचार लेखन में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर श्री विराट, अतिरिक्त उपायुक्त, अंबाला ने योजना के विभिन्न प्रावधानों और विकसित भारत के लक्ष्य में ग्रामीण विकास की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही समावेशी और सतत विकास विकसित राष्ट्र की आधारशिला है।इस मौके पर जिला परिषद के सीईओ श्री गगनदीप सिंह ने भी विकसित भारत जी राम जी कानून 2025 के तहत महत्वपूर्ण जानकारी दी और कहा कि इस कानून के लागू होने से किसान व मजदूर को लाभ होगा, दोनों सशक्त और मजबूत भी होगे। इस अवसर पर अंबाला के लोग संपर्क अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रामीण विकास में मीडिया अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने मीडिया कर्मियों एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों का धन्यवाद प्रस्तुत किया । इस मौके पर एसीयूटी राहुल कनवरिया व जिला के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।